Pt. Vijay Shukla May 6, 2021

मौत को इतना खूंखार पहले कभी नहीं देखा,इंसान इतना लाचार पहले कभी नहीं देखा।तपते बुख़ार से मरीज़ तो बहुत देखे मगर,व्यवस्था को बीमार पहले कभी नहीं देखा।मुंह मांगी कीमत लिए न फिरती देखी जनता,दवा का कालाबाजार पहले कभी नहीं देखा।हवा को छुपाते देखे न लोग कभी गोदामों में, सांसों का कारोबार पहले कभी नहीं देखा।कानों में ज़हर घोलती न सुनी मनहूस खबरें,खूं से लथपथ अख़बार पहले कभी नहीं देखा।किसी आफ़त में आदमी का आदमी के प्रति,ऐसा गंदा व्यवहार पहले कभी नहीं देख।राकेश से असहमत सब यही सोचते होंगें, ऐसा मूर्ख इंसान पहले कभी नहीं देखा.. कुछ दिन तो दूर रहना जरूरी है जिंदगी भर साथ रहने के लिए। अपने परिवार के साथ घर मे रहे सुरक्षित रहे।

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