जीवन में बुराई अवश्य हो सकती है मगर जीवन बुरा कदापि नहीं हो सकता। जीवन एक अवसर है श्रेष्ठ बनने का, श्रेष्ठ करने का, श्रेष्ठ पाने का। जीवन की दुर्लभता जिस दिन किसी की समझ में आ जाएगी उस दिन कोई भी व्यक्ति जीवन का दुरूपयोग नहीं कर सकता। जीवन वो फूल है जिसमें काँटे तो बहुत हैं मगर सौन्दर्य की भी कोई कमी नहीं। ये और बात है कुछ लोग काँटो को कोसते रहते हैं और कुछ सौन्दर्य का आनन्द लेते हैं। जीवन को बुरा सिर्फ उन लोगों के द्वारा कहा जाता है जिनकी नजर फूलों की बजाय काँटो पर ही लगी रहती है। जीवन का तिरस्कार वे ही लोग करते हैं जिनके लिए यह मूल्यहीन है। जीवन में सब कुछ पाया जा सकता है मगर सब कुछ देने पर भी जीवन को नहीं पाया जा सकता है। जीवन का तिरस्कार नहीं अपितु इससे प्यार करो। जीवन को बुरा कहने की अपेक्षा जीवन की बुराई मिटाने का प्रयास करो, यही समझदारी है।

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बीमार पड़ने के पहले , ये काम केवल आयुर्वेद ही कर सकता है. ---- 1--केंसर होने का भय लगता हो तो रोज़ाना कढ़ीपत्ते का रस पीते रहें. 2-- हार्टअटेक का भय लगता हो तो रोज़ना अर्जुनासव या अर्जुनारिष्ट पीते रहिए. 3-- बबासीर होने की सम्भावना लगती हो तो पथरचटे के हरे पत्ते रोजाना सबेरे चबा कर खाएँ . 4-- किडनी फेल होने का डर हो तो हरे धनिये का रस प्रात: खाली पेट पिएँ. 5-- पित्त की शिकायत का भय हो तो रोज़ाना सुबह शाम आंवले का रस पिएँ. 6-- सर्दी - जुकाम की सम्भावना हो तो नियमित कुछ दिन गुनगुने पानी में थोड़ा सा हल्दी चूर्ण डालकर पिएँ. 7-- गंजा होने का भय हो तो बड़ की जटाएँ कुचल कर नारियल के तेल में उबाल कर छान कर,रोज़ाना स्नान के पहले उस तेल की मालिश करें. 8-- दाँत गिरने से बचाने हों तो फ्रिज और कूलर का पानी पीना बंद कर दें . 9-- डायबिटीज से बचाव के लिए तनावमुक्त रहें, व्यायाम करें, रात को जल्दी सो जाएँ, चीनी नहीं खाएँ , गुड़ खाएँ. 10--किसी चिन्ता या डर के कारण नींद नहीं आती हो तो रोज़ाना भोजन के दो घन्टे पूर्व 20 या 25 मि. ली. अश्वगन्धारिष्ट ,200 मि. ली. पानी में मिला कर पिएँ . किसी बीमारी का भय नहीं हो तो भी -- 15 मिनिट अनुलोम - विलोम, 15 मिनिट कपालभाती, 12 बार सूर्य नमस्कार करें. स्वयं के स्वास्थ्य के लिए इतना तो करें . नही कर सकते तो दवा के लिए हमसे संपर्क करे 7248369088

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बीमार पड़ने के पहले , ये काम केवल आयुर्वेद ही कर सकता है. ---- 1--केंसर होने का भय लगता हो तो रोज़ाना कढ़ीपत्ते का रस पीते रहें. 2-- हार्टअटेक का भय लगता हो तो रोज़ना अर्जुनासव या अर्जुनारिष्ट पीते रहिए. 3-- बबासीर होने की सम्भावना लगती हो तो पथरचटे के हरे पत्ते रोजाना सबेरे चबा कर खाएँ . 4-- किडनी फेल होने का डर हो तो हरे धनिये का रस प्रात: खाली पेट पिएँ. 5-- पित्त की शिकायत का भय हो तो रोज़ाना सुबह शाम आंवले का रस पिएँ. 6-- सर्दी - जुकाम की सम्भावना हो तो नियमित कुछ दिन गुनगुने पानी में थोड़ा सा हल्दी चूर्ण डालकर पिएँ. 7-- गंजा होने का भय हो तो बड़ की जटाएँ कुचल कर नारियल के तेल में उबाल कर छान कर,रोज़ाना स्नान के पहले उस तेल की मालिश करें. 8-- दाँत गिरने से बचाने हों तो फ्रिज और कूलर का पानी पीना बंद कर दें . 9-- डायबिटीज से बचाव के लिए तनावमुक्त रहें, व्यायाम करें, रात को जल्दी सो जाएँ, चीनी नहीं खाएँ , गुड़ खाएँ. 10--किसी चिन्ता या डर के कारण नींद नहीं आती हो तो रोज़ाना भोजन के दो घन्टे पूर्व 20 या 25 मि. ली. अश्वगन्धारिष्ट ,200 मि. ली. पानी में मिला कर पिएँ . किसी बीमारी का भय नहीं हो तो भी -- 15 मिनिट अनुलोम - विलोम, 15 मिनिट कपालभाती, 12 बार सूर्य नमस्कार करें. स्वयं के स्वास्थ्य के लिए इतना तो करें . नही कर सकते तो दवा के लिए हमसे संपर्क करे 7248369088

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दलित हिंदू + मुस्लिम = अपवित्र नेक्सस मुसलमानों ने दलित हिंदुओं का व्यवसाय संभाला जावेद हबीब के 300 शानदार एयर कंडीशनिंग सैलून 21 राज्यों में चल रहे हैं, लेकिन हिंदू नाइयों को SC & OBC कोटे के माध्यम से आरक्षित सीटों से सरकारी नौकरी की तलाश है। 29 देशों सहित 30 देशों में चमड़े के जूते-चप्पलों की 600 मिलियन की कंपनी के मालिक, निशि फराह मलिक अरबपति बन गए। भारत और विदेशों में चमड़े और फुटवियर का कारोबार करके मिर्जा ब्रदर्स अरबपति बन गए। एक समय था जब जूते और चमड़े के उद्योग में दलित हिंदुओं का एकाधिकार था, नाई की दुकान आमतौर पर विशेष रूप से दलित वर्ग के पास होती थी, जिसे नाई ’कहा जाता था, लेकिन आश्चर्य हमारे वामपंथी, मुस्लिम, और नकली दलित अधिकार वक्ता की योजनाबद्ध साजिश के लिएइन व्यवसायों को मुस्लिम समुदाय द्वारा धीरे-धीरे अपना लिया गया जिसे कोई भी आसानी से समझ नहीं सकता था। सुनियोजित माफियाओं और मुस्लिम प्रतिनिधियों के साथ सुनियोजित रणनीति और साजिश के साथ, हिंदू नाइयों लोहारों चर्मकारों य बढ़ैयों धोखा देते हुए कहा कि - देखो ब्राह्मण आबादी में इतने कम हैं फिर भी वे सबसे शक्तिशाली पदों का आनंद ले रहे हैं और आप सभी को कई सदियों तक गुलामी में रखना चाहते हैं। अतः यह काम मत करो। आपके बच्चों को शिक्षित होना चाहिए और उन्हें सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए, और जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए मत भूलना, सरकार आपको सभी योग्य नौकरियां और लाभ देगी, आरक्षण और जयकार के लिए लड़ते रहें, इन पंडितों के जाल में न पड़ें ”। हिंदू नाइयों और अनुसूचित जाति वर्ग के अन्य लोगों ने सोचा कि उन्हें आरक्षण का लाभ मिलेगा और सरकारी नौकरी भी, इसलिए उन्होंने अपने परिवार के स्वामित्व वाली दुकानें बंद कर दीं, जो सदियों से चली आ रही थीं, और ग्लैमर और झूठे वादों के झांसे में शहर की ओर चल पड़े। उन्होंने अपने घरों को छोड़ दिया और अस्वच्छ चॉलों में किराए के कमरे में रहने लगे, अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में डाल दिया, या फिर एनजीओ द्वारा चलाए गए सड़क के स्कूलों में, जहाँ इन बच्चों को जॉनी जॉनी हाँ पापा को सुनकर सोचने लगे कि, एक दिन मेरा बच्चा सरकारी अधिकारी बन जाएगा जिसे आमतौर पर हिंदी में बाबू या साहब के नाम से जाना जाता है। लेकिन नाइयों, लॉन्डरों को कितनी सरकारी नौकरियां मिलती हैं? उनके बच्चे बेरोजगार रहते हैं और 20 साल और उससे अधिक समय बीतने के बाद भी, ये बच्चे बेरोजगार लोगों की नई खेप बनकर तैयार होते हैं। फिर वे सुरक्षा गार्ड या वेटर की न्यूनतम नौकरी के साथ 7000 से 15000 रुपये के मजदूर के रूप में कार्य करते हैं और राजनेताओं के उकसाने पर, वे आरक्षण के लिए वर्तमान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में खुशी से भाग लेते हैं। और जब बढ़ती उम्र के कारण, एससी, एसटी और अन्य ओबीसी समुदाय के ये गरीब लोग सुरक्षा गार्ड, वेटर आदि की नौकरी नहीं कर पाते तो अपने गाँव में अपनी नाई की दुकान खोलने की सोच कर लौटते हैं, जो पिछले दो दशकों से बंद पड़ी होती है । लेकिन उन्हें आश्चर्य होता है जब वे देखते हैं कि पहले जहां केवल कुछ सैलून थे, अब कई खुल गए हैं और उनमें से अधिकांश मुस्लिमों द्वारा चलाए जा रहेहैं। गरीब दलित हिंदू नाइयों ने अपना पारंपरिक पेशा छोड़ दिया।, जिस पर मुसलमानों ने कब्जा कर लिया सरकारी नौकरियों में आने के लिए हिंदू कोबलरों ने जूते बनाना बंद कर दिया और मुसलमान इसी पेशे से अरबों कमा लगे। मुसलमानों ने उन सभी पारंपरिक नौकरियों को लिया है जो पहले एक समय में ओबीसी, एससी और एसटी की हुआ करती थीं। कई दलितों को रोजगार मिला लेकिन उनमें से अधिकांश बेरोजगार भटक गए, मैकाले प्रणाली में फंस गए और सिर्फ एक डिग्री के साथ सड़कों पर भटकते रहे, जिसका कोई फायदा नहीं है। ये है वामपंथी नरेटिव जिसके शिकार हम हुए.. क्या हिंदुओं के पारंपरिक पेशे इतने बुरे थे ..... 🔥🌼🍃वन्दे मातरम् ☘🌼🔥

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मुस्लिम युवक का दावा पीर को हम नही हिन्दू पूजते है पीर मुगलकाल में एक पदवी होती थी जैसे आज दरोगा या थानेदार होता है उस समय मुगलकाल में जो मुस्लिम अधिकारी काफिरो अर्थात हिन्दुओ पर ज्यादा जुल्म करता था उसे पीर साहब बनाया जाता था पीर कई गांवो का एक और भूमिया प्रत्येक गांव का एक बनाया जाता था और पड़ताल करने पर उसका दावा सत्य निकला ! हिन्दू युवाओ को नही पता पीर मजार क्या होता है बस भेड़चाल है उनका कहना है सब हिन्दू पूजते आ रहे है तो हम भी पूज रहे है शायद कोई देवता होगा ? जागो हिन्दुओ जागो अन्यथा एक दिन विरासत में मिली अपनी इस महान संस्कृति को खोकर अल्पसंख्यक हो जाओगे जंहा सुख का नाम तक नही होगा सिवाय मारकाट के जैसे आज मुस्लिम और ईसाई देशो में हो रहा है भारत में कश्मीर ,बंगाल और केरल जैसे राज्यो में हिन्दुओ की स्तिथि दयनीय हो चली है अगर यही हाल रहा तो वह दिन भी दूर नही जब आप अपनी बहन बेटियो की इज्जत भी नही बचा पाओगे #पीर_का_मतलब #क्यों_पूजें_पीर? आपने भी हरी चादर लेकर घूमते कुछ दाढी वालों को देखा होगा या बहुत लोग पीर की पूजा करने जाते हैं। आखिर क्या है पीर?? मुस्लिम राजा का यह एक अधिकारी होता था, जिसे पीर कहा जाता था। जिसकी नौ गज के घेरे तक सुरक्षा रहती थी, जैसे आजकल सुरक्षा कमांडो मुख्यमंत्री को घेरा बनाकर चलते हैं। गावों में लगान आदि इकट्टा करने का जिम्मा पीर का होता था! रैवैन्यु गांव के एक निश्चित स्थान पर सभी लोग उस पीर के पास जाकर मुगलों का टैक्स देते थे! वो टैक्स केवल हिंदूओं पर ही था जिसको जजिया कर भी कहते थे! जो हिन्दू परिवार वह जजिया कर देने से मना कर देता था, तो उस पीर के साथ नौ गज के घेरे में रहने वाले सुरक्षा कर्मी , गांव में सबके सामने उस जजिया कर न चुकाने वाले परिवार की सबसे सुंदर बहु या बेटी को नंगा करके लाते थे, व सबके सामने उसके साथ बलात्कार किया जाता था, ताकि किसी की हिम्मत ना पड़े बाद में जजिया कर देने से मना करने से! सबके सामने हो रहे इस घिनौने बलात्कार के समय कुछ लोग उस बहु बेटी के उपर चादर डाल देते थे, व गांव के बाकी लोग डर के मारे लगान व जजिया कर (पैसा) उसी चादर के उपर या उसके पास धड़ाधड़ डालते चले जाते थे! और हाथ जोड़ लेते थे सिर झुकाते थे कि कहीं उनके उपर भी पीर या उसके नौ गज के घेरे वाले सुरक्षा देने वाले मुल्ले कोई अत्याचार ना करें! यह है उन पीरों की सच्चाई, जब वह दुष्ट नीच पीर मरे थे तब भी मूर्ख अज्ञानी हिंदुओ में उनके प्रति वही घबराहट व भयंकर खौफ बना रहा, और फिर यह पीढी दर पीढी परम्परा लोगों के दिमाग में बैठ गई। ऐसे राक्षस पीरों के मरने के सदियों बाद भी मूर्ख हिंदु डर के मारे उनकी कब्रों पर वही चादर व पैसा चढ़ाता है! अर्थात् जिस जिस नीच पीर ने मूर्ख हिंदुओं की बहिन बेटियों की इज्जत लूटी, यह मूर्ख उनकी ही कब्रों ( पीरो) पर माथा रगड़ता फिरता है! कहीं नौकरी मांगता फिरता है तो कहीं पुत्र और धन दौलत व व्यापार या तरक्की के लिए माथा रगड़ता है। क्या इससे अधिक कायरता व मूर्खता की मिसाल दुनियां में कहीं मिल सकती है! विशेष:-- पीर से ज्यादा अधिकार और क्षेत्रफल ख्वाजा के पास होता था और वह पीर से भी ज्यादा अत्याचार लुटखसूट करता था और उससे भी ज्यादा अधिकार सैय्यद को मिले होते थे। और वह अपने अधिन जनता पर अत्याधिक अनाचार अत्याचार दुराचार करता था उसी भय से आज भी हिन्दू उनसे डरते हैं और उनकी मजारों पर चदर चढ़ाते हैं और उनकी जय तक बोलते हैं। इस पोस्ट को अधिक से शेयर करें, ताकि मानसिक गुलामी में जी रहे लोगों तक असलियत का पता चल सके! जागो भारत विश्व जगाओ...... सनातन धर्म की ओर लोटो !! जय आर्यव्रत जय मां भारती।

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*अजीनोमोटो* "दिमाग़ को पागल करने का मसाला" *शादी-ब्याह* *दावतों* में भूल कर भी हलवाई को ना देवें ! आजकल व्यंजनों में, खासकर चायनीज वैरायटी में, एक सफेद पाउडर या क्रिस्टल के रूप में *मोनो सोडियम ग्लुटामेट* (M.S.G.) नामक रसायन जिसे दुनिया *अजीनोमोटो* के नाम से जानती है, का प्रयोग बहुत बढ़ गया है, बिना यह जाने कि यह वास्तव में क्या है? *अजीनोमोटो* नाम तो असल में इसे बनाने वाली मूल चायनीज कम्पनी का है ! यह एक ऐसा रसायन है, जिसके जीभ पर स्पर्श के बाद जीभ भ्रमित हो जाती है और मस्तिष्क को झूठे संदेश भेजने लगती है। जिस सें *सड़ा-गला* या *बेस्वाद* खाना भी अच्छा महसूस होता है। इस रसायन के प्रयोग से शरीर के अंगों-उपांगों और मस्तिष्क के बीच *न्यूरोंस* का नैटवर्क बाधित हो जाता है, जिसके दूरगामी दुष्परिणाम होते हैं। चिकित्सकों के अनुसार *अजीनोमोटो* के प्रयोग से 1-एलर्जी, 2-पेट में अफारा, 3-सिरदर्द, 4-सीने में जलन, 5-बाॅडीे टिश्यूज में सूजन, 6-माइग्रेन आदि हो सकते है। *अजीनोमोटो* से होने वाले रोग इतने व्यापक हो गये हैं कि अब इन्हें ‘*चाइनीज रेस्टोरेंट सिंड्रोम* कहा जाता है। दीर्घकाल में *मस्तिष्काघात* (Brain Hemorrhage) हो सकता है जिसकी वजह से *लकवा* होता है। अमेरिका आदि बहुत से देशों में *अजीनोमोटो* पर प्रतिबंध है। न जाने *फूड सेफ्टी एण्ड स्टैन्डर्ड अथाॅरिटी आॅफ इंडिया’* ने भारत में *अजीनोमोटो* को प्रतिबंधित क्यों नहीं किया है? *सुरक्षित खाद्य अभियान* ("Safe Food Abhiyan") की पाठकों से जोरदार अपील है कि दावतों में हलवाई द्वारा मंगाये जाने पर उसे *अजीनोमोटो* लाकर ना देवें। हलवाई कहेगा कि चाट में मजा नहीं आयेगा, फिर भी इसका पूर्ण बहिष्कार करें। कुछ भी हो (AFTER ALL) दावत खाने वाले आपके *प्रियजन* हैं, आपके यहां दावत खाकर वे बीमार नही पड़ने चाहिए ! जब आपने बाकि सारा बढ़िया सामान लाकर दिया है तो लोगों को *अजीनोमोटो* के बिना भी खाने में, चाट में पूरा मजा आयेगा, आप निश्चिंत रहें। *अजीनोमोटो* तो *हलवाई की अयोग्यता* को छिपाने व होटलों, ढाबों, कैटरर्स, स्ट्रीट फूड वैंडर्स द्वारा सड़े-गले सामान को आपके *दिमाग* को पागल बनाकर स्वादिष्ट महसूस कराने के लिए डाला जाता है। क्या *हलवाई की अयोग्यता* का दंड अपने *प्रियजनों* को देंगे ???? *सुरक्षित खाद्य अभियान*(Safe Food Abhiyan)द्वारा "विज्ञान प्रगति’ मई-2017"में छपी सामग्री पर आधारित।

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