"ये वक्त गुज़र जायेगा" ------------------------- मित्रों आपने कई बार अपने बुजुर्गों के मुँह से ये कहावत सुनी होगी। क्या कभी आपने गौर किया है इस कहावत पर कि बस पढ़ा, सुना, थोड़ा बहुत ध्यान दिया और फिर भूल गए. इस कहावत के Positive और Negative दोनों पहलुओं पर गौर करते हैं :- 1) सोचिये अगर हम यह कहावत "ये वक्त गुज़र जायेगा" अपने ख़राब वक़्त में पढ़ेंगे तो हमारे अंदर एक Positive Energy का संचार हो जायेगा कि चलो ख़राब वक़्त हमेशा नहीं रहेगा। हम भी यही चाहते हैं कि आपके, हमारे अंदर हमेशा Positive Energy बनी रहे क्योँकि हम सभी जानते हैं कि हमारी और हमसे जुड़े तमाम लोगों की जिंदगी अगर ऊपर उठ सकती है तो वह सिर्फ और सिर्फ Positive Energy से ही उठा सकती है. 2) अब सोचिये कि अगर हम यह कहावत "ये वक्त गुज़र जायेगा" अपने अच्छे वक़्त में पढ़ेंगे तो यह कहावत हमें गलत काम करने से रोकेगा क्योँकि हमारे मन में ये विचार आएगा की कहीं हमारा अच्छा वक़्त खत्म न हो जाये। हम सभी जानते हैं कि गलत काम करने और बोलने पर एक Negative Energy हमारे और साथ ही साथ हमसे जुड़े सभी लोगों के लिए भी automatically create हो जाती है. तो मित्रों यह सिर्फ एक छोटी सी कहावत नहीं है, यह हमारी Progress और Success से जुड़ी हुई एक रामबाण कहावत है जिसका आप Printout निकाल कर घर या ऑफिस में लगा सकते हैं. मित्रों ये कहावत "ये वक्त गुज़र जायेगा" हमें Positive Circumstances में Negativity की तरफ न जाने और Negative Circumstances में Positive रहने के लिए प्रेरित करती है. आपने अमेरिकन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का नाम तो सुना होगा, शायद इस कहावत "ये वक्त गुज़र जायेगा" के जरिये हम सब उनसे कुछ प्रेरणा ले पाएं: सन 1831 में उनका business बंद हो गया. 1832 में वो Election हार गए. 1833 में उन्होंने नया business किया और फिर fail हो गए. 1836 में उनका nervous breakdown हो गया. 1843 में वो Election हार गए. 1848 में वो फिर Election हार गए. 1855 में वो फिर Election हार गए. 1856 में वो फिर से Election हार गए. 1859 में वो फिर एक बार Election हार गए. और तब जाकर 1860 में वो अमेरिका के राष्ट्रपति बने. 29 साल लगे उन्हें इस ऊंचाई में पहुँचने के लिए. Success कोई रातों रात का काम नहीं है. मित्रों Success हमारे खट्टे मीठे पलों का संग्रह है और इसमें Time लगता है, ये बात हमें हमेशा याद रखनी पड़ेगी। ऐसी ही अनगिनत प्रेरणादायक कहानियाँ हम सुनते रहते हैं. ये नहीं था की अब्राहम लिंकन Perfect थे. दुनिया में कोई भी Perfect नहीं है. वो गलतियां करते रहे, fail होते रहे. पर सबसे बड़ी बात उन्होंने कभी हार नहीं मानी, वो अपनी गलतियों से सीखते रहे और चलते रहे चाहे कितने ही धीरे धीरे। ये महत्व नहीं करता की आपने कितनी बार गलती की या आप कितनी बार fail हुए हैं, महत्व ये रखता है कि :- अगर आप उड़ नहीं सकते तो दौड़िये, अगर आप दौड़ नहीं सकते तो चलिए, अगर आप चल नहीं सकते तो रेंगीए। हमें एक बात हमेशा याद रखनी है कि हमें किसी भी हालत में आगे बढ़ना है. हमें अपनी हर गलती या Failure के बाद एक नए जोश, होश, हौसले, नई Planning, नए Idea के साथ Bounce Back करना ही करना है. बस Important ये है कि हमें अपने सपनों को मरने नहीं देना है किसी भी हालत में, इस कहावत को दिलो दिमाग में याद रखते रखते कि :- "ये वक्त गुज़र जायेगा".

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एक ऐसी स्त्री जिसके बारे में मैंने अपने ग्रंथों में पढ़ा और उम्मीद की कि मेरे घर मे आएगी मगर हो न सका अपनी दादी के बारे में बहुत कुछ सुन कर ही ये ख्याल मन मे आया था बहुत बड़ी कमी रह गई मेरे जीवन में कि उन्हें देख भी न सका वो कैसी स्त्री होनी चाहिए बताना चाहता हूँ चाहे वो दादी हो नानी हो माँ हो बहन हो बेटी हो दोस्त हो बीवी हो या फिर हमारे घर मे काम करने वाली बाई ही क्यो न हो अगर आपको मिल जाए तो यकीन करना आप धरती पर स्वर्ग में रहते है शायद कुछ गलतियां मर्दो की भी हो सकती है कि ऐसी ओरतें अब नही बनती स्त्री कुछ भी बर्बाद नही होने देतीं। वो सहेजती हैं। संभालती हैं। ढकती हैं। बाँधती हैं। उम्मीद के आख़िरी छोर तक। कभी तुरपाई कर के। कभी टाँका लगा के। कभी धूप दिखा के। कभी हवा झला के। कभी छाँटकर। कभी बीनकर। कभी तोड़कर। कभी जोड़कर। देखा होगा ना अपने ही घर में उन्हें खाली डब्बे जोड़ते हुए। बची थैलियाँ मोड़ते हुए। बची रोटी शाम को खाते हुए। दोपहर की थोड़ी सी सब्जी में तड़का लगाते हुए। दीवारों की सीलन तस्वीरों से छुपाते हुए। बचे हुए खाने से अपनी थाली सजाते हुए। फ़टे हुए कपड़े हों। टूटा हुआ बटन हो। पुराना अचार हो। सीलन लगे बिस्किट, चाहे पापड़ हों। डिब्बे मे पुरानी दाल हो। गला हुआ फल हो। मुरझाई हुई सब्जी हो। या फिर तकलीफ़ देता " रिश्ता " वो सहेजती हैं। संभालती हैं। ढकती हैं। बाँधती हैं। उम्मीद के आख़िरी छोर तक इसलिए , आप अहमियत रखिये वो जिस दिन मुँह मोड़ेंगी तुम ढूंढ नहीं पाओगे...। " *मकान" को "घर" बनाने वाली रिक्तता उनसे पूछो जिन घर मे नारी नहीं वो घर नहीं मकान कहे जाते हैं* यही नारी दादी - नानी, मां, बहन, पत्नी, पुत्री - पुत्र वधु के रूप में आप - हम सबके घरों को स्वर्ग बनातीं हैं। अफसोस अब ऐसी नारी नही मिलती क्योकि हम अपनी पुत्री को नारी नही व्यभिचारी बना रहे है

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*आखिर है क्या रामायण ????* *अगर पढ़ो तो आंसुओ पे काबू रखना...प्यारे मित्रों....छोटा सा वृतांत है* *एक रात की बात हैं,माता कौशिल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी। नींद खुल गई । पूछा कौन हैं ?* *मालूम पड़ा श्रुतिकीर्ति जी हैं ।नीचे बुलाया गया* *श्रुतिकीर्ति जी, जो सबसे छोटी बहु हैं, आईं, चरणों में प्रणाम कर खड़ी रह गईं* *माता कौशिल्या जी ने पूछा, श्रुति ! इतनी रात को अकेली छत पर क्या कर रही हो बिटिया ? क्या नींद नहीं आ रही ?* *शत्रुघ्न कहाँ है ?* *श्रुतिकीर्ति की आँखें भर आईं, माँ की छाती से चिपटी, गोद में सिमट गईं, बोलीं, माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह वर्ष हो गए ।* *उफ ! कौशल्या जी का ह्रदय काँप कर झटपटा गया ।* *तुरंत आवाज लगी, सेवक दौड़े आए । आधी रात ही पालकी तैयार हुई, आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी, माँ चली ।* *आपको मालूम है शत्रुघ्न जी कहाँ मिले ?* *अयोध्या जी के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिग्राम में तपस्वी होकर रहते हैं, उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शिला हैं, उसी शिला पर, अपनी बाँह का तकिया बनाकर लेटे मिले ।* *माँ सिराहने बैठ गईं, बालों में* *हाथ फिराया तो शत्रुघ्न जी ने* *आँखें* *खोलीं, माँ !* *उठे, चरणों में गिरे, माँ ! आपने क्यों कष्ट किया ? मुझे बुलवा लिया होता ।* *माँ ने कहा, शत्रुघ्न ! यहाँ क्यों ?"* *शत्रुघ्न जी की रुलाई फूट पड़ी, बोले- माँ ! भैया राम जी पिताजी की आज्ञा से वन चले गए, भैया लक्ष्मण जी उनके पीछे चले गए, भैया भरत जी भी नंदिग्राम में हैं, क्या ये महल, ये रथ, ये राजसी वस्त्र, विधाता ने मेरे ही लिए बनाए हैं ?* *माता कौशल्या जी निरुत्तर रह गईं ।* *देखो क्या है ये रामकथा...* *यह भोग की नहीं....त्याग की कथा हैं, यहाँ त्याग की प्रतियोगिता चल रही हैं और सभी प्रथम हैं, कोई पीछे नहीं रहा* *चारो भाइयों का प्रेम और त्याग एक दूसरे के प्रति अद्भुत-अभिनव और अलौकिक हैं ।* *रामायण जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा देती हैं ।*🌸🌸🌸 *भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी माँ सीता ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया। परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मण जी कैसे राम जी से दूर हो जाते! माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की.. परन्तु जब पत्नी उर्मिला के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा!! क्या कहूंगा!* *यहीं सोच विचार करके लक्ष्मण जी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिला जी आरती का थाल लेके खड़ी थीं और बोलीं- "आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु की सेवा में वन को जाओ। मैं आपको नहीं रोकूँगीं। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आये, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।"* *लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था। परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया। वास्तव में यहीं पत्नी का धर्म है। पति संकोच में पड़े, उससे पहले ही पत्नी उसके मन की बात जानकर उसे संकोच से बाहर कर दे!* *लक्ष्मण जी चले गये परन्तु 14 वर्ष तक उर्मिला ने एक तपस्विनी की भांति कठोर तप किया। वन में भैया-भाभी की सेवा में लक्ष्मण जी कभी सोये नहीं परन्तु उर्मिला ने भी अपने महलों के द्वार कभी बंद नहीं किये और सारी रात जाग जागकर उस दीपक की लौ को बुझने नहीं दिया।* *मेघनाथ से युद्ध करते हुए जब लक्ष्मण को शक्ति लग जाती है और हनुमान जी उनके लिये संजीवनी का पहाड़ लेके लौट रहे होते हैं, तो बीच में अयोध्या में भरत जी उन्हें राक्षस समझकर बाण मारते हैं और हनुमान जी गिर जाते हैं। तब हनुमान जी सारा वृत्तांत सुनाते हैं कि सीता जी को रावण ले गया, लक्ष्मण जी मूर्छित हैं।* *यह सुनते ही कौशल्या जी कहती हैं कि राम को कहना कि लक्ष्मण के बिना अयोध्या में पैर भी मत रखना। राम वन में ही रहे। माता सुमित्रा कहती हैं कि राम से कहना कि कोई बात नहीं। अभी शत्रुघ्न है। मैं उसे भेज दूंगी। मेरे दोनों पुत्र राम सेवा के लिये ही तो जन्मे हैं। माताओं का प्रेम देखकर हनुमान जी की आँखों से अश्रुधारा बह रही थी। परन्तु जब उन्होंने उर्मिला जी को देखा तो सोचने लगे कि यह क्यों एकदम शांत और प्रसन्न खड़ी हैं? क्या इन्हें अपनी पति के प्राणों की कोई चिंता नहीं?* *हनुमान जी पूछते हैं- देवी! आपकी प्रसन्नता का कारण क्या है? आपके पति के प्राण संकट में हैं। सूर्य उदित होते ही सूर्य कुल का दीपक बुझ जायेगा। उर्मिला जी का उत्तर सुनकर तीनों लोकों का कोई भी प्राणी उनकी वंदना किये बिना नहीं रह पाएगा। वे बोलीं- "* *मेरा दीपक संकट में नहीं है, वो बुझ ही नहीं सकता। रही सूर्योदय की बात तो आप चाहें तो कुछ दिन अयोध्या में विश्राम कर लीजिये, क्योंकि आपके वहां पहुंचे बिना सूर्य उदित हो ही नहीं सकता। आपने कहा कि प्रभु श्रीराम मेरे पति को अपनी गोद में लेकर बैठे हैं। जो योगेश्वर राम की गोदी में लेटा हो, काल उसे छू भी नहीं सकता। यह तो वो दोनों लीला कर रहे हैं। मेरे पति जब से वन गये हैं, तबसे सोये नहीं हैं। उन्होंने न सोने का प्रण लिया था। इसलिए वे थोड़ी देर विश्राम कर रहे हैं। और जब भगवान् की गोद मिल गयी तो थोड़ा विश्राम ज्यादा हो गया। वे उठ जायेंगे। और शक्ति मेरे पति को लगी ही नहीं शक्ति तो राम जी को लगी है। मेरे पति की हर श्वास में राम हैं, हर धड़कन में राम, उनके रोम रोम में राम हैं, उनके खून की बूंद बूंद में राम हैं, और जब उनके शरीर और आत्मा में हैं ही सिर्फ राम, तो शक्ति राम जी को ही लगी, दर्द राम जी को ही हो रहा। इसलिये हनुमान जी आप निश्चिन्त होके जाएँ। सूर्य उदित नहीं होगा।"* *राम राज्य की नींव जनक की बेटियां ही थीं... कभी सीता तो कभी उर्मिला। भगवान् राम ने तो केवल राम राज्य का कलश स्थापित किया परन्तु वास्तव में राम राज्य इन सबके प्रेम, त्याग, समर्पण , बलिदान से ही आया।* *"जय जय सियाराम"* *"जयश्रीराधेकृष्णा"* *पसंद आया हो, प्रेम, त्याग, समर्थन की भावना अगर मन में हो तो इसे आगे अवश्य बढावे🙏🏻*

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1 चुकंदर खाएं रोजाना,शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी होगीपूरी 1. चुकंदर का सेवन करने से एनीमिया, कब्ज, माहवारी की समस्या दूर होती है। 2. चुकंदर का सेवन शरीर में खून की मात्रा बढ़ाता है, इसलिए महिलाओं के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है। 3. चुकंदर का सेवन सलाद व जूस के रूप में करना काफी फायदेमंद होता है। इसमें आयरन, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, विटामिन डी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। 4. आयुर्वेद में बताया गया है कि यह खून तो बढ़ाता ही है, साथ ही पेशाब संबंधी समस्याओं को भी दूर करता है। 5. चुकंदर में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जिस वजह से ये कब्ज और बवासीर की तकलीफ को दूर करने में सहायक होता है। 6. चुकंदर का सेवन शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल देता है और इस कारण रक्त साफ हो जाता है। 7. इसे नियमित खाया जाए तो ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है। 8. चुकंदर शरीर में कैल्शियम को बढ़ाता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।

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समयसूचक AM और PM का उद्गम स्थल भारत ही था। पर हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है : AM : एंटी मेरिडियन (ante meridian) PM : पोस्ट मेरिडियन (post meridian) एंटी यानि पहले, लेकिन किसके? पोस्ट यानि बाद में, लेकिन किसके? यह कभी साफ नहीं किया गया, क्योंकि यह चुराये गये शब्द का लघुतम रूप था। हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा ने इस संशय को अपनी आंधियों में उड़ा दिया और अब, सब कुछ साफ-साफ दृष्टिगत है। कैसे? देखिये... AM = आरोहनम् मार्तण्डस्य Aarohanam Martandasya PM = पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasya ---------------------------- सूर्य, जो कि हर आकाशीय गणना का मूल है, उसीको गौण कर दिया। अंग्रेजी के ये शब्द संस्कृत के उस 'मतलब' को नहीं इंगित करते जो कि वास्तव में है। आरोहणम् मार्तण्डस्य Arohanam Martandasaya यानि सूर्य का आरोहण (चढ़ाव)। पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasaya यानि सूर्य का ढलाव। दिन के बारह बजे के पहले सूर्य चढ़ता रहता है - 'आरोहनम मार्तण्डस्य' (AM)। बारह के बाद सूर्य का अवसान/ ढलाव होता है - 'पतनम मार्तण्डस्य' (PM) 🙏🙏❤️❤️❤️❤️❤️🙏🙏

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👉विष्णु भगवान ने पृथ्वी को किस समुद्र से निकाला था, जबकि समुद्र पृथ्वी पर ही है? बचपन से मेरे मन मे भी ये सवाल था कि आखिर कैसे पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया जबकि समुद पृथ्वी पर ही है। हिरण्यकश्यप का भाई हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को ले जाकर समुद्र में छिपा दिया था। फलस्वरूप भगवान बिष्णु ने सूकर का रूप धारण करके हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को पुनः उसके कच्छ में स्थापित कर दिया। इस बात को आज के युग में एक दंतकथा के रूप में लिया जाता था। लोगों का ऐसा मानना था कि ये सरासर गलत और मनगढंत कहानी है। लेकिन नासा के एक खोज के अनुसार खगोल विज्ञान की दो टीमों ने ब्रह्मांड में अब तक खोजे गए पानी के सबसे बड़े और सबसे दूर के जलाशय की खोज की है। उस जलाशय का पानी, हमारी पृथ्वी के समुद्र के 140 खरब गुना पानी के बराबर है। जो 12 बिलियन से अधिक प्रकाश-वर्ष दूर है। जाहिर सी बात है कि उस राक्षस ने पृथ्वी को इसी जलाशय में छुपाया होगा। इसे आप "भवसागर" भी कह सकते हैं। क्योंकि हिन्दू शास्त्र में भवसागर का वर्णन किया गया है। जब मैंने ये खबर पढ़ा तो मेरा भी भ्रम दूर हो गया। और अंत मे मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहुँगा की जो इस ब्रह्मांड का रचयिता है, जिसके मर्जी से ब्रह्मांड चलता है। उसकी शक्तियों की थाह लगाना एक तुच्छ मानव के वश की बात नही है। मानव तो अपनी आंखों से उनके विराट स्वरूप को भी नही देख सकता। जिस किसी को इसका स्रोत जानना है वो यहाँ से देख सकते हैं;- · कुछ बेवकूफ जिन्हें ये लगता है कि हमारा देश और यहाँ की सभ्यता गवांर है। जिन्हें लगता है कि नासा ने कह दिया तो सही ही होगा। जिन्हें ये लगता है की भारत की सभ्यता भारत का धर्म और ज्ञान विज्ञान सबसे पीछे है। उनके लिये मैं बता दूं कि सभ्यता, ज्ञान, विज्ञान, धर्म, सम्मान भारत से ही शुरू हुआ है। अगर आपको इसपर भी सवाल करना है तो आप इतिहास खंगाल कर देखिये। जिन सभ्यताओं की मान कर आप अपने ही धर्म पर सवाल कर रहे हैं उनके देश मे जाकर देखिये। उनके भगवान तथा धर्म पर कोई सवाल नही करता बल्कि उन्होंने अपने धर्म का इतना प्रचार किया है कि मात्र 2000 साल में ही आज संसार मे सबसे ज्यादा ईसाई हैं। और आप जैसे बेवकूफों को धर्मपरिवर्तन कराते हैं। और आप बेवकूफ हैं जो खुद अपने ही देश और धर्म पर सवाल करते हैं। अगर उनकी तरह आपके भी पूर्वज बंदर थे तो आप का सवाल करना तथा ईश्वर पर तर्क करना सर्वदा उचित है। एडिट 1:- कौन होता है नासा जो हमे ये बताएगा कि आप सही हैं या गलत। हिन्दू धर्म कितना प्राचीन है इसका अनुमान भी नही लगा सकता नासा। जब इंग्लैंड में पहला स्कूल खुला था तब भारत में लाखों गुरुकुल थे। और लाखों साल पहले 4 वेद और 18 पुराण लिखे जा चुके थे। जब भारत मे प्राचीन राजप्रथा चल रही थी तब ये लोग कपड़े पहनना भी नही जानते थे। तुलसीदास जी ने तब सूर्य के दूरी के बारे में लिख दिया था जब दुनिया को दूरी के बारे में ज्ञान ही नही था। खगोलशास्त्र के सबसे बड़े वैज्ञानिक आर्यभट्ट जो भारत के थे। उन्होंने दुनिया को इस बात से अवगत कराया कि ब्रह्मांड क्या है, पृथ्वी का आकार और व्यास कितना है। और आज अगर कुछ मूर्ख विदेशी संस्कृति के आगे भारत को झूठा समझ रहे हैं तो उनसे बड़ा मूर्ख और द्रोही कोई नही हो सकता। ये अपडेट करना आवश्यक हो गया था। जिनके मन मे ईश्वर के प्रति शंका है। जो वेद और पुराणों को बस एक मनोरंजन का पुस्तक मानते हैं। उनके लिए शास्त्र कहता है:- बिष्णु विमुख इसका अर्थ है भगवान विष्णु के प्रति प्रीति नहीं रखने वाला, अस्नेही या विरोधी। इसे ईश्‍वर विरोधी भी कहा गया है। ऐसे परमात्मा विरोधी व्यक्ति मृतक के समान है। ऐसे अज्ञानी लोग मानते हैं कि कोई परमतत्व है ही नहीं। जब परमतत्व है ही नहीं तो यह संसार स्वयं ही चलायमान है। हम ही हमारे भाग्य के निर्माता है। हम ही संचार चला रहे हैं। हम जो करते हैं, वही होता है। अविद्या से ग्रस्त ऐसे ईश्‍वर विरोधी लोग मृतक के समान है जो बगैर किसी आधार और तर्क के ईश्‍वर को नहीं मानते हैं। उन्होंने ईश्‍वर के नहीं होने के कई कुतर्क एकत्रित कर लिए हैं। दिन और रात का सही समय पर होना। सही समय पर सूर्य अस्त और उदय होना। पेड़ पौधे, अणु परमाणु तथा मनुष्य की मस्तिष्क की कार्यशैली का ठीक ढंग से चलना ये अनायास ही नही हो रहा है। जीव के अंदर चेतना कहाँ से आता है, हर प्राणी अपने जैसा ही बीज कैसे उत्पन्न करता है, शरीर की बनावट उसके जरूरत के अनुसार ही कैसे होता है? बिना किसी निराकार शक्ति के ये अपने आप होना असंभव है। और अगर अब भी ईश्वर और वेद पुराण के प्रति तर्क करना है तो उसके जीवन का कोई महत्व नही है।

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सबसे प्राचीन टेपरिकार्डर और विष्णु सहस्त्रनाम ........... * 1940 या 50 के दशक में वापस चलते हैं ..!!! एक बार कोई व्यक्ति जगतगुरु SriMaha_Periyava - Kanchi Paramacharya साक्षात्कार कर रहा था ... उस सज्जन ने टेपरिकॉर्डर का उपयोग करके साक्षात्कार रिकॉर्ड किया..!! जगतगुरु ने तब एक प्रश्न किया था ... क्या किसी को पता है कि सबसे पुराना टेप रिकॉर्डर कौन है ... ???" कोई भी जवाब देने में सक्षम नहीं था..!! तब जगतगुरु ने एक और प्रश्न पूछा .. विष्णु सहस्रनाम हमारे पास कैसे आया .. ????" किसी ने कहा भीष्म पितामह ने हमें दिया है.. उन्होंने श्रीकृष्ण की स्तुति की थी इससे ..!! सब मान गए.. तब श्रीजगतगुरु ने एक और प्रश्न किया ... ??? जब सभी युद्ध के मैदान में पितामह भीष्म की बात सुन रहे थे, तो कुरुक्षेत्र में कैसे कौन नोट किया होगा .. ???" फिर से चुप्पी..!! श्री जगतगुरु ने समझाया - जब भीष्म पितामह सहस्रनाम से कृष्ण की महिमा कर रहे थे, तो हर कोई उनकी ओर देख रहा था यहाँ तक कि श्रीकृष्ण और ऋषि वेदव्यास जी भी .... 1000 नाम के समाप्त करने के बाद, सभी ने अपनी आँखें खोलीं ...!!! . ..पहली प्रतिक्रिया देने वाले युधिष्ठिर थे .. उन्होंने कहा... ‘पितामह आपने वासुदेव के 1000 गौरवशाली नामों का जप किया है .. हम सभी ने इसे सुना लेकिन हममें से किसी ने भी इसे नोट नहीं किया है .. !! अनुक्रम खो गया है ... हमेशा की तरह फिर सभी ने श्रीकृष्ण की ओर रुख किया और उनकी मदद मांगी ..!!! उन्होंने कहा, .. मैं भी आप की तरह सुन रहा था .. हम क्या सहायता कर सकते हैं .. ??? फिर श्रीकृष्ण ने कहा हाँ ... यह केवल सहदेव द्वारा किया जा सकता है और वेदव्यास इसे लिख देंगे ..!! . अब हर कोई को ये अबूझ पहेली लगी ..!! कि सहदेव इसमें कैसे सहायता कर सकते हैं ..?? तब श्रीकृष्ण ने जवाब दिया, .... .. हमारे बीच केवल सहदेव हैं जो शुद्ध स्फटिक की माला धारण करते हैं .. यदि वह शिव से प्रार्थना कर उनका ध्यानम करते हैं तो वह स्फटिक से ध्वनि को तरंगों में पुनः परिवर्तित कर सकते हैं और व्यासजी इसे रचित रूप दे सकते हैं ..!! . तब सहदेव और वेदव्यास दोनों भीष्म पितामह के पास नीचे उसी स्थान पर बैठे ... जहाँ उन्होंने विष्णु सहस्रनाम का पहला स्तुति पाठ किया था ..!!! सहदेव ने शिवजी का प्रार्थना कर ध्यान किया और स्फटिक से ध्वनि तरंगों को पुनःप्राप्त करना शुरू किया और वेदव्यास जी ने लिखना .!! . तो, दुनिया का सबसे पहला टेप रिकॉर्डर यह स्फटिका है ..!! जिसने हमें अद्भुत विष्णु सहस्रनाम प्रदान किया ..!! जब श्रीजगतगुरु ने समझाया कि सभी स्तब्ध थे ... स्फटिक की रिकॉर्डिंग से, वेदव्यास के माध्यम से , सहदेव के ध्यान और शिवजी के कृपा से ये ग्रन्थ हमारे पास आया..!!

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आज हर घर में कोई न कोई व्यक्ति किसी न किसी समस्या से परेशान है I 1- शुगर (मधुमेह) 2- ब्लड प्रेशर (B.P.) 3- हृदय रोग 4- कोलेस्ट्रॉल 5- कैंसर 6- दमा 7- लकवा ( paralysis ) 8- स्वाइन फ्लू 9- थाइरोइड 10- माइग्रेन 11- थकान 12- आर्थराइटिस 13- गठिया 14-जोड़ों का दर्द 15- कमर में दर्द 16- बदन दर्द 17- सेक्सुअल समस्या 18- मोटापा 19- त्वचा / चर्म रोग 20- सोराइसिस 21-लूकोडर्मा 23- बवासीर 24- एसिडिटी 25- श्वसन संबंधी समस्या 26- पाचन सम्बंधित रोग 27- एंटी एजिंग 28- लीवर से जुडी कोई भी परेशानी 29- अनिद्रा 30- अनीमिया (खून की कमी) 31- मानसीक तनाव 32- खांसी 33- साईनस 34- पेट में गैस बनना 35- पैर के तलवे मे जलन 36- आखों से संबंधित रोग 37- स्वेद प्रदर 38- मlसिक धर्म (M.C.) अनियमितता इत्यादि! ★ दोस्तों अगर आप इनमें से किसी भी समस्या से परेशान हैं और काफी समय से दवाओं के सेवन से भी कोई फायदा नहीं हो रहा है आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ जीवन पाए Contact :- Vijay luthra herbalist Neelkanth laal danth haldwani dist. Nainital uttrakhand फोन करे या व्हाट्सएप करे अपना नाम शहर व रोग के बारे में विस्तार से लिखे Phone :- 7668324741 Whatsapp 7248369088 email :- [email protected] [email protected]

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