Uma shankar Pandey May 18, 2021

🏵🙏🏵🚩🕉हं हनुमते नमः। 🏵🙏🏵🚩🕉शुभ दोप़हर बन्दन। तात स्वर्ग अपवर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग। तूल नताहि सकल मिलि जौ सुख लव सत्संग ।। बहुत ही छोटा रुप बनाकर श्रीराम जी का मन में ध्यान करके (जो श्रीराम इस समय नरलीला कर रहे हैं)। रात्रि के समय जब लंका मे प्रवेश किया तब लंकिनी नामक राक्षसी ने इनको रोककर कहा कि तू मेरी आज्ञा के बिना कैसे जा सकता है?(वह राक्षसी लंका के द्वार पर रहती थी और वहाँ की अधिष्ठात्री देबी थी) रे मूर्ख! तूने मेरा भेद नही जाना,लंका मे जितने भी चोरी से जाते हैं वह सब मेरा आहार हो जाता है। श्री महाकपि हनुमान जी ने ऐसा घूसा मारा जिससे वह खून की उल्टी करती हुई जमीन मे लुढ़क गयी।वह लंकिनी फिर अपने को सभाँल न सकी और उठी और हाथ जोड़कर बोली जब ब्रह्रमा जी ने रावण को बरदान दिया था तब चलते समय उन्होने मुझसे कहा था कि जब भी तू बानर के घूसे से तू ब्याकुल तब समझना कि राक्षसों का नाश हो जायेगा बडे़ भाग्य से भगवान के दूत का मुझे दर्शन हो गया ।वह पचान बता दी थी ।---- हे तात!यदि स्वर्ग और मोक्ष के सारे सुख एक पलडे़ मे रख दिये जायें और सत्संग का सुख दूसरे पलडे़ मे रखा जाये तब भी सत्संग की भारी ही रहेगा चाहे सत्संग क्षण मात्र ही क्यो न हो। प्रेरणा----- जब शरीर मे बल हो और मन मे श्री राम प्रभु का ध्यान तो शत्रु भी साथ देने लगता है।श्री हनुमान जी प्रभु के पास दोनों तभी राक्षसी राक्षसो अन्त का भेद बतायी।प्रशंसा भी की मैं धन्य हूँ कि श्री राम के दूत का दर्शन आँखों से कर ली ,इसलिये प्रभु राम का ध्यान मन मे करना चाहिये🏵🙏🏵🚩🕉सियाबर राम चन्द्र की जय ।। 🏵🙏🏵🚩🕉शुभ दोप़हर बन्दन।

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