suraj rajpal Jul 16, 2019

🌷मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय । निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ॥🌷 🌿भावार्थ : मुझमें मन को लगा और मुझमें ही बुद्धि को लगा, इसके उपरान्त तू मुझमें ही निवास करेगा, इसमें कुछ भी संशय नहीं है॥12.8॥🌿 🌿यदि तू मन को मुझमें अचल स्थापन करने के लिए समर्थ नहीं है, तो हे अर्जुन! अभ्यासरूप*  योग द्वारा मुझको प्राप्त होने के लिए इच्छा कर l (*भगवान के नाम और गुणों का श्रवण, कीर्तन, मनन तथा श्वास द्वारा जप और भगवत्प्राप्तिविषयक शास्त्रों का पठन-पाठन इत्यादि चेष्टाएँ भगवत्प्राप्ति के लिए बारंबार करने का नाम 'अभ्यास' है)॥12.9॥🌿 🌷अथ चित्तं समाधातुं न शक्रोषि मयि स्थिरम्‌ । अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय ll12. 9 ll🌷 🌿आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभ कामनाएँ💐🌿 Radhe radhe🌼 Jay shree Radhekrishna🙏🌹🌹 https://youtu.be/CDs1KXlOZTI

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