suraj rajpal Oct 18, 2019

🌷भगवान् श्री कृष्ण का प्रेम पा कर मनुष्य सारी बाह्य वस्तुओं को भूल जाता है। जगत का ख्याल उसे नहीं रहता, यहाँ तक कि सब से प्रिय अपने शरीर को भी भूल जाता है। जब ऐसी अवस्था आवे तब समझना चाहिए कि प्रेम प्राप्त हुआ ।" क्या आपको *'श्रीकृष्ण'* का अर्थ मालूम है? वह जो प्रत्येक व्यक्ति और वस्तु को अपनी और आकर्षित करता है, *श्रीकृष्ण* है | ऐसा आकर्षण जो रोका ही न जा सके! पूरा भागवत यह बताता है कि *श्रीकृष्ण* कितने मंत्रमुग्ध कर देने वाले थे| जब वे रथ में बैठ कर गलियों से गुजरते थे तो लोग मूर्ति की तरह स्तब्ध हो कर उन्हें निहारते रह जाते थे... उनके निकल जाने के बाद भी वे बस वहां खड़े रह जाते थे... गोपियाँ कहती 'जाते जाते वे मेरी नज़रे ही ले गए...'| यानी, ऐसे स्थिति, जब दर्शक और दृश्य एक हो जाए.. ऐसे बहुत से वृत्तांत हैं... एक गोपी, जो श्रृंगार कर रही थी; *श्रीकृष्ण* के आने की खबर सुनकर, एक ही आंख में प्रसाधन लगे हुए उन्हें देखने दौड़ पड़ी.. दिव्यता अत्यंत आकर्षक है.. ताकि हमारा मन तुच्छ बन्धनों से ऊपर उठ सके.. इसीलिए इसे *'मोहन'* कहा गया है; मोहन ह्रदय को आकर्षित करता है, मोहित करता है और प्रीति से भर देता है...🌷 🌹हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे🌹 Radhe radhe 🌼 Jay shree Radhekrishna 🙏🌹🌹

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suraj rajpal Oct 17, 2019

🌷कहा जाता है कि जब कार्तिक मास आता है तो 33 कोटि के देवी देवता मृत्यु लोक पर आते हैं और भगवान की सेवा करते रहते हैं पूरा महीना वृंदावन में ही रहते हैं 4 बार चरन 2 बार नाभि 3 बार मुख पर और 7 बार भगवान के पूरे जिस्म पर दीपदान करना चाहिए दिन में दो बार सुबह और शाम भगवान कृष्ण ने कार्तिक मास में एक ऑफर दिया है जैसे दिवाली ऑफर आता है ऐसे ही कार्तिक मास की ऑफर है इस ऑफर का लाभ उठाओ यह ऑफर साल में एक बार और महीने में दो बार आती है *एकादशी* और कृष्ण धाम जाओ और अधिक से अधिक कृष्ण की माला करो महामंत्र का जाप करते रहो🌷 🌹हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे🌹 हरे कृष्ण🌼 Radhe radhe 🌼 Jay shree Radhekrishna 🙏🌹🌹

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suraj rajpal Oct 16, 2019

🌷बहुत बड़ी दौलत के मालिक होने के बावजूद भी यदि मन में कुछ पाने की चाह बाकी है तो समझ लेना वो अभी दरिद्र ही है और कुछ पास में नहीं फिर भी जो अपनी मस्ती में झूम रहा है उससे बढ़कर भी कोई दूसरा करोड़ पति नहीं हो सकता है। सुदामा को गले लगाने के लिए आतुर श्री द्वारिकाधीश इसलिए भागकर नहीं गए कि सुदामा के पास कुछ नहीं है अपितु इसलिए गए कि सुदामा के मन में कुछ भी पाने की इच्छा अब शेष नहीं रह गयी थी। जो कुछ नहीं माँगता उसको भगवान स्वयं को दे देते हैं। द्वारिकापुरी में सुदामा राजसिंहासन पर विराजमान हैं और कृष्ण समेत समस्त पटरानियाँ चरणों में बैठकर उनकी चरण सेवा कर रही हैं। सुदामा अपने प्रभाव के कारण नहीं पूजे जा रहे हैं अपितु अपने स्वभाव और कुछ भी न चाहने के भाव के कारण पूजे जा रहे हैं। सुदामा की कुछ भी न पाने की इच्छा ने उन्हें द्वारिकापुरी का राजसिंहासन प्रदान कर दिया मानो कि भगवान ये कहना चाह रहे हों कि जिसकी अब और कोई इच्छा बाकी नहीं रही वो मेरे ही समान मेरे बराबर में बैठने का अधिकारी बन जाता है। मनुष्य की कामना शून्यता ही उसे अधिक मूल्यवान, अनमोल और उस प्रभु का प्रिय बना देती है। जिसमें डिमांड नहीं होती वो ही डायमंड होता है।🌷 🌹हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे🌹 हरे कृष्ण🌼 Radhe radhe 🌼 Jay shree Radhekrishna 🙏 🌹🌹

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suraj rajpal Oct 14, 2019

🌿कार्तिक मास की शुभ कामनाएं 💐 और महत्व🌿 _कार्तिक माह में कुछ भी आध्यात्मिक कार्य करने पर उसका हजार गुना फल मिलता है। *कार्तिक मास, जिसे दामोदर मास भी कहते हैं।* दामोदर भगवान कृष्ण का एक नाम है। यह मास भगवान को अत्यंत प्रिय है और इस मास में भगवान ने अधिकतम लीलाएँ की है। *हमें इस मास में कैसे भक्ति करनी है जिससे अधिक से अधिक फल प्राप्त कर सकें ?* *1.* भगवान कृष्ण का एक चित्र माता यशोदा और ओखल के संग रख लें। *2.* दामोदराष्टकम (आठ श्लोक की भगवान दामोदर कृष्ण की प्रार्थना है जिसे नित्य कार्तिक में गाना चाहिए) ऑडियो वीडियो या लिखित रुप से रख लें। *3.* तुलसी महारानी की विशेष पूजा इस माह में होती है। इसलिए तुलसी महारानी का पौधा गमले में लगा लें और गमले को अच्छे से रंगरोगन कर दें। *4.* तुलसी महारानी के पूजन की विधि समझ लें। *5.* मिट्टी के दीपक खरीद लें (कार्तिक में भगवान् कृष्ण के समक्ष मिट्टी के दीप प्रज्वलित करने का विशेष महत्त्व है) और साथ ही रुई की बत्ती, गाय का घी और तिल का तेल भी लेलें। *6.* अगर 10 दीप एक बार में प्रज्जवलित करने हैं तो 300 दीप ले ले। *7.* ब्रह्म मुहूर्त में उठे, स्नान के बाद तुलसी - पूजन (सूर्योदय से पहले)करें और तुलसी महारानी के समक्ष हरे कृष्ण महामंत्र का जप करें। (पवित्र कार्तिक मास में ब्रह्मा मुहुर्त में स्नान अनिवार्य है) *8.* शाम को स्नान करके सूर्यास्त के बाद भगवान दामोदर के समक्ष दामोदराष्टकम.....गाते हुए या सुनते हुए दीप प्रज्जलवित करें और साथ ही तुलसी महारानी के समक्ष भी दीप प्रज्जलवित करें इस प्रकार पूरे कार्तिक मास में ऐसा करें..... _पवित्र दामोदर मास भगवान् कृष्ण को अत्यंत प्रिय है और इस महीने किया हुआ हरि नाम जाप, पुण्य, दान, दीप दान कई गुना फल देता है.....इसलिए वैष्णव भक्त अपने कृष्ण की प्रसन्नता के लिए सब कुछ करने को तत्पर रहते हैं।_ *"श्रीदामोदराष्टकम्"* नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपं,लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम्। यशोदाभियोलूखलाधावमानं,परामृष्टमत्यं ततो द्रुत्य गोप्या।।१।। रुदन्तं मुहुर्नेत्रयुग्मं मृजन्तं,कराम्भोज-युग्मेन सातंकनेत्रम्। मुहुःश्वासकम्प - त्रिरेखाप्रकण्ठ -स्थित ग्रैव-दामोदरं भक्तिबद्धम्।।२।। इतीदृक् स्वलीलाभिरानन्द कुण्डे,स्वघोषं निमज्जन्तमाख्यापयन्तम्। तदीयेशितज्ञेषु भक्तैर्जितत्वं,पुनः प्रेमतस्तं शतावृत्ति वन्दे।।३।। वरं देव ! मोक्षं न मोक्षावधिं वा,न चान्यं वृणेऽहं वरेशादपीह। इदन्ते वपुर्नाथ! गोपालबालं,सदा मे मनस्याविरास्तां किमन्यैः।।४।। इदन्ते मुखाम्भोजमव्यक्तनीलै -र्वृतं कुन्तलैः स्निग्ध-रक्तैश्च गोप्या। मुहुश्चुम्बितं बिम्बरक्ताधरं मे,मनस्याविरास्तामलं लक्षलाभैः।।५।। नमो देव दामोदरानन्त विष्णो ! प्रसीद प्रभो ! दुःखजालाब्धिमग्नम्। कृपादृष्टि-वृष्ट्यातिदीनं बतानुगृहाणेश ! मामज्ञमेध्यक्षिदृश्यः।।६।। कुबेरात्मजौ बद्धमुरत्यैव यद्वत्,त्वया मोचितौ भक्तिभाजौ कृतौ च। तथा प्रेमभक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ,न मोक्षे ग्रहो मेऽस्ति दामोदरेह।।७।। नमस्तेऽस्तु दाम्ने स्फुरद्दीप्तिधाम्ने,त्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्ने। नमो राधिकायै त्वदीय-प्रियायै,नमोऽनन्तलीलाय देवाय तुभ्यम्।।८ 🌹हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे🌹 हरे कृष्ण🌼 राधे राधे जी🌼 Jay shree Radhekrishna 🙏🌹🌹

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suraj rajpal Oct 14, 2019

🌿 कार्तिक/दामोदर मास की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🌿 🌷पवित्र कार्तिक मास का एक नाम दामोदर मास भी है। ‘दाम’ कहते हैं रस्सी को और ‘उदर’ कहते हैं पेट को। इस महीने में माता यशोदा ने भगवान नन्द-नन्दन श्रीकृष्ण के पेट पर रस्सी बाँध कर उन्हें ऊखल से बाँधा था, अतः उनका एक नाम हुआ ‘दामोदर’। चूंकि भगवान और उनकी माता के बीच यह लीला कार्तिक के महीने में हुई थी, अतः उस लीला की याद में इस महीने को दामोदर भी कहते हैं। बृज में सुबह-सुबह जब गोपियाँ दही मन्थन करतीं तो उनका यही भाव होता कि नन्दलाल ये मक्खन – दही खाएं, हमारे कहने पर वो छलिया- नटखट नाचता और नन्हें-नन्हें हाथों से मक्खन को पकड़ता। भक्तों की इच्छा को पूरा करने के लिये भगवान उनके यहाँ जाते किन्तु जब देखते कि दही-मक्खन तो उनकी पहुँच से दूर ऊपर छींके पर रखा है तो, अपने मित्रों के साथ उसको किसी प्रकार से लूटते। गोपियां इससे आनन्दित तो होतीं किन्तु नंदनन्दन को देखने के लिये, किसी न किसी बहाने से यशोदा माता के यहाँ जातीं और शिकायत करतीं।माता यशोदा अपने लाल से यही कहतीं कि अरे कान्हा! अपने घर में इतन मक्खन-दही है, फिर तू बाहर क्यों जाता है? एक दिन माता यशोदा भगवान को दूध पिला रहीं थीं तभी उन्हें याद आया कि रसोई में दूध चूल्हे पर चढ़ाया हुआ था, अब तक ऊबल गया होगा। माता ने लाल को गोद से उतारा और उबलते दूध को आग से उतारने के लिये लपकीं। श्रीकृष्ण ने रोष-लीला प्रकट की और मन ही मन बोलने लगे कि मेरा पेट अभी भरा नहीं और मैया मुझे छोड़कर रसोई में चली गईं। बस फिर क्या था, भगवान ने सा्मने दही रखे हुये मिट्टी के बर्तन को पत्थर मार कर तोड़ दिया जिससे सारे कमरे में दही बिखर गया। परन्तु इससे भी बालकृष्ण का गुस्सा शान्त नहीं हुआ। उन्होंने कमरे में रखे सभी दूध और दही की मटकियों को तोड़ डाला। इसके बाद छींके पर रखे हुये मक्खन व दही के मटकों को तोड़ने के लिये एक ओखली के ऊपर चढ़ गये। उधर यशोदा मैय्या जब दूध संभाल कर मुड़ीं तो वह यह देख कर हैरान हो गयीं कि दरवाज़े में से दूध-दही-मक्खन बह रहा है। माता को देखकर श्रीकृष्ण ओखली से कूद कर सरपट भागे। अपने घर में माखन चोरी की श्रीकृष्ण की यह पहली लीला थी। माता यशोदा श्रीकृष्ण को पकड़ने के लिये उनके पीछे दौड़ीं। मैय्या तो माँ के वात्सल्य से भगवान को बालक ही समझ रही थी व उन्होंने सोचा कि आज कन्हैया को सबक सिखाना ही होगा। अतः छड़ी उठाई और उनके पीछे-पीछे भागीं। यह निश्चित है कि सर्वशक्तिमान–अनन्त गुणों से विभूषित भगवान यदि अपने आप को न पकड़वायें तो कोई उनको नहीं पकड़ सकता। यदि वे अपने आप को न जनायें तो कोई उन्हें जान भी नहीं सकता। माता यशोदा का परिश्रम देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी चाल को थोड़ा धीमा किया। माता ने उन्हें पकड़ लिया और वापिस नन्द-भवन में वहीं पर ले आयीं जहाँ ऊखल पर चढ़ कर भगवान बन्दरों को माखन बाँट रहे थे। सजा देने की भावना से माता यशोदा श्रीकृष्ण को ऊखल से बाँधने लगीं। जब रस्सी से बाँधने लगीं तो रस्सी दो ऊँगल छोटी पड़ गयी। माता रस्सी पर रस्सी जोड़ती जाती परन्तु भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य चमत्कारी लीला से हर बार रस्सी दो ऊँगल छोटी पड़ जाती। सारे गोकुल की रस्सियाँ आ गयीं किन्तु भगवान नहीं बंध पाये, रस्सी हमेशा दो ऊँगल छोटी रही। भगवान ने अपनी इस लीला के माध्यम से हमें बताया कि वे छोटे से गोपाल के रूप में होते हुये भी अनन्त हैं साथ ही भक्त-वत्सल भी हैं। अपनी वात्सल्य रस की भक्त माता यशोदा की इच्छा पूरी करने के लिये वे लीला-पुरुषोत्तम जब बँधे तो पहली रस्सी से ही बँध गये, बाकी रस्सियों का ढेर यूँ ही पड़ा रहा। इस लीला के बाद से ही भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम हो गया दामोदर।श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर श्रीमद् भागवत की टीका में हर बार रस्सी के दो ऊँगल कम पड़ने का कारण बताते हैं — दो ऊँगल अर्थात् मनुष्य की भगवान को पाने की निष्कपट भक्तिमयी चेष्टा (एक ऊँगल) और भगवान की कृपा (दूसरी ऊँगल)। जब दोनों होंगे तब ही भगवान हाथ आयेंगे । **एक अन्य तात्पर्य ये भी है जब तक मनुष्य इच्छा और अहंकार (रूप दो ऊंगल)को छोड़ता नहीं तब तक कोई भी भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता।🌷 Radhe radhe🌼 Jay shree Radhekrishna 🙏🌹🌹

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suraj rajpal Oct 12, 2019

🌿कल से शुरू हो रहे कार्तिक/दामोदर मास की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🌿 🌷SRIMAD BHAGAVATAM’S SLOKA* *प्रयुक्तान्भोजराजेन मायिन: कामरूपिण:।* *लीलया व्यनुदत्तांस्तान्बाल: क्रीडनकानिव॥SB 3.2.30॥* *शब्दार्थ* प्रयुक्तान्—लगाये गये; भोज-राजेन—कंस द्वारा; मायिन:—बड़े-बड़े जादूगर, मायावी; काम-रूपिण:—इच्छानुसार रूप धारण करने वाले; लीलया—लीलाओं के दौरान; व्यनुदत्—मार डाला; तान्—उनको; तान्—जैसे ही वे निकट आये; बाल:—बालक; क्रीडनकान्—खिलौनों; इव—सदृश।. *भोज के राजा कंस ने कृष्ण को मारने के लिए बड़े-बड़े जादूगरों को लगा रखा था, जो कैसा भी रूप धारण कर सकते थे। किन्तु अपनी लीलाओं के दौरान भगवान् ने उन सबों को उतनी ही आसानी से मार डाला जिस तरह कोई बालक खिलौनों को तोड़ डालता है।* *तात्पर्य* नास्तिक कंस कृष्ण को जन्मते ही मार डालना चाहता था। वह ऐसा करने में विफल रहा, किन्तु बाद में उसे यह जानकारी मिली कि कृष्ण वृन्दावन में नन्द महाराज के घर में रह रहे हैं। अतएव उसने कई जादूगर लगाये जो अद्भुत कार्य कर सकते थे और इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकते थे। वे सभी बालक भगवान् के समक्ष विविध रूपों में, यथा अघ, बक, पूतना, शकट, तृणावर्त, धेनुक तथा गर्दभ रूपों में प्रकट हुए और हर बार उन्होंने भगवान् को मार डालने का प्रयास किया। किन्तु भगवान् ने एक-एक करके सबों को इस तरह मार डाला मानो वे खिलौनों से खेल रहे हों। बच्चे सिंह, हाथी, भालू तथा अन्य ऐसे ही विविध खिलौनों से खेलते हैं और खेलते खेलते वे इनको तोड़ डालते हैं। शक्तिशाली भगवान् के सामने कोई भी शक्तिशाली जीव खेलते हुए बच्चे के हाथों में सिंह के खिलौने के समान होता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह ईश्वर से बढ़कर नहीं हो सकता। अतएव कोई भी व्यक्ति न तो उनके समान हो सकता है, न उनसे बड़ा। न ही किसी भी प्रकार के प्रयत्न से कोई व्यक्ति ईश्वर की समता कर सकता है। ज्ञान, योग तथा भक्ति ये आध्यात्मिक साक्षात्कार की तीन मान्य विधियाँ हैं। ऐसी विधियों की पूर्णता मनुष्य को आध्यात्मिक मूल्यों में जीवन के वांछित गन्तव्य तक पहुँचा सकती है, किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि ऐसे प्रयत्नों से मनुष्य भगवान् की ही जैसी पूर्णता प्राप्त कर सकता है। भगवान् प्रत्येक अवस्था में भगवान् रहते हैं। जब वे यशोदामाई की गोद में शिशु की तरह या जब वे ग्वलाबाल के रूप में अपने दिव्य मित्रों के साथ खेल रहे थे तो वे अपने षडैश्वर्यों में किञ्चित कमी किये बिना ईश्वर बने रहे। इस तरह वे सदैव अद्वय हैं। 🌷 🙏श्रीमद भागवत पुराण की जय🙏 🌹हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे , हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे !!🌹 हरे कृष्ण 🌼 Radhe radhe 🌼 Jay shree Radhekrishna 🙏🌹🌹

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suraj rajpal Oct 11, 2019

🌷भगवान को मांगना ही भक्ति नही अपितु भगवान से माँगना भी भक्ति हो सकती है बशर्ते हमें माँगना आ जाए सत्य तो यह है कि जिन्हें भगवान् के सामने माँगना आ गया वो श्रेष्ठ भक्त भी बन गये।* *प्रहलाद जी ने भगवान से माँगा हे प्रभु मैं यह माँगता हूँ कि मेरी माँगने की इच्छा ही ख़त्म हो जाए।* *माँ कुंती ने भगवान से माँगा हे प्रभु मुझे बार बार विपत्ति दो ताकि आपका स्मरण होता रहे।* *महाराज पृथु ने भगवान से माँगा :- हे प्रभु मुझे दस हज़ार कान दीजिये ताकि में आप की पावन लीला गुणानुवाद का अधिक से अधिक रसास्वादन कर सकूँ।* *और सुग्रीवजी तो बड़ा ही सुंदर कहते हैं :- *अब प्रभु कृपा करो एही भाँती।* *सब तजि भजन करौं दिन राती* *भगवान से माँगना दोष नहीं मगर साथ में क्या माँगना ये होश जरूर रहे।*🌷 🌹हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे🌹 Radhe radhe 🌼 Jay shree Radhekrishna 🙏🌹🌹

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suraj rajpal Oct 10, 2019

🌿द्वादशी की शुभकानाएं🌿 🌷*उत्तम भक्त वही होता है जो अपनी प्रशंसा को प्रभु चरणों में समर्पित कर दे और निंदा को अपनी गाँठ में इस प्रण के साथ रखले कि इस निंदा को प्रशंसा में अवश्य बदलूंगा और भगवान को भेंट चढ़ाऊंगा।* *एक बार भगवान श्रीराम जी ने भरतजी की प्रशंसा की तो उन्होंने कहा: प्रशंसा तो आपकी होनी चाहिए क्योंकि मुझे आपकी छत्रछाया मिली हुई है । इसके अलावा आप अपने स्वभाव से किसी भी जीव में दोष देखते ही नहीं, इसलिए मेरे भी सिर्फ गुण ही आपको दिखते हैं।* *भगवान श्रीरामजी ने कहा- चलो मान लिया कि मुझे किसी का दोष देखना नहीं आता, पर गुण देखना तो आता है? इसलिए कहता हूँ कि तुम गुणों का अक्षय कोष हो।* *भरतजी बोले-प्रभु यदि तोता बहुत बढ़िया श्लोक पढ़ने लगे और बन्दर बहुत सुन्दर नाचने लगे तो यह बन्दर या तोते की विशेषता है अथवा पढ़ाने और नचानेवाले की? भगवान ने कहा- पढ़ाने और नचानेवाले की।* *भरतजी बोले- मैं उसी तोते और बन्दर की तरह हूँ। यदि मुझमें कोई विशेषता दिखाई देती है तो पढ़ाने और नचाने वाले तो आप ही हैं, इसलिए यह प्रशंसा आपको ही अर्पित है।* *भगवान ने कहा- भरत,इसका मतलब प्रशंसा तुमने लौटा दी।* *भरतजी बोले- प्रभु, प्रशंसा पचा लेना सबके वश का नहीं। यह अजीर्ण पैदा कर देता है लेकिन आप इस प्रशंसा को पचाने में बड़े निपुण हैं। अनादिकाल से भक्त आपकी स्तुति कर रहे हैं, पर आपको तो कभी अहंकार हुआ ही नहीं। इसलिए यह प्रशंसा आपके चरण कमलों में अर्पित है।* *इससे स्पष्ट होता है कि प्रशंसा अच्छी है किंतु कई लोगों को अपनी प्रशंसा सुनकर अहंकार हो जाता है कम लोग ही अपनी प्रशंसा को पचा पाते हैं ।*🌷 🌹हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे🌹 Radhe radhe 🌼 Jay shree Radhekrishna 🙏🌹🌹

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