suraj pandey Oct 28, 2017

मित्रों, भारत में हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुल देवता/कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है । प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है ,बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म कर...

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suraj pandey Oct 25, 2017

दुख में सुमरिन सब करे, सुख मे करे न कोय ।
जो सुख मे सुमरिन करे, दुख काहे को होय ॥१॥

तिनका कबहुँ न निंदिये, जो पाँयन तर होय ।
कबहुँ उड़ आँखिन परे, पीर घनेरी होय ॥२॥

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर ।
कर का मन का डार दें, मन का मनका फेर ॥३॥

गु...

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suraj pandey Oct 18, 2017

1. *आठ महीने ठण्ड पड़ने के कारण
कोट पैंट पहनना उनकी विवशता और
शादी वाले दिन भरी गर्मीं में कोट - पैंट डाल कर
बरात ले कर जाना हमारी मुर्खता !*

2. *ठण्ड में नाक बहते रहने के कारण
टाई लगाना यूरोप की विवशता और
दुसरे को प्रभावित करने के लिए
मई - ज...

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suraj pandey Oct 17, 2017

कभी आपने सोचा है कि इस धरती की सबसे प्राचीन सभ्यता, जिसने असंख्य बर्बर आक्रमणों के बाद भी दस हजार वर्षों से अपना अस्तित्व बरकरार रखा है, वह पिछले डेढ़ सौ वर्षों से क्यों लगातार सिमटती जा रही है?
असल में पिछले डेढ़ सौ वर्षो से, पहले तो अंग्रेजी सत्...

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suraj pandey Oct 17, 2017

दुसरेके द्वारा तुम्हारा कभी कोई अनिष्ट हो जाय तो उसके लिये दुःख न करो; उसे अपने पहले किये हुए बुरे कर्मका फल समझो,

यह विचार कभी मनमें मत आने दो कि 'अमुकने मेरा अनिष्ट कर दिया है, यह निश्चय समझो कि ईश्वरके दरबारमें अन्याय नहीं होता,

तुम्हारा जो...

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suraj pandey Oct 16, 2017

दो संन्यासी युवक यात्रा करते-करते किसी गांव में पहुंचे। वहां लोगों से पूछा हमें एक रात्रि यहां रहना है किसी पवित्र परिवार का घर दिखाओ। लोगों ने बताया कि वहां एक चाचा का घर है। साधु-महात्माओं का आदर सत्कार करते हैं। अखिल ब्रह्माण्डमां एकतुं श्रीहरि...

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suraj pandey Oct 16, 2017

कृपया पटाखे छोड़े क्यों की ये त्यौहार ही पटाखों का है

रही बात पर्यावरण की एक दीवाली की रात बारूद की महक से सारे मच्छरो और कई कीड़ों का सफाया हो जाता है

सालभर एयर कंडिशन्ड रूम में बैठकर ओजोन लेयर की ऐसी तैसी करने वाले कृपया दीपावली पर आतिशबाजी न कर...

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suraj pandey Oct 16, 2017

जब भगवान श्री राम माता सीता को रावण की कैद से छुडाकर अयोध्या जा रहे थे़ उस समय उन्होने मार्ग में गन्धमदान पर्वत पर रुक कर विश्राम किया था। विश्राम करने के बाद उन्हें ज्ञात हुआ कि यहां पर ऋषि पुलस्त्य कुल का नाश करने का पाप लगा हुआ है। इस श्राप से ...

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