Som Dutt Sharma Jan 23, 2022

मुझे यह कविता बहुत पसन्द आई आपको कैसी लगी खुद बताए ************* *आंखे जिस पल को तरसी थीं,* *वह दृश्य दिखाया योगी ने।* *उस सदन बीच खुलकर हिन्दू* *उत्कर्ष दिखाया योगी ने।।* *निज धर्म, कर्म पर गौरव है,* *ये सिखा दिया है योगी ने।* *जो मोदी नहीं दिखा पाये,* *वो दिखा दिया है योगी ने।।* *बेशर्म जनेऊ धारी थे,* *जो इफ़्तारो में जाते थे।* *हाथों से तिलक मिटा करके जो,* *टोपी गोल लगाते थे।।* *वोटों की भूख जिन्हें मस्ज़िद* *दरगाहों तक ले जाती थी।* *खुद को हिन्दू कहने में जिनकी* *रूह तलक शर्माती थी।।* *उन ढोंगी धर्म कपूतों की* *छाती पर चढ़कर बोल दिया।* *क्यों ईद मनाऊं? हिन्दू हूं,* *ऐलान अकड़कर बोल दिया।।* *जड़ दिया तमाचा, और लिखी* *इक नयी कहानी योगी ने।* *लो डूब मरो, बंटवा डाला,* *चुल्लू भर पानी योगी ने।।* *संकेत दिखा है साफ़ साफ़* *अब इस महन्त की बातों में।* *अब होना दर्द ज़रूरी है,* *आज़म खानों की आंतो में।।* *पूरे प्रदेश में शान्ति अमन,* *गर होना बहुत जरुरी है।* *तो फिर गुण्डों में योगी का,* *डर होना बहुत ज़रूरी है।।* *चौबिस कैरट का बांका बीर* *दिलेर मिला है यू पी को।* *लगता है जैसे पहला बब्बर* *शेर मिला है यू पी को।।* *हिन्दू गौरव पर ग्रहण लगा जो,* *जल्दी हटने वाला है।* *जेहादी कुनबा सदमे में अब* *शीश पटकने वाला है।।* *वह राजनीति के नवयुग में* *बजरंगी का अवतारी है।* *थोड़ा सा बाल ठाकरे है,* *थोड़ा सा अटल बिहारी है।।* *दीवाली फिर से चमकी है,* *होली फिर से मुस्काई है।* *शिवरात्रि लगी महकी महकी,* *हर उत्सव में तरुणाई है।।* *हर हिन्दू को यह ध्यान रहे,* *यह स्वाभिमान की बेला है।* *हर हिन्दू मिलकर साथ खड़ा,* *योगी अब नहीं अकेला है।।* *आरम्भ हुआ है लो प्रचण्ड,* *हम दिव्य चमकते बिन्दु हैं।* *खुलकर के आज सभी बोलो,* *हम हिन्दू हैं, हम हिन्दू हैं।।* *ॐ जय श्री राम जी की ,🙏🙏🚩 जिसने भी यह कविता लिखी है बहुत ही सटीक लिखी है। *इसका अधिकतम प्रचार किया जाना चाहिए*

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Som Dutt Sharma Jan 23, 2022

मुझे यह कविता बहुत पसन्द आई आपको कैसी लगी खुद बताए ************* *आंखे जिस पल को तरसी थीं,* *वह दृश्य दिखाया योगी ने।* *उस सदन बीच खुलकर हिन्दू* *उत्कर्ष दिखाया योगी ने।।* *निज धर्म, कर्म पर गौरव है,* *ये सिखा दिया है योगी ने।* *जो मोदी नहीं दिखा पाये,* *वो दिखा दिया है योगी ने।।* *बेशर्म जनेऊ धारी थे,* *जो इफ़्तारो में जाते थे।* *हाथों से तिलक मिटा करके जो,* *टोपी गोल लगाते थे।।* *वोटों की भूख जिन्हें मस्ज़िद* *दरगाहों तक ले जाती थी।* *खुद को हिन्दू कहने में जिनकी* *रूह तलक शर्माती थी।।* *उन ढोंगी धर्म कपूतों की* *छाती पर चढ़कर बोल दिया।* *क्यों ईद मनाऊं? हिन्दू हूं,* *ऐलान अकड़कर बोल दिया।।* *जड़ दिया तमाचा, और लिखी* *इक नयी कहानी योगी ने।* *लो डूब मरो, बंटवा डाला,* *चुल्लू भर पानी योगी ने।।* *संकेत दिखा है साफ़ साफ़* *अब इस महन्त की बातों में।* *अब होना दर्द ज़रूरी है,* *आज़म खानों की आंतो में।।* *पूरे प्रदेश में शान्ति अमन,* *गर होना बहुत जरुरी है।* *तो फिर गुण्डों में योगी का,* *डर होना बहुत ज़रूरी है।।* *चौबिस कैरट का बांका बीर* *दिलेर मिला है यू पी को।* *लगता है जैसे पहला बब्बर* *शेर मिला है यू पी को।।* *हिन्दू गौरव पर ग्रहण लगा जो,* *जल्दी हटने वाला है।* *जेहादी कुनबा सदमे में अब* *शीश पटकने वाला है।।* *वह राजनीति के नवयुग में* *बजरंगी का अवतारी है।* *थोड़ा सा बाल ठाकरे है,* *थोड़ा सा अटल बिहारी है।।* *दीवाली फिर से चमकी है,* *होली फिर से मुस्काई है।* *शिवरात्रि लगी महकी महकी,* *हर उत्सव में तरुणाई है।।* *हर हिन्दू को यह ध्यान रहे,* *यह स्वाभिमान की बेला है।* *हर हिन्दू मिलकर साथ खड़ा,* *योगी अब नहीं अकेला है।।* *आरम्भ हुआ है लो प्रचण्ड,* *हम दिव्य चमकते बिन्दु हैं।* *खुलकर के आज सभी बोलो,* *हम हिन्दू हैं, हम हिन्दू हैं।।* *ॐ जय श्री राम जी की ,🙏🙏🚩 जिसने भी यह कविता लिखी है बहुत ही सटीक लिखी है। *इसका अधिकतम प्रचार किया जाना चाहिए*

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Som Dutt Sharma Jan 23, 2022

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Som Dutt Sharma Jan 23, 2022

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Som Dutt Sharma Jan 23, 2022

+8 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Som Dutt Sharma Jan 22, 2022

+5 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर