Neeru Miglani Sep 15, 2020

#दान......!! ▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪ एक संत ने एक द्वार पर दस्तक दी और आवाज लगाई " भिक्षां देहि "एक छोटी बच्ची बाहर आई और बोली, ‘बाबा, हम गरीब हैं, हमारे पास देने को कुछ नहीं है।’ संत बोले, ‘‘बेटी, मना मत कर, अपने आंगन की धूल ही दे दे। लड़की ने एक मुट्ठी धूल उठाई और भिक्षा पात्र में डाल दीशिष्य ने पूछा, ‘‘गुरु जी, धूल भी कोई भिक्षा है? आपने धूल देने को क्यों कहा?’ संत बोले, ‘‘बेटे, अगर वह आज ना कह देती तो फिर कभी नहीं दे पाती। आज धूल दी तो क्या हुआ, देने का संस्कार तो पड़ गया। आज धूल दी है, उसमें देने की भावना तो जागी ! कल समर्थवान होगी तो फल-फूल भी देगी। जितनी छोटी कथा है निहितार्थ उतना ही विशाल साथ में आग्रह भी दान करते समय दान हमेशा अपने परिवार के छोटे बच्चों के हाथों से दिलवाये जिससे उनमें देने की भावना बचपन से बने | 💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠 🚩||जय श्री राम ||🚩

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Neeru Miglani Sep 13, 2020

*मैंने ईश्वर से कहा.... ✍✍✍ ● *मैंने ईश्वर से कहा -"मेरी सारी बुराइयाँ दूर कर दो !"* *ईश्वर ने कहा -"नहीं !* *वह इसलिये वहाँ नहीं हैं कि मैं उन्हें हटा दूँ। वह इसलिये वहाँ हैं कि तुम स्वयं उनका प्रतिरोध करो।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा -"मेरा शरीर पूर्ण कर दो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *तुम्हारी आत्मा पूर्ण है ; तुम्हारा शरीर तो अस्थायी है , उसे मर जाना है , जल जाना है।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मुझे धैर्य दो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *धैर्य कठिनाइयों का परिणाम होता है। वह दिया नहीं जाता , सीखा जाता है।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा -"मुझे ख़ुशी दे दो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *मैं आशीर्वाद देता हूँ , ख़ुशी स्वयं तुम पर निर्भर करती है।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मुझे दुःख - दर्द से छुटकारा दिला दो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *दुःख तुम्हें संसार से दूर ले जाते हैं और मेरे निकट लाते हैं।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मेरी आत्मा का विकास करो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *तुम्हें स्वयं विकसित होना है क्योंकि मैं उसी की मदद करता हूँ , जो स्वयं अपनी मदद करते हैं।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मुझे ऐसी चीज़ दो कि मुझे ज़िंदगी से प्यार हो जाये !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *तुम मुझमें दिल लगाओ , ताकि तुम सत, , चित्त और आनंद की अनुभूति कर सको !"* *"प्रार्थना भीख माँगना नहीं है।"* साधना प्रारंभ करने के साथ जब हृदय में 'विवेक' जागता है , तब उपरोक्त ☝️प्रार्थना धीरे - धीरे यह 👇स्वरूप लेने लगती हैं....* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मुझे बिल्कुल अपने जैसा बना दो , ताकि मैं भी औरों से वैसे ही प्रेम कर सकूँ , जैसा आप सबसे करते हैं !"* *ईश्वर ने कहा -"ओह !* *तो आख़िर तुम्हारे अंदर यह 'विवेक' पैदा हो ही गया कि यदि तुम मेरी भाँति पूर्ण बनते हो तो तुम भी औरों से वैसे ही प्रेम कर सकोगे , जैसा मैं सबसे करता हूँ।"* ● *अंततः मैंने ईश्वर से कहा- "हे नाथ !* *तू ही मनुष्य जीवन का वास्तविक ध्येय है।* *हम अपनी इच्छाओं के गुलाम हैं ,* *जो हमारी उन्नति में बाधक है।* *तू ही एकमात्र ईश्वर एवं शक्ति है ,* *जो हमें उस लक्ष्य तक ले चल सकता है।* *ईश्वर ने गदगद होकर कहा -"हाँ , यह मैं अव श्य करूँगा मेरे बच्चे !* *क्योंकि मुझसे ऐसी निः स्वार्थ अपेक्षा रखना तुम्हारा जन्म- सिद्ध अधिकार है और उसे पूरा करना मेरा परम् कर्तव्य !" ⛳||जय श्री कृष्णा ||⛳

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Neeru Miglani Sep 7, 2020

*प्रेरणादायक कहानी.....✍✍✍✍✍✍ ▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪ 🕶️• चश्मा ☞ एक बहाना •🕶️ ┉┅━❀꧁ω❍ω꧂❀━┅┉ जल्दी-जल्दी घर के सारे काम निपटा, बेटे को स्कूल छोड़ते हुए ऑफिस जाने का सोच, घर से निकल ही रही थी, कि ... फिर पिताजी की आवाज़ आ गई. बहू ! ज़रा मेरा चश्मा तो साफ़ कर दो. और बहू झल्लाती हुई ... चश्मा साफ करने लगी. इसी चक्कर में आज फिर ऑफिस देर से पहुँची. पति की सलाह पर अब वो सुबह उठते ही पिताजी का चश्मा साफ़ करके रख देती, फिर भी घर से निकलते समय पिताजी का बहू को बुलाना बन्द नही हुआ. समय से खींचातानी के चलते अब बहू ने पिताजी की पुकार को अनसुना करना शुरू कर दिया. आज ऑफिस की छुट्टी थी, तो बहू ने सोचा ~ घर की साफ-सफाई कर लूँ. अचानक ... पिताजी की डायरी हाथ लग गई. एक पन्ने पर लिखा था ~ दिनांक ~ 23/8/15 आज की इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में, घर से निकलते समय, बच्चे अक्सर बड़ों का आशीर्वाद लेना भूल जाते हैं. बस इसीलिए, जब तुम चश्मा साफ कर मुझे देने के लिए झुकतीं, तो मैं मन ही मन, अपना हाथ तुम्हारे सर पर रख देता. वैसे मेरा आशीष सदा तुम्हारे साथ है बेटा ! आज पिताजी को गुजरे 5 साल बीत चुके हैं. अब मैं रोज ... घर से बाहर निकलते समय पिताजी का चश्मा साफ़ कर, टेबल पर रख दिया करती हूँ. उनके अनदेखे हाथ से मिले आशीष की लालसा में. जीवन में हम रिश्तों का महत्व महसूस नहीं करते हैं, चाहे वो किसी से भी हों, कैसे भी हों, और ... जब तक महसूस करते हैं, तब तक वह हमसे ... बहुत दूर जा चुके होते है | 💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠 ⛳||जय श्री कृष्णा ||⛳

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Neeru Miglani Sep 4, 2020

🌻 #संस्कृति_संस्कार_सम्बोधन 🌻 🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹 हम सब जब भी आपस में मिलें तो एक दूसरे से जय श्रीराम जय श्रीकृष्ण जरूर कहें। इसके कई फायदे होंगें जैसे एक तो अनायास ही भगवान का नाम आपके मुख से निकलेगा। हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रकटीकरण, संस्कारो का प्रसार, और सम्बोधन की आत्मीयता। हमारे संस्कार-पूर्ण आचरण का प्रतिफल सिर्फ हमे ही नही, सम्पूर्ण हिन्दू समाज को मिलता है, आपस मे जब भी मिलें, जय श्री राम जय श्री कृष्ण बोलकर एक दूसरे का स्वागत करें। यही सम्बोधन हाथ जोड़कर, द्विगुणित अपनत्व का संवाहक बन जाता है। पाश्चात्य अभिवादन हैलो हाय जिनका अर्थ तक नही है, उसे बोलने में हम गौरव समझतें है जोकि हमारी मूर्खता है। हमारी सांस्कृतिक पतन का परिचायक है।अतः इसमे शर्माना नही,शर्म गलत काम को करने में आनी चाहिये, यह तो संसारिकता में धर्म की अनुभूति करता है। ये हमारे गौरवपूर्ण हिंदुत्व का प्रतीक है। हमेशा निर्भीक होकर जय श्रीराम जय श्रीकृष्ण बोलना सीखिये। जय श्रीराम जय श्रीकृष्ण का अर्थ क्या है , ये भी समझना होगा। श्री अर्थात #लक्ष्मी, राम कृष्ण अर्थात संसार के पालनहार, #श्री_हरि_विष्णु जय का अर्थ #विजय_हो। जब हम ऐसा कहते है, भगवान प्रसन्न होते हैं,ओर हमे सदा विजय प्राप्त कराते है। तो अब से गर्व से बोलो ओर अपने मित्रों से भी जय श्रीराम 👋 जय श्रीकृष्ण ¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢ अभिवादन सम्बोधन में बोलने के लिए प्रेरित करो 🌷🙏🌷एक ओर निवेदन :: ************************** #कृपया_लिखने_में_भी_पूर्ण_नाम_लिखे, #क्योंकि_ईश्वर_पुर्ण_ब्रह्म_है। JSR ,JSK, या GM, GN, इस तरह कभी नहीं ▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪ 🚩||जय श्री राम ||🚩 ⛳||जय श्री कृष्ण ||⛳

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