Neeru Miglani Feb 25, 2021

"भगवान् से मिलन"*✍✍✍✍ *************************************** एक ६ साल का छोटा सा बच्चा अक्सर भगवान से मिलने की जिद किया करता था। उसे भगवान् के बारे में कुछ भी पता नही था, पर मिलने की तमन्ना, भरपूर थी, उसकी चाहत थी की एक समय की रोटी वो भगवान के साथ बैठकर खाये। एक दिन उसने एक थैले में 5, 6 रोटियाँ रखीं और भगवान् को को ढूँढने के लिये निकल पड़ा। चलते-चलते वो बहुत दूर निकल आया संध्या का समय हो गया। उसने देखा एक नदी के तट पर एक बुजुर्ग माता बैठी हुई हैं, जिनकी आँखों में बहुत ही गजब की चमक थी, प्यार था, किसी की तलाश थी, और ऐसा लग रहा था जैसे उसी के इन्तजार में वहाँ बैठी उसका रास्ता देख रहीं हों। वो मासूम बालक बुजुर्ग माता के पास जा कर बैठ गया, अपने थैले में से रोटी निकाली और खाने लग गया। फिर उसे कुछ याद आया तो उसने अपना रोटी वाला हाथ बूढी माता की ओर बढ़ाया और मुस्कुरा के देखने लगा, बूढी माता ने रोटी ले ली, माता के झुर्रियों वाले चेहरे पे अजीब सी खुशी आ गई आँखों में खुशी के आँसू भी थे। बच्चा माता को देखे जा रहा था, जब माता ने रोटी खा ली बच्चे ने एक और रोटी माता को दे दी। माता अब बहुत खुश थी। बच्चा भी बहुत खुश था। दोनों ने आपस में बहुत प्यार और स्नेह केे पल बिताये। जब रात घिरने लगी तो बच्चा इजाजत लेकर घर की ओर चलने लगा और वो बार- बार पीछे मुडकर देखता ! तो पाता बुजुर्ग माता उसी की ओर देख रही होती हैं। बच्चा घर पहुँचा तो माँ ने अपने बेटे को आया देखकर जोर से गले से लगा लिया और चूमने लगी, बच्चा बहूत खुश था। माँ ने अपने बच्चे को इतना खुश पहली बार देखा तो खुशी का कारण पूछा, तो बच्चे ने बताया, "माँ ! आज मैंने भगवान के साथ बैठकर रोटी खाई, आपको पता है माँ उन्होंने भी मेरी रोटी खाई, पर माँ भगवान् बहुत बूढ़े हो गये हैं, मैं आज बहुत खुश हूँ माँ।" उधर बुजुर्ग माता भी जब अपने घर पहुँची तो गाँव वालों ने देखा माता जी बहुत खुश हैं, तो किसी ने उनके इतने खुश होने का कारण पूछा ? माता जी बोलीं, "मैं दो दिन से नदी के तट पर अकेली भूखी बैठी थी, मुझे विश्वास था भगवान आएंगे और मुझे खाना खिलाएंगे। आज भगवान् आए थे, उन्होंने मेरे साथ बैठकर रोटी खाई मुझे भी बहुत प्यार से खिलाई, बहुत प्यार से मेरी ओर देखते थे, जाते समय मुझे गले भी लगाया, भगवान बहुत ही मासूम हैं बच्चे की तरह दिखते हैं।" इस कहानी का अर्थ बहुत गहराई वाला है। वास्तव में बात सिर्फ इतनी है की दोनों के दिलों में ईश्वर के लिए अगाध सच्चा प्रेम था, और प्रभु ने दोनों को, दोनों के लिये, दोनों में ही (ईश्वर) खुद को भेज दिया। जब मन ईश्वर भक्ति में रम जाता है तो, हमे हर एक जीव में वही नजर आता है। 💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠 ⛳|| जय श्री कृष्णा ||⛳

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Neeru Miglani Feb 17, 2021

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Neeru Miglani Jan 31, 2021

प्रभु......... ************************* एक सब्ज़ी वाला था, सब्ज़ी की पूरी दुकान साइकल पर लगा कर घूमता रहता था । "प्रभु" उसका तकिया कलाम था । कोई पूछता आलू कैसे दिये, 10 रुपये प्रभु । हरी धनीया है क्या ? बिलकुल ताज़ा है प्रभु। वह सबको प्रभु कहता था । लोग भी उसको प्रभु कहकर पुकारने लगे। एक दिन उससे किसी ने पूछा तुम सबको प्रभु-प्रभु क्यों कहते हो, यहाँ तक तुझे भी लोग इसी उपाधि से बुलाते हैं और तुम्हारा कोई असली नाम है भी या नहीं ? सब्जी वाले ने कहा है न प्रभु , मेरा नाम भैयालाल है। प्रभु, मैं शुरू से अनपढ़ गँवार हूँ। गॉव में मज़दूरी करता था, एक बार गाँव में एक नामी सन्त जी के प्रवचन हुए । प्रवचन मेरे पल्ले नहीं पड़े, लेकिन एक लाइन मेरे दिमाग़ में आकर फँस गई , उन संत ने कहा हर इन्सान में प्रभु का वास हैं -तलाशने की कोशिश तो करो पता नहीं किस इन्सान में मिल जाय और तुम्हारा उद्धार कर जाये, बस उस दिन से मैने हर मिलने वाले को प्रभु की नज़र से देखना और पुकारना शुरू कर दिया वाकई चमत्त्कार हो गया दुनिया के लिए शैतान आदमी भी मेरे लिये प्रभु रूप हो गया । ऐसे दिन फिरें कि मज़दूर से व्यापारी हो गया सुख समृद्धि के सारे साधन जुड़ते गये मेरे लिये तो सारी दुनिया ही प्रभु रूप बन गईं। "लाख टके की बात" जीवन एक प्रतिध्वनि है आप जिस लहजे में आवाज़ देंगे पलटकर आपको उसी लहजे में सुनाईं देंगीं। न जाने किस रूप में प्रभु मिल जाये। 💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠 ⛳||जय श्री कृष्णा ||⛳

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Neeru Miglani Jan 25, 2021

*☝ईश्वर पर भरोसा☝* ************************************ जाड़े का दिन था और शाम होने को आई। आसमान में बादल छाए थे। एक नीम के पेड़ पर बहुत से कौए बैठे थे। वे सब बार-बार कांव-कांव कर रहे थे और एक-दूसरे से झगड़ भी रहे थे। इसी समय एक मैना आई और उसी पेड़ की एक डाल पर बैठ गई। मैना को देखते हुए कई कौए उस पर टूट पड़े। बेचारी मैना ने कहा- “बादल बहुत हैं इसीलिए आज अंधेरा हो गया है। मैं अपना घोंसला भूल गई हूँ। *इसीलिए आज रात मुझे यहां बैठने दो।* “कौओं ने कहा- “नहीं यह पेड़ हमारा है तू यहां से भाग जा।“ मैना बोली- “पेड़ तो सब ईश्वर के बनाए हुए हैं। इस सर्दी में यदि वर्षा पड़ी और ओले पड़े तो ईश्वर ही हमें बचा सकते हैं। मैं बहुत छोटी हूँ, तुम्हारी बहन हूँ, तुम लोग मुझ पर दया करो और मुझे भी यहां बैठने दो।“ कौओं ने कहा- “हमें तेरी जैसी बहन नहीं चाहिए। तू बहुत ईश्वर का नाम लेती है तो ईश्वर के भरोसे यहां से चली क्यों नहीं जाती। तू नहीं जाएगी तो हम सब तुझे मारेंगे।“ कौओं को कांव-कांव करके अपनी ओर झपटते देखकर बेचारी मैना वहां से उड़ गई और थोड़ी दूर जाकर एक आम के पेड़ पर बैठ गई। रात को आंधी आई, बादल गरजे और बड़े-बड़े ओले बरसने लगे। कौए कांव-कांव करके चिल्लाए। इधर से उधर थोड़ा-बहुत उड़े परन्तु ओलों की मार से सबके सब घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। बहुत से कौए मर गए। मैना जिस आम पर बैठी थी उसकी एक डाली टूट कर गिर गई। डाल टूटने पर उसकी जड़ के पास पेड़ में एक खोंडर हो गया। छोटी मैना उसमें घुस गई और उसे एक भी ओला नहीं लगा। सवेरा हुआ और दो घड़ी चढऩे पर चमकीली धूप निकली। मैना खोंडर में से निकली पंख फैला कर चहक कर उसने भगवान को प्रणाम किया और उड़ी। पृथ्वी पर ओले से घायल पड़े हुए कौए ने मैना को उड़ते देख कर बड़े कष्ट से पूछा- *“मैना बहन! तुम कहां रही तुम को ओलों की मार से किसने बचाया “मैना बोली- “मैं आम के पेड़ पर अकेली बैठी भगवान से प्रार्थना करती रही और भगवान ने मेरी मदद की।“* *दुख में पड़े असहाय जीव को ईश्वर के सिवाय कौन बचा सकता है। जो भी ईश्वर पर विश्वास करता है और ईश्वर को याद करता है, उसे ईश्वर सभी आपत्ति-विपत्ति में सहायता करते हैं और उसकी रक्षा करते हैं।* *ईश्वर के कृत्य अनोखे होते हैं। हमारे समझने में कमी हो सकती है, परंतु उनके करने में नहीं।* 💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠 ⛳||जय श्री कृष्णा ||⛳

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Neeru Miglani Dec 3, 2020

सुबह-सुबह क्यों अपनी हथेलियों के दर्शन माने जाते हैं.. शुभ ? ★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ शास्त्रों में भी जागते ही बिस्तर पर सबसे पहले बैठकर दोनों हाथों की हथेलियों (करतल) के दर्शन का विधान बताया गया है। इससे व्यक्ति की दशा सुधरती है और सौभाग्य में वृद्धि होती है। जब आप सुबह नींद से जागें तो अपनी हथेलियों को आपस में मिलाकर पुस्तक की तरह खोल लें और यह श्लोक पढ़ते हुए हथेलियों का दर्शन करें । कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥ अर्थात मेरे हाथ के अग्रभाग में भगवती लक्ष्मी का निवास है। मध्य भाग में विद्यादात्री सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु का निवास है। अतः प्रभातकाल में मैं इनका दर्शन करता हूं। इस श्लोक में धन की देवी लक्ष्मी, विद्या की देवी सरस्वती और अपार शक्ति के दाता, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की स्तुति की गई है, ताकि जीवन में धन, विद्या और भगवत कृपा की प्राप्ति हो सके। हथेलियों के दर्शन का मूल भाव यही है कि हम अपने कर्म पर विश्वास करें। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि ऐसे कर्म करें जिससे जीवन में धन, सुख और ज्ञान प्राप्त कर सकें। हमारे हाथों से कोई बुरा काम न हो एवं दूसरों की मदद के लिए हमेशा हाथ आगे बढ़ें। 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏 ⛳||जय श्री विष्णु हरि ||⛳

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Neeru Miglani Nov 1, 2020

ऋग्वेद हमे बांटकर खाना सिखाता है ... ऋग्वेद के अनुसार जो अनाज खेतों मे पैदा होता है, उसका बंटवारा तो देखिए... 1- जमीन से चार अंगुल भूमि का, 2- गेहूं के बाली के नीचे का पशुओं का, 3- पहली फसल की पहली बाली अग्नि की, 4- बाली से गेहूं अलग करने पर मुठ्ठी भर दाना पंछियो का, 5- गेहूं का आटा बनाने पर मुट्ठी भर आटा चीटियों का, 6- चुटकी भर गुथा आटा मछलियों का, 7- फिर उस आटे की पहली रोटी गौमाता की, 8- पहली थाली घर के बुज़ुर्ग़ो की 9- फिर हमारी थाली, 10- आखिरी रोटी कुत्ते की, ये हमें सिखाती है हमारी सनातन संस्कृति और मुझे गर्व है कि मैं इस संस्कृति का हिस्सा हूँ... 💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠 ⛳||जय श्री कृष्णा ||⛳ 🚩||गौ माता की जय ||🚩

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Neeru Miglani Oct 8, 2020

*गावो विश्वस्य मातरः* ----------------------------- *क्या आप जानते हैं?* *हम सभी गो पुत्र या गो पुत्री हैं?* *👍हाँ !यह सच है, इसका प्रमाण है हमारा गोत्र* *इसलिए हम किसी भी जाति के हों लेकिन हमारा जन्म किसी न किसी गोत्र में ही अवश्य होता है* ------- ----- ----- ----- ------ ----- - *2-क्या आप समझते हैं?- गो माता के गोबर में लक्ष्मी का वास होता है?* *हाँ* *हमारा कोई भी अनुष्ठान बिना गो माता के गोबर के सम्पन्न नही होता*? *सुख ,सम्रद्धि एवं शांति के लिए कराया जाने वाला कोई भी यज्ञ हवन व अनुष्ठान पंचगव्य से ही पूर्ण होता है* 🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃 *3- क्या आप मानते हैं?* *सर्वश्रेष्ठ मंगल बेला -गो धूलि बेला है?* *हम हर मांगलिक कार्य गो धूलि बेला में ही करते हैं या करना चाहते हैं* *क्यों?क्योंकि इस दौरान किया जाने वाले मांगलिक कार्य कभी असफल नही होते ।यही कारण है कि सनातन संस्कृति में तलाक को स्थान ही नहीं दिया गया था* 🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃 *4-क्या आप स्वीकार करते हैं?* *अटकी हुई जान को भी सहज बनाती है बछिया दान* *मृत्यु को भी सुखद बनाने वाली एवं वैतरणी पार करने में समर्थ एक मात्र प्राणी है गो माता की बछिया* 🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃 *क्या आप देखते हैं ?* *मृत्यु के बाद हर सनातनी जाना चाहता है -गोलोक धाम* *क्योंकि श्री हरि भी वास करते हैं गोलोकधाम में* 🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂 *क्या आप महसूस करते हैं*? *सुख ,शांति व सम्रद्धि की कामना पूरी करती है गो माता* *और नित्य प्रति प्रेम से दिया जाने वाला -गो ग्रास 🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸 🙏|| जय गौ माता ||🙏

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