Neeru Miglani Feb 20, 2020

राधे राधे ॥ आज का भगवद चिन्तन ॥ 💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠 मैं शब्द में बड़ी बिचित्रता है। सुबह से शाम तक आदमी कई बार मै मै करता है। इस मै के कारण ही बहुत सारी समस्याएं जन्म लेती है। आश्चर्य की बात यह है कि मै के कारण उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए आदमी फिर " मै " को प्रस्तुत करता है। समस्त हिंसा और अशांति के मूल में " मै " ही है। जीवन बड़ा आनंदमय और उत्सवमय बन सकता है लेकिन यह अहंवाद उसमे सबसे बड़ी बाधा है। मै " के ज्यादा आश्रय से ह्रदय पाषाण जैसा हो जाता है। जबकि जीवन का वास्तविक सौंदर्य तो उदारता, विनम्रता, प्रेमशीलता और संवेदना में ही खिलता है। मै माने स्वयं में बंद हो जाना, पिंजड़े में कैद हो जाना, आकाश की अनंतता से वंचित रह जाना। एक बात बिलकुल समझ लेना " मै " की मुक्ति में ही तुम्हारी समस्याओं की मुक्ति है। साहब जो बात "हम" में है, वो ना तुम में है ना मुझ में है॥ ⛳||जय श्री कृष्णा ||⛳ 💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮

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Neeru Miglani Feb 19, 2020

🌹"राम राम जी" 🌹🙏🏻🙏🏻 स्वामी रामकृष्ण परमहंस कहते हैं कि *भक्त दो प्रकार* के होते हैं- *एक बंदर के बच्चे के समान* और *दूसरा बिल्ली के बच्चे के समान*। *बंदर का बच्चा स्वयं ही मां को पकड़े रहता है*। मां जहां-जहां जाती है, वह उसके साथ चिपटा रहता है। मां को बच्चे की कोई खास चिंता नहीं रहती। वह आश्वस्त रहती है कि बच्चा उसे मजबूती से पकड़े हुए हैं। योग, ध्यान तंत्र, मंत्र एवं तपस्या के माध्यम से साधना करने वाले साधक इसी वर्ग के होते हैं। वह सोचते हैं कि अधिक से अधिक जप, तप, ध्यान आदि कर तपस्या के मार्ग से भगवान को पा लिया जाएगा। ऐसे साधक भगवान को पाने का खुद यत्न करते हैं, लक्ष्य तय करते हैं और उस पर चलते हैं। *उन्हें अपने ज्ञान और जप, तप, ध्यान आदि पर भरोसा रहता है कि इससे वह एक न एक दिन भगवान को पा ही लेंगे*। इस दौरान वह सिद्धियों को भी पाने का यत्न करते हैं। *दूसरी ओर बिल्ली का बच्चा खुद अपनी मां को नहीं पकड़ता है*। वह तो बस पड़ा-पड़ा म्याऊं-म्याऊं कर मां को पुकारता रहता है। उसकी मां चाहे जहां, जिस स्थिति में उसे रख दे, वह मां पर विश्वास कर वैसा ही पड़ा रहता है। अत: मां को ही उसकी सारी चिंता करना पड़ती है। ऐसे साधक भक्त कहलाते हैं। वह भगवान को पाने के लिए कोई जप, ध्यान, भजन-कीर्तन आदि का कोई हिसाब-किताब नहीं रखते हैं। उन्हें इसका भी ध्यान नहीं रहता कि कितना जप-तप करके क्या मिलेगा? कैसे सिद्धि मिलेगी और कैसे ईश्वर की प्राप्ति होगी। वह तो सिर्फ भगवान पर भरोसा करते हैं और उनकी भक्ति करते हैं। *जब परेशान होते हैं और भगवान की याद आती है तो व्याकुल होकर भजन-कीर्तन या सीधे ही रो-रोकर उन्हें पुकारते हैं। भगवान उनका रोना नहीं सुन पाते और खुद उनके पास पहुंच जाते है*। आइए हम भी *बिल्ली के बच्चों की तरह बनकर परमात्मा को पुकारते रहें* ⛳|| जय श्री कृष्णा ||⛳ 💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠💠

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Neeru Miglani Feb 18, 2020

""" प्रभु की कृपा """" एक औरत रोटी बनाते बनाते *"ॐ भगवते वासूदेवाय नम: "* का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही...। एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ मे दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर झांकी तो आठ साल का चुन्नू चित्त पड़ा था, खुन से लथपथ। मन हुआ दहाड़ मार कर रोये। परंतु घर मे उसके अलावा कोई था नही, रोकर भी किसे बुलाती, फिर चुन्नू को संभालना भी तो था। दौड़ कर नीचे गई तो देखा चुन्नू आधी बेहोशी में माँ माँ की रट लगाए हुए है। अंदर की ममता ने आंखों से निकल कर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया। फिर 10 दिन पहले करवाये अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बावजूद ना जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी कि चुन्नू को गोद मे उठा कर पड़ोस के नर्सिंग होम की ओर दौड़ी। रास्ते भर भगवान को जी भर कर कोसती रही, बड़बड़ाती रही, हे कन्हैया क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा, जो मेरे ही बच्चे को..। खैर डॉक्टर सा. मिल गए और समय पर इलाज होने पर चुन्नू बिल्कुल ठीक हो गया। चोटें गहरी नही थी, ऊपरी थीं तो कोई खास परेशानी नही हुई।... *रात को घर पर जब सब टीवी देख रहे थे तब उस औरत का मन बेचैन था। भगवान से विरक्ति होने लगी थी। एक मां की ममता प्रभुसत्ता को चुनौती दे रही थी।* उसके दिमाग मे दिन की सारी घटना चलचित्र की तरह चलने लगी। कैसे चुन्नू आंगन में गिरा की एकाएक उसकी आत्मा सिहर उठी, कल ही तो पुराने चापाकल का पाइप का टुकड़ा आंगन से हटवाया है, ठीक उसी जगह था जहां चिंटू गिरा पड़ा था। अगर कल मिस्त्री न आया होता तो..? उसका हाथ अब अपने पेट की तरफ गया जहां टांके अभी हरे ही थे, ऑपरेशन के। आश्चर्य हुआ कि उसने 20-22 किलो के चुन्नू को उठाया कैसे, कैसे वो आधा किलोमीटर तक दौड़ती चली गयी? फूल सा हल्का लग रहा था चुन्नू। वैसे तो वो कपड़ों की बाल्टी तक छत पर नही ले जा पाती। फिर उसे ख्याल आया कि डॉक्टर साहब तो 2 बजे तक ही रहते हैं और जब वो पहुंची तो साढ़े 3 बज रहे थे, उसके जाते ही तुरंत इलाज हुआ, मानो किसी ने उन्हें रोक रखा था। *उसका सर प्रभु चरणों मे श्रद्धा से झुक गया। अब वो सारा खेल समझ चुकी थी। मन ही मन प्रभु से अपने शब्दों के लिए क्षमा मांगी।* तभी टीवी पर ध्यान गया तो प्रवचन आ रहा था :--- *प्रभु कहते हैं, "मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता, लेकिन तुम्हे इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको, तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।"* उस औरत ने घर के मंदिर में झांक कर देखा, कन्हैया मुस्कुरा रहे थे। 🙏🏻🙏🏻 *जय श्री कृष्णा... राधे राधे*🙏🏼🙏🏼

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Neeru Miglani Jan 17, 2020

💥 *हरि ओम !*💥 *_प्रश्न :- कौन है श्रीकृष्ण, कौन है श्रीराधे,_* *उत्तर :- गीता है श्रीकृष्ण, ज्ञान है श्रीराधे,* *वायु है श्रीकृष्ण, वेग है श्रीराधे,* *तन है श्रीकृष्ण, मन है श्रीराधे,* *ईत्र है श्रीकृष्ण, सुगंध है श्रीराधे,* *प्यास है श्रीकृष्ण, जल है श्रीराधे,* *नाव है श्रीकृष्ण, पतवार है श्रीराधे,* *मौज है श्रीकृष्ण, किनारा है श्रीराधे,* *सूर्य है श्रीकृष्ण, रोशनी है श्रीराधे,* *अमृत है श्रीकृष्ण, अमरता है श्रीराधे,* *संसार है श्रीकृष्ण, सार है श्रीराधे,* *किस्मत है श्रीकृष सौभाग्य है श्रीराधे,* *संगीत है श्रीकृष्ण, सुर है श्रीराधे,* *शहद है श्रीकृष्ण, मिठास है श्रीराधे,* *पूर्ण है श्रीकृष्ण, परिपूर्ण है श्रीराधे,* *आदि है श्रीकृष्ण, अनंत है श्री राधे,* धन्य हे तेरी बासुरी, जो चखती है तेरे "अधरामृत" को.... व्याकुल कंठ मेरा तरसे, जो तेरे "चरणामृत" को...!! *🙏🌹 हरे कृष्ण हरे कृष्ण 🌹कृष्ण कृष्ण हरे हरे 🌹हरे राम हरे राम 🌹राम राम हरे हरे🌹🙏*

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Neeru Miglani Jan 8, 2020

राधे राधे ॥ आज का भगवद चिन्तन॥ प्रकृति अपने नियम से कभी नहीं चूकती। अगर पौधे को आप पानी देते हैं तो वह स्वत: हरा भरा रहेगा और यदि आपने उसकी उपेक्षा शुरू की तो उसे मुरझाने में भी वक्त नहीं लगने वाला है। जिन लोगों ने इस दुनिया को स्वर्ग कहा उनके लिए यही प्रकृति उनके अच्छे कार्यों से स्वर्ग बन गई और जिन लोगों ने गलत काम किये उनके लिए यही प्रकृति, यही दुनिया नरक बन गई। यहाँ खुशबू उनके लिए स्वत: मिल जाती है जो लोग फूलों की खेती किया करते हैं और यहाँ मीठे फल उन्हें स्वत: मिल जाते हैं जो लोग पेड़ लगाने भर का परिश्रम कर पाते हैं। अत: यहाँ चाहने मात्र से कुछ नहीं प्राप्त होता जो भी और जितना भी आपको प्राप्त होता है वह निश्चित ही आपके परिश्रम का और आपके सदकार्यों का पुरुस्कार होता है। ⛳||जय श्री कृष्णा ||⛳

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