Shivsanker Shukla Feb 25, 2021

शुभ गुरुवार की शुभ संध्या में मंदिर परिवार के सभी आदरणीय भगवत प्रेमी भाई में हैं आप सभी को संध्या की राम राम संध्या की पावन बेला में आप सभी का ध्यान मानव जीवन के मुख्य उद्देश की ओर आकर्षित करना चाहूंगा यह तन कर विषय ना भाई इस मानव शरीर को प्राप्त कर लेने का उद्देश सिर्फ सुख भोगना ही नहीं है अपितु साधन धाम मोक्ष कर द्वारा परमात्मा ने मानव शरीर देकर हमे साधन करने का सौभाग्य प्रदान किया है मानव शरीर को प्राप्त कर लेने के बाद अगर हमारे आपके द्वारा साधन नहीं हो सके तो महान दुर्भाग्य होगा श्री मानव शरीर दुबारा मिले कि ना मिले इसलिए इसे व्यर्थ न जाने दें जीवन का हर क्षण बहुमूल्य है और आप सभी से निवेदन करूं शरीर की महान उपयोगिता को उपयोग में लाते हुए जीवन के यथेष्ट लाभ से लाभान्वित हो सुंदर भजन पूरा सुने

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Shivsanker Shukla Feb 24, 2021

शुभ बुधवार की शुभ संध्या में मंदिर परिवार के सभी आदरणीय भगवत प्रेमी भाई बहन आप सभी को संध्या की राम राम संध्या की पावन बेला में आज उस महान देवी का दर्शन करवाते हैं जिसका नाम भक्ति का पर्याय बन चुका है भारतवासी ही नहीं इस महान देवी को देश विदेश के संत और भक्त भी नमन करते हैं महात्मा तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस में संसार में पतिव्रता स्त्री को चार श्रेणियों में विभक्त किया है उत्तम मध्यम अधम और नीच उत्तम के विषय में कहां है उत्तम के बस यह मन माही सपने आन पुरुष जग नाही शादी के पहले ही मीरा जी ने यह संकल्प कर लिया था कि मुझे संसाधित जीव से विवाह नहीं करना है उनका विचार था ऐसे बर को क्यों बरु जो जन्म ले मर जाए देवी श्री वीरा जी का सोचना था हम उसके साथ विवाह करेंगे जिसके साथ विवाह करने से कल्प कल्प अंतर तक मेरा सुहाग अटल बना रहे सांसारिक प्राणी के प्रति मीरा जी की कोई आसक्ति नहीं है अगर कोई सामने दिखता भी है तो केवल और केवल श्याम ही दिखते हैं भगवान कृष्ण ही दिखते हैं यह महान दिव्य दृष्टि केवल और केवल भगवत कृपा से ही प्राप्त हो सकती है मीरा जी घर से बन की ओर आ जाती है और निर्जन स्थान में बैठकर प्रेम का एहसास करती हैं पति पीछा करते हुए पीछे आता है और देखता है कि मीरा जी जाति कहां है उस वन में मीरा जी को कान्हा के सिवा और कुछ नहीं दिखता किसी ने मुझसे कहा था पागल और भक्तों में कोई अंतर नहीं होता या यूं कहें प्रेमी और पागल में कोई फर्क नहीं होता आज मैंने कई पागल देखें जो कुत्तों के आक्रमण करने पर भागते हैं परंतु देवी मीरा को कोई भय नहीं अगर कहीं कोई कुछ दिखता है तो वह केवल कान्हा जी ही दिखते हैं

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Shivsanker Shukla Feb 23, 2021

शुभ मंगलवार की शुभ संध्या में मंदिर परिवार के सभी आदरणीय भगवत प्रेमी भाई बहन आप सभी को संध्या की राम राम पावन संध्या की बेला में आज मां जानकी और पुत्र हनुमान की दिव्य झांकी का दर्शन करते हैं आज की युवा पीढ़ी से यह प्रश्न किया जाना चाहिए कि मित्र की पत्नी से अपना रिश्ता क्या होता है आज की युवा पीढ़ी इस बात से अनभिज्ञ है यह तो श्री हनुमान जी की उदारता है महानता है कि वह स्वयं को श्री राम जी का अपने को दास बताते हैं परंतु श्री राम जी उन्हें अपना मित्र कहते हैं श्री रामचरितमानस के सुंदरकांड में श्री राम जी ने कहा है हे तात मैं तुमसे इस जीवन में उरण नहीं हो सकता संपूर्ण सृष्टि का रचना कार श्री हनुमान जी के अनन्य प्रेम के आगे नतमस्तक है प्रभु अपने लीला क्रम से श्री हनुमान जी के समक्ष संकट पैदा कर सकते हैं और श्री हनुमान जी की सहायता करके उपकार का बदला चुका सकते हैं लेकिन ध्यान देने की बात है प्रभु श्री राम जी को श्री हनुमान जी से इतना प्रेम है और यह भाव है कि तुम पर कभी संकट ना आए इतिहास के पन्नों पर तुम्हारे उपकार का बदला न चुकाने वाला ही बना रहूंगाप्रभु श्री राम जी के प्रेम की पराकाष्ठा है और श्री हनुमान जी की भी भक्त शिरोमणि की उपाधि है तो मेरे भाई बहन देखें मित्र की पत्नी के साथ किन आदर्शों से व्यवहार किया जाता है श्री हनुमान जी से शिक्षा ले

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