Sharda Dubey Dec 4, 2021

शेष भाग------_सत्यानंदविप्र की बानी,,सुन के महा हृदय दुख मानी।।इत कमला जू सूर्य निहोरी,, बोली बचन हाथ निज जोरी।।सुनो सूर्य तुम तपो आग सा,,बालू गरम होय ज्वाला सा।।सुनि आज्ञा सूरज सिर लायो,, गर्मी आपन बहुत बढायो।।नहि पद त्राण शीष नहि छाया, जगन्नाथ उर सोच समाया।।बोले हलधर से यदुरैया,,मोसे चला जाय नहि भैया।।गर्मी आतप भुख सतावै,,कवनिव बिधि अब चला न जावै।।भैया यदि समर्थ तूं होवै,, दौड़ जान अपना दुख रोवो।।सुनि हलधर भाई की बानी,,दौड़े शीघ्र हृदय दुख मानी।।दौड़त कुछ दूर गये कृपाला,,साधु वेष हाथ मृगछाला।।,🥀दोहा 🥀२६🥀यदि विधि दौड़त लस्त हो,,हलधर गयो समाय।। लक्ष्मी जी को भवन था,,भारी चमक सुहाय।।।। चौपाई--------हलधर सुघर भवन लखि हर्षे,,मांगन हित लालच बहु तरसे।।पुनि दासी सो बिनय सुनाये,,सुनि बिनती दासी मन भाये।।कमला पहं सो गयंउ बहोरी,,हाल सुनाई दिये कर जोरि।।स्वामिनी जाचक है कोई आया,,यहि सम दुखिया कबहुं न पाया।।यह सुनि कमला कहैं रिसाई,देहुं द्वार ते तुरत भगाई।।पुनि दासिया आई फटकारी,,कहि दुर्बचन सुनाये गारी।।भागे हलधर प्राण बचाई,,आवत रहें कृष्ण यदुराई।।अर्ध मार्ग भेंटे बलरामा,,कहे वहां पुरैं नहि कामा।।बहु दासिया मुझे फटकारी,,प्राण बचै कहि भांति मुरारि।।सुनी आज जो अन्न न मिलिहैं,,तो कदापि यह प्राण न रहिहैं।।,🥀दोहा 🥀२७🥀यह सुनि बोले कृष्ण जी,,चलिये पुनि मम साथ,अब की भीख मिलै सही,,तो पद नाऊब माथ।। चौपाई-------सुनि हलधर बोले भ्राता से,, मैं नहिं जाऊं होइ आगे से।।जो तुम आगे चलिहो भाई,,पाछे मैं चलिहौं हरषाई।।यह सुनि कृष्ण चले आगे में,हलधर चले होइ पीछे में।।एहि बिधि भवन गये नियराई,बोले हलधर बात सुहाई।।पंचम स्वर से वेद पढ़े जी,,चारो वेद प्रकार करे जी।।यह सुनि कृष्ण ॐकार पुकारें ,,वेद मंत्र सस्वर उच्चारे।।गूंजा त्रिभुवन में यह भारी,, बोली कमला भंई सुखारी।।पूछो याचक क्या ये लहै,,कवन भांति शान्ति सुख पैहैं।।और कहो यह सहिनी घर है,,लैहैं भीख तो सब पुरन हैं।।पुनि दासियां दौड़ यह आई कमला बचन सब बतलाई।। ,🥀दोहा 🥀२८🥀सुनि वाणी दोनों जनें,पुलके हृदय महान।।सूखी सीधा देहुरी,अरु दूजै माकान।। चौपाई----------चूल्हा नया और डूबा दो,,सीधा सेर विविध तूं सजा दो।।यह सुनि दासी गंई भवन,, बोली बचन सुधार सतर में।। स्वामिनी सूखा सेर मंगत हैं,,नेम और कुछ नाहिं करत हैं।। कमला बैन कहि समुझाई,जाहु शीघ्र तूं लाहू बुलाई।।पुनि दासी हलधर श्री कृष्ण को,गंई भवन लै शांति करन को।।अरु चावल सुगंध युत् प्यारी,,साग विविध विधि अति रुचिकारी।।कोचंई आलू केला बरी,दीन्ह बहुत व्यंजन सुखकारी।।दूध दही शक्कर गहूं चूरण,,घृत दीन्है कींन्हे परिपूरण।। कहें बहोरि हाथ निज जोरी,,पचवहू भोजन बहुत करोरि।।कमला बचन सुनत दोउ भाई,,हरषे हृदय परम सुख पाई।।,🥀 दोहा 🥀२९🥀। पुनि कमला धरि काष्ठ को,मंत्र फुंकि कै दीन्ह।।अनल प्रबल हो वो नहीं,,मातु बचन मम चीन्ह।। चौपाई----_------कमला अस कहि अनल बुझाई,, मुनि दोउ जन को कहे सुनाई।।भोजन पचिय शीघ्र दोउ भाई,मानहुं मम वाणी सुख पाई।। सुनि वाणी हलधर हर्षाए,बहरि कृष्ण सो कहे सुहाए।।भोजन शीघ्र बनाओ ताता,जेहि ते हृदय होय बहु राता।।पाक बनावन चले कृष्ण जी,,फूंकन लगे अनल बहु विधि जी।।बरैं अग्नि नहिं कविनिऊं भांति,,धुंआ उड़ै नयनन जल आती।।भात पकन को कहै कौन जी पानी गरम भया नहिं अब जी।।इधर भुख से ब्याकुल हुइके बोले हलधर बचन कड़क के।।भोजन बना अबहि को नाहीं,लगी भूख बड़ जोर में साही।। जगन्नाथ सुनि बोलेउ बानी,,गरम नहीं भा अबलौं पानी।।बरत आग नहिं कविनिउं भांती,धुंवा छा रहा व्याकुल काफी।।🥀 दोहा 🥀३०🥀हलधर सुनि बोले तभी, तुम हो बेफूक राय।।हटो शीघ्र तू दे मुझे,,क्षण में दूं निर्माय।। चौपाई---------शेषभाग---- क्रमशः------

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Sharda Dubey Dec 4, 2021

,🌹🌺 श्री गणेशाय नमः 🌹🌺🙏🏻🙏🏻। शेष भाग से आगे---- पुछे कृष्ण पुनः हलधर से, बांधे हो क्या बहुत जतन से।।सुनि हलधर मुंदरी दिखलाये,पीतल भया निरखि पछताए।। विलपत गये रसोई गृह में,ठाढ़ भयो बलभद्र द्वार में।। भीतर गये कृष्ण यदुराई, करिखा लगा देह में भाई।। सोचि दशा निज कहने लगे, भैया हम दोउ अभागे।।अस गुनि नैनन नीर बहावे, कवनेउ भांति चैन नहिं पावैं।। मांगन चले भीख दोउ भ्राता,भारी दुखद चरित यह ताता।।भीख मिली नहि कवनेउ भांति, सूर्य तपे अग्नि से ताती।। भूख विहाल किया दोउ को, ठाने डर पानी पानी को।। पानी पियन गये सर में,दलदल मात्र रहा तो थल में।। 🥀 दोहा 🥀 २१,🥀 करें रामनारायण जोई,होवे त्रिभुवन में सब सोई।।सुख दुःख सब संग रहते,समय पड़े नारायण सहते।। पुनि दुजे दिन जगे कृपाला, पानी नहिं धोये किमि भाला।।विपत पड़ी भारी गिरधर को,,मिलै अन्न जल भी नहिं उनको गये सिंधू पहं आस लगाई,तबहि सिन्धु गा तुरत सुखाई।।हुआ उपास दिवस दो भारी,मानी कोउ भिमसेनी धारी।।हलधर कहे सुनो यदुराई,भूख लगे बड़े जोर से भाई।।जो कहूं आजहूं अन्न न मिलिहैं,कहो प्राण यह कैसे रहिहैं।।यदि ते जाइ भीख बहुं मांगो,मिलैं भीख तो जीवन जागो।।यह सुनि ठकुरानी गृह जाई,मांगे भीख दया दरशाई।। ,🥀दोहा 🥀२२🥀--------लाठि धर के हाथ में,चोर समझ ललकार।।भीख तनिक दीन्हो नहीं,घर से दियो निकारि।। चौपाई----_-------भागे हलधर संग दोउ भाई,चलत चलत बहु हाफीं आई।।पुनि श्री कृष्ण बोले हलधर से,मिलैं भीख अब एक यतन से।। चलिए पंडा गृह अब भाई,दैहैं भीख अवसि बरियाई।।यह उर मान गये पंडा घर,पुत्र बधु ठाढ़ी द्वारे पर।।मांगे भीख तबैं यदुराई,दियो भीख नहिं गयो पराई।।अरु निज सासू से कहो सुनाई,मांग रहे भिक्षा अरु आई।।यह सुन सासु महा खिसियायो, द्वार आई बहु भांति खिझायो।।हटो शीघ्र बय्यार यहां से,दारिद्री आये तूं कहां से।।अस कहि द्वार कपाट लगाई दिये तुरत दोउ लोग भगाई।।निराहार पीड़ीत दोउ भाई,, सामवेद की मंत्र सुहाई।।🥀दोहा,🥀२३🥀मंत्र मधुर कहने लगे,दुखिया दोनों भाई।। तेंहि अवसर एक ब्राह्मणी,निज गृह लियो बुलाय।। चौपाई-------दया लागि सो पाक बनाई,व्यंजन यथाशक्ति निरमाई ।।सादर दोउ भाइन बैठारी,परुसन हित गृह पाक सिधारि।।परुसन को जब हांड़ि निकाली,,व्यंजन तुरत भयो सब ख़ाली।।तब ब्रह्माणी दारिद्री जानी,,मार भगायो तुरत सयानी।।भागे राम कृष्ण तब ते,,भारी स्वेद बहा तिन तन ते।।भारी आतब (गर्मी)प्यास सतावै,,पेट जरे बहुते पछतावे।।पुनि कबीर पंथी घसिया से,,जाइ भीख मांग बहु दुःख से।।लाई ला घसिया ने दीन्हा,,कमला वायु प्रेरित कीन्हां।।आयो पवन तुरत श्री हरि सो,, उड़ा दी ये लाई सत्वर सों।।तब मन में दोउ कीन्ह बिचारा,,कमला तजै कहां निस्तारा।।🥀 दोहा,🥀२४🥀कमल मूल फल तोड़िके,,खाउब दोनों भाई,,।।यह बिचारि उर लाइके,सर में पैठे जाई।। चौपाई-------_जलतालाब गये दोउ भाई,, कमला प्रेरित गए उ सुखाई।।भारी विपद देखी घबराये,,मूल फूल फल एक न पाये।।विलपत चले पुनः दोउ भाई,,एक विप्र गृह गये समाई।।भोजन करत विप्र को देखी,,इनकर लालच बढ़ि विशेषी।।मांगी भीख विप्र बाबा सो,,दोउ विनय किय बहु बिधि सो।।देखयी विप्र इन लोग ढिठाई,,रदन चाप बोले खिसियाई।।रे दरिद्र तुम हुये रे,, लक्ष्मी तापे आंख तरेरे।।दूध भातथा मम थाली में,खाली हुआ देखि तोहि क्षण में।।अस कहि विप्र लगुड़ ले धाए,राम कृष्ण भागे चिल्लाए।।मन में सोच बहुत विधि कीन्हां,,विधि ने हमहि बहुत दुख दीन्हा।।🥀 दोहा 🥀२५🥀कौन कार्य अब हम करैं,,भुख नहीं अब जाय।।भेजा ब्राह्मण सिंधु पे, कैसे वह पहुंचाय।। शेष भाग______क्रमश:_____

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Sharda Dubey Dec 3, 2021

🥀🥀गतांक से आगे____चौपाई---------पुनि भूतन आज्ञा सिर धाई,पहूंचे तहां तुरन्त सुख पाई।।और हरिहि दोऊ भूमि सुलाये,करले पलंग तुरंत चढ़ि आये।।कमला देखी बहुत हरषाई,ढुढ़िहैं अवसि हमें दोऊ भाई।।यदि हमार पति हमें न ढूंढैं,तो किमि कलयुग के नर मूढै।।पुनि कमला दूत सन कहेऊ तू बैकुंठ जाई सब रहेऊ।।रमा शारदा लिन्ह बुलाई,तो सन कही युक्ति समझाई।।सब गृह इन्ह सन जाहू सयानी सबके कंठ बैठि मनमानी।।मिले अन्न जल इनको नाही,करो यत्न कहती तो पाहीं।।गयी शारदा आज्ञा पाई,दिन चढ़ते हरि लिये जगाई।। निद्रा त्यागी उठे दोउ भाई,कुल्ला हेतु मिला जल नाई।🥀दोहा 🥀१९,,🥀कमला बिन बलदेव जू,देखे गृह के हाल,चकित बहुत होने लगे,पीटे हाथ से भाल।।🥀🥀१९🥀🥀 चौपाई-----कहबलभद्र सुनहु यदुराई,माना मैं संकट अब आई।।पंडा प्रतिदिन पूजै जोई आया नहिं अबै लगि सोई।।दासी दास दिखें कोऊ नाहीं,भाग गये सबके सब क्या कहीं।। कृष्ण कहे सुनिये बड़ भ्राता,कमला संग ये गये छोड़ि सब नाता।।तेहि कारण यह विपत सतावे उर में तनिक चैन नहीं आवैं।।सुनि बोले बलभद्र कृष्ण से,त्यागे तूं कमला निज बल से।। और दोष मो सिर पर देहू,भला बुरा उर में गुनि लेहू।।पुनि भंडार गृह गये दोउ भाई,शून्य शून्य चहूं ओर लखाई।।सोचे दोउ अपने उर अंदर, लाख जीव लावे नित भंडर।।सो सब खाली भयो विधाता,पूछैं हमहिं कौन मन राता।।🥀दोहा,🥀२०🥀हलधर ने भंडार में,पायो मुंदरी एक,सात गांठ से बांध के,राखे संग मह टेक।।🥀🥀 क्रमशः----शेष भाग---

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Sharda Dubey Dec 3, 2021

चौपाई------बोले जगन्नाथ कटु बानी,गर्जत तव पितु सदा अदानी।।🍁🍁🍁🍁🍁ता सम तू भी वृथा प्रलापी,मानू मैं नहि बचन कदापि।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 कौन जात कुल तोर गोसाई,देहु बताय मुझे यदुराई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 वृंदावन में गाय चराये,कौन उच्च तुम आंख दिखाये।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁ग्वालन और विदूर गृह जाई,भोजन भखो बहुत बतराई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁जूठे बेर तुम्हीं ने खायो जांति पांति कुल धर्म गंवायो।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁पाप पुण्य निज कभी न ताके,मम निंदा करते बल काके।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁एकहि दोष हुआ मेरे से,वह भी तुम्हरे बल देने से।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁देहू मोर आभूषण सारी,जो तुम अपने आस बिचारी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁दोहा________अलंकार जब दीन्ह नही, लक्ष्मी कहा बुझाय।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁 आभूषण पर चाह जो,राखो यतन कराय।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 चौपाई-----यह कही कमला तू महारानी, अलंकार भूषण अनुमानी,।।🍁🍁🍁🍁🍁तन ते हेरि हरिहिं दे डारी,तन में बचा वसन इक सारी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁कहे नाथ लीजे सब अपना,यह सब होगा मोकहं सपना।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁सुनि श्रीकृष्ण बोलि पुनि बानी, अलंकार काकरब सयानी।।लैजावहु तूं अपने साथा,बेचि भांजि के खाहु अनाथा।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁हरि मुख ताकि कहीं कमला जू,सुन ब्रह्मांड पती स्वामी जू।।जब तूं दूसर नारी लैहो,ता कहं सब गहना पहिरैंहो ।।🍁🍁🍁🍁अरु मम श्राप शीश पर लीजै,जेहि मम त्यागी सुरति जिय की जै।। चन्द्र सूर्य जो सांचौ होवै,तुमहि अन्न कोउ भीख न देवे।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 वर्ष बीतत दारिद्री होउ,अन्न बारि पट मिलै न सोउ।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🥀🥀दोहा---जब कोऊ देवे अन्न नहीं, चांडाली कोउ देय।।तब तुम चखो प्रेम से,घूमो श्राप मम लेय।।🥀🥀१६,🥀🥀यह कहि कमला चली पराई कमला पति की याद दुराई।।दासी जात देखि कमला को,चले सबहिं संग लक्ष्मी जी को।।🍁🍁सोचे कमला अपने उर मे,पिता रखें नहि अपने घर में।।याद कीन्ह विश्वकर्मा को जब,आए झट हरि पुर ते तब।।🍁🍁🍁 बोले विश्वकर्मा लक्ष्मी से,याद किये मोहिं किस कारण से।। बोली कमला सुन विश्वकर्मा,सिरिया गृह जाओ नित सद्धर्मा।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁जाई तहां बहु भांति सजाओ,मणिमुक्ता माणिक तहं लाओ।।पुनि विश्वकर्मा तहं चलि गयंउ रचना विधि बहु भांति निर्मयंउ।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁मणि माणिक अरु हीर जवाहर,सजवाये भांतिन मन आगर।।चमचम झलमल चमकत तंहवा,काहे कौन कमला वस जहंवा।।शोभा देखि रमा हरषाई,पुनि वैतालन लिये बोलाई।।आज्ञा दी न्ह भूतन को हरि गृह जाइ लाहू सब धन को।।🍁🍁🥀🥀दोहा---- 🥀🥀 विश्वकर्मा भूतन सब,जाहु शीध्र हरि धाम।।लाओ धन गृह पाक से,साधो यह मम आम।।🥀🥀१७🥀🥀 चौपाई-----पुनिबैताल कहे कमला से, कैसे वार परैं हलधर से,।।ये रक्षक चैतन्य बने है, फिर अस कार्य कदापि न वनिहैं।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 यह सुनि निद्रा दियो पठाई,निद्रा व्याप होऊ तहं जाई।।पुनि दूतन को आज्ञा दी न्हे बहुत भांति अभिनन्दन कीन्हे।।🍁🍁🍁🍁खाने योग्य वस्तु सब खाओ,हांड़ि फाड़ि और सब लाओ।।निद्रा मस्त हुये दोऊ भाई,अवसर सुखद दूत ने पाई।।आज्ञा पालन किये रमा के,लाये वस्तु सबै तहंवा के।।यह लखि रमा बहुत हरषाई,सकल भांति सुख संपत्ति छाई।।पुनि लक्ष्मी सोची अपने उर में,किमती पलंग रहा हरि पुर में।।सुनि वैताल कहे कर जोरे,ता पर शयन किये मतवारे।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🥀दोहा------ताकैसे हम लाइहैं, कहहु मातु समुझाय।जमीं सेज डराई के,हरि को देहू सुलाय 🥀१८🥀शेष भाग अगले भाग में, क्रमशः_____ । ।

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Sharda Dubey Dec 3, 2021

सुप्रभातम आप सभी को 👏👏👏👏👏पुराण का अगला भाग_______दसविधि मूल फूल फल मंगाई, विविध भांति नैवेद्य बनाई।।🍁🍁अरु दस गांठ सूत लै राखी , बहुत विनय कमला सो भाखी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁। अरवा के दस कूढा बनाई,अरुसुपक्क कदली मंगवाई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 धूप दीप नैवेद्य अरपि के,जय लक्ष्मी नारायण कहिके।।,🍁🍁🍁🍁🍁🍁। जय जय महालक्ष्मी सुख दानी,कृपा करो मोहि जानि अजानि।।,🍁🍁🍁🍁🍁 चांडाली मति मंद गंवारी,की यह पूजा धरो संभारी 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁ताको भक्ति देखि सुजानी,मगन होई तहं गई सुदानी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁जाके गृह लक्ष्मी पगु धारी,ता महिमा को कहै सुठारी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁पुनि कमला बोली मृदु बानी,हूं प्रसन्न वर मांगु सयानी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁। कमला बचन सुनी जब सिरिया,कहन लगी बहु भांतिन किरिया।।🍁🍁🍁🍁🍁। दोहा-------हे माता सुनु क्या कहूं,तो सो बैन सुनाये।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁मांगन मैं जानू नहीं,अति दरिद्र हूं माय।।,,🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁देना है तो दिजिये,धन कुवेर सम होय।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁लक्ष्य एक गौ किजिये,अमर कीर्ति जेहि दोय।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 चौपाई---सुनि लक्ष्मी बोली मृदु बानी,देहूं सबही पर सुनहूं सयानी।।🍁🍁🍁🍁 अमर नहीं कर सकती तोहि,और देहूं पावैं जेहि मोहि।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁सुख भोगे तू जब तक जीवैं,अंत विष्णु दर्शन रस पीवैं।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁यह ब्रत सदा करहूं तूबहिनी,होवैं नारायण पद रोहिनी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁। पाराशर नारद सो बोले,राम कृष्ण मृगया बन डोले।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 हलधर ज्ञान शक्ति यह जाने,कहे कृष्ण सो तन अनुमाने।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁देखि तात तब नारि सुभाऊ,घसनीन गृह कीन्हीं मन चाऊ।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁बिन स्नान किये गृह आई,अरु अन्न करि पाक बनाई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁। एहि भांति: प्रतिदिन जावैं,दोऊ भाई न की धर्म मिटावै।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁👏सुनि श्री कृष्ण भ्राता की बानी,बोले बचन सुधारस सानी,🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁सोरठा-----_--दारिद्री हरि नाम है,देख नहीं सकती दूखी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁ताते जात समात है,भेद लखत कोई नहीं।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁। चौपाई-----सुदर्शा लक्ष्मी ब्रत भारी,तापालै वह होई सुखारी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁ताहि देखि कमला मन राता,कहंउं सत्य समझहूं जीय ताता।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁बोले हलधर सुनि के बानी,त्यागहूं ऐसे नारि कुजानी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁कहे कृष्ण सुनि बड़ भ्राता, कमला तज कहां मन राता।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁मिले नहीं ऐसे कोउ नारि, तेहि ते कमला रखो सुखारि।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 और स्वर्ग से देव बुलाई, न्याय कराई दीजै भाई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 पुनि ऐसी जो करिही आगे,तो निकाल देऊं भय त्यागें।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁अबकि कृपा करिय यह जानि,बार बार बिनवौं सुख दानी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁सुनि हलधर बोले खिसियाई,जो नारी पैं ममता भाई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁तोहतें मैं गृह छोड़ पराऊं,एहि बिधि अपना धर्म बचाऊं।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁नारी गये मिलिहि बहु नारी, बंधु मिलहि होऊ दुखारि।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁। यह जिय जानि बोले यदुराई,कमला वेगि तू जाहूं पराई ।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁दोहा-------_--नाहिंन इति फटकब महि,याते जाहूं पलाय,घर भीतर आना नहीं साचिं देउ बताय।।🥀🥀🥀🥀🥀🥀असकहि दोऊ लगुड़ उठाई,बैठे गृह द्वारे मह जाई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁तेहि अवसर कमला तहं आई,सुनि प्रभु बचन महा दुख पाई।।🍁🍁🍁🍁🍁तब भ्राता हियजि अस भाऊं,जाऊं अब दोष न काऊ।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 लिख देवहू एक पत्रगोसाई,तेहि ते मन शंका मिट जाई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁लिखूं पत्र नाही सुनु साचीं जावो कहीं जहां मन राची।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁कमला बोलीं हरि सों बानी,सागर बचन भुलेउ काजानि।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 वरुणा दिक सब देव समाजें,क्षमा करन दश दोष कहाजे।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁सो स्वीकार कियो काआनी छांड़त हो अब क्या जिय जानी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 शादी समय जूवा जब खेले,सात बार जिते हम तोले।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁तो प्रसन्न हो दिये बरदानू,गुरुवासर घूमो मन मानू 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁दोहा--------झूठ बचन क्यों करत हो,तीन लोक के नाथ।। भूलें भंईहोगी यदि कर दो आज सनाथ।।१४।।🥀🥀🥀🥀🥀👏👏

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Sharda Dubey Dec 2, 2021

महालक्ष्मी पुराण_गतांक से आगे। ,🌺🌺🌺🌺 चौपाई_तेहिऊपर कदली फल रखो,पंचरंग के वस्त्र भाखो।।🌺🌺ता पर श्री लक्ष्मी धरवावे,धूप दीप से पूजा लावे।।,🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺भोग लगाई के शंख बजावे,तब श्री लक्ष्मी जू सुख पावे।।🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔अहै एक सुदर्शा भारी, चित्त लगाई सुनो तु प्यारी।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁शुक्ल पक्ष लक्ष्मी गुरुवारा,ता दिन प्रातः लिपु घट द्वारा।।💮💮💮💮💮💮💮💮💮 पूर्व कहे सम चिन्ह बनावै,नहाई धोई के पद्म बनावै।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹पुनि सिंहासन धोई मढ़ा वो, पुंगी फल लक्ष्मी पधरावो।।✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️अरु पंचामृत स्नान करावे,सूत लाई दस गांठ बनावे।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾। ता लक्ष्मी को जपै भाई,पुनि पुनि बांधे बांह सजाई।,🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 प्रथम नैवेद्य लगावो, और कथा सुनि के मन भावो।।🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻दोहा_------अरवाचावल पीस के,भेला चूर्ण मिलाय।।दूध के छेना फ़ारिके,कदली डारि सनाय।।५।।🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 महालक्ष्मी पूजा मन लाई,खा प्रसाद दिन रैन बिताई।।🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀यह प्रसाद दूसर जनि दिजै,कन्या शादी संघ बरीजै।।👏👏👏👏👏👏👏👏👏 चित्त लगाई कथा यह सुनिये,कोउ गुरुवार रिक्त नही करिये।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁 गुरुवार लाई जनि फारे,अमिख त्यागि केश जनि कोरे।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁जुठा खाई जो तेल लगावे,तेहि लक्ष्मी निश्चय विसरावे।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 गुरुवार जनि सूपा लीपै, मांस,तुमा खावै जनि लावै।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 छाया खाट खाइ जनि सोवै,रात काल दधि अन्न न खावै।।🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀कर जोर जनि सुनहु सयानी, मछ्ली नहीं लावै यह मानी।।👏👏👏👏👏👏👏 अन्न तनिक फेंके जनि भाई,किए महालक्ष्मी बिसराई।।🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍🤍भली भांति चूल्हा को लीपै,सो नारि अवसि कुलदीपै।।🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷जो न करै अस भांति अचारा,ता गृह कमला अवसि बिसारा।।🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 नया श्वेत लुगड़ा परिधाने,रुमगा होई बहुत धन माने।।🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 लड़का बच्चन को जनि मारे,बर्तन साफ करे सुविचारे ।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾संध्या दीपक वारि दिखावै,ताघर लक्ष्मी जी सुख पावै।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 सोरठा-----जले अन्न खावे नही,सीधी खाट बिछाय।सासु बचन माने सही,सयन करे उलटा मति।।।१।।। दोहा-----अम्मावस संक्रांति को,बरजे नागर तेल।सभा बीच सच बोलिये ,पांव धोई मल मैल।।६।।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏कन्या तुला लग्न रवि होई,ता मंह श्राद्ध करै सब कोई।।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 जो जन ऐसा करै न भाई, ताकहं सुयश नसाई।।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 गुरू संक्रांति अमावश राति,जनि खावै नर नारी सुपाती।।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 मैथुन क्रिया करे जनि कोई,ताहिम शपदि धर्म क्षय होई।।🤱🤱🤱🤱🤱🤱🤱 कहै तीन दिन कड़वा खावै, दण्ड बिविध यम पूर में पावै।।🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥करे दान दुखिया की मारी, त्यागी कपट कृपणता सारी 🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌। जो नारी या विधि ब्रत करंई,आयु धन कान्ति जन बढ़ ई।।🐚🐚🐚🐚🐚🐚 प्रातः उठि जो मुंह न धोवै,तामुख देखे पाप बढोवै।।🤱🤱🤱🤱🤱🤱🤱🤱🤱 दूसरे दिन के बीछे बिछौना,तापर शयन करावै छौना।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 ता गृह सुख वैभव सब जाई,सत्य सत्य मानहु सब भाई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁दोहा------बिन आसन भोजन करे,करे कुमारी भोग। दक्षिण पश्चिम मुंह हों,तो व्यापै रोग।।७।।🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 चौपाई-----अंधकार जनि भोजन करिये, कुल्ला बहुत भांति उपचरिये।।,🍀🍀🍀 स्नान करे अरू तेल लगावे,भुमि नख से खोद करावे।।🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀आधा पहिन बिछावै नारी,था गृह लक्ष्मी निस्तारी।।🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 जो नारी पति आज्ञा टारै,सान बढाई बहुत फटकारै।।☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️ प्रेम करे जो और पुरुष से,भागे लक्ष्मी ताहि दरश से।।☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️कहहि बैर प्रिया कटु बानी,विप्र अतिथि जो कभी न मानी ।।,☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️जो गृह ऐसे नारी होवे,ता गृह लक्ष्मी कभी न आवे।।😪😪😪😪😪😪😪😪😪 जो नारी पति सेवा त्यागे, पुत्र वती सुख कभी न पावे।।🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥दोहा--------देव यथा पूजा करें,नारी पति मन लाय। न्हाइ धोई निर्मल रहें,परिजन सुख उपजाय।।८।।🥀🥀🥀🥀🥀🥀 सबको पुत्र पति सम प्यारी, भोजन देवे त्यागी अनारी।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 आज्ञा भंग करे जनि पति की, दुःख में दुःखी सुमति की।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹 या नारी लक्ष्मी के प्यारी, लक्ष्मी सदा बसे हितकारी।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌾पती पुत्र धन बहु बिधि पावै,कमला कृपा कुमति नही आवै।।✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️अंत समय लक्ष्मी पूर जाई,तहं बहु काल बिविध सुख पाई।।, पति से प्रेम सहित पूजा करू, पूजा जप तप डर नाहिन धरु।।🛕🛕🛕🛕🛕🛕 तीर्थ करै जो सेवा तजि के,बिधवा होई जन्म बहु धरि के।।🌼🌼🌼🌼🌼🌼 हर्ष चित्त जो अतिथि पुजै,ता सम नहि त्रिभुवन में दूजैं।।🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡 या बिधि नर नारिन्ह महं कोई,करै धर्म त्यागे जनि कोई।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 सदाचार जो पालै प्यारी, लक्ष्मी तत्क्षण मिले सुखारी।।🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 दोहा---_-----पतिसहित शुभ गति लहै,नाही और उपाय,पति सेवा बिन व्यर्थ है,जप तप नियम बताय।।९।।🙏🙏🙏🙏🙏🙏 चौपाई----_---जो नारी गुरु ब्रत नहि करंई,हुंमकि गर्व पति सेवा भरंई।।🌿🌿 जन्म जन्म सुख ता नहीं पावे, दुःख भोगी यम पुर को जावै।।🌿🌿🌿🌿🌿🌿। तेहि ते यह ब्रत सुनहु सयानी,नाहिन दुख पावे सुनु बानी।।☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️ अस कहि लक्ष्मी गयी नगर में,चौक दिया नहि काहू घर में।।☘️☘️☘️☘️☘️☘️शयन किये सब सुधि विसराई, वस्त्र हीन कोऊ केश गिराई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁हाल देख कमला दुःख पाई,मन ही मन बहु भांति रिसाई।।🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼। पुनि सहीस सिरिया गृह जाई देखे तहं बहु विधि सजाई।।💮💮💮💮💮💮🪔🪔🪔🪔बाहर नगरभवन रह ताके, विष्णु भक्ति सदा मन वाके।।🔔🔔🔔🔔🔔। रात्रि घड़ी दो बांचें,लाये गोबर इक रंग साचे।।🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 बछड़ा गाय एक रंग होई,तागोबर को लावे सोई।।🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿लीप पोत गृह साफ बनावे गलि की छरा कहि नहि जावे।।🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿दोहा---_----अरवा चावल पीस के रेहन ताहि बनाय। पद्म चिन्ह वह लिख रखे दसमुख दीप जलाय।।१०।।🍀🍀🍀🍀🍀शेषभाग अगले कड़ी में__________क्रमश:

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Sharda Dubey Dec 2, 2021

श्री गणेशाय नमः 🙏🏻 जयश्री गणेश 🌺 🌹🌹 उड़िया भाषा से रूपांतरण 🌹🌹 श्री महालक्ष्मी पुराण 🛕🛕🛕🛕🛕🛕 जय वीणा वादिनी मां!🔔🔔🔔🔔🔔जयति जै हे मां सरस्वती जयति वीणा वादिनी।। ब्रह्मा तनया स्वर्ग वासी शांति सुख उपजावनी।। भक्त उर वासी सदा जय मातु ब्रह्म विचारिणी।।हंस वाहन वस्त्र उज्जवल स्फटिक मणि तन की प्रभा।। पुष्प माला कंठ साजे चारु भुज मन भावनी ।। वेद जननी मातु जय हे हरहु तू मम अज्ञता।। ज्ञान दो मुझको सदा जय मातु मंगल कारिणी।।।।।।बसंत लाल।।।।।।प्रिया अरु ज्ञान दायिनी लोक के।।तुमुल, अं धियारी हृदय के हरण करु वरदायिनी।।🌹🌺🌹 श्री महालक्ष्मी पुराण भाषा ✡️✡️✡️✡️✡️ प्रारंभ ✡️✡️✡️✡️दोहा__कमला पति मन लायिके ,हृदय सुमरि वागिश**भाषा लक्ष्मी ब्रत कहौं,कृपा करो गौरीश**जय जगदंबे शारदा,जय गज वदन कृपालु**पौष शुक्ल द्विज रात में ,दिवस पड़ा गुरुवार**दुइ हजार सोलह समे, लक्ष्मी ब्रत विस्तार**। 🕉️🕉️🤱🙏कथा प्रारम्भ 🙏🤱🕉️🕉️जय जय सागर सुता भवानी। जय जय विष्णु प्रिया महारानी 🙏। कमला जय दीनन हित कारी। सकल जगत के पालनहारी तोरे कृपा अधन धन पावे।।🌾🌾🌾🌾अचल होइ सुख संपति पावे। 🌿🌿🌿द्रोह करे जो तोसे माता।,🌿🌿🌿🌿 द्रारिद्रि तिनको ही सताता।।🌾🌾🌾🌾जो गावे चरित्र नर कोई।,🌿🌿🌿🌿🌿ताके गृह वैभव सुख होई।।🌾🌾🌾🌾हेमाता पुराण यह गावौ ।,🌿🌿🌿🌿तोरे कृपा विमल मति पावौ।।🌿🌿🌿 पाराशर नारद मुनि दोउ।एक गांव आए मुनि ओऊ 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾तादिन अगहन के गुरुवारा।पूजा लखि मुनि कीन्ह विचारा 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾प्रति घर गोबर द्वार लिपाए लक्ष्मी चर के चिन्ह सुहाए।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾गृह गृह नारी नहाइ नहाई।पुजे लक्ष्मी अधिक सुख पाई।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 ब्राह्मण शूद्र सबहि गृह भाई। श्री लक्ष्मी पूजा अधिकाई।।🌾🌾🌾🌾🌾 🌾🥀🌿🥀 दोहा___जय जय पूरित हो रहा गगन मर्त्य पाताल,🥀 पाराशर नारद मुनि,भये चकित लखि हाल 🥀१,🥀पुनि नारद पूछे मृदु बानी।कहहु कथा निज सेवक जानी**नाम मौन प्रभु ब्रत कर एहा**नियम बुझाय हरहु संदेहा**नारद बचन पाराशर सुनेऊ**धन्य धन्य बहु विधि तेहि कहेऊ**नारद सुनहु सत्य मम बानी**करौ प्रकाश हृदय अनुमानी,**प्रेम सहित जो लक्ष्मी पूजैं था सम नहिं त्रिभुवन में दूजैं**सब मास में अगहन भारी तेहि के गुरुवासर हितकारी**लक्ष्मी प्रिय सबही विधि सोई, अभिलाषा पूजैं सब कोई***।तेहि महं श्रेष्ठ सुदर्शा जानों,गुरु दशमी सुदि मानो**।। लक्ष्मी प्रिया सुदर्शा भारी,सेवत नर सिद्धि अधिकारी**। ,🥀🌿🥀। दोहा_____यह सुनी नारद ऋषि,पूछे मुनि के पास,कौन प्रथम किंन्हा इसे, कहहु नाथ हूं दास।।२।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾चौ-'नारद बचन सुनेऊ मुनि राई,कहन लगे शुभ कथा सुहाई**। धन्य ज्ञान नारद मुनि तोरे अतिशय प्रीति होत मन मोरे**,🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾जो तुम कथा श्रवन मन लाई।यह सब लोक लोग सुख पाई।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 एक समय लक्ष्मी महारानी, जगन्नाथ सों बोली बानी।।,🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾आज मोर ब्रत अहैं गुसाईं,घर घर चन्दन चौक पुरानी।।🌾🌾🌾🥀🌾🥀🌾 आज्ञा हो तो देखन जाऊं,देखि पुनः वापस घर आऊं।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 यह सुनि जगन्नाथ हर्षाए,बिहंसि बचन बोले मन भाए।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 जाहु प्रिया देखहु पुर शोभा,जा लखि मुनि सुर के मन लोभा।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾 एक बात और सुनि लीजै,केवल नगर परिक्रमा कीजै।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 सुदर्शा ब्रत जो नित करि ताके गृह सुख सम्पत्ति भर ई।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 दोहा______कमलाहरि आज्ञा पाई के,सजी सोलह श्रृंगार,।बुढी ब्राह्मणी वेष में गयी सधुवा के द्वार।।🥀🥀🥀।। चौपाई____लक्षमी नगर हाल जब देखी,शून्य शून्य सब द्वार विशेषी।।🌾🌾 ठाढ़ भयी सुनि साधू द्वारे, साध्वी बैठी थी मन मारे।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾तासे लक्ष्मी बोली बानी,आज मोर ब्रत सुनहू सयानी।।,🌾🌾🌾🌾🌾🥀🥀🌾🌾 घर घर शून्य लगत है मोही,देखत चौक दिया नहीं ओहीं।।,🌾🌾🌾🌾🌾🌾 सधुवा सुनि लक्ष्मी के बानी,हाथ जोरि बोली मृदु बानी।।,🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾हे माता यह ब्रत समझाओ,काविधि कौन किया तेहि गाओ।।🌾🌾🌾🌾🥀🌾 ए है ब्रत आगे जो माता,तेहि पूजन हम होई मन राता।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 लक्ष्मी सुनि सधुवा के बानी कहन लगी धीमी मृदु बानी।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 सुनु सधुवा ब्रत या विधि होई,अगहन मास आदि गुरु जोई।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾। ता दिन उठकर जल्दी,गोबर लिपयी शुद्ध कर बल्दी।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾पुनि नव चावल धोई सुखावे,महीन पीसिके चौक पुरावे करि स्नान शुद्ध मन होई,चौक एक बनावे सोई।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾 तेहि ऊपर एक कलश सजावे,नया धान तेहि ऊप्पर लावे।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾। दोहा______लाल धान रखना नहीं,सिर्फ सफेदी होय।बरतन में भरकर रखो,यह जानो सब कोय।।🌾🌾🌾🌾🌾🌾। 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🥀🥀शेष भाग- - --क्रमश:-------//^\\

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