Shanti Pathak Jun 1, 2020

+148 प्रतिक्रिया 31 कॉमेंट्स • 54 शेयर
Shanti Pathak May 31, 2020

🌹🌺🌷जय श्री कृष्ण🌷🌺🌹* *"नादान" इंसान ही जिंदगी का* *'आनंद' लेता है...,* *ज्यादा "होशियार" तो हमेशा* *'उलझा' हुआ रहता है..* *बहुत मुश्किल है,,* *उस शख़्स को गिराना,,,,* *जिसको चलना,,* *ठोकरों ने सिखाया हो,,,,* सदैव हंसते रहिए, हसाते रहिए 🙏 *शुभरात्रि * 🙏 ईश्वर बहुत दयालु है एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था, उसमें तरह-तरह के फल होते थे और उस बाग की सारी देखरेख एक किसान अपने परिवार के साथ करता था। वह किसान हर दिन बगीचे के ताजे फल लेकर राजा के राजमहल में जाता था। एक दिन किसान ने पेड़ों पे देखा नारियल अमरूद, अनार और अंगूर पककर तैयार हैं। किसान सोचने लगा आज कौन सा फल महाराज को अर्पित करूं, फिर उसे लगा अंगूर करने चाहिये क्योंकि वो तैयार हैं इसलिये उसने अंगूरों की टोकरी भर ली और राजा को देने चल पड़ा! किसान राजमहल में पहुचा, राजा किसी दूसरे ख्याल में खोया हुआ था और नाराज भी लग रहा था किसान ने रोज की तरह मीठे रसीले अंगूरों की टोकरी राजा के सामने रख दी और थोड़ी दूर बैठ गया, अब राजा उसी खयालों-खयालों में टोकरी में से अंगूर उठाता एक खाता और एक खींच कर किसान के माथे पर निशाना साधकर फेंक देता। राजा का अंगूर जब भी किसान के माथे या शरीर  पर लगता था तो किसान कहता था, ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’ राजा फिर और जोर से अंगूर फेंकता था किसान फिर वही कहता था ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’। थोड़ी देर बाद राजा को एहसास हुआ की वो क्या कर रहा है और प्रत्युत्तर क्या आ रहा है वो संभलकर बैठा, उसने किसान से कहा, मैं तुम्हें बार-बार अंगूर मार रहा हूं और फिर भी तुम बार-बार क्यों कह रहे हो की ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’। किसान नम्रता से बोला, महाराज, बागान में आज नारियल, अनार और अमरुद भी तैयार थे पर मुझे भान हुआ क्यों न आज आपके लिए अंगूर ले चलूं। लाने को मैं अमरूद और अनार भी ला सकता था पर मैं अंगूर लाया। यदि अंगूर की जगह नारियल, अनार या बड़े बड़े अमरूद रखे होते तो आज मेरा हाल क्या होता? इसीलिए मैं कह रहा हूं कि  ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’। शिक्षा: इसी प्रकार ईश्वर भी हमारी कई मुसीबतों को बहुत हल्का करके हमें उबार लेता है पर हम लोग ईश्वर को ही सारा दोष दे देते हैं। आज हमारे पास जो कुछ भी है अगर वास्तविकता के धरातल पर खड़े होकर देखेंगे तो वास्तव में हम इसके लायक भी नही हैं।

+78 प्रतिक्रिया 25 कॉमेंट्स • 97 शेयर
Shanti Pathak May 31, 2020

🌹🙏ऊँ सूर्यदेवाय नमः, शुभ रविवार, सुप्रभात वंदन 🙏🌹 मानव तन मोक्ष का द्वार है . एक बार भगवान् राम एक शिला पर बैठे जानकी जी के साथ लक्ष्मण जी पास मे ही कुछ कार्य कर रहे थे... . राम जी अचानक से बहुत जोर से हंसे ! . लक्ष्मण ने देखा और कहने लगे क्या हुआ भईया ? . भगवान् राम ने सामने पेड़ की और इशारा करते हुए कहा.. . इस कीड़े को देख कर हमे हंसी आई यह बार बार ऊपर चढ़ रहा है फिर गिर जाता है। . लक्ष्मण.. भईया इसमे हँसने की क्या बात है ? यह तो इसका स्वभाव है ! . राम जी.. अरे मैं इसके गिरने से नही हँस रहा, इस कीड़े मे जो जीव आत्मा है उस पर हँसी आई है। . लक्ष्मण.. ऐसा क्या हुआ ? . राम जी.. इसमे जो जीव आत्मा है ना वो चौदह बार इन्द्र के सिंहासन पर बैठ चुकी है और तब भी यह कीड़े की योनी मे भटक रही है। . लक्ष्मण... भईया ऐसा क्यू ? . राम जी.. इस पर दया करके जब -जब मानव तन दिया तब तब यह बहुत अच्छे कर्म करता है.. . दान पुण्य आदि जिससे इसे इन्द्र का सिंहासन प्राप्त हो जाता है, पर कर्म खत्म होते ही चौरासी मे भटकता रहता है। . यह मानव तन पा कर दिव्य द्वार मे प्रवेश नही करता, मुक्ति का यतन नही करता और कर्मो के चक्र मे भटक रहा है। . लक्ष्मण... भईया तो यह क्या ऐसे ही भटकती रहेगी जीव आत्मा ? . राम... जीव जब मानव तन मे आता है तब संत यही संदेश देते है मानव तन मोक्ष का द्वार है... . पर जीव मन के आधार पर चलता है ईश्वर दर्शन की इच्छा ही नही रखता, भगवान से संसार और संसार की वस्तु को ही मांगता है ? . भटकता रहता है.. जीव जब तक एक कृपा अपने पर नही करेगा ईश्वर की सारी कृपा व्यर्थ हो जाएंगी ! . प्रथम भक्ति संतन को संगा, दूसरि रति मम कथा प्रसंगा। जय जय श्री राधे*

+142 प्रतिक्रिया 37 कॉमेंट्स • 83 शेयर
Shanti Pathak May 30, 2020

🌺🙏🌺जय श्री राम जय श्री हनुमानजी 🌺🙏🌺 राम नाम जप की महिमा एक गुरु युवा बालकों के एक समूह को विष्णु सहस्त्रनाम सिखा रहे थे। गुरु ने श्लोक दोहराया: श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥ फिर उन्होंने लड़कों से कहा, अगर तुम तीन बार राम नाम का जाप करते हो तो यह सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या १००० बार ईश्वर के नाम का जाप करने के बराबर है। उनमें से एक लड़का अध्यापक से सहमत नहीं था। उसने शिक्षक से प्रशन किया, गुरूजी! ३ बार = १००० बार कैसे हो सकता है? मुझे इसका तर्क समझ में नहीं आया। ३ नाम = १००० नाम कैसे? ज्ञानी तथा निपुण गुरु, जो भगवान राम के एक महान भक्त थे, ने अति सरलता से समझाया, भगवान शिव कहतें हैं कि भगवान राम का नाम सभी शब्दों से अधिक मधुर है और इस नाम का जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु के १००० नामों के जाप के समतुल्य है। इस बात की पुष्टि करने के लिए कि ३ बार राम नाम का जाप = १००० बार या सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम के जाप के बराबर है, यहाँ एक दिलचस्प संख्यात्मक गणना है- राम के नाम में संस्कृत के दो अक्षर हैं- र एवं म र (संस्कृत का द्वितीय व्यंजन : य, र, ल, व, स, श) म (संस्कृत का पाँचवा व्यंजन : प, फ, ब, भ, म) र और म के स्थान पर २ तथा ५ रखने से राम = २* ५= १० अतः तीन बार राम राम राम बोलना = २ * ५* २* ५* २* ५ = १० * १० * १० = १००० इस प्रकार ३ बार राम नाम का जाप १००० बार के बराबर है। बालक इस उत्तर से प्रसन्न हुआ और उसने पूरी एकाग्रता और निष्ठा से विष्णुसहस्त्रनाम सिखना शुरू कर दिया। आइए इस जिज्ञासु बालक का धन्यवाद करते हुए इस जानकारी को अधिकतम बंधुओं में फैलाएँ और प्रतिदिन सुबह- शाम राम नाम का जाप कम-से-कम १००० बार करें। जब किसी रीति-रिवाज़ या पूजा को करने का अर्थ या उद्देश्य दूसरों, खासकर बच्चों, को समझाते हैं तो वे इन्हें सराहते हैं। और इनका अभिप्राय समझकर, जबरदस्ती में नहीं अपितु श्रद्धा से, इनका पालन करते हैं। ज्ञान व अनुभव द्वारा बुद्धिमत्ता आती है।

+143 प्रतिक्रिया 31 कॉमेंट्स • 99 शेयर