"भगवान शिव द्वारा प्रकट की गई दस महाविद्याओं में प्रमुख आठवीं महाविद्या माँ 'बगलामुखी' का प्राकट्य पर्व वैशाख शुक्ल अष्टमी 01 मई, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन मध्य रात्रि व्यापनी नवमी के संधिकाल में माँ की आराधना का फल अमोघ रहेगा। जो लोग अनेकों समस्याओं, कष्टों एवं संघर्षों से लड़कर हताश हों चुके हों, या जिनके जीवन में निराशा ने डेरा डाल रखा है तो उन्हें माँ घोर साधना करनी चाहिए। ऐसे साधकों को सफलता देने के लिए माँ बगलामुखी प्रतिक्षण तत्पर रहती हैं। ये अपने भक्तों के अशुभ समय का निवारण कर जीवन की सभी खुशियां देकर नई चेतना का संचार करती है। इनमें संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश हैं अतः इनसे परे कुछ भी नहीं। देवी बगलामुखी जयंती पर अनुष्ठान से होगा शत्रुओं का नाश व मिलेगी कर्ज व प्रॉपर्टी संबंधित परेशानियों से मुक्ति :- 1 मई 2020 आदिकाल से ही इनकी साधना शत्रुनाश, वाकसिद्धि, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय, मारण, मोहन, स्तम्भन और उच्चाटन जैसे कार्यों के लिए की जाती रही है। इनकी कृपा से साधक का जीवन हर प्रकार की बाधाओं से मुक्त हो जाता है। माँ रत्न जड़ित सिंहासन पर विराजती हैं और रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो शत्रुओं का नाश करती हैं। इनकी सर्वाधिक आराधना रानीतिज्ञ चुनाव जीतने और अपने शत्रुओं को परास्त करने में ससंकल्प अनुष्टान रूप में करवाकर अपनी संकल्प सिद्धि करते हैं । कथा इनके प्रकट होने की कथा है कि एक बार पूर्वकाल में महाविनाशक तूफान से सृष्टि नष्ट होने लगी। चारों ओर हाहाकार मच गया। प्राणियों की रक्षा करना असंभव हो गया। यह महाविनाशक तूफान सब कुछ नष्ट करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था, जिसे देखकर पालनकर्ता विष्णु चिंतित हो शिव को स्मरण करने लगे। शिव ने कहा कि शक्ति के अतिरिक्त अन्य कोई इस विनाश को रोक नहीं सकता अतः आप शक्ति का ध्यान करें। विष्णु जी ने 'महात्रिपुरसुंदरी' को ध्यान द्वारा प्रसन्न किया, देवी विष्णु जी की साधना से प्रसन्न होकर सौराष्ट्र क्षेत्र की हरिद्रा झील में जलक्रीडा करती हुई प्रकट हुई और अपनी शक्ति के द्वारा उस महाविनाशक तूफ़ान को स्तंभित कर विष्णु जी को इच्छित वर दिया तब सृष्टि का विनाश रुका। बगलामुखी मंत्र माँ बगलामुखी का 36 अक्षरों वाला यह मंत्र 'ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं नाशय ह्लीं ॐ स्वाहा'। शत्रुओं का सर्वनाश कर अपने साधक को विजयश्री दिलाकर चिंता मुक्त कर देता है। मंत्र का जप करते समय पवित्रता का विशेष ध्यान रखें, मंत्र पीले वस्त्र पीले आसन और हल्दी की माला का ही प्रयोग करें। जप करने से पहले बगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करें। जय श्री बगलामुखी माता की जय हो भोलेनाथ नमस्कार शुभ मंगलमय प्रभात वंदन 👏 🐚 👣 🌅 🌷 🎪 🌿 🌻 👏 🌹

+152 प्रतिक्रिया 41 कॉमेंट्स • 2 शेयर

"।। संतोषी माता की आरती ।। मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की। मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की। जय जय संतोषी माता जय जय माँ॥ जय जय संतोषी माता जय जय माँ... जय जय संतोषी माता जय जय माँ।। बड़ी ममता है बड़ा प्यार माँ की आँखों में। माँ की आँखों में। बड़ी करुणा माया दुलार माँ की आँखों मे। माँ की आँखों में। क्यूँ ना देखूँ मैं बारम्बार माँ की आँखों में। माँ की आँखों में। दिखे हर घड़ी नया चमत्कार आँखों में। माँ की आँखों में। नृत्य करो झूम झूम, छम छमा छम झूम झूम, झांकी निहारो रे॥ मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की। मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की। जय जय संतोषी माता जय जय माँ॥ जय जय संतोषी माता जय जय माँ... जय जय संतोषी माता जय जय माँ ।। सदा होती है जय जय कार माँ के मंदिर में। माँ के मंदिर में। नित्त झांझर की होवे झंकार माँ के मंदिर में। माँ के मंदिर में। सदा मंजीरे करते पुकार माँ के मंदिर में। माँ के मंदिर में। वरदान के भरे हैं भंडार, माँ के मंदिर में। माँ के मंदिर में। दीप धरो धूप करूँ, प्रेम सहित भक्ति करूँ, जीवन सुधारो रे॥ मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की। मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की। जय जय संतोषी माता जय जय माँ॥ जय जय संतोषी माता जय जय माँ... जय जय संतोषी माता जय जय माँ।। **********" - शुक्रवारः ऐसा करने से प्रसन्न हो जाती है माँ संतोषी, देती है मनचाहा वरदान जय श्री संतोषी माता की जय श्री तुळजाभवानी माता की जय श्री छत्रपती शिवाजी महाराज 👑 जय महाराष्ट्र माझा 🚩 💐 🌺 👑 1 मई 2020 महाराष्ट्र राज्य दिवस 🚩 सर्व मित्रांना हार्दिक शुभेच्छा 🌹 👏 💐 😀 🚩 महाराष्ट्र माझा 🚩

+92 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 0 शेयर

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र शिव उवाच शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् . येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः भवेत् ॥1॥ न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् . न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥2॥ कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् . अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥ 3॥ गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति. मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम् . पाठमात्रेण संसिद्ध् येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥4॥ अथ मंत्र:- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे. ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा.." ॥ इति मंत्रः॥ "नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि. नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिन ॥1॥ नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन ॥2॥ जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे. ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका॥3॥ क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते. चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी॥ 4॥ विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण ॥5॥ धां धीं धू धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी. क्रां क्रीं क्रूं कालिका देविशां शीं शूं मे शुभं कुरु॥6॥ हुं हु हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी. भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥7॥ अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥ पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा॥ 8॥ सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्र सिद्धिं कुरुष्व मे॥ इदं तु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे. अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥ यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत् . न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥ . इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम् . जय श्री महाकाली माता की जय श्री लक्ष्मी माता की जय श्री सरस्वती माता की जय श्री बगलामुखी माता की जय श्री वैश्नवी माता की जय हो भोलेनाथ नमस्कार शुभ मंगलमय प्रभात 🌅 वंदन 👏 🐚 👣 💐🌺🌷🎪🌿🌻🌹🙏🚩🎈

+25 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 0 शेयर

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु का दिन माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन श्री हरि विष्णु की पूजा करना श्रेष्ठ होता है व इनकी अराधना से अनेक प्रकार की इच्छाएं पूरी होती हैं। तो वहीं इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करना भी लाभदायक होता है। कि कि धर्म शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण श्री हरि विष्णु का ही एक अवतार है। शास्त्रों में श्री कृष्ण की पूजन विधि के अलावा इन को समर्पित ऐसे कई मंत्रों के बारे में बताया गया है, जिनके जाप मात्र से श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। तो वहीं इन मंत्रों की शक्ति को दर्शाते हुए शास्त्रों में वर्णन किया गया है कि अगर किसी व्यक्ति पर कोई आपदा या बिकता पड़ गई हो और उसे उससे बचने का कोई तरीका दिखाई ना दे रहा हो तो केवल इन मंत्रों के जाप से उसकी समस्याएं टल सकती हैं। चलिए देर न करते हुए जानते हैं श्रीकृष्ण को समर्पित इन शक्तिशाली दो अधिक मंत्रों के बारे में- जिस व्यक्ति को कोई आप तैयार इतागी रहे हो उसे श्री कृष्ण शरणम ममः मंत्र का जाप करना चाहिए। शांति और मोक्ष पाने की कामना करने वाले व्यक्ति को ॐ ह्रषीकेशाय नमः मंत्र का जाप करना चाहिए। जिस व्यक्ति के जीवन में शत्रु के कारण अशांति फैली हो उसे क्लीं ह्रषीकेशाय नमः मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। भक्ति और वैराग्य पाने के लिए प्रातः दिन व खास तौर पर गुरुवार के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। जीवन में सौभाग्य वृद्धि ऐश्वर्या और क्लेश निवारण के लिए ॐ ऐं श्री क्लीं प्राण वल्लभाय सोः सौभाग्यदाय श्री कृष्णाय स्वाहा मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। महिलाओं को संतान प्राप्ति के लिए ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते मंत्र का जाप करना चाहिए। ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का जाप किसी भी वक्त किया जा सकता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस मंत्र का जाप करने से समस्त प्रकार की समस्याओं का निदान खुद ब खुद हो जाता है। इस बात का ध्यान रखें इन मंत्रों का जाप केवल तुलसी की माला से ही करें तथा जमीन मंत्रों का जाप कर रहे हो भगवान श्री कृष्ण के चित्र के आगे शुद्ध घी का दीपक धूप में वेद आदि लगाएं तथापूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर इस मंत्र का जाप करें। गोपिजनवल्लभाय स्वाहा नमस्कार शुभ प्रभात वंदन 👏 जय श्री कृष्ण जय श्री राधे राधे नमस्कार शुभ गुरुवार 👣 👏 🌹 जय श्री गुरुदेव दत्त 👏🌹🚩🌅🎪🌿🌻👑😀🐚🚩

+71 प्रतिक्रिया 14 कॉमेंट्स • 0 शेयर

श्री गुरुदेव दत्त! मानव जन्म पूर्व प्रारब्धाने प्राप्त होतो.जन्म घेतानाच त्याची कुंडली तयार असते. त्याच्या आयुष्य तीन प्रकारच्या संबंधाने बांधलेले असतात. एक जन्मजात संबंध! त्यात आई,वडील,भाऊ,बहीण,काका,काकी,मामा मामी,आत्या मावशी नवरा मुलगा मुलगी सून सासरे ह्या सारखे नातेवाईक संबंध…. जन्म संपला संबंध संपला. दुसरा संबंध प्रस्थापित संबंध मित्र मैत्रिणी,सह प्रवासी,कामाच्या निमित्ताने एकत्रित आलेले हे काही काळा पुरते जवळ येतात आणि सोडून जातात. तिसरा संबंध संत सनातन संबंध. जन्माच्या अगोदर होता आत्ता आहे आपल्या जन्मा नंतर ही राहणार आहे.आत्मा ज्या ज्या योनीत आहे ती चिरंजीव आहे. तो सबंध आत्मानंद देऊन जातो. त्याची भेट होण्यासाठी त्यात विलीन होण्यासाठी हा मानव जन्म आहे. ह्याचे आकलन होण्यासाठी सत्संग हवा! जे सत आहे त्याची जाणीव करून देतो त्यामुळे मानव जन्म सार्थकी लागतो. हे सुद्धा पूर्व सुकृत आहे.हे सहजासहजी प्राप्त होत नाही. कारण जन्माच्या वेळी त्या अघटित शक्तीने आपल्या सोबत सहा षडरिपुना पाठवले आहे. काम-क्रोध-लोभ-मोह-मद-मत्सर! ह्या पैकी कोणता षडरिपू मानवाची बुद्धी भ्रष्ट्र करील हे सांगता येत नाही. सगळ्यात पहिलं म्हणजे काम ज्याच्यामूळे आपला जन्म झालाय. मग क्रोध आहेच त्या जोडीला! सगळे कसे एकत्र असतात कोणीही कोणाची साथ सोडत नाहीत आणि इथेच सुरू होतो मानसिक त्रास! हा त्रास शेवटच्या घडी पर्यंत सोबत असतो तो कुणालाच चुकलेला नाही. ह्या सर्वांवर भगवंताने एक उपाय सांगितला आहे माझी अनेक रूपे आहेत तेथे अनन्य भावाने शरण जा, माझे भक्ती भावाने नाम घे तुला परमानंद प्राप्त होहिल तुझा प्रारब्ध संपणार नाही पण त्या प्रारब्धाला सामोरे जायची ताकत नक्की मिळेल! अध्यात्म प्रारब्ध संपवून घालवण्यासाठी नाही भोग भोगून घालवण्यासाठी आहे आणि त्यासाठीच अनेक उपाय आहेत जप जाप्य, पोथी वाचन,तीर्थ यात्रा,कथा श्रवण इत्यादी. ह्यातील कोणत्याही मार्गाने वाटचाल कराल तर नक्कीच मोक्ष जो काही म्हणतात तो मिळेल. मोक्ष मिळेल की नाही हे माहीत नाही पण समाधान नक्कीच मिळेल ह्यात शंका नाही! सर्वात शेवटी जीवनात समाधान नसेल तर लाखो रुपयांची प्रॉपर्टी-गाडी-बांगला-मुले बाळे असून मन जर समाधानी नसेल तर सगळे फुकट! ह्यासाठी जे सत आहे त्याची कास धरा. त्यासाठी स्वामी महाराज सांगून गेले कलियुगात कलीच्या त्रासापासून वाचायचे असेल तर तुम्ही तुमच्या आराध्य दैवताचे नाम घ्या! तुमचे आराध्य दैवत पदोपदी साथ देईल ह्याची ग्वाही स्वामी महाराजांनी दिली आहे! तूच तुझ्या जीवनाचा शिल्पकार! श्री स्वामी समर्थ! श्री गुरुदेव दत्त! श्रीपाद श्रीवल्लभ नरहरी दत्तात्रेया दिगंबरा।। वासुदेवानंद सरस्वती सद्गुरूंनाथा कृपा करा!!! श्रीपाद श्रीवल्लभ नरहरी दत्तात्रेया दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा नमस्कार शुभ प्रभात वंदन 👏 🐚 👣 🌅 🌷 🎪 🌿 🌻 👏 🌹 🌾 नमस्कार शुभ गुरुवार 1 मे महाराष्ट्र राज्य दिवस सर्व मित्रांना हार्दिक शुभेच्छा 🌹 👏 💐 😀 🚩 🙏

+28 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 8 शेयर

"एक ईंट से इतना क्यों था साईं बाबा को लगाव, इसके टूटने के बाद ले ली थी Sai Kripa Part 4 : साईं की समाधि लेने के पीछे का कारण आज भी एक रहस्य है। ईंट टूट जाने या तात्या की जीवन रक्षा के लिए उन्होंने समाधि ली थी, आज भी रहस्य ही है। एक ईंट से इतना क्यों था साईं बाबा को लगाव, इसके टूटने के बाद ले ली थी समाधि साईं के माता-पिता बालकाल में ही परलोक सिधार गए थे और साईं बालकाल से ही फकीरी का जीवन जीने लगे थे। एक बार वैंकुंशा ने उन्हें देखा और अपने आश्रम में शिक्षा देने के लिए ले आए। साईं यहीं रह कर अपनी दीक्षा लेते और भिक्षा मांगा करते थे। भिक्षा में वह जो कुछ मांग कर लाते थे उसे उसका उपभोग वह स्वयं नहीं करते थे, वह चिड़िया, जानवर या किसी जरूरतमंद को सामान दे दिया करते थे। वह आश्रम में रहने वाले अन्य शिष्यों से बेहद अलग थे और यही कारण था कि वैकुंशा उन्हें बहुत प्रेम करते थे और बाकी की आश्रम के शिष्य उनसे चिढ़ते थे। ईंट से लगाव था ये कारण साईं के पास एक ईंट तब तक रही जब तक वह समाधि नहीं ले लिए। इस ईंट से लगाव के पीछे एक उनके साथ हुई घटना थी। सांईं जब वैंकुशा के आश्रम में पढ़ते थे तब वैंकुंशा को एक दिन अपनी मृत्यु का आभास हुआ। वह साईं को अपनी मृत्यु के पूर्व अपनी सारी शक्तियां दे दीं और वे बाबा को एक जंगल में ले गए। जंगल में उन्होंने पंचाग्नि तपस्या की। वहां से लौटते वक्त कुछ कट्टरपंथी लोग सांईं बाबा पर ईट बरसाने लगे। यह देख वैंकुशा तुरत वहां आए और साईं का बचाव किया। बचाव में वैंकुशा के सिर पर एक ईंट लग गई और उनके सिर से खून बहने लगा। तब साईं ने अपने कपड़े से उनका खून साफ किया। वैंकुशा उसी कपड़े का साईं के माथे पर तीन फेरे में बांध दिया और साईं से कहा कि ये तीन फेरे संसार से मुक्त होने और ज्ञान व सुरक्षा के हैं। इसके बाद साईं ने वह ईंट उठा कर अपने झोली में डाल ली जिससे वैंकुशा को चोट लगी थी। इसके बाद बाबा ने जीवनभर इस ईंट को ही अपना सिरहाना बनाए रखा। ईंट टूट गई तो साईं ने कहा उनके दिन पूरे हुए सन् 1918 में सितंबर माह में दशहरे के दिन साईं भिक्षाटन को निकले थे। उधर उनके आश्रम में साईं के भक्त सफाई में जुटे थे का उनके भक्त माधव के हाथ से वह ईंट गिरकर टूट गई। यह देख सभी भक्त सकते में आ गए। बाबा भी भिक्षाटन से वापस आए गए और टूटी हुई ईंट को देख कर मुस्कारा कर बोले कि लगता है उनके दिन अब पूरे हो गए। साईं ने कहा कि ये ईंट उनकी जीवनसंगनी थी और जब वह नहीं रही तो मेरा भी समय समझ लो पूरा हुआ। इसके बाद से ही साईं अपने महासामाधि की तैयारी में लग गए। तात्या से था बेहद लगाव दशहरे के कुछ दिन पहले ही सांईं ने अपने एक भक्त रामचन्द्र पाटिल को दशहरे पर 'तात्या' की मृत्यु होने की जानकारी दी थी। तात्या बैजाबाई के पुत्र थे और बैजाबाई सांईं की अनन्य भक्त थीं। तात्या, सांईं को मामा कह कर पुकारते थे। ऐसा माना जाता है कि तात्या को जीवनदान देने के लिए साईं ने अपने शरीर का बलिदान किया था। जय श्री साई राम 👏 🌹 जय श्री गुरुदेव दत्त जय श्री स्वामी समर्थ जय श्री गजानन महाराज 👑नमस्कार शुभ प्रभात वंदन 👏 🐚 👣 🌅 🌷 🎪 🌹👏💐🌺🌻🌷🌿🌾🍃💐🚩🙏🎪

+17 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 5 शेयर

1 "मेरा मन नहीं" मचल उठता है मन     जब उनका दीदार                होता है लेकिन/कोई समझ    नहीं सकता उनको सिर्फ/मेरा मन ही         उनको महसूस         उनका अहसास              कर सकता हैं वो तो मेरे हृदय में        वास करते हैं मेरे मित्र         मेरे दिल में         मेरे मन में     रहते हैं।। 2 "कुछ खास नहीं" विचारों का मौसम      दे रहा संदेश कुछ खास नहीं       पर है ये विशेष समझो पल पल की            बारीकियां कहीं रह ना जाए शेष हम सब रहें सजग     करें प्रयास विशेष इनसे भी हम पायेंगे     सफ़लता एक दिन ऐसा ही है कुछ       ये संदेश।। 3 "यादें" बचपन की यादें     आज मुझे बचपना       याद दिला रही है वो लड़ना, झगड़ना     तितलियों का पकड़ना       बारिश के मौसम में       कागज की नाव खेना    इन यादों को फिर/       मैं एक बार पाने की            ख्वाहिश रखता हूं     पर/कहते हैं      समय लौटकर नहीं आता।। 4 "स्मृतियां" यादों के साथ साथ     मेरे दिल में बसी उनकी सुनहरी स्मृतियां    धुधंली होती          जा रही है क्या करूं अब इन        बेजान स्मृतियों         को संजोकर   जिनके सहारे        सोचा था कि हमें उनकी याद आती                 रहेगी पर ये बात भी अब     मुझसे दूर होती          जा रही है।। 5 "मरहम"   प्यार में मिले दर्दों का   कोई मरहम नहीं होता        ये दर्दे दिल तो हमेशा हमारे हृदय में         मौजूद रहता   पर हम चाहें तो कुछ   मरहम खुद लगा             सकते हैं    अपना वक्त कुछ         करने में व्यतीत करके।। 6 "परिस्थितियां" विषम परिस्थितियों       में फंसा इंसान उनसे मुक्त रहने              के लिए बहुत ही संघर्ष करता है      उसी संघर्ष की राह          पकड़कर   वो इन विषम परिस्थितियों का सामना             हरदम करता है और/अंत समय        निश्चय ही वो       विजय पा लेता है 7 "हसरत मेरी" एक अरमां एक आरज़ू थी तुम्हारा साथ पाने की       यह हसरत मेरी अधूरी ही रह गई तुम्हारे चलें जाने से हम क्या करें       रस्मों रिवाजों का      बिन तुम्हारे आने वाले ख्वाबों का।। 8 "बंधन" किसी का किसी के साथ किसी भी रूप में बंधन रहता ही है हम चाहें इसे कोई सा भी नाम दें चाहें स्नेह         प्यार चाहें कुछ भी कह लें यह तो हर एक से            हर एक का बंधन तो रहेगा ही।। -- यही कविताए किसी की हैं ये मालूम नहीं लेकिन अच्छे जरूर हैं मुझे बहोत खूब मन को भा गई नमस्कार शुभ रात्री वंदन 👏 जय श्री कृष्ण राधे राधे नमस्कार शुभ रात्री वंदन 👏 🐚 👣 🚩✨🌙⛺🌾🌈🎪🌻🌺🎈👌👍

+43 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 3 शेयर

"बगलामुखी जयंती 2020: बाधाओं से मुक्ति के लिए करें मां बगलामुखी के इस मंत्र का जाप मां बगलामुखी की साधना काफी शुभ एवं लाभ पहुंचाने वाली है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। इसी तिथि पर भगवान शिव के द्वारा प्रकट की गई दस महाविद्याओं में प्रमुख आठवीं महाविद्या माँ बगलामुखी प्रगट हुईं थीं। इस बार यह 01 मई 2020 को है। मां बगलामुखी को पीला रंग बहुत ही प्रिय होता है। इसी कारण से मां बगलामुखी को पीताम्बारा भी कहते हैं। मां बगलामुखी की साधना करने से तमाम तरह की परेशानियों और शत्रु से जुड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं मां बगलामुखी। इनकी कृपा से साधक का जीवन हर प्रकार की बाधाओं से मुक्त हो जाता है। सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिल कर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती। माता बगलामुखी की पूजा करने से शत्रुओं की पराजय होती है और सभी तरह के वाद-विवाद में विजय प्राप्त होती है। मां बगलामुखी की पूजा से लाभ शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद-विवाद में विजय आदि के लिए मां बगलामुखी की साधना काफी शुभ एवं लाभ पहुंचाने वाली है। बगलामुखी मां की उपासना से हर प्रकार के तंत्र से निजात मिलती है। देवी बगलामुखी जयंती पर अनुष्ठान से होगा शत्रुओं का नाश व मिलेगी कर्ज व प्रॉपर्टी संबंधित परेशानियों से मुक्ति :- 1 मई 2020 बगलामुखी मंत्र माँ बगलामुखी की जयंती पर उनकी पूजा करते समय इस मंत्र का जप करना उपयोगी होता है। 'ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं नाशय ह्लीं ॐ स्वाहा'। जय श्री बगलामुखी माता की जय हो भोलेनाथ नमस्कार शुभ मंगलमय संध्याकाळ वंदन 👏 🐚 👣 🌆🌄 🌷 🎪 🌿बगलामुखी माता की जयंती उत्सव 🎉 की हार्दिक शुभकामना ये शुभ रात्री वंदन 👏 🌻 🚩💐🌺🌈

+58 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 3 शेयर