दुनिया के हर कोने में भगवान शिव के भक्तगण बहुत ही देखने को मिलते हैं। सावन के महीने में भोलेनाथ की आराधना करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती हैं। दुनिया के हर कोने में भगवान शिव के भक्तगण बहुत ही देखने को मिलते हैं। सावन के महीने में भोलेनाथ की आराधना करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती हैं। इसके साथ ही व्यक्ति को मनचाहा वरदान मिलता है। कहते हैं कि सावन के पूरे माह में शिवलिंग की पूजा करने से सारे पाप धूल जाते हैं। तो वहीं अगर हम बात करें ज्योतिर्लिंग के पूजन के बारे में तो उसकी पूजा से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन क्या किसी ने ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग के बारे में ये जानने की कोशिश की है कि उनमें क्या फर्क है। बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग को एक समान ही मानते हैं। लेकिन हम बता दें कि इन दोनों में बहुत ही अंतर होता है। ऐसे में अगर आप भी नहीं जानते इनके अंतर के बारे में तो आइए जाने विस्तार से।  शिवपुराण में एक कथा है, जिसके अनुसार एक बार सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और जगतपालक विष्णु में विवाद हुआ कि उनमें श्रेष्ठ कौन है? तब उन दोनों का भ्रम समाप्त करने के लिए शिव एक महान ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट हुए, जिसकी थाह ये दोनों देव नहीं पा सके। इसी को ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। वहीं जूसरी ओर लिंग का अर्थ होता है प्रतीक, यानि शिव के ज्योति रूप में प्रकट होने और सृष्टि के निर्माण का प्रतीक। ज्योतिर्लिंग सदैव स्वयंभू होते हैं जबकि शिवलिंग मानव द्वारा स्थापित और स्वयंभू दोनों हो सकते हैं। हिंदू धर्मग्रंथों में शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख मिलता है। जहां-जहां ये शिव ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, आज वहां भव्य शिव मंदिर बने हुए हैं। चलिए जानते हैं उनके बारे में।  सोमेश्वर या सोमनाथ : यह प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है, जो गुजरात के सौराष्ट्र प्रदेश में स्थित है। इसे प्रभास तीर्थ भी कहते हैं। श्रीशैलम मल्लिकार्जुन : यह आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में श्रीशैल नामक पर्वत पर स्थित है। इसे दक्षिण का कैलाश भी माना गया है। महाकालेश्वर : यह मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। इसे प्राचीनकाल में अवन्तिका या अवंती कहा जाता था। ओंकारेश्वर : यह ज्योतिर्लिंग भी मध्य प्रदेश में है। राज्य के मालवा क्षेत्र में स्थित यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। केदारेश्वर : यह शिव ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में हिमालय की चोटी पर विराजमान श्री केदारनाथजी या केदारेश्वर के नाम से विख्यात है। श्री केदार पर्वत शिखर से पूर्व में अलकनन्दा नदी के किनारे भगवान बद्रीनाथ का मन्दिर है। भीमाशंकर : महाराष्ट्र में स्थित है यह ज्योतिर्लिंग भीमा नदी के किनारे सहयाद्रि पर्वत पर हैं। भीमा नदी इसी पर्वत से निकलती है। विश्वेश्वर : वाराणसी या काशी में विराजमान भूतभावन भगवान श्री विश्वनाथ या विश्वेश्वर महादेव को सातवां ज्योतिर्लिंग माना गया है। त्र्यम्बकेश्वर : भगवान शिव का यह आठवां ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक जिले में ब्रह्मगिरि के पास गोदावरी नदी के किनारे स्थापित है। वैद्यनाथ महादेव : इसे बैजनाथ भी कहते हैं। यं नौवां ज्योतिर्लिंग है, जो झारखण्ड राज्य देवघर में स्थापित है। इस स्थान को चिताभूमि भी कहा गया है। नागेश्वर महादेव : भगवान शिव का यह दसवां ज्योतिर्लिंग बड़ौदा क्षेत्र में गोमती द्वारका के समीप है। इस स्थान को दारूकावन भी कहा जाता है। इस ज्योतिर्लिंग लेकर कुछ विवाद भी है। अनेक लोग दक्षिण हैदराबाद के औढ़ा ग्राम में स्थित शिवलिंग का नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मानते हैं। रामेश्वरम : श्री रामेश्वर एकादशवें ज्योतिर्लिंग है. इस तीर्थ को सेतुबन्ध तीर्थ कहा गया है। यह तमिलनाडु में समुद्र के किनारे स्थपित है। घृष्णेश्वर : इस द्वादशवें ज्योतिर्लिंग को घृष्णेश्वर या घुसृणेश्वर के नाम से भे जाना जाता है। यह महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद जिला दौलताबाद से लगभग 18 किलोमीटर दूर वेरूळ गांव के पास स्थित है। इह संसारे खलु दुस्तारे कृपया पारे पाहि त्रेलोक्यस्य महाकाल जी मला पार कर अशी प्रार्थना करीत हर हर महादेव का पूजा नमस्कार 🙏 जय श्री महाकाली माता की जय श्री महाकाल जी नमस्कार 🙏 ॐ नमः शिवाय जय श्री भोलेनाथ नमस्कार 🙏 शुभ मध्यान्ह नमस्कार 🙏 🌅 👣 👏 🚩 शुभ रविवार जय श्री सुर्य नारायण जय श्री महाकाली माता की जय श्री महाकाल जी नमस्कार 🙏

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संत दगाजी महाराज ट्रस्टतर्फे तापी मातेचा जन्मोत्सव उत्साहात साजरा करण्यात आला. यावेळी तापीमातेला साडी-चोळी तसेच साजश्रृंगार अर्पण करण्यात आला. पौराणिक परंपरेनुसार दक्षिण काशी म्हणून संबोधल्या जाणार्‍या प्रकाशा येथील सूर्यकन्या तापीनदीचा जन्म दिवस आषाढ शुध्द सप्तमीला साजरा करण्यात येतो. या ठिकाणी धार्मिक मुहूर्तच्या पार्श्वभूमीवर असंख्य भाविकांनी श्री संगमेश्वर मंदिराजवळील तापी-गोमाई नदीच्या संगमावर तापी मातेचे पूजन, धार्मिक विधी, मंत्रोच्चार करून येथील संत दगाजी महाराज ट्रस्टचे संचालक मोहन चौधरी यांनी सपत्नीक सूर्यकन्या तापी मातेला साडी, चोळी, फुल माळ, सप्तश्रृंगार अर्पण केले. याप्रसंगी अनेक भाविक जोडप्यांनी पूजनाच्या कार्यक्रमात सहभाग घेतला. तापी माता स्तोत्र, मंत्र महात्म्य, आरती, विधीवत पूजा, पुरोहित राजनाथ भट यांनी करुन धार्मिक पूजापाठ केले. साडी,चोळी वस्त्र श्रृंगार अर्पण करुन तापी मातेचा जय जय कार करण्यात आला. भाविकांनी पवित्र स्नान केले. दरम्यान, जन्मोत्सव साजरा करण्याकरिता श्रृंगार वस्त्राची श्री. तोताराम महाराज मंदिर येथून भाविकांनी शोभायात्रा काढली. थेट संगमेश्वर मंदिरापर्यंत सदर शोभायात्रा काढण्यात आली. यात असंख महिला भाविक उपस्थित होते. तापी नदीच्या काठावर गावातील भजनी मंडळींनी भजन कीर्तन, तापी माता महात्म्य, स्तोत्र पठन केले. यावेळी भा जपाचे तालुका अध्यक्ष हरी दत्तू पाटील, किशोर मुरार पाटील, दिलीप पाटील, सतीश पाटील, अशोक शिवदास पाटील, काशीनाथ पाटील, लड्डूभाई पाटील, काशीनाथ हरी पाटील, सतीश पाटील, रामचंद्र वेडू पाटील, मधुकर पाटील, रामचंद्र गोविंद पाटील, विश्वनाथ टेलर, पंकज महाराज, मोहन पाटील, गुलाल पाटील आदी उपस्थित होते. श्री केदारेश्वर मंदिर येथील तापी मातेच्या मूर्तीच्या दर्शनासाठी भाविकांनी दिवसभर रांगा लागल्या होत्या. जय श्री गंगाधर जय श्री गंगे हर हर गंगे नमामी गंगे नमस्कार शुभ प्रभात 🌅 👣 वंदन 🚩 नमस्कार 🙏 मित्रांनो जय श्री भोलेनाथ ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव नमस्कार शुभ प्रभात 🌅 शुभ शनिवार जय जय रघुवीर समर्थ नमस्कार जय श्री राम 👏 🚩 🙏

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सावन का महीना चल रहा है और इसमें भक्त शिव-शक्ति दोनों की ही आराधना में लीन रहते हैं। शक्ति के बिना शिव ‘शव’ है, शिव और शक्ति एक-दूसरे से उसी प्रकार अभिन्न है जिस प्रकार सूर्य और उसका प्रकाश, अग्नि और उसका ताप तथा दूध और उसकी सफेदी। अगर आप आनंद दायक जीवन जीना चाहते हैं तो, सावन मास में भगवान अर्धनारी नटेश्वर ( ardhanari nateshwar path ) की इस कामना पूर्ति स्तुति का पाठ जरूर करें। इसके पाठ से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती है। शिव महापुराण में उल्लेख आता है कि- ।। शंकर: पुरुषा: सर्वे स्त्रिय: सर्वा महेश्वरी।। अर्थात्– समस्त पुरुष भगवान सदाशिव के अंश और समस्त स्त्रियां भगवती शिवा की अंशभूता हैं, उन्हीं भगवान अर्धनारीश्वर से यह सम्पूर्ण चराचर जगत् व्याप्त है। ।। अथ अर्धनारी नटेश्वर स्तोत्र ।। 1- चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय। धम्मिल्लकायै च जटाधराय नम: शिवायै च नम: शिवाय।। 2- कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै चितारज:पुंजविचर्चिताय। कृतस्मरायै विकृतस्मराय नम: शिवायै च नम: शिवाय।। 3- चलत्क्वणत्कंकणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणीनूपुराय। हेमांगदायै भुजगांगदाय नम: शिवायै च नम: शिवाय।। 4- विशालनीलोत्पललोचनायै विकासिपंकेरुहलोचनाय। समेक्षणायै विषमेक्षणाय नम: शिवायै च नम: शिवाय।। 5- मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालांकितकन्धराय। दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नम: शिवायै च नम: शिवाय।। 6- अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय। निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नम: शिवायै च नम: शिवाय।। 7- प्रपंचसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय। जगज्जनन्यैजगदेकपित्रे नम: शिवायै च नम: शिवाय।। 8- प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय। शिवान्वितायै च शिवान्विताय नम: शिवायै च नम: शिवाय।। अर्धनारीनटेश्वर स्तुति का फल एतत् पठेदष्टकमिष्टदं यो भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी। प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं भूयात् सदा तस्य समस्तसिद्धि:।। अर्थात- आठ श्लोकों का यह स्तोत्र अभीष्ट सिद्धि करने वाला है। जो व्यक्ति भक्तिपूर्वक इस स्त्रोत का पाठ करता है, वह समस्त संसार में सम्मानित होता है और दीर्घजीवी बनता है, वह अनन्त काल के लिए सौभाग्य व समस्त सिद्धियों को प्राप्त करता है। ।। इति आदिशंकराचार्य विरचित अर्धनारीनटेश्वरस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ।। **************** जय श्री भोलेनाथ ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव नमस्कार शुभ प्रभात 🌅 👣 वंदन 🚩 नमस्कार 🙏 मित्रों जय माता की 🙏 जय श्री महाकाली माता की जय श्री महाकाल जी नमस्कार 🙏 🌅 शुभ प्रभात 🙏 शुभ शनिवार शुभ दिवस नमस्कार 🙏

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जय श्री महाकाली माता की जय श्री महाकाल जी जय श्री गुरुदेव जय श्री राम जय जय राम जय श्री हनुमान जी नमस्कार शुभ प्रभात 🌅 👣 वंदन 🚩 नमस्कार 🙏 मित्रों जय श्री राम 👏 🚩 🙏 🌅 शुभ प्रभात 🙏 शुभ शनिवार जय जय रघुवीर समर्थ नमस्कार 🙏 यदि ठीक सूर्योदय के समय हम स्नान करते हैं तो यह धर्म की नजरिए से बहुत शुभ होता है। शास्त्रों में सुबह जल्दी नहाने के कई चमत्कारी फायदे बताए गए हैं। नहाते समय यहां दी गई बातों का ध्यान रखेंगे तो सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त हो सकती है और कुंडली के दोष भी शांत हो सकते हैं। डेस्क। जो लोग प्रतिदिन नहाते हैं, उन्हें स्वास्थ्य और धर्म की दृष्टि से कई लाभ प्राप्त होते हैं। यदि ठीक सूर्योदय के समय हम स्नान करते हैं तो यह धर्म की नजरिए से बहुत शुभ होता है। शास्त्रों में सुबह जल्दी नहाने के कई चमत्कारी फायदे बताए गए हैं। नहाते समय यहां दी गई बातों का ध्यान रखेंगे तो सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त हो सकती है और कुंडली के दोष भी शांत हो सकते हैं। प्रतिदिन स्नान यानी नहाना सेहत की दृष्टि से अनिवार्य होता है। लेकिन प्राचीन धर्मग्रंथों में स्नान से जुड़ी पवित्र मान्यताएं हैं। एक सुनिश्चित समय निर्धारित है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पढ़ें विस्तार से.... सुबह जल्दी नहाने के फायदे...   शास्त्रों के अनुसार सुबह जल्दी जागना अनिवार्य बताया है। जल्दी जागकर सूर्योदय से पूर्व नहाने से त्वचा की चमक बढ़ती है और दिनभर के कामों में आलस्य का सामना नहीं करना पड़ता है। जबकि जो लोग देर से नहाते हैं, उनमें आलस्य अधिक रहता है, वे जल्दी थक जाते हैं और कम उम्र में ही त्वचा की चमक कम हो सकती है।   सुबह जल्दी जागकर नहाने के बाद प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। सूर्य को जल चढ़ाने से मान-सम्मान प्राप्ति होती है, ऑफिस हो या घर आपके कार्यों को सराहना मिलती है।   नहाने से पहले तेल मालिश करें   नहाने से पहले शरीर की अच्छी तरह से तेल मालिश करना चाहिए। तेल मालिश से स्वास्थ्य और त्वचा, दोनों को ही लाभ प्राप्त होता है। इससे त्वचा की चमक बढ़ती है। -इस संबंध में यह ध्यान रखना चाहिए कि मालिश के आधे घंटे बाद शरीर को रगड़-रगड़ कर नहाना चाहिए। नहाने के बाद तेल पूरी तरह साफ हो जाना चाहिए। तेल मालिश से शरीर के रोम छिद्रों के द्वार साफ हो जाते हैं। रोम छिद्रों की गंदगी नहाने के बाद निकल जाती है। जिससे वातावरण से प्राप्त होने वाली ऊर्जा सीधे-सीधे शरीर का मिलने लगती है। नहाते समय करें मंत्रों का जप   शास्त्रों के अनुसार दिन के सभी आवश्यक कार्यों के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं। नहाते समय भी हमें मंत्र जप करना चाहिए। स्नान करते समय किसी मंत्र का पाठ किया जा सकता है या कीर्तन या भजन या भगवान का नाम लिया जा सकता है। ऐसा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।   नहाते समय इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ रहता है...   मंत्र: गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।। नहाते समय सिर पर डाले पहले पानी   नहाते समय सबसे पहले सिर पर पानी डालना चाहिए इसके बाद पूरे शरीर पर। इसके पीछे भी वैज्ञानिक कारण है, इस प्रकार नहाने से हमारे सिर एवं शरीर के ऊपरी हिस्सों की गर्मी पैरों से बाहर निकल जाती है। इस प्रकार नहाने से पूरे शरीर को शीतलता प्राप्त होती है, जिससे मन शांत होता है, आलस्य और थकावट भी दूर हो जाती है। सुबह के स्नान को धर्मग्रंथों में चार उपनाम दिए है। मुनि स्नान: सुबह 4 से 5 के बीच किया जाता है।  देव स्नान: सुबह 5 से 6 के बीच किया जाता है। मानव स्नान: सुबह 6 से 8 के बीच किया जाता है। राक्षसी स्नान: सुबह 8 के बाद किया जाता है। ` मुनि स्नान सर्वोत्तम है। ` देव स्नान उत्तम है। ` मानव स्नान सामान्य है। ` राक्षसी स्नान धर्म में निषेध है। किसी भी मनुष्य को 8 के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। जय श्री राम 👏 शुभ प्रभात 🙏 शुभ शनिवार शुभ दिवस नमस्कार 🙏 जय श्री महाकाली माता की जय श्री गणेश जी जय श्री महाकाल जी नमस्कार 🙏

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श्रीराम या शब्दातील ‘श्री’ म्हणजे शक्ती, सौंदर्य, सद्गुण, वैभव इत्यादींचा समुच्चय. यामुळेच श्रीकृष्णाप्रमाणे ‘श्रीराम’ या नावामध्ये ‘श्री’च्या नंतर पूर्णविराम नाही; कारण श्रीराम हा स्वतःच भगवंत आहे. असा हा श्यामवर्ण, कमलनेत्र, आनंददायी अन् वात्सल्यमूर्ती श्रीराम म्हणजे अनेक भाविकांची श्रद्धाज्योत ! रामभक्तांनो, आपल्या परम श्रद्धेय श्रीरामाची उपासना आपण विविध प्रकारे करत असतो; परंतु श्रीरामाच्या उपासनेसंदर्भातील शास्त्र समजून घेतल्यास उपासनेशी संबंधित कृती योग्यरीत्या करणे सुलभ होईल. श्रीरामाची पूजा श्रीरामाची पूजा करतांना त्याला करंगळीजवळच्या बोटाने, म्हणजेच अनामिकेने गंध लावावे. तसेच श्रीरामाला हळद-कुंकू वहातांना आधी हळद अन् नंतर कुंकू, उजव्या हाताच्या अंगठा आणि अनामिका यांच्या चिमटीत घेऊन चरणांवर वाहावे. अंगठा आणि अनामिका जोडून तयार होणार्‍या मुद्रेमुळे पूजकाच्या देहातील अनाहतचक्र जागृत होते. त्यामुळे पूजकामध्ये भक्तीभाव निर्माण होण्यास साहाय्य होते. श्रीरामाला वाहायची विशिष्ट फुले विशिष्ट फुलांमध्ये विशिष्ट देवतेचे तत्त्व आकृष्ट करण्याची क्षमता अन्य फुलांच्या तुलनेत अधिक असते. श्रीरामाला केवडा, चंपा, चमेली अन् जाई ही फुले वाहावीत. या फुलांच्या गंधामुळे श्रीरामाचे तत्त्व मूर्तीत अधिक प्रमाणात आकर्षित होते आणि देवतेच्या तत्त्वाचा आपल्याला लाभ होतो. श्रीरामाला चार किंवा चारच्या पटीत फुले वाहावीत. श्रीरामाच्या उपासनेत वापरायची उदबत्ती विशिष्ट देवतेचे तत्त्व विशिष्ट गंधाकडे लवकर आकृष्ट होते. केवडा, चंपा, चमेली, जाई, चंदन, वाळा आणि अंबर या गंधांकडे रामतत्त्व लवकर आकृष्ट होते. यामुळे या गंधांच्या उदबत्त्या श्रीरामाच्या उपासनेत वापरल्यास रामतत्त्वाचा लाभ अधिक प्रमाणात होतो. श्रीरामासह सर्व देवतांना भक्तीच्या पहिल्या टप्प्यात दोन उदबत्त्यांनी ओवाळणे अधिक योग्य आहे, तर भक्तीच्या पुढच्या टप्प्यात देवतेला एका उदबत्तीने ओवाळावे. देवतेला ओवाळतांना उदबत्ती उजव्या हाताची तर्जनी म्हणजे अंगठ्याजवळचे बोट आणि अंगठा यांनी धरून ती घड्याळ्याच्या काट्याच्या दिशेने तीन वेळा ओवाळावी. श्रीरामाला घालावयाच्या प्रदक्षिणा श्रीरामाच्या देवळात दर्शन घेतल्यानंतर चार प्रदक्षिणा घालाव्यात. ब्रह्मचर्याश्रम, गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थाश्रम आणि संन्यासाश्रम या चारही आश्रमांचे आदर्शरीत्या पालन करणारा राजा म्हणजे श्रीराम; म्हणून श्रीरामाच्या देवळात दर्शन घेतल्यानंतर श्रीरामाला चार प्रदक्षिणा घालाव्यात. जय श्री राम जय जय राम जय श्री हनुमान जी जय श्री शनि देव महाराज 👑 नमस्कार 🙏 🌅 शुभ प्रभात 🙏 शुभ शनिवार जय जय रघुवीर समर्थ नमस्कार 🙏 नमस्कार मित्रांनो जय श्री राम 👏 🚩 🙏

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भगवान शिव का महीना सावन का महीना चल रहा है। आज हम आपको ऐसी जानकारी देंगे जो सबके लिए जानना बहुत जरूरी है। किसी भी मंदिर में या हमारे घर में जब भी पूजन कर्म होते हैं तो वहां कुछ मंत्रों का जाप अनिवार्य रूप से किया जाता है। सभी देवी-देवताओं के मंत्र अलग-अलग हैं, लेकिन जब भी आरती पूर्ण होती है तो यह मंत्र विशेष रूप से बोला जाता है ये है मंत्र कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि। मंत्र का अर्थ इस मंत्र से शिवजी की स्तुति की जाती है। इसका अर्थ इस प्रकार है- कर्पूरगौरं– कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले। करुणावतारं– करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं। संसारसारं– समस्त सृष्टि के जो सार हैं। भुजगेंद्रहारम्– इस शब्द का अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं। सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है। ये मंत्र का पूरा अर्थ जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है। किसी भी देवी-देवता की आरती के बाद कर्पूरगौरम् करुणावतारं….मंत्र ही क्यों बोला जाता है, इसके पीछे बहुत गहरे अर्थ छिपे हुए हैं। भगवान शिव की ये स्तुति शिव-पार्वती विवाह के समय विष्णु द्वारा गाई हुई मानी गई है। शिवजी श्मशान वासी और अघोरी हैं, लेकिन फिर भी ये स्तुति बताती है कि उनका स्वरूप बहुत दिव्य है। जय श्री महाकाली माता की जय श्री महाकाल जी जय श्री गुरुदेव जय श्री गणेश जी जय श्री भोलेनाथ ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव नमस्कार शुभ रात्री 🌃 🎪 👣 वंदन 🚩 नमस्कार 🙏 मित्रों जय श्री महाकाल जी नमस्कार 🙏

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"मंत्र- दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:। दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।। शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां। शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।। फायदे- - इस मंत्र के उच्चारण से समस्त पापों का नाश होता है।   - इस मंत्र को बोलने से शत्रुओं का नाश होता है। - इस मंत्र के जाप से आरोग्य यानी अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। - घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। - इस मंत्र के उच्चारण से धन-संपत्ति में भी वृद्धि होती है। - इस मंत्र के उच्चारण से जातक को शुभ फलों की प्राप्ति भी होती है। जय श्री राम जय जय राम जय श्री हनुमान जी जय श्री महाकाल जी जय श्री महाकाली माता की जय श्री गणेश जी 🙏 शुभ संध्या वंदन 🚩 👏 👣 🌄 🚩 👏 👣 नमस्कार 🙏 जय श्री लक्ष्मी नारायण ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमोऽस्तु

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"लक्ष्मी को चंचल माना गया है। हर कोई चाहता है कि लक्ष्मी सदा उसे घर में निवास करे। हम आपको बता रहे हैं कुछ खास उपाय जिनको करने से मां लक्ष्मी आपके घर खिंची चली आएंगी। आम धारणा है कि बेटे जब आवाज दें तो मां कहीं भी हो दौडी चली आती हैं। ऐसा ही मां लक्ष्मी के साथ भी है। अगर आप मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं या उनकी कृपा दृष्टि चाहते हैं तो केवल उनके पुत्रों के नाम ही जपने होंगे। इससे मां लक्ष्मीो आपके घर खिंची चली आएंगी।ज्यो्तिष और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब लक्ष्मी जी के पुत्रों का नाम लेंगे, तो मां दौड़ी चली आयेंगी। ये ममता ही तो है, जो मां को बच्चों से जोड़ती है। गणेश जी लक्ष्मी जी के मानस पुत्र हैं। वैसे तो लक्ष्मी जी चंचला हैं, एक स्थान पर नहीं टिकतीं। लेकिन दो स्थानों पर लक्ष्मी जी सदा निवास करती हैं। पहला वह स्थान जहां विष्णु जी का अभिषेक दक्षिणावर्ती शंख से किया जाये। दूसरा वह स्थान, जहां गणपति की आराधना की जाये। तीसरा उपाय है लक्ष्मी जी के पुत्रों का नाम जपना। वैसे तो लक्ष्मी जी वहां सदा निवास करती हैं, जहां गणपति पूजे जाते हैं, लेकिन अचानक रुपये चाहिये तो एक नहीं, बल्कि लक्ष्मी जी के अनेक पुत्रों के नाम लेना होगा। ऋग्वेद में लक्ष्मी जी के 4 पुत्रों का नाम इस श्लोक में आया है -आनंद: कर्दम: श्रीदश्चिकलीत इति विश्रुता: -ऋषय: श्रिय: पुत्राश्व मयि श्रीर्देवी देवता-4/5/4/6 लेकिन आकस्मिक धन पाने के लिये आपको लक्ष्मी जी के पुत्रों के नाम लेने होंगे। इसके बाद धन की व्यवस्था स्वयं लक्ष्मी जी आकर करती हैं। जय श्री लक्ष्मी माता की जय श्री गणेश जी जय श्री लक्ष्मी नारायण नमस्कार 🙏 🌅 शुभ प्रभात 🙏 शुभ शुक्रवार जय माता लक्ष्मी जय श्री सरस्वती माता की जय श्री महाकाली माता की जय श्री वैष्णवी माता की जय श्री तुळजाभवानी माता की जय श्री पार्वती माता की 🙏 👣🌹🌈🎪👏🚩🌅☔🎈💞💦👀🌷🌿🍁🐾🌴🌵🌾🌻🌺🌼🐚👣💖👆

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