Shailendra Sengar Apr 26, 2019

बहुत साल पहले की बात है। एक आलसी लेकिन भोलाभाला युवक था आनंद। दिन भर कोई काम नहीं करता बस खाता ही रहता और सोए रहता। घर वालों ने कहा चलो जाओ निकलो घर से, कोई काम धाम करते नहीं हो बस पड़े रहते हो। वह घर से निकल कर यूं ही भटकते हुए एक आश्रम पहुंचा। वहां उसने देखा कि एक गुरुजी हैं उनके शिष्य कोई काम नहीं करते बस मंदिर की पूजा करते हैं। उसने मन में सोचा यह बढिया है कोई काम धाम नहीं बस पूजा ही तो करना है। गुरुजी के पास जाकर पूछा, क्या मैं यहां रह सकता हूं, गुरुजी बोले हां, हां क्यों नहीं?    लेकिन मैं कोई काम नहीं कर सकता हूं    गुरुजी : कोई काम नहीं करना है बस पूजा करना होगी    आनंद : ठीक है वह तो मैं कर लूंगा ...    अब आनंद महाराज आश्रम में रहने लगे। ना कोई काम ना कोई धाम बस सारा दिन खाते रहो और प्रभु मक्ति में भजन गाते रहो।    महीना भर हो गया फिर एक दिन आई एकादशी। उसने रसोई में जाकर देखा खाने की कोई तैयारी नहीं। उसने गुरुजी से पूछा आज खाना नहीं बनेगा क्या    गुरुजी ने कहा नहीं आज तो एकादशी है तुम्हारा भी उपवास है ।    उसने कहा नहीं अगर हमने उपवास कर लिया तो कल का दिन ही नहीं देख पाएंगे हम तो .... हम नहीं कर सकते उपवास... हमें तो भूख लगती है आपने पहले क्यों नहीं बताया?    गुरुजी ने कहा ठीक है तुम ना करो उपवास, पर खाना भी तुम्हारे लिए कोई और नहीं बनाएगा तुम खुद बना लो।    मरता क्या न करता    गया रसोई में, गुरुजी फिर आए ''देखो अगर तुम खाना बना लो तो राम जी को भोग जरूर लगा लेना और नदी के उस पार जाकर बना लो रसोई।     ठीक है, लकड़ी, आटा, तेल, घी, सब्जी लेकर आंनद महाराज चले गए, जैसा तैसा खाना भी बनाया, खाने लगा तो याद आया गुरुजी ने कहा था कि राम जी को भोग लगाना है।     लगा भजन गाने    आओ मेरे राम जी , भोग लगाओ जी    प्रभु राम आइए, श्रीराम आइए मेरे भोजन का भोग लगाइए.....    कोई ना आया, तो बैचैन हो गया कि यहां तो भूख लग रही है और राम जी आ ही नहीं रहे। भोला मानस जानता नहीं था कि प्रभु साक्षात तो आएंगे नहीं । पर गुरुजी की बात मानना जरूरी है। फिर उसने कहा , देखो प्रभु राम जी, मैं समझ गया कि आप क्यों नहीं आ रहे हैं। मैंने रूखा सूखा बनाया है और आपको तर माल खाने की आदत है इसलिए नहीं आ रहे हैं.... तो सुनो प्रभु ... आज वहां भी कुछ नहीं बना है, सबको एकादशी है, खाना हो तो यह भोग ही खालो...   श्रीराम अपने भक्त की सरलता पर बड़े मुस्कुराए और माता सीता के साथ प्रकट हो गए। भक्त असमंजस में। गुरुजी ने तो कहा था कि राम जी आएंगे पर यहां तो माता सीता भी आईं है और मैंने तो भोजन बस दो लोगों का बनाया हैं। चलो कोई बात नहीं आज इन्हें ही खिला देते हैं।    बोला प्रभु मैं भूखा रह गया लेकिन मुझे आप दोनों को देखकर बड़ा अच्छा लग रहा है लेकिन अगली एकादशी पर ऐसा न करना पहले बता देना कि कितने जन आ रहे हो, और हां थोड़ा जल्दी आ जाना। राम जी उसकी बात पर बड़े मुदित हुए। प्रसाद ग्रहण कर के चले गए। अगली एकादशी तक यह भोला मानस सब भूल गया। उसे लगा प्रभु ऐसे ही आते होंगे और प्रसाद ग्रहण करते होंगे।    फिर एकादशी आई। गुरुजी से कहा, मैं चला अपना खाना बनाने पर गुरुजी थोड़ा ज्यादा अनाज लगेगा, वहां दो लोग आते हैं। गुरुजी मुस्कुराए, भूख के मारे बावला है। ठीक है ले जा और अनाज लेजा।    अबकी बार उसने तीन लोगों का खाना बनाया। फिर गुहार लगाई    प्रभु राम आइए, सीताराम आइए, मेरे भोजन का भोग लगाइए...    प्रभु की महिमा भी निराली है। भक्त के साथ कौतुक करने में उन्हें भी बड़ा मजा आता है। इस बार वे अपने भाई लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न और हनुमान जी को लेकर आ गए। भक्त को चक्कर आ गए। यह क्या हुआ। एक का भोजन बनाया तो दो आए आज दो का खाना ज्यादा बनाया तो पूरा खानदान आ गया। लगता है आज भी भूखा ही रहना पड़ेगा। सबको भोजन लगाया और बैठे-बैठे देखता रहा। अनजाने ही उसकी भी एकादशी हो गई।    फिर अगली एकादशी आने से पहले गुरुजी से कहा, गुरुजी, ये आपके प्रभु राम जी, अकेले क्यों नहीं आते हर बार कितने सारे लोग ले आते हैं? इस बार अनाज ज्यादा देना। गुरुजी को लगा, कहीं यह अनाज बेचता तो नहीं है देखना पड़ेगा जाकर। भंडार में कहा इसे जितना अनाज चाहिए देदो और छुपकर उसे देखने चल पड़े।    इस बार आनंद ने सोचा, खाना पहले नहीं बनाऊंगा, पता नहीं कितने लोग आ जाएं। पहले बुला लेता हूं फिर बनाता हूं।     फिर टेर लगाई प्रभु राम आइए , श्री राम आइए, मेरे भोजन का भोग लगाइए...    सारा राम दरबार मौजूद... इस बार तो हनुमान जी भी साथ आए लेकिन यह क्या प्रसाद तो तैयार ही नहीं है। भक्त ठहरा भोला भाला, बोला प्रभु इस बार मैंने खाना नहीं बनाया, प्रभु ने पूछा क्यों? बोला, मुझे मिलेगा तो है नहीं फिर क्या फायदा बनाने का, आप ही बना लो और खुद ही खा लो....    राम जी मुस्कुराए, सीता माता भी गदगद हो गई उसके मासूम जवाब से... लक्ष्मण जी बोले क्या करें प्रभु...    प्रभु बोले भक्त की इच्छा है पूरी तो करनी पड़ेगी। चलो लग जाओ काम से। लक्ष्मण जी ने लकड़ी उठाई, माता सीता आटा सानने लगीं। भक्त एक तरफ बैठकर देखता रहा। माता सीता रसोई बना रही थी तो कई ऋषि-मुनि, यक्ष, गंधर्व प्रसाद लेने आने लगे। इधर गुरुजी ने देखा खाना तो बना नहीं भक्त एक कोने में बैठा है। पूछा बेटा क्या बात है खाना क्यों नहीं बनाया?    बोला, अच्छा किया गुरुजी आप आ गए देखिए कितने लोग आते हैं प्रभु के साथ.....     गुरुजी बोले, मुझे तो कुछ नहीं दिख रहा तुम्हारे और अनाज के सिवा   भक्त ने माथा पकड़ लिया, एक तो इतनी मेहनत करवाते हैं प्रभु, भूखा भी रखते हैं और ऊपर से गुरुजी को दिख भी नहीं रहे यह और बड़ी मुसीबत है।    प्रभु से कहा, आप गुरुजी को क्यों नहीं दिख रहे हैं?    प्रभु बोले : मैं उन्हें नहीं दिख सकता।    बोला : क्यों , वे तो बड़े पंडित हैं, ज्ञानी हैं विद्वान हैं उन्हें तो बहुत कुछ आता है उनको क्यों नहीं दिखते आप?    प्रभु बोले , माना कि उनको सब आता है पर वे सरल नहीं हैं तुम्हारी तरह। इसलिए उनको नहीं दिख सकता....     आनंद ने गुरुजी से कहा, गुरुजी प्रभु कह रहे हैं आप सरल नहीं है इसलिए आपको नहीं दिखेंगे, गुरुजी रोने लगे वाकई मैंने सबकुछ पाया पर सरलता नहीं पा सका तुम्हारी तरह, और प्रभु तो मन की सरलता से ही मिलते हैं।    प्रभु प्रकट हो गए और गुरुजी को भी दर्शन दिए। इस तरह एक भक्त के कहने पर प्रभु ने रसोई भी बनाई। यह भक्ति कथा लोकश्रुति पर आधारित है।

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Shailendra Sengar Apr 26, 2019

बहुत साल पहले की बात है। एक आलसी लेकिन भोलाभाला युवक था आनंद। दिन भर कोई काम नहीं करता बस खाता ही रहता और सोए रहता। घर वालों ने कहा चलो जाओ निकलो घर से, कोई काम धाम करते नहीं हो बस पड़े रहते हो। वह घर से निकल कर यूं ही भटकते हुए एक आश्रम पहुंचा। वहां उसने देखा कि एक गुरुजी हैं उनके शिष्य कोई काम नहीं करते बस मंदिर की पूजा करते हैं। उसने मन में सोचा यह बढिया है कोई काम धाम नहीं बस पूजा ही तो करना है। गुरुजी के पास जाकर पूछा, क्या मैं यहां रह सकता हूं, गुरुजी बोले हां, हां क्यों नहीं?    लेकिन मैं कोई काम नहीं कर सकता हूं    गुरुजी : कोई काम नहीं करना है बस पूजा करना होगी    आनंद : ठीक है वह तो मैं कर लूंगा ...    अब आनंद महाराज आश्रम में रहने लगे। ना कोई काम ना कोई धाम बस सारा दिन खाते रहो और प्रभु मक्ति में भजन गाते रहो।    महीना भर हो गया फिर एक दिन आई एकादशी। उसने रसोई में जाकर देखा खाने की कोई तैयारी नहीं। उसने गुरुजी से पूछा आज खाना नहीं बनेगा क्या    गुरुजी ने कहा नहीं आज तो एकादशी है तुम्हारा भी उपवास है ।    उसने कहा नहीं अगर हमने उपवास कर लिया तो कल का दिन ही नहीं देख पाएंगे हम तो .... हम नहीं कर सकते उपवास... हमें तो भूख लगती है आपने पहले क्यों नहीं बताया?    गुरुजी ने कहा ठीक है तुम ना करो उपवास, पर खाना भी तुम्हारे लिए कोई और नहीं बनाएगा तुम खुद बना लो।    मरता क्या न करता    गया रसोई में, गुरुजी फिर आए ''देखो अगर तुम खाना बना लो तो राम जी को भोग जरूर लगा लेना और नदी के उस पार जाकर बना लो रसोई।     ठीक है, लकड़ी, आटा, तेल, घी, सब्जी लेकर आंनद महाराज चले गए, जैसा तैसा खाना भी बनाया, खाने लगा तो याद आया गुरुजी ने कहा था कि राम जी को भोग लगाना है।     लगा भजन गाने    आओ मेरे राम जी , भोग लगाओ जी    प्रभु राम आइए, श्रीराम आइए मेरे भोजन का भोग लगाइए.....    कोई ना आया, तो बैचैन हो गया कि यहां तो भूख लग रही है और राम जी आ ही नहीं रहे। भोला मानस जानता नहीं था कि प्रभु साक्षात तो आएंगे नहीं । पर गुरुजी की बात मानना जरूरी है। फिर उसने कहा , देखो प्रभु राम जी, मैं समझ गया कि आप क्यों नहीं आ रहे हैं। मैंने रूखा सूखा बनाया है और आपको तर माल खाने की आदत है इसलिए नहीं आ रहे हैं.... तो सुनो प्रभु ... आज वहां भी कुछ नहीं बना है, सबको एकादशी है, खाना हो तो यह भोग ही खालो...   श्रीराम अपने भक्त की सरलता पर बड़े मुस्कुराए और माता सीता के साथ प्रकट हो गए। भक्त असमंजस में। गुरुजी ने तो कहा था कि राम जी आएंगे पर यहां तो माता सीता भी आईं है और मैंने तो भोजन बस दो लोगों का बनाया हैं। चलो कोई बात नहीं आज इन्हें ही खिला देते हैं।    बोला प्रभु मैं भूखा रह गया लेकिन मुझे आप दोनों को देखकर बड़ा अच्छा लग रहा है लेकिन अगली एकादशी पर ऐसा न करना पहले बता देना कि कितने जन आ रहे हो, और हां थोड़ा जल्दी आ जाना। राम जी उसकी बात पर बड़े मुदित हुए। प्रसाद ग्रहण कर के चले गए। अगली एकादशी तक यह भोला मानस सब भूल गया। उसे लगा प्रभु ऐसे ही आते होंगे और प्रसाद ग्रहण करते होंगे।    फिर एकादशी आई। गुरुजी से कहा, मैं चला अपना खाना बनाने पर गुरुजी थोड़ा ज्यादा अनाज लगेगा, वहां दो लोग आते हैं। गुरुजी मुस्कुराए, भूख के मारे बावला है। ठीक है ले जा और अनाज लेजा।    अबकी बार उसने तीन लोगों का खाना बनाया। फिर गुहार लगाई    प्रभु राम आइए, सीताराम आइए, मेरे भोजन का भोग लगाइए...    प्रभु की महिमा भी निराली है। भक्त के साथ कौतुक करने में उन्हें भी बड़ा मजा आता है। इस बार वे अपने भाई लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न और हनुमान जी को लेकर आ गए। भक्त को चक्कर आ गए। यह क्या हुआ। एक का भोजन बनाया तो दो आए आज दो का खाना ज्यादा बनाया तो पूरा खानदान आ गया। लगता है आज भी भूखा ही रहना पड़ेगा। सबको भोजन लगाया और बैठे-बैठे देखता रहा। अनजाने ही उसकी भी एकादशी हो गई।    फिर अगली एकादशी आने से पहले गुरुजी से कहा, गुरुजी, ये आपके प्रभु राम जी, अकेले क्यों नहीं आते हर बार कितने सारे लोग ले आते हैं? इस बार अनाज ज्यादा देना। गुरुजी को लगा, कहीं यह अनाज बेचता तो नहीं है देखना पड़ेगा जाकर। भंडार में कहा इसे जितना अनाज चाहिए देदो और छुपकर उसे देखने चल पड़े।    इस बार आनंद ने सोचा, खाना पहले नहीं बनाऊंगा, पता नहीं कितने लोग आ जाएं। पहले बुला लेता हूं फिर बनाता हूं।     फिर टेर लगाई प्रभु राम आइए , श्री राम आइए, मेरे भोजन का भोग लगाइए...    सारा राम दरबार मौजूद... इस बार तो हनुमान जी भी साथ आए लेकिन यह क्या प्रसाद तो तैयार ही नहीं है। भक्त ठहरा भोला भाला, बोला प्रभु इस बार मैंने खाना नहीं बनाया, प्रभु ने पूछा क्यों? बोला, मुझे मिलेगा तो है नहीं फिर क्या फायदा बनाने का, आप ही बना लो और खुद ही खा लो....    राम जी मुस्कुराए, सीता माता भी गदगद हो गई उसके मासूम जवाब से... लक्ष्मण जी बोले क्या करें प्रभु...    प्रभु बोले भक्त की इच्छा है पूरी तो करनी पड़ेगी। चलो लग जाओ काम से। लक्ष्मण जी ने लकड़ी उठाई, माता सीता आटा सानने लगीं। भक्त एक तरफ बैठकर देखता रहा। माता सीता रसोई बना रही थी तो कई ऋषि-मुनि, यक्ष, गंधर्व प्रसाद लेने आने लगे। इधर गुरुजी ने देखा खाना तो बना नहीं भक्त एक कोने में बैठा है। पूछा बेटा क्या बात है खाना क्यों नहीं बनाया?    बोला, अच्छा किया गुरुजी आप आ गए देखिए कितने लोग आते हैं प्रभु के साथ.....     गुरुजी बोले, मुझे तो कुछ नहीं दिख रहा तुम्हारे और अनाज के सिवा   भक्त ने माथा पकड़ लिया, एक तो इतनी मेहनत करवाते हैं प्रभु, भूखा भी रखते हैं और ऊपर से गुरुजी को दिख भी नहीं रहे यह और बड़ी मुसीबत है।    प्रभु से कहा, आप गुरुजी को क्यों नहीं दिख रहे हैं?    प्रभु बोले : मैं उन्हें नहीं दिख सकता।    बोला : क्यों , वे तो बड़े पंडित हैं, ज्ञानी हैं विद्वान हैं उन्हें तो बहुत कुछ आता है उनको क्यों नहीं दिखते आप?    प्रभु बोले , माना कि उनको सब आता है पर वे सरल नहीं हैं तुम्हारी तरह। इसलिए उनको नहीं दिख सकता....     आनंद ने गुरुजी से कहा, गुरुजी प्रभु कह रहे हैं आप सरल नहीं है इसलिए आपको नहीं दिखेंगे, गुरुजी रोने लगे वाकई मैंने सबकुछ पाया पर सरलता नहीं पा सका तुम्हारी तरह, और प्रभु तो मन की सरलता से ही मिलते हैं।    प्रभु प्रकट हो गए और गुरुजी को भी दर्शन दिए। इस तरह एक भक्त के कहने पर प्रभु ने रसोई भी बनाई। यह भक्ति कथा लोकश्रुति पर आधारित है।

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Shailendra Sengar Apr 9, 2019

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Shailendra Sengar Apr 6, 2019

नौ दुर्गा के आगमन से सजता हैं नव वर्ष, गुड़ी के त्यौहार से खिलता हैं नव वर्ष। कोयल गाती है नववर्ष का मल्हार, संगीतमय सजता प्रकृति का आकार। चैत्र की शुरुवात से होता नव आरंभ, यही हैं नव वर्ष का शुभारम्भ।।अवनी से अंबर तक छाया नववर्ष। सिन्दूरी भोर लिए आया नववर्ष।। तैरते हवाओं में पंछी रंगीन। ले आए प्राची से उजियारे दिन। झरनों ने भैरवी में गाया नववर्ष। सिन्दूरी भोर लिए आया नववर्ष।। मधु किरणें पूरब से आई छुम-छुम। घोल गई रेवा के जल में कुमकुम।। सुखद रात सुप्रभात लाया नववर्ष। सिन्दूरी भोर लिए आया नववर्ष।। शाखों पर फूल नए चमकीली पातें। बांट रहा स्नेहिल सूरज सौगातें।। अलसायी धूप खिली भाया नववर्ष। सिन्दूरी भोर लिए आया *नववर्ष*।। *नव वर्ष की शुभकामनायें*.

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Shailendra Sengar Apr 2, 2019

।। ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ।। 🚩||सुप्रभातम्||🚩 «««««आज का पंचांग »»»» 🕉 *2 अप्रैल 2019* 🕉 *Jaipur, India* 🕉 *द्वादशी, कृष्ण पक्ष* 🕉 *चैत्र* 🔱तिथि द्वादशी 08:38:29 🔱पक्ष कृष्ण 🔱नक्षत्र शतभिष 24:48:52 🔱योग शुभ 21:09:19 🔱करण तैतुल 08:38:29 🔱करण गरज 21:49:54 🔱वार मंगलवार 🕉 *माह* 🔱(अमावस्यांत) फाल्गुन 🔱(पूर्णिमांत) चैत्र 🔱चन्द्र राशि कुम्भ 🔱सूर्य राशि मीन 🔱रितु शिशिर 🔱आयन उत्तरायण 🔱संवत्सर विलम्बी 🔱संवत्सर (उत्तर) विरोधकृत 🔱विक्रम संवत 2075 🔱विक्रम संवत (कर्तक) 2075 🔱शाका संवत 1940 🕉 *Solar Tithi 19* 🔱Solar Month चैत्र 🔱Jaipur, India 🌞सूर्योदय 06:18:20 🌒सूर्यास्त 18:43:01 🌕दिन काल 12:24:40 🌑रात्री काल 11:34:14 🌔चंद्रास्त 16:12:50 🌙चंद्रोदय 29:17:23 🕉 *At Sunrise* 🔱लग्न मीन 17°53' , 347°53' 🔱सूर्य नक्षत्र रेवती 🔱चन्द्र नक्षत्र शतभिष 🕉 *पद, चरण* 🔱2 सा शतभिष 11:23:23 🔱3 सी शतभिष 18:06:42 🔱4 सू शतभिष 24:48:52 🕉 *मुहूर्त* 🔱राहू काल 15:37 - 17:10 अशुभ 🔱यम घंटा 09:25 - 10:58 अशुभ 🔱गुली काल 12:31 - 14:04 🔱अभिजित 12:06 -12:56 शुभ 🔱दूर मुहूर्त 08:47 - 09:37 अशुभ 🔱दूर मुहूर्त 23:21 - 24:11 अशुभ 🔱लग्न मीन 17°53' , 347°53' 🔱पंचक अहोरात्र अशुभ 🕉 *चोघडिया, दिन* 🔱रोग 06:18 - 07:51 अशुभ 🔱उद्वेग 07:51 - 09:25 अशुभ 🔱चाल 09:25 - 10:58 शुभ 🔱लाभ 10:58 - 12:31 शुभ 🔱अमृत 12:31 - 14:04 शुभ 🔱काल 14:04 - 15:37 अशुभ 🔱शुभ 15:37 - 17:10 शुभ 🔱रोग 17:10 - 18:43 अशुभ 🕉 *चोघडिया, रात* 🔱काल 18:43 - 20:10 अशुभ 🔱लाभ 20:10 - 21:37 शुभ 🔱उद्वेग 21:37 - 23:03 अशुभ 🔱शुभ 23:03 - 24:30 शुभ 🔱अमृत 24:30 - 25:57 शुभ 🔱चाल 25:57 - 27:24 शुभ 🔱रोग 27:24 - 28:50 अशुभ 🔱काल 28:50- 30:17 अशुभ 🕉 *2 अप्रैल आज का राशि फल*🕉 🐏 *मेष (Aries)*: निजी प्रयासों में बेहतर बने रहेंगे। प्रेम में सफलता मिलेगी। प्रियजन से भेंट संभव है। प्रतियोगी अच्छा करेंगे। आर्थिक पक्ष हितकर रहेगा। दिन शुभ। 🐂 *वृषभ (Tauras)*: कम बोलें ज्यादा करें की नीति अपनाएं। बड़ों के प्रति विनम्र और कृतज्ञ रहें। घरेलू मामलों में स्मार्ट डिले की पॉलिसी रखें। दिन सामान्य से शुभकारक। 👭 *मिथुन (Gemini)*: सूचना और जनसंपर्क बेहतर बने रहेंगे। आवश्यक कार्यों को आज ही पूरा कर लेने की सोच रखें। रक्त संबंध मजबूत होंगे। दिन श्रेष्ठ फलकारक। 🦀 *कर्क (Cancer):* मूल्यवान भेंट की प्राप्ति संभव है। उल्लेखीय कार्यों को आगे बढ़ाने का समय है। अपनों का साथ मिलेगा। काम को बोझ न समझें। सहजता से आगे बढ़े। 🦁 *सिंह (Leo)*: अनोखी कोशिशों को समर्थन और सहयोग मिलेगा। जो सही लगे उसे निसंकोच आगे बढ़ाते रहें। प्रभावशीलता बनी रहेगी। दिन हितकारक। 👧🏻 *कन्या (Virgo):* कार्यों को निस्वार्थ कर्मयोगी की भांति करें। सफलता मिलेगी लेकिन तुरंत इसकी अपेक्षा न रखें। खर्च बढ़ा हुआ रहेगा। चापलूसों से सतर्क रहें। ⚖ *तुला (Libra)*: करियर कारोबार बेहतर बने रहेंगे। आर्थिक उन्नति का समय है। लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए यथासंभव प्रयास करें। दिन श्रेष्ठ फलकारक। तेजी दिखाएं। 🦂 *वृश्चिक (Scorpio):* प्रभावशीलता बढ़त पर रहेगी। सभी वर्गों का सहयोग जुटाने में सफल रहेंगे। घर परिवार में सुख सौख्य बना रहेगा। दिन जिम्मेदारी बढ़ाने वाला। 🏹 *धनु (Sagittarius)*: आस्था और आत्मविश्वास से असंभव को संभव कर दिखाएंगे। भ्रमण मनोरंजन में रुचि रहेगी। शुभ सूचना मिल सकती है। दिन भाग्यवर्धक। 🐊 *मकर (Capricorn):* बड़ी योजनाएं छोटी अनदेखियों से अधिक प्रभावित होती हैं। जो भी करें उसे पुख्ता करने का प्रयास करें। व्यक्तिगत मामलों में सतर्क रहें। दिन सामान्य। ⚱ *कुंभ (Aquarius):* महत्वपूर्ण प्रयासों में तेजी आएगी। स्थायित्व बढ़ेगा। दाम्पत्य में विश्वास और निजता को बल मिलेगा। भूमि भवन के मामले पक्ष में रह सकते हैं। दिन हितकर। 🧜‍♀ *मीन (Pisces)*: आवश्यक कार्यों के पूरा होने तक विश्राम से बचें। लापरवाही से काम प्रभावित होने की आशंका है। लेन देन में सतर्क रहें। खर्च पर अंकुश रखें। दिन सामान्य। *🔥🌹🚩पंकज पाराशर 🚩🌹🔥*

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Shailendra Sengar Mar 8, 2019

🌇🌇🌇🌇🌇🌇🌇🌇🌇 _*👉चिंता आसक्ति मिटाने की युक्ति*_ _*👉भोजन में तुलसी के पत्ते डालने से वह भोजन आपका नहीं, ठाकुर जी का हो जाता है। तुलसी को माता समझते हो तो एक काम करो। आप सुबह उठो तो तुलसी के 15-25 पत्ते लेकर घर के ऊपर एक पत्ता रख दो कि ‘यह घर भगवान को अर्पण। मेरा नहीं, भगवान का है।’ कन्या के सिर पर तुलसी का पत्ता रख दो, ‘यह मेरी बेटी नहीं,*_ _*आपकी है मेरे ठाकुर जी ! बेटी की मँगनी हो, शादी हो…. कब हो ? आपकी मर्जी ! आज से मैं निश्चिंत हुआ।’ बेटे की चिंता है तो उस पर भी तुलसी पत्ता रख दो कि ‘ठाकुर जी ! मेरा बेटा नहीं, आपका है।’*_ _*जहाँ अपना स्वार्थ रहता है वहाँ भगवान बेपरवाह होते हैं। अपना स्वार्थ गया, भगवान का कर दिया तो भगवान सँभालते हैं। तुलसी का पत्ता लेकर जो बहुत अच्छी वस्तु ‘मेरी-मेरी’ लगती है, उसके ऊपर रख दो, ‘मेरा गहना नहीं, भगवान का है और शरीर भगवान का है….’ ऐसा करके गहना पहनो। फिर तिजोरी के ऊपर तुलसी का पत्ता रख दो कि ‘मेरी नहीं है, ठाकुर जी की है।’ ‘मेरा-मेरा’ मान के उसमें आसक्ति की तो मरने के बाद छिपकली, मच्छर, चूहा या और कोई शरीर लेकर उस घऱ में आना पड़ेगा इसलिए भगवद् अर्पण करके अपने व कुटुम्ब के लिए यथायोग्य सत्कृत्य के लिए उसका उपयोग करो पर उसमें आसक्ति नहीं करो।*_ _*‘मेरा-मेरा’ करके कितने ही चले गये, किसी के हाथ एक तृण आया नहीं। सच पूछो तो सब चीजें भगवान की हैं, यह तो हमारे मन की बेईमानी है कि उन्हें हम ‘हमारा-हमारा’ मानते हैं।*_ 🐄🐄🐄🐄🙏🐄🐄🐄🐄

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