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🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 22 जनवरी 2021* ⛅ *दिन - शुक्रवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - शिशिर* ⛅ *मास - पौष* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - नवमी शाम 06:29 तक तत्पश्चात दशमी* ⛅ *नक्षत्र - भरणी शाम 06:40 तक तत्पश्चात कृत्तिका* ⛅ *योग - शुभ रात्रि 09:19 तक तत्पश्चात शुक्ल* ⛅ *राहुकाल - सुबह 11:27 से दोपहर 12:50 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:19* ⛅ *सूर्यास्त - 18:21* ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - 💥 *विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌷 *किसानो के लिए* 🌷 🌳 *अपना खेत हो तो खेत में पश्चिम की तरफ पीपल का पेड़ लगा दो, पितर लोग राजी होंगे व सुख शांति होगी l खेत में कुआँ पूर्व-उत्तर के कोने में हो l पश्चिम और दक्षिण की तरफ अपना निवास हो खेत में बरकत आएगी l* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *कदवृद्धि* 🌷 👉🏻 *जिन बच्चों का कद नहीं बढता वे पुलअप्स का अभ्यास करें और बेल के ६ पते व २-४ काली मिर्च हनुमानजी का स्मरण करते हुए चबा चबाकर खाएं उसमे पानी डाल के पीसकर भी खा सकते हैं l* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *कैन्सर में* 🌷 🐄 *१)सुबह मंजन करने के पहले बासी मुंह, १ तोला (१०-१२ मि. ग्रा.) देशी गाय का गौ मूत्र छानकर ले या ये न मिले तो गौझरण में १०-१२ मि.ग्रा पानी डाल के लें ....( आश्रम में मिलता है ).. थोड़े दिन में कैन्सर की बीमारी मिट जायेगी l* 🌿 *२) २० ग्राम तुलसी का रस , ५० ग्राम ताजा दही के साथ कुछ दिन सुबह - शाम लेने से कैन्सर में आराम होता है । 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏

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🌷 *संसार जड़-चेतन गुण-दोषमय* 🌷 🌅च्वांगत्सु एक मरघट से निकलता था । सांझ का वक्त था अँधेरा हो रहा था और उसका एक खोपड़ी से पैर लग गया , तो वह वही बैठ गया । उसके शिष्य भी साथ में थे , वे भी चौककर खड़े हो गये कि वह क्या कर रहा है । उसने उस खोपड़ी को सिर से लगाया और बहुत क्षमा मांगी, कि क्षमा करिये, माफ करिये, नाराज मत होइये थोड़ी देर तो शिष्य बर्दाश्त करते रहे । फिर उन्होंने कहा : आप पागल हो गए है या क्या बात है ? इस खोपड़ी से क्षमा मांगते है ? च्वांगत्सु ने कहा ; जरा सोचो अगर ये आदमी जिन्दा होता तो आज अपनी मुसीबत हो गयी होती । और यह कोई छोटा - मोटा आदमी नही , मैं तुमसे कह दूं , क्योकि यह बड़े लोगो का मरघट है । यहा सिर्फ राजा - महाराजा इस मरघट में दफनाये जाते है , आज अपनी गर्दन कट गई होती । यह तो संयोग की बात कहो कि यह मर चुका है । मगर क्षमा मांग लेना उचित है , बड़े लोग इनका क्या भरोसा , कही नाराज हो जाए , भूत - प्रेत हो नाराज हो जाए , कुछ उपद्रव खड़ा करे ! और वह उस खोपड़ी को अपने घर ले आया और उसको सदा अपने पास रखने लगा । लोग जब भी आते तो चौककर पूछते कि यह खोपड़ी किस लिए ? तो वह कहता कि यह खोपड़ी इस बात की याद दिलाने के लिए है कि एक दिन अपनी भी खोपड़ी इसी तरह पड़ी होगी कही मरघट में , लोगो की लाते लगेगी, कोई क्षमा भी नही मांगेगा । जिस दिन से इस खोपड़ी को ले आया हूं , उस दिन से अब कोई मुझे मार भी जाता है , तो मैं इसकी तरफ देखता हूं और मुस्कुराता हूं और मैं भी कहता हूं : यह देखो , यह अभी से लोग मारने लगे । अभी तो हम मरे भी नही और लोग मारने लगे । मगर यह तो होना ही है , आज नही कल होगा । सत्तर साल की जिंदगी है और उसके बाद अनंत काल तक यह खोपड़ी कहां पड़ी रहेगी ! तुम से पहले बहुत लोग हुए है , कहां है अब ? तुमसे कम अकड़ वाले न थे वे । तुम्हारे जैसी ही अकड़ थी -- तुम्हारी अकड़ भी ऐसे ही खो जायेगी। यह संसार सूली है , यहा हर आदमी अपनी फांसी की प्रतीक्षा कर रहा है और जल्दी ही तुम्हारा नाम पूकारा जाएगा । यहां मृत्यु के अतिरिक्त और कुछ घटता ही नही । यहां रोज मौत घटती है । यहां मौत ही एक वास्तविक घटना है , बाकी सब घटनाओं का कोई मूल्य नही है , क्योकि मौत सारी घटनाओं को पोंछ जाती है । आखिर में मौत की ही लकीर बचती है बाकी सब मिट जाता है । 💖¸.•*""*•.¸ *जय श्री राधे ¸.•*""*•.¸ 💖 *श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव* 🌸💐👏🏼♥💚💖*

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*👂 कान की आत्मकथा👂* *एक बार आवश्य पढ़े... मन में गुदगुदी होने लगेगी...😊* *मैं कान हूँ........👂* *हम दो हैं...*👂👂 *दोनों जुड़वां भाई...* लेकिन........... हमारी किस्मत ही ऐसी है.... *कि आज तक हमने एक दूसरे को देखा तक नहीं 😪* पता नहीं.. *कौन से श्राप के कारण हमें विपरित दिशा में चिपका कर भेजा गया है 😠...* दु:ख सिर्फ इतना ही नहीं है... *हमें जिम्मेदारी सिर्फ सुनने की मिली है......* *गालियाँ हों या तालियाँ..,* *अच्छा हो या बुरा..*, सब *हम ही सुनते हैं...* *धीरे धीरे हमें खूंटी समझा जाने लगा...* *चश्मे का बोझ डाला गया,* फ्रेम की डण्डी को हम पर फँसाया गया... ये दर्द सहा हमने... क्यों भाई..??? *चश्मे का मामला आंखो का है* *तो हमें बीच में घसीटने का* *मतलब क्या है...???* हम बोलते नहीं तो क्या हुआ, सुनते तो हैं ना... *हर जगह बोलने वाले ही क्यों आगे रहते है....???* बचपन में पढ़ाई में किसी का दिमाग काम न करे तो *मास्टर जी हमें ही मरोड़ते हैं 😡...* जवान हुए तो *आदमी,औरतें सबने सुन्दर सुन्दर लौंग,बालियाँ, झुमके आदि बनवाकर हम पर ही लटकाये...!!!* *छेदन हमारा हुआ,* *और तारीफ चेहरे की ...!* और तो और... श्रृंगार देखो... *आँखों के लिए काजल...* *मुँह के लिए क्रीमें...* *होठों के लिए लिपस्टिक...* *हमने आज तक कुछ माँगा हो तो बताओ...* कभी किसी कवि ने, शायर ने *कान की कोई तारीफ की हो तो बताओ...* *इनकी नजर में आँखे, होंठ, गाल,ये ही सब कुछ है...* *हम तो जैसे किसी मृत्युभोज की* *बची खुची दो पूड़ियाँ हैं..,* जिसे उठाकर चेहरे के साइड में चिपका दिया बस... और तो और, *कई बार बालों के चक्कर में हम पर भी कट लगते हैं* ... हमें डिटाॅल लगाकर पुचकार दिया जाता है... बातें बहुत सी हैं, किससे कहें...??? कहते है दर्द बाँटने से मन हल्का हो जाता है... *आँख से कहूँ तो वे आँसू टपकाती हैं..* *नाक से कहूँ तो वो बहती है...* *मुँह से कहूँ तो वो हाय हाय करके रोता है...* और बताऊँ... *पण्डित जी का जनेऊ,* *टेलर मास्टर की पेंसिल,* *मिस्त्री की बची हुई गुटखे की पुड़िया* *मोबाइल का एयरफोन सब हम ही सम्भालते हैं...* और *आजकल ये नया नया मास्क का झंझट भी हम ही झेल रहे हैं...* *कान नहीं जैसे पक्की खूँटियाँ हैं हम...और भी कुछ टाँगना, लटकाना हो तो ले आओ भाई...* *तैयार हैं हम दोनों भाई...!¡!* *थोड़ा थोड़ा हँसते रहिये* *हमेशा स्वस्थ रहिए ।।* 😂😜😍😛😍😜😂

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