Sarvagya Shukla Oct 9, 2020

+61 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 9 शेयर
Sarvagya Shukla Oct 9, 2020

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Sarvagya Shukla Oct 9, 2020

🌹एक छोटी सी कहानी , एक पंछी की !🌹 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 👉हा कैद पंछी के बारे में तो सब ने सुना ! ये पंछी भी कुछ ऐसा ही था ! खूबसूरत , मग़र पिंजरे में कैद पर तो थे मगर उड़ने से मनाई । किसी के घर मे एक सुंदर से पिंजरे में । लाड़ प्यार में बड़ा हो रहा था । समय पर खाना , समय समय पर नहलाना ! सच कहें तो आलीशान सी ! उस परिवार का उस से बहोत लगाव था ! पहले कुछ तकलीफ हुई , मग़र जैसे जैसे दिन बीते वो भी घुल मिल गया । वो अब उसे पिंजरे में नही बाहर भी निकालकर रखने लगे । जैसे वो कभी उड़ेगा नही यकीन करने लगे। कुछ देर तक बस घर में ही उसे खुला रहने देते। फिर धीरे धीरे उसे बाहर भी जाने देने लगे । कुछ दूर वो उड़े तो वापिस पिंजरे में डाल देते । मग़र कुछ देर बाद फिर उसे बाहर निकाल लेते। वो उनके बहोत करीब हो चुका था । अब वो पिंजरे में बहोत कम रहने लगा। उनके साथ ही रहता था। एक दिन पता नही उस पंछी के मन मे क्या आया , वो बहोत ऊँची उड़ान भर बस पल भर में उन सब के नजरो से दूर हो गया वो सब उसके पीछे कुछ देर दौड़े मग़र अफसोस वो आसमान में पहोच चुका था । उस परिवार को बहोत दुख हुआ क्योंकि वो उसे अब उनके परिवार का हिस्सा मानने लगे थे । वो पंछी इतना ऊंचा पहली बार उड़ा था वो बहोत खुश था । वो बहोत देर तक बस हवा में उड़ रहा था । कुछ देर बाद उसे भूक लगी , मग़र उसे पता नही खाना कैसे ढूढ़ते ! वो अपने आस पास देखने लगा । उस वक़्त तो वहाँ पर एक भी पेड़ नजर नही आ रहा था। वो आस पास भटका , मग़र उसे कुछ ना मिला ! और उसे आदत हो चुकी थी वक्त वक्त खाने की , अब तो बहोत देर हो चुकी थी इन सब मे उसे घर का रास्ता भी याद नही था । वो भूक के मारे तड़प रहा था । अब उसे उड़ना भी नही हो रहा था । ना आस पास कुछ नजर आ रहा था । वो सुबह तक पूरी तरह कमजोर हो गया था । क्योंकि उसकी जीने की आदते बदल चुकी थी ! कह सकते हो उसका कंफर्ट जोन , अब स्ट्रगल जोन में बदल चुका था । मग़र उसे लगा कि चारो तरफ कंफर्ट जोन है ! पर ये बस उसकी सोच थी । वो पंछी वैसे ही मर गया ! अब इस कहानी में बहोत सी बातें गलत भी लग सकती । की वो जिंदा क्यों नही रहा , वो चाहे तो रह सकता था , मग़र उसे कैसे रहा जाता ये बिल्कुल खबर नही थी । और ये भी गलत लग सकता की क्या उसका पिंजरे में रहना ही सही था क्या ? ये कहानी मैंने इस लिए लिखी की कुछ लोगो को उनकी लाइफ बहोत बहोत बहोत ही ज्यादा 🤔 sad लगती है। मग़र वो ये कभी नही देखते की वो गलत सोच रहे । हा हर किसी को उसकी आज़ादी पसंद है। पर उस आज़ादी को जिया कैसे जाता है उन्हें खुद नही पता । भगवान हर चीज़ सोच समझ कर ही करता । कठिनाई उन्ही के लाइफ में लिखता है जो उसे सह सके । हा सवाल तो बहोत करते है हम की हमारे साथ ही क्यों , क्योकि भगवान जानता है हमसे अच्छा हमारा किरदार कोई और निभा नही सकता ! वो पंछी शायद उस काबिल नही था के वो आज़ाद पंछी की तरह जी सके इसीलिए भगवान ने उसे ऐसे घर मे भेजा जहाँ उसे जान से ज्यादा प्यार करने वाले लोग मिले । वो सृष्टि रचयिता जानते है किस के भाग में क्या लिखा है । उसकी कमिया निकालने से अच्छा खुद को तराशो !! आपका कुछ ना कुछ मकसद जरूर है अगर आपको जीवन मिला है बस उस मकसद को धुंड , उसे पूरा करने की कोशिश करो । 😄 हर चीज़ में खुशी ढूंढना जरूरी है गम तो हर कोई देके जाता है !!..

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Sarvagya Shukla Oct 9, 2020

♊🌼♊🌼♊🌼♊🌼♊🌼♊ ~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~ 🧚🏻‍♀❣भगवान जी से सम्बन्ध ❣🧚🏻‍♂ ~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~ 🌷एक पंडित जी थे। पंडित जी ने एक दुकानदार के पास पाँच सौ रुपये रख दिये.. उन्होंने सोचा कि जब बच्ची की शादी होगी, तो पैसा ले लेंगे, थोड़े दिनों के बाद जब बच्ची सयानी हो गयी, तो पंडित जी उस दुकानदार के पास गये। दुकानदार ने नकार दिया कि आपने कब हमें पैसा दिया था। उसने पंडित जी से कहा कि क्या हमने कुछ लिखकर दिया है ? पंडित जी इस हरकत से परेशान हो गये और चिन्ता में डूब गये।_ _🌷थोड़े दिन के बाद उन्हें याद आया कि क्यों न राजा से इस बारे में शिकायत कर दें ! ताकि वे कुछ फैसला कर दें एवं मेरा पैसा कन्या के विवाह के लिए मिल जाये। वे राजा के पास पहुँचे तथा अपनी फरियाद सुनाई.. राजा ने कहा.. कल हमारी सवारी निकलेगी तुम उस लालाजी की दुकान के पास खड़े रहना !! राजा की सवारी निकली.. सभी लोगों ने फूलमालाएँ पहनायीं, किसी ने आरती उतारी।_ _🌷पंडित जी लालाजी की दुकान के पास खड़े थे ! राजा ने कहा... गुरुजी आप यहाँ कैसे ! आप तो हमारे गुरु हैं ? आइये इस बग्घी में बैठ जाइये, लालाजी यह सब देख रहे थे, उन्होंने आरती उतारी, सवारी आगे बढ़ गयी। थोड़ी दूर चलने के बाद राजा ने पंडित जी को उतार दिया और कहा कि पंडित जी हमने आपका काम कर दिया। अब आगे आपका भाग्य !!_ _🌷उधर लालाजी यह सब देखकर हैरान थे कि पंडित जी की तो राजा से अच्छी साँठ-गाँठ है.. कहीं वे हमारा कबाड़ा न करा दें !! लालाजी ने अपने मुनीम को पंडित जी को ढूँढ़कर लाने को कहा.. पंडित जी एक पेड़ के नीचे बैठकर कुछ विचार कर रहे थे, मुनीम जी आदर के साथ उन्हें अपने साथ ले गये।_ _🌷लालाजी ने प्रणाम किया और बोले.. पंडित जी हमने काफी श्रम किया तथा पुराने खाते को देखा.. तो पाया कि हमारे खाते में आपका पाँच सौ रुपये जमा है। पंडित जी दस साल में ब्याज के बारह हजार रुपये हो गये, पंडित जी आपकी बेटी हमारी बेटी है.. अत: एक हजार रुपये आप हमारी तरफ से ले जाइये तथा उसे लड़की की शादी में लगा देना,_ _🌷इस प्रकार लालाजी ने पंडित जी को तेरह हजार रुपये देकर प्रेम के साथ विदा किया.. जब मात्र एक राजा के साथ सम्बंध होने भर से विपदा दूर जो जाती है तो...! हम सब भी अगर इस दुनिया के राजा, दीनदयालु भगवान् से अगर अपना सम्बन्ध जोड़ लें...! तो आपकी कोई समस्या, कठिनाई या फिर आपके साथ अन्याय का.. कोई प्रश्न ही नही उत्पन्न हो ♊🌼♊🌼♊🌼♊🌼♊🌼♊

+8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Sarvagya Shukla Oct 9, 2020

🌹🌹बुरी आदत 🌹🌹 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 एक बार स्वामी रामकृष्ण से एक साधक ने पूछा- 'मैं हमेशा भगवान का नाम लेता रहता हूँ। भजन-कीर्तन करता हूँ, ध्यान लगाता हूँ, फिर भी मेरे मन में कुविचार क्यों उठते हैं?' यह सुनकर स्वामीजी मुस्कुराए। उन्होंने साधक को समझाने के लिए एक किस्सा सुनाया। एक आदमी ने कुत्ता पाला हुआ था। वह उससे बहुत प्यार करता था। कभी उसे गोद में लेता, कभी पुचकारता। यहाँ तक कि खाते-पीते, सोते-जागते या बाहर जाते समय भी कुत्ता उसके साथ ही रहता था। उसकी इस हरकत को देखकर किसी दिन एक बुजुर्ग ने उससे कहा कि एक कुत्ते से इतना लगाव ठीक नहीं। आखिरकार है तो पशु ही। क्या पता कब किसी दिन कोई अनहोनी कर बैठे। तुम्हें नुकसान पहुंचा दे या काट ले। यह बात उस आदमी के दिमाग में घर कर गई। उसने तुरंत कुत्ते से दूर रहने की ठान ली। लेकिन वह कुत्ता इस बात को भला कैसे समझे! वह तो मालिक को देखते ही दौड़कर उसकी गोद में आ जाता था। मुंह चाटने की कोशिश करता। मालिक उसे मार-मारकर भगा भी देता। लेकिन कुत्ता अपनी आदत नहीं छोड़ता था। बहुत दिनों की कठिन मेहनत और कुत्ते को दुत्कारने के बाद कुत्ते की यह आदत छूटी। कथा सुनाकर स्वामीजी ने साधक से कहा-'तुम भी वास्तव में ऐसे ही हो। जिन सांसारिक भोग-विलास में आसक्ति की आदतों को तुमने इतने लम्बे समय से पाल कर छाती से लगा रखा है, वे भला तुम्हें इतनी आसानी से कैसे छोड़ सकती हैं? पहले तुम उनसे लाड़-प्यार करना बंद करो। उन्हें निर्दयी, निर्मोही होकर अपने से दूर करो। तब ही उनसे पूरी तरह से छुटकारा पा सकोगे। जैसे-जैसे बुरी आदतों का दमन करोगे, मन की एकाग्रता बढ़ती जाएगी और चित्त में अपनेआप धर्म विराजता जाएगा।' 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

+7 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर