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बहुत ही सुन्दर दृष्टांत 🔸🔸🔹🔹🔸🔸 एक माता आटा गूंध रही थीं, इतने में उसका चार साल का बच्चा जाग जाता है, और रोना शुरु कर देता है । मां दौड़कर उसके पास आती है और ढेर सारे खिलौने उसके पास डाल देती है । और एक-दो खिलौने उसके सामने बजा कर उसके हाथ में देना चाहती है । किन्तु बच्चा खिलौने हाथ में लेने के बजाए उन्हें पैरों की ठोकर से दूर फेंक देता है और जमीन मैं पसर जाता है और हाथ-पैर मारकर जोर जोर से रोने लगता है। यह सब देख कर मां प्यार के जोश में आकर बच्चे को अपनी गोदी में उठा लेती है, और उसे खूब चूमती-चाटती है, उसे सहलाती है । बच्चा अपनी मां का प्यार पाकर परम शांति का आनन्द लेता हुआ फिर सो जाता है या शांत बैठ जाता है । मां भी अपने काम में लग जाती है । बस यही कुछ हाल यहां भी होता है जब साधक भजन भक्ति में लगकर रोता गिड़गिगिड़ाता है, फरियाद करता है , तो उसके आगे पीछे भी मोटर , बिल्डिंग गुड़िया, गुड्डे आदि खिलौने डाल दिये जाते हैं ,और वह उन्हीं में उलझ कर रह जाता है । और अपने असली लक्ष्य से भटक कर सत्य मार्ग को खो बैठता है । और जिंदगी भर रोता और दुख उठाता है । अगर वह भी उस बच्चे की तरह उसको लात मार देता तो आज वह भी अपने प्रभु की गोद में बैठा होता । दो नावों में एक साथ बैठना संभव नहीं । या तो दुनिया का मजा लूट लो या आत्मा के आनंद का ।। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

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