Sanjiv 9779584243 Feb 18, 2020

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Sanjiv 9779584243 Feb 18, 2020

रात्रि कहांनी 🌹🌹🌹🌹 *तीन गुड़ियों कीत्र कहानी* 👩‍🦳👩‍🦳👩‍🦳 *😃🙏एक बार एक कलाकार तीन सुन्दर गुडि़यों को लेकर बादशाह अकबर के दरबार में आया। ये गुडि़यां बिल्कुल एक समान थी। उनमें इतनी समानता थी कि उनके बीच अंतर करना बहुत मुश्किल था। अकबर को गुडि़यां बहुत प्यारी लगी। उसने कहा, ”ये गुडि़यां मुझे बेच दो और मैं तुम्हें इनकी अच्छी कीमत दूंगा।“* 🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂ *कलाकार ने कहा, ”जहांपनाह! ये गुडि़यां बेचने के लिए नहीं हैं। बेशक मैं आपको ये उपहार के रूप में दे दूंगा यदि आपके दरबार में कोई यह बता दे कि तीनों में से अच्छी कौन सी है।“ यह एक अजीब पहेली थी। अकबर ने गुडि़यों को उठाया और करीब से देखा। किंतु तीनों गुडि़यों में इतनी समानता थी कि अकबर यह नहीं कह सका कि कौन सी अच्छी है। तब उसके प्रत्येक मंत्री ने इस पहेली को सुलझाने की कोशिश की, परंतु वे असफल रहे।* *😃अकबर ने बीरबल को बुलाकर कहा, ”बीरबल तुम क्यों नहीं कोशिश करते। मुझे विश्वास है कि तुम इस पहेली को हल कर लोगे।“ बीरबल अकबर की ओर सम्मान से झुका और गुडि़यों के पास गया। उसने प्रत्येक गुडि़या को हाथ में उठाया और बड़ी बारीकी से उनको देखा। हर कोई आश्चर्यचकित था। उसने एक गुडि़या के कान में फूंक मारी। हवा उसके दूसरे कान से बाहर आ गई। फिर उसने दूसरी गुडि़या के कान में फृंक मारी, किंतु इस बार हवा उसके मुंह से निकली। जब बीरबल ने तीसरी गुडि़या के कान में फूंक मारी तो हवा कहीं से भी बाहर नहीं निकली।* *बीरबल ने कहा, ”जहांपनाह! यह तीसरी गुडि़या ही इन तीनों में सबसे अच्छी है।“ अकबर हैरान हो गया। उसने कहा, ”तुमने यह कैसे जान लिया?“* *😎बीरबल ने कहा, ”मेरे मालिक! यह तीनों गुडि़यां तीन व्यक्तियों की तरह हैं। जब मैंने पहली गुडि़या के कान में फूंक मारी, तो यह दूसरे कान से बाहर आ गई। ऐसे ही जब हम एक रहस्य किसी दूसरे व्यक्ति को बताते हैं तो वह अगले ही पल उसे भूल जाता है।* *☝😀जब मैंने दूसरी गुडि़या के कान में फूंक मारी, तो वह उसके मुंह से बाहर निकल गयी। ऐसे ही कुछ व्यक्ति जो कुछ सुनते हैं, उसे शीघ्र ही दूसरे व्यक्ति को बता देते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी रहस्य को छुपाकर नहीं रख सकते। किंतु जब तीसरी गुडि़या के कान में फूंक मारी, तो हवा कहीं से भी बाहर नहीं आई। इस तरह के व्यक्ति अच्छे होते हैं, जो रहस्य को छुपाकर रखते हैं। आप इन्हें कोई भी रहस्य की बात बता सकते हैं।“* *☝कलाकार ने कहा, ”मैंने अभी तक केवल बीरबल के ज्ञान के बारे में सुना था, किन्तु आज मैंने इसे देख भी लिया। जहांपनाह, ये गुडि़यां आपकी हैं।“* *अकबर ने कहा उसे बीरबल पर बहुत गर्व है।* 💝💖🌹🙏🌹💖💝

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Sanjiv 9779584243 Feb 18, 2020

👨‍👩‍👦‍👦 *"परिवार"* 👨‍👩‍👦‍👦 परिवार अब कहाँ, परिवार तो कब के मर गए। आज जो है, वह उसका केवल टुकड़ा भर रह गए। पहले होता था दादा का, बेटों पोतों सहित, भरा पूरा परिवार, एक ही छत के नीचे। एक ही चूल्हे पर, पलता था उनके मध्य, अगाध स्नेह और प्यार। *अब तो रिश्तों के आईने,* *तड़क कर हो गए हैं कच्चे,* *केवल मैं और मेरे बच्चे।* *माँ बाप भी नहीं रहे* *परिवार का हिस्सा,* *तो समझिये खत्म ही हो गया किस्सा।* होगा भी क्यों नहीं, माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में, बेटों को घर से दूर ठूंस देते हैं किसी होस्टल में, पढ़ने के बहाने। वंचित कर देते हैं प्रेम से जाने अनजाने। *आज की शिक्षा* *हुनर तो सिखाती है।* *पर संस्कार कहाँ दे पाती है।* पढ़ लिख कर बेटा डॉलर की चकाचोंध में, आस्ट्रेलिया, यूरोप या अमेरिका बस जाता है। बाप को कंधा देने भी कहाँ पहुंच पाता है। बाकी बस जाते हैं बंगलोर, हैदराबाद, मुम्बई, नोएडा या गुड़गांव में। फिर लौट कर नहीं आते माँ बाप की छांव में। पिछले वर्ष का है किस्सा, ऐसा ही एक बेटा, देकर घिस्सा पुस्तैनी घर बेचकर, माँ के विश्वास को तोड़ गया। उसको यतीमों की तरह, दिल्ली के एयर पोर्ट पर छोड़ गया। अभी अभी एक नालायक ने माँ से बात नहीं की, पूरे एक साल। आया तो देखा माँ का आठ माह पुराना कंकाल। माँ से मिलने का तो केवल एक बहाना था। असली मकसद फ्लैट बेच कर खाना था। आपसी प्रेम का खत्म होने को है पेटा। लड़ रहे हैं बाप और बेटा। करोड़पति सिंघानियां को लाले पड़ गये हैं खाने के। बेटे ने घर से निकाल दिया, चक्कर काट रहा है कोर्ट कचहरी थाने के। परिवार को तोड़ने में अब तो कानून ने भी बो दिए हैं बीज। जायज है लिवइन रिलेशनशिप और कॉन्ट्रैक्ट मैरिज। ना मुर्गी ना अंडा ना सास ससुर का फंडा। जब पति पत्नी ही नहीं तो परिवार कहाँ से बसते। कॉन्ट्रैक्ट खत्म, चल दिये अपने अपने रस्ते। इस दौरान जो बच्चे हुए, पलते हैं यतीमों की तरह और पीते हैं तिरस्कार का जहर। अर्थ की भागमभाग में मीलों पीछे छूट गए हैं रिश्ते नातेदार। टूट रहे हैं घर परिवार सूख रहा है प्रेम और प्यार। *परिवारों का इस पीढ़ी ने ऐसा सत्यानाश किया कि आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी ----* *"वन्स अपॉन ए टाइम--देयर वाज लिविंग ए जोइंट फैमिली इन इंडिया• दैट इज कॉल्ड परिवार"* 👩‍👩‍👧‍👧👩‍👩‍👧‍👧👩‍👩‍👧‍👧

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Sanjiv 9779584243 Feb 18, 2020

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Sanjiv 9779584243 Feb 18, 2020

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Sanjiv 9779584243 Feb 18, 2020

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