sanjeev sharma Feb 27, 2021

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sanjeev sharma Feb 27, 2021

*"पंडितजी का बेटा"* 🙏🏻🚩🌹 👁❗👁 🌹🚩🙏🏻 एक राज्य में एक पंडितजी रहा करते थे. वे अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध थे. उनकी बुद्धिमत्ता के चर्चे दूर-दूर तक हुआ करते थे. एक दिन उस राज्य के राजा ने पंडितजी को अपने दरबार में आमंत्रित किया. पंडित जी दरबार में पहुँचे. राजा ने उनसे कई विषयों पर गहन चर्चा की. चर्चा समाप्त होने के पश्चात् जब पंडितजी प्रस्थान करने लगे, तो राजा ने उनसे कहा, “पंडितजी! आप आज्ञा दें, तो मैं एक बात आपसे पूछना चाहता हूँ.” पंडित ने कहा, “पूछिए राजन.” “आप इतने बुद्धिमान है पंडितजी, किंतु आपका पुत्र इतना मूर्ख क्यों हैं?” राजा ने पूछा. राजा का प्रश्न सुनकर पंडितजी को बुरा लगा. उन्होंने पूछा, “आप ऐसा क्यों कह रहे हैं राजन?” “पंडितजी, आपके पुत्र को ये नहीं पता कि सोने और चाँदी में अधिक मूल्यवान क्या है.” राजा बोला. ये सुनकर सारे दरबारी हँसने लगे. सबको यूं हँसता देख पंडितजी ने स्वयं को बहुत अपमानित महसूस किया. किंतु वे बिना कुछ कहे अपने घर लौट आये. घर पहुँचने पर उनका पुत्र उनके लिए जल लेकर आया और बोला, “पिताश्री, जल ग्रहण करें.” उस समय भी सारे दरबारियों की हँसी पंडितजी के दिमाग में गूंज रही थी. वे अत्यंत क्रोध में थे. उन्होंने जल लेने से मना कर दिया और बोले, “पुत्र, जल तो मैं तब ग्रहण करूंगा, जब तुम मेरे इस प्रश्न का उत्तर दोगे.” “पूछिये पिताश्री.” पुत्र बोला. “ये बताओ कि सोने और चाँदी में अधिक मूल्यवान क्या है?” पंडितजी ने पूछा. “सोना अधिक मूल्यवान है.” पुत्र के तपाक से उत्तर दिया, पुत्र का उत्तर सुनने के बाद पंडितजी ने पूछा, “तुमने इस प्रश्न का सही उत्तर दिया है. फिर राजा तुम्हें मूर्ख क्यों कहते हैं? वे कहते हैं कि तुम्हें सोने और चाँदी के मूल्य का ज्ञान नहीं है.” पंडितजी की बात सुनकर पुत्र सारा माज़रा समझ गया. वह उन्हें बताने लगा, “पिताश्री! मैं प्रतिदिन सुबह जिस रास्ते से विद्यालय जाता हूँ, उस रास्ते के किनारे राजा अपना दरबार लगाते हैं. वहाँ ज्ञानी और बुद्धिमान लोग बैठकर विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं. मुझे वहाँ से जाता हुआ देख राजा अक्सर मुझे बुलाते है और अपने एक हाथ में सोने और एक हाथ में चाँदी का सिक्का रखकर कहते हैं कि इन दोनों में से तुम्हें जो मूल्यवान लगे, वो उठा लो. मैं रोज़ चाँदी का सिक्का उठाता हूँ. यह देख वे लोग मेरा परिहास करते हैं और मुझ पर हँसते हैं. मैं चुपचाप वहाँ से चला जाता हूँ.” पूरी बात सुनकर पंडितजी ने कहा, “पुत्र, जब तुम्हें ज्ञात है कि सोने और चाँदी में से अधिक मूल्यवान सोना है, तो सोने का सिक्का उठाकर ले आया करो. क्यों स्वयं को उनकी दृष्टि में मूर्ख साबित करते हो? तुम्हारे कारण मुझे भी अपमानित होना पड़ता है.” पुत्र हँसते हुए बोला, “पिताश्री मेरे साथ अंदर आइये. मैं आपको कारण बताता हूँ.” वह पंडितजी को अंदर के कक्ष में ले गया. वहाँ एक कोने पर एक संदूक रखा हुआ था. उसने वह संदूक खोलकर पंडितजी को दिखाया. पंडितजी आश्चर्यचकित रह गए. उस संदूक में चाँदी के सिक्के भरे हुए थे. पंडितजी ने पूछा, “पुत्र! ये सब कहाँ से आया?” पुत्र ने उत्तर दिया, “पिताश्री! राजा के लिए मुझे रोकना और हाथ में सोने और चाँदी का सिक्का लेकर वह प्रश्न पूछना एक खेल बन गया है. अक्सर वे यह खेल मेरे साथ खेला करते हैं और मैं चाँदी का सिक्का लेकर आ जाता हूँ. उन्हीं चाँदी के सिक्कों से यह संदूक भर गया है. जिस दिन मैंने सोने का सिक्का उठा लिया. उस दिन ये खेल बंद हो जायेगा. इसलिए मैं कभी सोने का सिक्का नहीं उठाता.” पंडितजी को पुत्र की बात समझ तो आ गई. किंतु वे पूरी दुनिया को ये बताना चाहते थे कि उनका पुत्र मूर्ख नहीं है. इसलिए उसे लेकर वे राजा के दरबार चले गए. वहाँ पुत्र ने राजा को सारी बात बता दी है कि वो जानते हुए भी चाँदी का सिक्का ही क्यों उठाता है. पूरी बात जानकर राजा बड़ा प्रसन्न हुआ. उसने सोने के सिक्कों से भरा संदूक मंगवाया और उसे पंडितजी के पुत्र को देते हुए बोला “असली विद्वान तो तुम निकले.” मित्रों" कभी भी अपने सामर्थ्य का दिखावा मत करो. कर्म करते चले जाओ. जब वक़्त आएगा, तो पूरी दुनिया को पता चल जायेगा कि आप कितने सामर्थ्यवान हैं. उस दिन आप सोने की तरह चमकोगे और पूरी दुनिया आपका सम्मान करेगी. 🌹🙏🏻🚩 *जय सियाराम* 🚩🙏🏻🌹 🚩🙏🏻 *जय श्री महाकाल* 🙏🏻🚩 🌹🙏🏻 *जय माता* *श्री नैना देवी* *जी* 🙏🏻🌹 🚩 🌹

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sanjeev sharma Feb 26, 2021

🇱 🇮 🇻 🇪 🇩 🇦 🇷 🇸 🇭 🇦 🇳 👣 🌹👁️🔻👁️🌹 जय माता कुलजा देवी श्री नैना देवी जी🕉️🌺🙏🌹🌻🎇🌹👣🌷🔔🎊🕉️🎈🎉🍍⛳️🙏जय माता कुलजा देवी जी आदि शक्ति जगजननी विश्वविख्यात श्री सिद्ध शक्तिपीठ माता श्री नैना देवी जी के आज के प्रातः काल के श्रृंगार दर्शन हिमाचल प्रदेश बिलासपुर नैना देवी से🙏👣🎉🕉️🌷🎊🌺⛳️🌻👁️❗️👁️🌹👣2️⃣6️⃣🌹 *फरवरी* ❤️ *शुक्रवार* 🔱 🎈🎊.🎉2⃣0⃣2⃣1️⃣👣🌷 🌻💐✍️...दास संजीव शर्मा🕉️👣 🌺🔔🙏🎈🎊🌹👁️🔻👁️🌹👣 जेष्ठ माता श्री नैना देवी जी सदैव अपनी कृपा बनाए रखें भक्तों पर🕉️ शुभ विक्रम संवत- 2077 शक संवत-1942 *अयन* - उत्तरायण *ऋतु* -वसंत *मास* -माघ *पक्ष* -शुक्ल *तिथि* - चतुर्दशी शाम 03:49 तक तत्पश्चात पूर्णिमा *नक्षत्र* - अक्ष्लेशा दोपहर 12:35 तक तत्पश्चाढ मघा *योग* - अतिगण्ड रात्रि 10:36 तक तत्पश्चात सुकर्मा *दिशाशूल*- पश्चिम दिशा में *व्रत पर्व* *विवरण* - पूर्णिमा व्रत 🏵️ *विशेष*- चतुर्दशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और तिल का तेल लगाना और खाना निषिद्ध है। चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं सभी माता के भक्तों को जय माता श्री नैना देवी जी।🎉🌹🎈⛳️👣🔱🐚🔔🙏

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sanjeev sharma Feb 25, 2021

🇱 🇮 🇻 🇪 🇩 🇦 🇷 🇸 🇭 🇦 🇳 👣 🌹👁️🔻👁️🌹 जय माता कुलजा देवी श्री नैना देवी जी🕉️🌺🙏🌹🌻🎇🌹👣🌷🔔🎊🕉️🎈🎉🍍⛳️🙏जय माता कुलजा देवी जी आदि शक्ति जगजननी विश्वविख्यात श्री सिद्ध शक्तिपीठ माता श्री नैना देवी जी के आज के प्रातः काल के श्रृंगार दर्शन हिमाचल प्रदेश बिलासपुर नैना देवी से🙏👣🎉🕉️🌷🎊🌺⛳️🌻👁️❗️👁️🌹👣2️⃣5️⃣🌹 *फरवरी* ❤️ *वीरवार* 🔱 🎈🎊.🎉2⃣0⃣2⃣1️⃣👣🌷 🌻💐✍️...दास संजीव शर्मा🕉️👣 🌺🔔🙏🎈🎊🌹👁️🔻👁️🌹👣 जेष्ठ माता श्री नैना देवी जी सदैव अपनी कृपा बनाए रखें भक्तों पर🕉️ शुभ विक्रम संवत- 2077 शक संवत-1942 *अयन* - उत्तरायण *ऋतु* -वसंत *मास* -माघ *पक्ष* -शुक्ल *तिथि* - त्रयोदशी शाम 05:18 तक तत्पश्चात चतुर्दशी *नक्षत्र* - पुष्य दोपहर 01:17 तक तत्पश्चा अक्ष्लेशा *योग* - शोभन 26 फरवरी रात्रि 01:08 तक तत्पश्चात अतिगण्ड *दिशाशूल*- दक्षिण दिशा में *व्रत पर्व* *विवरण* - गुरुपुष्पामृत योग 🏵️ *विशेष*- त्रयोदशी को बैंगन नहीं खाना चाहिए । त्रयोदशी की हार्दिक शुभकामनाएं सभी माता के भक्तों को जय माता श्री नैना देवी जी।🎉🌹🎈⛳️👣🔱🐚🔔🙏

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sanjeev sharma Feb 24, 2021

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sanjeev sharma Feb 24, 2021

*‼️🦚💎!!!"श्रीकृष्णा"!!!💎🦚‼️* *‼️🌹"ईस्वर के साक्षात दर्शन"🌹‼️* ✍ *एक बार तुलसीदास जी महाराज को किसी ने बताया की जगन्नाथ जी मैं तो साक्षात भगवान ही दर्शन देते हैं बस फिर क्या था सुनकर तुलसीदास जी महाराज तो बहुत ही प्रसन्न हुए और अपने इष्टदेव का दर्शन करने श्रीजगन्नाथपुरी को चल दिए।* *महीनों की कठिन और थका देने वाली यात्रा के उपरांत जब वह जगन्नाथ पुरी पहुंचे तो मंदिर में भक्तों की भीड़ देख कर प्रसन्नमन से अंदर प्रविष्ट हुए।* *जगन्नाथ जी का दर्शन करते ही उन्हें बड़ा धक्का सा लगा वह निराश हो गये। और विचार किया कि यह हस्तपादविहीन देव हमारे जगत में सबसे सुंदर नेत्रों को सुख देने वाले मेरे इष्ट श्री राम नहीं हो सकते।* *इस प्रकार दुखी मन से बाहर निकल कर दूर एक वृक्ष के तले बैठ गये। सोचा कि इतनी दूर आना ब्यर्थ हुआ। क्या गोलाकार नेत्रों वाला हस्तपादविहीन दारुदेव मेरा राम हो सकता है? कदापि नहीं।* *रात्रि हो गयी, थके-माँदे, भूखे-प्यासे तुलसी का अंग टूट रहा था।* *अचानक एक आहट हुई। वे ध्यान से सुनने लगे। अरे बाबा ! तुलसीदास कौन है.? एक बालक हाथों में थाली लिए पुकार रहा था।* *आपने सोचा साथ आए लोगों में से शायद किसी ने पुजारियों को बता दिया होगा कि तुलसीदास जी भी दर्शन करने को आए हैं, इसलिये उन्होने प्रसाद भेज दिया होगा आप उठते हुए बोले - 'हाँ भाई ! मैं ही हूँ तुलसीदास!* *बालक ने कहा, 'अरे ! आप यहाँ हैं। मैं बड़ी देर से आपको खोज रहा हूँ।* *बालक ने कहा -'लीजिए, जगन्नाथ जी ने आपके लिए प्रसाद भेजा है।* *तुलसीदास बोले -- भैया कृपा करके इसे बापस ले जायें। बालक ने कहा, आश्चर्य की बात है, "जगन्नाथ का भात-जगत पसारे हाथ" और वह भी स्वयं महाप्रभु ने भेजा और आप अस्वीकार कर रहे हैं। कारण..............?* *तुलसीदास बोले, 'अरे भाई ! मैं बिना अपने इष्ट को भोग लगाये कुछ ग्रहण नहीं करता। फिर यह जगन्नाथ का जूठा प्रसाद जिसे मैं अपने इष्ट को समर्पित न कर सकूँ, यह मेरे किस काम का.?' बालक ने मुस्कराते हुए कहा अरे, बाबा ! आपके इष्ट ने ही तो भेजा है।* *तुलसीदास बोले - यह हस्तपादविहीन दारुमूर्ति मेरा इष्ट नहीं हो सकता।* *बालक ने कहा कि फिर आपने अपने श्रीरामचरितमानस में यह किस रूप का वर्णन किया है --* *"बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना।* *कर बिनु कर्म करइ बिधि नाना॥* *आनन रहित सकल रस भोगी।* *बिनु बानी बकता बड़ जोगी॥"* *अब तुलसीदास की भाव-भंगिमा देखने लायक थी। नेत्रों में अश्रु-बिन्दु, मुख से शब्द नहीं निकल रहे थे। थाल रखकर बालक यह कहकर अदृश्य हो गया कि मैं ही तुम्हारा राम हूँ। मेरे मंदिर के चारों द्वारों पर हनुमान का पहरा है। विभीषण नित्य मेरे दर्शन को आता है। कल प्रातः तुम भी आकर दर्शन कर लेना।* *तुलसीदास जी की स्थिति ऐसी की रोमावली रोमांचित थी, नेत्रों से अस्त्र अविरल बह रहे थे, और शरीर की कोई सुध ही नहीं उन्होंने बड़े ही प्रेम से प्रसाद ग्रहण किया।* *प्रातः मंदिर में जब तुलसीदास जी महाराज दर्शन करने के लिए गए तब उन्हें जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के स्थान पर श्री राम, लक्ष्मण एवं जानकी के भव्य दर्शन हुए। भगवान ने भक्त की इच्छा पूरी की।* *जिस स्थान पर तुलसीदास जी ने रात्रि व्यतीत की थी, वह स्थान 'तुलसी चौरा' नाम से विख्यात हुआ। वहाँ पर तुलसीदास जी की पीठ 'बड़छता मठ' के रूप में प्रतिष्ठित है।* *‼️📿💎"जय श्री राधे राधे"💎📿‼️* *‼️🕉️"ईस्वर तेरी शरण- संजीव शर्मा"🕉️‼️* 💐💐.....✍✍.....📡📡..🎷🎙️

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