Sahil Grover Jan 19, 2022

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Sahil Grover Jan 18, 2022

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Sahil Grover Jan 11, 2022

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥ पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥2॥ भावार्थ:-ऋक्षराज जाम्बवान् ने श्री हनुमानजी से कहा- हे हनुमान्! हे बलवान्! सुनो, तुमने यह क्या चुप साध रखी है? तुम पवन के पुत्र हो और बल में पवन के समान हो। तुम बुद्धि-विवेक और विज्ञान की खान हो॥2॥ * कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥ राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥3॥ भावार्थ:-जगत् में कौन सा ऐसा कठिन काम है जो हे तात! तुमसे न हो सके। श्री रामजी के कार्य के लिए ही तो तुम्हारा अवतार हुआ है। यह सुनते ही हनुमान्जी पर्वत के आकार के (अत्यंत विशालकाय) हो गए॥3॥ * कनक बरन तन तेज बिराजा। मानहुँ अपर गिरिन्ह कर राजा॥ सिंहनाद करि बारहिं बारा। लीलहिं नाघउँ जलनिधि खारा॥4॥ भावार्थ:-उनका सोने का सा रंग है, शरीर पर तेज सुशोभित है, मानो दूसरा पर्वतों का राजा सुमेरु हो। हनुमान्जी ने बार-बार सिंहनाद करके कहा- मैं इस खारे समुद्र को खेल में ही लाँघ सकता हूँ॥4॥ * सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी॥ जामवंत मैं पूँछउँ तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही॥5॥ भावार्थ:- और सहायकों सहित रावण को मारकर त्रिकूट पर्वत को उखाड़कर यहाँ ला सकता हूँ। हे जाम्बवान्! मैं तुमसे पूछता हूँ, तुम मुझे उचित सीख देना (कि मुझे क्या करना चाहिए)॥5॥ * एतना करहु तात तुम्ह जाई। सीतहि देखि कहहु सुधि आई॥ तब निज भुज बल राजिवनैना। कौतुक लागि संग कपि सेना॥6॥ भावार्थ:-(जाम्बवान् ने कहा-) हे तात! तुम जाकर इतना ही करो कि सीताजी को देखकर लौट आओ और उनकी खबर कह दो। फिर कमलनयन श्री रामजी अपने बाहुबल से (ही राक्षसों का संहार कर सीताजी को ले आएँगे, केवल) खेल के लिए ही वे वानरों की सेना साथ लेंगे॥6॥

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Sahil Grover Jan 11, 2022

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥ पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥2॥ भावार्थ:-ऋक्षराज जाम्बवान् ने श्री हनुमानजी से कहा- हे हनुमान्! हे बलवान्! सुनो, तुमने यह क्या चुप साध रखी है? तुम पवन के पुत्र हो और बल में पवन के समान हो। तुम बुद्धि-विवेक और विज्ञान की खान हो॥2॥ * कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥ राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥3॥ भावार्थ:-जगत् में कौन सा ऐसा कठिन काम है जो हे तात! तुमसे न हो सके। श्री रामजी के कार्य के लिए ही तो तुम्हारा अवतार हुआ है। यह सुनते ही हनुमान्जी पर्वत के आकार के (अत्यंत विशालकाय) हो गए॥3॥ * कनक बरन तन तेज बिराजा। मानहुँ अपर गिरिन्ह कर राजा॥ सिंहनाद करि बारहिं बारा। लीलहिं नाघउँ जलनिधि खारा॥4॥ भावार्थ:-उनका सोने का सा रंग है, शरीर पर तेज सुशोभित है, मानो दूसरा पर्वतों का राजा सुमेरु हो। हनुमान्जी ने बार-बार सिंहनाद करके कहा- मैं इस खारे समुद्र को खेल में ही लाँघ सकता हूँ॥4॥ * सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी॥ जामवंत मैं पूँछउँ तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही॥5॥ भावार्थ:- और सहायकों सहित रावण को मारकर त्रिकूट पर्वत को उखाड़कर यहाँ ला सकता हूँ। हे जाम्बवान्! मैं तुमसे पूछता हूँ, तुम मुझे उचित सीख देना (कि मुझे क्या करना चाहिए)॥5॥ * एतना करहु तात तुम्ह जाई। सीतहि देखि कहहु सुधि आई॥ तब निज भुज बल राजिवनैना। कौतुक लागि संग कपि सेना॥6॥ भावार्थ:-(जाम्बवान् ने कहा-) हे तात! तुम जाकर इतना ही करो कि सीताजी को देखकर लौट आओ और उनकी खबर कह दो। फिर कमलनयन श्री रामजी अपने बाहुबल से (ही राक्षसों का संहार कर सीताजी को ले आएँगे, केवल) खेल के लिए ही वे वानरों की सेना साथ लेंगे॥6॥

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Sahil Grover Jan 11, 2022

हनुमान जी को क्यों कहा जाता है कलियुग का देवता? इनके सामने क्यों नहीं ठहरती कोई मायावी शक्ति? वर्तमान में जो युग चल रहा है उसे कलियुग का नाम दिया गया है। ऐसी मान्यता है कि कलियुग में देवी - देवता वास नहीं करते हैं, लेकिन हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जिन्हें कलियुग के देवता के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है, जो भक्त हनुमान जी की आराधना करता है, उसे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है। हनुमान जी अपने भक्तों का हर संकट हर लेते हैं। हनुमान जी कलियुग में जागृत और साक्षात शक्ति हैं जिनके समक्ष कोई मायावी शक्ति नहीं ठहर पाती है। ऐसा माना जाता है कि जहां भी भगवान राम की पूजा होती है या फिर रामायण का पाठ होता है वहां पर भक्त हनुमान किसी न किसी रूप में अवश्य पहुंचते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण की लंका पर विजय पाकर जब भगवान श्री राम अयोध्या लौट रहे थे, तब उन्होंने उन लोगों को उपहार दिए जिन्होंने रावण के साथ युद्ध में उनका साथ दिया था। इसमें विभीषण, अंगद और सुग्रीव शामिल हैं। तभी हनुमान जी, भगवान श्रीराम से याचना करते हैं कि, ‘यावद् रामकथा वीर चरिष्यति महीतले। तावच्छरीरे वत्स्युन्तु प्राणामम न संशय:।।' अर्थात: ‘हे वीर श्रीराम! इस पृथ्वी पर जब तक रामकथा प्रचलित रहे, तब तक निस्संदेह मेरे प्राण इस शरीर में बसे रहें’। भगवान श्रीराम आशीर्वाद देते हुए कहते हैं, ‘एवमेतत् कपिश्रेष्ठ भविता नात्र संशय:। चरिष्यति कथा यावदेषा लोके च मामिका तावत् ते भविता कीर्ति: शरीरे प्यवस्तथा। लोकाहि यावत्स्थास्यन्ति तावत् स्थास्यन्ति में कथा।।' अर्थात् : ‘हे कपि श्रेष्ठ, ऐसा ही होगा, इसमें संदेह नहीं है। इस संसार में जब तक मेरी कथा प्रचलित रहेगी, तब तक तुम्हारी कीर्ति अमिट रहेगी और तुम्हारे शरीर में प्राण भी रहेंगे ही। जब तक ये लोक बने रहेंगे, तब तक मेरी कथाएं भी स्थिर रहेंगी।' इस तरह प्रसन्न करें हनुमान जी को: -हनुमान जी की कृपा अपने ऊपर बनाए रखने के लिए, प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी को चोला चढ़ाना अत्यंत लाभकारी होता है। मंगलवार और शनिवार के दिन व्रत रख कर भी आप भगवान का आशीर्वाद पा सकते हैं।

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Sahil Grover Jan 9, 2022

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Sahil Grover Jan 6, 2022

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Sahil Grover Jan 5, 2022

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