ज्वर कैसा भी क्यों न हो :-> गर्मियों में:>तुलसी की पत्तियाँ ग्यारह,काली मिर्च सात दोनों को 60 ग्राम जल में रगङकर प्रातः और सायं रोगी को पिलायें । बरसात और सर्दियों में यही 124 ग्राम जल में उबालकर आधा रह जाने पर रोगी को पिलायें । काली मिर्च थोड़ी कूटकर डालनी चाहिए । बारह साल से कम आयु वाले बच्चों को चौथाई मात्रा (तीन तुलसी की पत्तियाँ,दो काली मिर्च) दस ग्राम पानी में पीसकर आयु को ध्यान में रखते हुए दें । मिठास के बिना काम न चले तो दस ग्राम मिश्री का चूर्ण ङाल सकते हैं । आवश्यकतानुसार दो दिन से सात दिन तक पिलाएँ । दूसरी विधि:>सात तुलसी की पत्तियाँ ,सात काली मिर्च और सात बताशे (या दस ग्राम मिश्री) तीन कप पानी में ङालकर उबालें । एक कप रह जाने पर गरम -गरम पीकर बदन ढककर दस मिनट लेट जाएँ । बुखार , फ्लू , मलेरिया , सर्दी का जुकाम , हरारत में रामबाण है । आवश्यकतानुसार दिन में दो बार प्रातः एवं रात्रि सोते समय दो -तीन दिन लें । सहायक उपचार:> वात और कफ ज्वर में उबालकर ठंडा किया हुआ जल पिलाना चाहिए । औटाया हुआ जल वात तथा कफ ज्वर नष्ट करता है । जो जल औटाते-औटाते धीरे-धीरे झाग रहित तथा निर्मल हो जाए तथा आधा शेष रह जाय उसे ही औटा हुआ जल या 'उष्णोदक' समझना चाहिए । आयुर्वेदानुसा एक किलो का पाव भार पका हुआ गरम जल कफ-ज्वर का नाश करता है । एक किलो का तीन पाव गरम जल पित्त-ज्वर का नाश करता है । एक दो बार उबाला हुआ पका जल रात्रि में पीने से कफ,वात और अजीर्ण नष्ट होते हैं । न्यूमोनिया में 250 ग्राम जल में एक लौंग ङालकर दस मिनट तक उबालें । साठ ग्राम की मात्रा से यह पानी दिन में दो - तीन बार रोगी को दें । अत्यंत लाभप्रद है सभी ज्वरों में बेदाना (मीठा अनार) बिना किसी हिचक के दिया जा सकता है । इससे ज्वर के समय की प्यास भी शांत होती है ।ज्वर में साबूदाना,दूध, चीकू ,मौसमी पथ्य है ज्वर उतारने के लिए हथेलियों और पगतलियों को घिया के गोल टुकङों से उँगलीयो की तरफ झाङते हुए मलें अथवा कपड़े से उँगलीयों की तरफ झाङें । कागजी नींबू के पेड़ की पत्तियाँ लेकर हाथ से मलकर महिन कपङे में बांधकर बुख़ार वाले रोगी के नाक के पास ले जाकर सूघाएँ ।कम से कम सुबह-शाम सूंघाएँ । पुराना बुखार उतारने के लिए:> तुलसी की पत्तियाँ सात,काली मिर्च चार,पीपर (पिप्पली) एक तीनों वस्तुओं को 60 ग्राम पानी के साथ बारीक पीसकर 10 ग्राम मिश्री मिलाकर नित्य सवेरे खाली पेट रोगी को पिलाएँ तो महिनों का ठहरा हुआ जीर्ण-ज्वर ठीक हो जाता है आवश्यकतानुसार दो-तीन सप्ताह पिलाएँ । अपने विचार (कमेन्ट)अवश्य लिखे जिससे कि पोस्ट करने में उत्साह बना रहें वसुदेव कुटुंबकम् जय जय श्री राधे 🙏🙏

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सुप्रभात:-हर प्रकार के बदन दर्द के लिए राम बाण एक लहसुन का गठिया लेकर उसकी चार-पांच कलियाँ छीलकर तीस ग्राम सरसों के तेल में ङाल दें । उसमें दो ग्राम (आधा चम्मच) अजवायन के दाने ङाल कर धीमी- धीमी आंच पर पकाये । लहसुन और अजवायन काली पङने पर तेल उताकर थोड़ा ठण्ङा कर छान लें । इस सुहाते-सुहाते गर्म तेल की मालिश करने से हर प्रकार का बदन का दर्द दूर हो जाता है । विकल्प:- 10 ग्राम कपूर 200 ग्राम सरसों का तेल दोनों को शीशी में भरकर मजबूत कार्क (ढक्कन) लगा दें तथा शीशी धूप में रख दें । जब दोनों वस्तुएँ मिलकर एकरस होकर घुल जाये तब इस तेल की मालिश से वात विकार, नसों का दर्द,पीठ और कमर का दर्द,हिप-शूल,मांसपेशियों के दर्द और सब प्रकार के दर्द शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं । परन्तु इस तेल को छाती पर मलने से माँ का दूध बन्द हो जाता है । इसलिए माताओं से अनुरोध है कि वो इस का उपयोग सावधानी पूर्वक करे । जय गुरुदेव जय श्री राधे 🙏🙏

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