😨 क्या आपको पता है मोदी जी कड़े निर्णय कहीं भी क्यों नहीं ले पाते हैं ❓ ऐसे में वह जो भी कर पा रहे हैं वह भी बड़ा चमत्कार है आश्चर्यजनक है 😳 नीचे लिखा अगर आप पढ़ेंगे तो आपको पता लग जाएगा 👇 *देश मे मुस्लिम और क्रिश्चियन का कार्ड खेलने वाली कांग्रेस ने देश मे क्या-क्या गुल खिलाये हैं...!*😡 *जानना हरेक भारतवासी का हक़ है...* 2008 मे कांग्रेस सरकार बनने के बाद सोनीया एन्टोनिया ओर राहुल खान के काले कारनामे...👇 *मुस्लिम क्रिस्चियन आरक्षण का कहर !* राष्ट्रपति सचिवालय मे कुल पद : 49 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 45 हिन्दू : 4 उप राष्ट्रपति सचिवालय मे कुल पद : 7 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 7 हिन्दू : 00 मंत्रियो के कैबिनेट सचिव कुल पद : 20 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 19 हिन्दू : 1 प्रधानमंत्री कार्यालय मे कुल पद : 35 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 33 हिन्दू : 2 कृषि-सिचंन विभाग मे कुल पद : 274 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 259 हिन्दू : 15 रक्षा मंत्रालय मे कुल पद : 1379 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 1331 हिन्दू : 48 समाज-हैल्थ मंत्रालय कुल पद : 209 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 192 हिन्दू : 17 वित्त मंत्रालय मे कुल पद : 1008 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 952 हिन्दू : 56 ग्रह मंत्रालय मे कुल पद : 409 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 377 हिन्दू : 32 श्रम मंत्रालय मे कुल पद : 74 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 70 हिन्दू : 4 रसायन-पेट्रो मंत्रालय कुल पद:121 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 112 हिन्दू : 9 राज्यपाल-उपराज्यपाल कुल पद : 27 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 20 हिन्दू : 7 विदेश मे राजदूत : 140 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 130 हिन्दू : 10 विश्वविद्यालय के कुलपति पद : 108 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 88 हिन्दू : 20 प्रधान सचिव के पद : 26 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 20 हिन्दू : 6 हाइकोर्ट के न्यायाधीश : 330 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 326 हिन्दू : 4 सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश : 23 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 20 हिन्दू : 03 IAS अधिकारी : 3600 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 3000 हिन्दू : 600 PTI कुल पद : 2700 मुस्लिम-क्रिस्चियन : 2400 हिन्दू : 300 1947 से अब तक किसी सरकार ने इस तरह से सविँधान को अनदेखा और इस का उल्लंघन नहीं किया, सरकार की नजरों तो जैसे मुस्लीम से श्रेष्ठ, ईमानदार, योग्य, अनुभवी और मेहनती कोई दूसरी जातियो्ँ है ही नहीं... *क्या ये सब कानून का उल्लंघन और सविँधान के खिलाफ नहीं था ?* आपको यह सन्देश 3 लोगो को भेजना है। 3 × 3 = 9 9 × 3 = 27 *बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है,* *देखते ही देखते पूरा देश जुड़ जायेगा...*🚩

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समय... स्लेट को जीभ से चाटकर अक्षर मिटाने की हमारी स्थाई आदत थी लेकिन इसमें पापबोध भी था कि कहीं विद्यामाता नाराज न हो जायें । पढ़ाई का तनाव हमने पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर मिटाया था । स्कूल में टाट पट्टी की अनुपलब्धता में घर से बोरी का टुकड़ा बगल में दबा कर ले जाना भी हमारी दिनचर्या थी । पुस्तक के बीच विद्या , पौधे की पत्ती और मोरपंख रखने से हम होशियार हो जाएंगे ऐसा हमारा दृढ विश्वास था । कपड़े के थैले में किताब कॉपियां जमाने का विन्यास हमारा रचनात्मक कौशल था । हर साल जब नई कक्षा के बस्ते बंधते तब कॉपी किताबों पर जिल्द चढ़ाना हमारे जीवन का वार्षिक उत्सव था । माता पिता को हमारी पढ़ाई की कोई फ़िक्र नहीं थी , न हमारी पढ़ाई उनकी जेब पर बोझा थी । सालों साल बीत जाते पर माता पिता के कदम हमारे स्कूल में न पड़ते थे । एक दोस्त को साईकिल के डंडे पर और दूसरे को पीछे कैरियर पर बिठा हमने कितने रास्ते नापें हैं , यह अब याद नहीं बस कुछ धुंधली सी स्मृतियां हैं । स्कूल में पिटते हुए और मुर्गा बनते हमारा ईगो हमें कभी परेशान नहीं करता था , दरअसल हम जानते ही नही थे कि ईगो होता क्या है ? पिटाई हमारे दैनिक जीवन की सहज सामान्य प्रक्रिया थी ,पीटने वाला और पिटने वाला दोनो खुश थे , पिटने वाला इसलिए कि कम पिटे , पीटने वाला इसलिए खुश कि हाथ साफ़ हुवा। हम अपने माता पिता को कभी नहीं बता पाए कि हम उन्हें कितना प्यार करते हैं क्योंकि हमें आई लव यू कहना नहीं आता था । आज हम गिरते - सम्भलते , संघर्ष करते दुनियां का हिस्सा बन चुके हैं , कुछ मंजिल पा गये हैं तो कुछ न जाने कहां खो गए हैं । हम दुनिया में कहीं भी हों लेकिन यह सच है , हमे हकीकतों ने पाला है , हम सच की दुनियां में थे । कपड़ों को सिलवटों से बचाए रखना और रिश्तों को औपचारिकता से बनाए रखना हमें कभी नहीं आया इस मामले में हम सदा मूरख ही रहे । अपना अपना प्रारब्ध झेलते हुए हम आज भी ख्वाब बुन रहे हैं , शायद ख्वाब बुनना ही हमें जिन्दा रखे है वरना जो जीवन हम जीकर आये हैं उसके सामने यह वर्तमान कुछ भी नहीं । हम अच्छे थे या बुरे थे पर हम एक समय थे, काश वो समय फिर लौट आए । "बस यूंही" दिल की कलम से. 🙏🙏

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✍क्षीर सागर में भगवान विष्णु शेष शैया पर विश्राम कर रहे हैं और लक्ष्मीजी उनके पैर दबा रही हैं । विष्णुजी के एक पैर का अंगूठा शैया के बाहर आ गया और लहरें उससे खिलवाड़ करने लगीं । . ✍क्षीरसागर के एक कछुवे ने इस दृश्य को देखा और मन में यह विचार कर कि मैं यदि भगवान विष्णु के अंगूठे को अपनी जिव्ह्या से स्पर्श कर लूँ तो मेरा मोक्ष हो जायेगा,यह सोच कर उनकी ओर बढ़ा । . ✍उसे भगवान विष्णु की ओर आते हुये शेषनाग ने देख लिया और कछुवे को भगाने के लिये जोर से फुँफकारा । फुँफकार सुन कर कछुवा भाग कर छुप गया । . ✍कुछ समय पश्चात् जब शेषजी का ध्यान हट गया तो उसने पुनः प्रयास किया । इस बार लक्ष्मीदेवी की दृष्टि उस पर पड़ गई और उन्होंने उसे भगा दिया । . ✍इस प्रकार उस कछुवे ने अनेकों प्रयास किये पर शेष नाग और लक्ष्मी माता के कारण उसे सफलता नहीं मिली । यहाँ तक कि सृष्टि की रचना हो गई और सत्युग बीत जाने के बाद त्रेता युग आ गया । . ✍इस मध्य उस कछुवे ने अनेक बार अनेक योनियों में जन्म लिया और प्रत्येक जन्म में भगवान की प्राप्ति का प्रयत्न करता रहा । अपने तपोबल से उसने दिव्य दृष्टि को प्राप्त कर लिया था । . ✍कछुवे को पता था कि त्रेता युग में वही क्षीरसागर में शयन करने वाले विष्णु राम का और वही शेषनाग लक्ष्मण का व वही लक्ष्मीदेवी सीता के रूप में अवतरित होंगे तथा वनवास के समय उन्हें गंगा पार उतरने की आवश्यकता पड़ेगी । इसीलिये वह भी केवट बन कर वहाँ आ गया था । . ✍✍एक युग से भी अधिक काल तक तपस्या करने के कारण उसने प्रभु के सारे मर्म जान लिये थे, इसीलिये उसने रामजी से कहा था कि मैं आपका मर्म जानता हूँ । . ✍संत श्री तुलसीदासजी भी इस तथ्य को जानते थे, इसलिये अपनी चौपाई में केवट के मुख से कहलवाया है कि . “कहहि तुम्हार मरमु मैं जाना”। . ✍केवल इतना ही नहीं, इस बार केवट इस अवसर को किसी भी प्रकार हाथ से जाने नहीं देना चाहता था । उसे याद था कि शेषनाग क्रोध कर के फुँफकारते थे और मैं डर जाता था । . ✍अबकी बार वे लक्ष्मण के रूप में मुझ पर अपना बाण भी चला सकते हैं, पर इस बार उसने अपने भय को त्याग दिया था, लक्ष्मण के तीर से मर जाना उसे स्वीकार था पर इस अवसर को खो देना नहीं । . ✍✍इसीलिये विद्वान संत श्री तुलसीदासजी ने लिखा है - . ✍( हे नाथ ! मैं चरणकमल धोकर आप लोगों को नाव पर चढ़ा लूँगा; मैं आपसे उतराई भी नहीं चाहता । हे राम ! मुझे आपकी दुहाई और दशरथजी की सौगंध है, मैं आपसे बिल्कुल सच कह रहा हूँ । भले ही लक्ष्मणजी मुझे तीर मार दें, पर जब तक मैं आपके पैरों को पखार नहीं लूँगा, तब तक हे तुलसीदास के नाथ ! हे कृपालु ! मैं पार नहीं उतारूँगा । ) . ✍तुलसीदासजी आगे और लिखते हैं - . ✍केवट के प्रेम से लपेटे हुये अटपटे वचन को सुन कर करुणा के धाम श्री रामचन्द्रजी जानकी और लक्ष्मण की ओर देख कर हँसे । जैसे वे उनसे पूछ रहे हैं- कहो, अब क्या करूँ, उस समय तो केवल अँगूठे को स्पर्श करना चाहता था और तुम लोग इसे भगा देते थे पर अब तो यह दोनों पैर माँग रहा है ! . ✍केवट बहुत चतुर था । उसने अपने साथ ही साथ अपने परिवार और पितरों को भी मोक्ष प्रदान करवा दिया । तुलसीदासजी लिखते हैं -. ✍चरणों को धोकर पूरे परिवार सहित उस चरणामृत का पान करके उसी जल से पितरों का तर्पण करके अपने पितरों को भवसागर से पार कर फिर आनन्दपूर्वक प्रभु श्री रामचन्द्र को गंगा के पार ले गया । उस समय का प्रसंग है ... जब केवट भगवान् के चरण धो रहे है । . ✍बड़ा प्यारा दृश्य है, भगवान् का एक पैर धोकर उसे निकलकर कठौती से बाहर रख देते है, और जब दूसरा धोने लगते है, . ✍तो पहला वाला पैर गीला होने से जमीन पर रखने से धूल भरा हो जाता है, . ✍केवट दूसरा पैर बाहर रखते है, फिर पहले वाले को धोते है, एक-एक पैर को सात-सात बार धोते है । . ✍फिर ये सब देखकर कहते है, प्रभु, एक पैर कठौती में रखिये दूसरा मेरे हाथ पर रखिये, ताकि मैला ना हो । . ✍जब भगवान् ऐसा ही करते है । तो जरा सोचिये ... क्या स्थिति होगी , यदि एक पैर कठौती में है और दूसरा केवट के हाथों में, . ✍भगवान् दोनों पैरों से खड़े नहीं हो पाते बोले - केवट मैं गिर जाऊँगा ? . ✍केवट बोला - चिंता क्यों करते हो भगवन् !. दोनों हाथों को मेरे सिर पर रख कर खड़े हो जाईये, फिर नहीं गिरेंगे , . ✍जैसे कोई छोटा बच्चा है जब उसकी माँ उसे स्नान कराती है तो बच्चा माँ के सिर पर हाथ रखकर खड़ा हो जाता है, भगवान् भी आज वैसे ही खड़े है । . ✍भगवान् केवट से बोले - भईया केवट ! मेरे अंदर का अभिमान आज टूट गया... . ✍केवट बोला - प्रभु ! क्या कह रहे है ?. भगवान् बोले - सच कह रहा हूँ केवट, अभी तक मेरे अंदर अभिमान था, कि .... मैं भक्तों को गिरने से बचाता हूँ पर.. . ✍आज पता चला कि, भक्त भी भगवान् को गिरने से बचाता है ।.जै राम जी की।।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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🙏🙏सभी मित्रों को नमस्कार सुप्रभात आप सभी का दिन मंगलकारी हो जी 🙏 🙏 एक बार पढें और विचार करे🙏🙏🙏👉प्रवासी मजदूरों पर मीडिया का इतना फोकस क्यों है ? इस मामले में News Manufacturing क्यों की जा रही है । सूटकेस पर बीवी-बच्चों को ले जाते मज़दूर के साथ पूरे रास्ते वीडियोग्राफी क्यों की जा रही है ? रवीश कुमार क्यों मगरमच्छ के आँसू बहा रहा है ? बीस लाख करोड़ के पैकेज को क्यों बेकार बताया जा रहा है ? एक ही उद्देश्य है कि भारत में मज़दूरों और आम जनता में असंतोष पैदा करना, देश में दंगे भड़काना और ऐसी स्थिति पैदा करना कि चीन से बाहर निकलने वाले उद्योग भारत की ऐसी खराब हालत देख कर भारत की ओर रुख न करें । इस तरह ये चीन के षड़यंत्र में शामिल वामपंथी पार्टियां, अर्बन नक्सलवादी, देश की एक प्रमुख पार्टी और कई रीजनल पार्टियां, कई मज़दूर संगठन, बिकाऊ मीडिया भारत को कमज़ोर रख कर आत्म निर्भर नहीं होने देना चाहते और चाहते हैं कि चीन-पाकिस्तान जब भारत के खिलाफ जंग छेड़ें तो आसानी से भारत हार जाए औऱ चीन के इन प्यादों को सत्ता का सुख मिल सके । इधर हमारे आम भारतीय तो छोड़िए, पढ़े-लिखे इस षड़यंत्र को समझ नहीं पा रहे और मज़दूरों की वीडियो की मैन्युफैक्चर्ड खबरों को देख कर सरकार की आलोचना करने में लगे हैं । चेतो, भाईयो, चेतो, समझो इस षड़यंत्र को और जो बन पड़े सो करो । भारत माता की जय ! 🙏🙏🙏 मैसेज में क्या जानकारी और उसका विश्लेषण है, इसके लिए आपको यह मैसेज पड़ने की आवश्यकता है । कृपया पढ़िए जरूर । 👇 "तो भाई सुनो, सरकार जो चीन और दुनिया के सामान को क्यों बैन नहीं कर सकती, उसके पीछे का कारण जानने के लिए सुनो भारत की एक सच्ची कहानी ..सुनो मतलब पढ़ो ! लिख देता हूं आज और इतनी मेहनत इसलिए की कि आप सब को फॉरवर्ड करोगे। सन 1994 में जब शायद आप 2 या 3 साल के रहे होंगे तब इस देश में एक कांड हुआ (wto में शामिल होना) उसके आगे पीछे की कहानी है यह। भारत में तब उद्योगों के हालात बहुत ज्यादा खराब थे। क्योंकि कम्युनिस्ट पार्टियां कांग्रेस के साथ पूरे पॉवर में थी। मजदूर कानूनों और कांग्रेस के भ्रष्टाचार से सारे देश के कारखाने और manufacturing units बड़ी तादात में बंद हो चुकी थी .. यह काम 1960 से ही चल रहा था और कम्युनिस्ट मजदूर संगठनों द्वारा हिंसात्मक आंदोलन और उनके कानूनी पचड़े इतने ज्यादा थे कि कुछेक बड़े व्यापारियों को छोड़कर अधिकतर भारतीय व्यापारी भारत में काम बंदकर यहां से दूसरे देशों में अपना काम शुरू कर चुके थे... जैसे अफ्रीका, अमरीका, कनाडा आदि। भारत के इन सभी मजदूर संगठनों को चाइना के लाल झंडे व ईसाई मिशनरियों के जरिए पैसा पहुंचाया जाता था.. ताकि भारत की जगह कारखाने रुस व चीन में लगाए जा सके। तात्कालिक भारतीय नेता इन बातों को जानते थे। 1980 में जब उन्हें यह बात समझ में आयी तब तक भारत में हालात बहुत खराब हो चुके थे। कम्युनिस्ट रूस व चीन के जासूसों की पकड़ भारतीय राजनीति पर बहुत ज्यादा हो चुकी थी... जो भी सरकार कुछ करने की कोशिश करती, उसे गिरा दिया जाता या समर्थन वापस ले लिया जाता। इस तरह इस दरम्यान सरकारें बार बार गिराई गई। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि गांधी परिवार के अलावा 13 और प्रधानमंत्री बनाए गए। पर किसी ने 1 वर्ष का कार्यकाल भी पूरा नहीं किया सिवाय लाल बहादुर शास्त्री जी के। जिन्होंने केवल 18 महीने शासन किया। मतलब 1.5 साल और अच्छे शासन का पुरस्कार में उन्हें रूस के ताशकंत में मौत दी गई। 1991 से 4 वर्ष के साथ नरसिंहराव ने यह क्रम तोड़ा तो उसका परिणाम उनके मृत शरीर व अमर आत्मा को सहना पड़ा। मोदी और वाजपयी जी को भी 6 साल मिले .. लेकिन जो भी कहो भारत, रूस और चीन जैसे कम्युनिस्ट देशों के हाथ की कठपुतली बना रहा। तो 1990 में ये हालत हो गए कि हमारे पास लोगों के लिए दवाई बाहर से आ रही, किसानों के लिए बीज-pestiside, गाडियां, सेना के लिए बंदूक की गोली, यहां तक कि सुई भी बाहर से बनकर आती। इधर तेल और हथियार के व्यापार के कारण अमरीका महाशक्ति बन चुका था। उसका ही कंट्रोल अरब के तेल पर भी था और इसीलिए विश्व में उसने सोने के बदले होने वाले व्यापार को बंद कर विश्व व्यापार डॉलर में शुरू करवाने में सफलता प्राप्त कर ली थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप का गोल्ड बैंक अमरीका में सुरक्षित समझ बनाया गया था यह भी प्रमुख कारण बना। और डॉलर के माध्यम से हो रहे लेन-देन के कारण अमरीका ने सभी देशों को प्रभाव में लेकर WTO का निर्माण किया (world Trade organisation)। और अब लगभग दुनिया के सभी देशों ने तय किया किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर होने वाले विवादों का निपटारा wto के नियमों के अधीन होगा। जो इसके नियम नहीं मानता व किसी नियम का उल्लघंन करते पाए जाने पर wto उस देश पर trading restrictions लगायेगा। जैसे duties को बढ़ाएगा और व्यापार पर प्रतिबंध- मतलब कोई भी देश ना उसे कोई भी सामान देगा, ना लेगा। The most important and first rule of WTO is MFN- most favoured nation. इसमें वो कहते है कि आप किसी भी देश से discrimination नहीं कर सकते... बोले तो भेदभाव... कि अपने देश में इस देश को सामान बेचने दूंगा, इसको नहीं .. ऐसा नहीं कर सकते हो। ऐसा करते ही wto आपके सामान को दुनिया में बिकने ही नहीं देगा या बहुत महंगा कर देगा। ताकि कोई खरीद ही ना पाए। फिर से पुरानी कहानी पर आते हैं.. जब हमारे अधिकतर बड़े उद्योग खत्म हो गए थे तो केवल छोटे उद्योग ही बचे थे। जैसे हैंडीक्राफ्ट्स, छपाई, एंटीक फर्नीचर आदि कला से जुड़े उद्योग। इन उत्पादों का उपयोग भारत में होता ही नहीं था, खपत थी ही नहीं। लोग सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान की दौड़ में थे और वो भी बहुत कम पैसे में। जबकि ये luxury आइटम थे। निर्माण में मजदूरी ही बहुत ज्यादा थी, जो वास्तव में दुनिया के लिए भी luxury ही थी। इनके ना मिलने से किसी का कोई भी कार्य रुक नहीं रहा था। पर दिखने में सुंदर। जिसके सामने आ जाए, वह व्यक्ति मोह में लेता ही था। यह सभी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट होते थे और एक्सपोर्ट ड्यूटी से ही सरकार को धन की प्राप्ति थी। बाकी चीजों में मसाले, तेल जैसे कृषि आधारित वस्तुओं का सहारा था। इस एक्सपोर्ट से प्राप्त हुए डॉलर (फौरन रिजर्व) से ही देश को चलाने के लिए पेट्रोल, डीजल हथियार, कृषि, डेयरी के व्यापार की वस्तुएं खरीदी जा सकती थी। अगर तब भारत wto के साथ नहीं जुड़ता और दुनिया से आवश्यकता की मूलभूत वस्तुएं ना मंगवाता तो उस सबसे बूरे समय में हथियारों, भोजन, नई तकनीक के अभाव में भारत ना जाने कितने अलग-अलग और छोटे-छोटे व कमजोर देशों में बंट जाता। एक तरह से हमारा देश ही नष्ट हो जाता। उस समय की काल-परिस्थिति के अनुसार wto से जुड़ना ठीक था। हमको आवश्यकताएं अधिक थी और सस्ता सामान भी आवश्यक था। पर आज परिस्थिति अलग है। हम आगे बढ़ सकते हैं। अगले 10 वर्ष में एक बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति बन सकते हैं। Wto के कारण अब मोदी जी यह तो कह नहीं सकते कि सीधे सीधे बॉयकॉट चाइना। लेकिन स्वदेशी का मन्त्र और उद्योगों के लिए हर छोटे-बड़े व्यापारी के लिए भारत का खजाना खोल देना उनकी मंशा समझा देता है। वे सीधे-सीधे चीन के बॉयकॉट का नारा तो दे नहीं सकते। चीन भी हल्के में इसे जाने नहीं देगा। हमारा आत्मनिर्भर हो जाना ही उसके लिए सबसे बड़ा नुकसान है। पैसे और काम की कमी से चीन में आंदोलन जोर पकड़ सकते हैं, चीन में सत्ता पलट या रूस जैसे टुकड़े हो सकते हैं। चीन यह बात अच्छे से जानता है और इसीलिए वो फिर से भारत के मजदूरों को कम्युनिस्टों के जरिए भड़का कर और उकसे हुए जिहादियों को पैसा-हथियार देकर भारत को अस्थिर कर सकता है। वह युद्ध में जाने को पूरी तरह से तैयार है। पाकिस्तान को दवाई और मेडिकल सप्लाई देकर भारत पर आतंकवादी हमला या युद्ध शुरू करना चाहता है। फिर पाकिस्तान के नाम पर वो युद्ध में कूदेगा। ताकि दुनिया की जो कंपनियां भारत में चीन छोड़कर आ रही है, वो युद्ध और दंगे देख कर ना आए। दंगों की टेस्टिंग उसने बंगाल से शुरू कर दी है। उसने भारत पर मजबूत आक्रमण करने के लिए कुछ दिनों में ही गतिविधियां तेज की हैं। मालदीव के पास एक कृत्रिम आइलैंड बनाया है, श्रीलंका के पोर्ट पर लड़ाकू विमान उतरे हैं, नेपाल के एवरेस्ट पर उसकी सेना ने कब्जा कर लिया है। वहां से लद्दाख केवल 80 किलोमीटर है। नॉर्थ ईस्ट की सारी सीमा पर भारतीय सैनिकों से गुत्थम गुत्था लड़ाई की है, पाकिस्तान-बांग्लादेश में वो पहले से है। वो छह दिशा से युद्ध को तैयार है। और आपको उसी चीन का रेवेन्यू tick tok से बढ़ाना है, उनके सामान खरीद के बढ़ाना है- आपकी मर्ज़ी। पर अब भी आप नहीं समझते हैं तो मेरी नजर में आप जाने-अनजाने अपनी ही मातृभूमि, अपने स्वदेश के प्रति एक अक्षम्य अपराध के भागी होंगे। जिसका प्रायश्चित स्वयं देवताओं के पास भी नहीं है।"

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