इसे "संयोग"कहें,??? या "इस्लामीकरण"की तैयारी ??? 🇮🇳 क्या कारण है ? कि, "बाॅलीवुड"में सभी जगह,"मुस्लिम मर्दों" का वर्चस्व"है . 🇮🇳 और- उन,"सभी" की," पत्नियाॅ"" हिन्दू" हैं । 💂‍♀शाहरुख खान की पत्नी - "गौरी" एक हिंदू है। 💂‍♀आमिर खान की पत्नियां - "रीमा दत्ता /किरण राव"!!... 💂‍♀और सैफ अली खान की पत्नियाँ - "अमृता सिंह / करीना कपूर" दोनों हिंदू हैं। 💂‍♀नवाब पटौदी ने भी ,हिंदू लड़की "शर्मीला टैगोर" से शादी की थी। 💂‍♀फरहान अख्तर की पत्नी - "अधुना भवानी" ..... 💂‍♀और फरहान आजमी की पत्नी, "आयशा टाकिया" भी हिंदू है। अमृता अरोड़ा की शादी एक 💂‍♀"मुस्लिम"से हुई है ...जिसका नाम," शकील लदाक" है। 💂‍♀सलमान खान के भाई - "अरबाज खान" की पूर्व पत्नी - "मलाइका अरोड़ा" हिंदू है!!! 💂‍♀और उसके छोटे भाई - "सुहैल खान" की पत्नी - "सीमा सचदेव"भी हिंदू है। 💂‍♀आमिर खान के भतीजे - "इमरान" की हिंदू - पत्नी "अवंतिका मलिक" है। 💂‍♀संजय खान के बेटे -"जायद खान" की पत्नी - "मलिका पारेख" है। 💂‍♀फिरोज खान के बेटे - "फरदीन" की पत्नी:---" नताशा "है। 💂‍♀इरफान खान की बीवी का नाम - "सुतपा सिकदर" है। 💂‍♀नसरुद्दीन शाह की हिंदू पत्नी - "रत्ना पाठक" हैं। 🇮🇳एक समय था, जब 💂‍♀"मुसलमान एक्टर" हिंदू नाम"रख लेते थे .... क्योंकि ,उन्हें डर था, कि अगर "दर्शकों" को उनके ‍,💂‍♀"मुसलमान" होने का,"पता" लग गया .....तो,उनकी "फिल्म" देखने, कोई नहीं आएगा।!!! 🇮🇳 ऐसे लोगों में,"सबसे मशहूर" नाम 💂‍♀"युसूफ खान" का है .... जिन्हें, "दशकों"तक, हम "दिलीप कुमार" समझते रहे।!! 🇮🇳 💂‍♀"महजबीन अलीबख्श",मीना कुमारी"बन गई... और 💂‍♀"मुमताज बेगम जहाँ देहलवी"," मधुबाला" बनकर, हिंदू ह्रदयों पर," राज" करतीं रहीं। 💂‍♀"बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी" को हम - "जॉनी वाकर" समझते रहे ....😂और 💂‍♀"हामिद अली खान" विलेन "अजित" बनकर, काम करते रहे।!!! 😂मशहूर "अभिनेत्री" रीना राय" का ,"असली नाम"💂‍♀"सायरा खान" था। 🇮🇳 💂‍♀"जॉन अब्राहम" भी,दरअसल एक "मुस्लिम" है .... जिसका "असली नाम" फरहान इब्राहिम" है।!! 🇮🇳 जरा सोचिए ....कि ,पिछले "50 साल"में ऐसा क्या हुआ है ?????कि:---- अब,ये "मुस्लिम कलाकार", "हिंदू नाम"रखने की "जरूरत"नहीं समझते..... 🇮🇳 बल्कि, उनका "मुस्लिम नाम" उनका "ब्रांड" बन गया है।!! 🇮🇳 यह उनकी "मेहनत" का "परिणाम" है ???? या "हम लोगों" के "अंदर" से, "कुछ"खत्म, हो गया है??? 🇮🇳 जरा सोचिए ....कि :-- हम कौन सी,"फिल्मों" को "बढ़ावा" दे रहे हैं???? 🇮🇳 क्या वजह है,कि "बहुसंख्यक बॉलीवुड फिल्मों" में ,"हीरो"💂‍♀ "मुस्लिम लड़का" और 💃"हीरोइन" "हिन्दू लड़की" होती है??? 🇮🇳 क्योंकि - ऐसा "फिल्म उद्योग" का सबसे बड़ा -"फाइनेंसर",💂‍♀"दाऊद इब्राहिम" चाहता है l " टी-सीरीज' का मालिक "गुलशन कुमार" ने उसकी बात नहीं मानी, और "नतीजा" सबने देखा। 🇮🇳 आज भी,एक "फिल्मकार" को, *💂‍♀मुस्लिम हीरो, साइन करते ही, "दुबई" से,"आसान शर्तों "पर "कर्ज" मिल जाता है। 💂‍♀इकबाल मिर्ची और 💂‍♀अनीस इब्राहिम, जैसे 💂‍♀"आतंकी एजेंट" "सात सितारा होटलों" में," खुलेआम" "मीटिंग", करते देखे जा सकते हैं। 🇮🇳 💂‍♀सलमान खा 💂‍♀शाहरुख खान 💂‍♀आमिर खान 💂‍♀ सैफ अली खान 💂‍♀नसीरुद्दीन शाह 💂‍♀फरहान अख्तर 💂‍♀नवाजुद्दीन सिद्दीकी 💂‍♀फवाद खान जैसे अनेक नाम "हिंदी फिल्मों" की "सफलता" की "गारंटी"बना दिए गए हैं। 🇮🇳 👌अक्षय कुमार 👌अजय देवगन *जैसे "फिल्मकार" इन की "आंख के कांटे" हैं*। 🇮🇳 तब्बू, हुमा कुरैशी, सोहा अली खान, और जरीन खान, जैसी "प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों" का," कैरियर" जबरन, "खत्म"कर दिया गया .....* क्योंकि, वे मुस्लिम हैं.... और इस्लामी मुल्लाओं को, उनका "काम""गैर मजहबी"लगता है। 🇮🇳 फिल्मों की ,"कहानियां" लिखने का काम भी," सलीम खान और जावेद अख्तर" जैसे " मुस्लिम लेखकों" के" इर्द-गिर्द "ही रहा। 🇮🇳 जिनकी- " कहानियों"में, एक "भला-ईमानदार" ....मुसलमान, 🇮🇳 एक "पाखंडी" ब्राह्मण 🇮🇳 एक "अत्याचारी" - "बलात्कारी" क्षत्रिय 🇮🇳 एक "कालाबाजारी" वैश्य 🇮🇳 एक "राष्ट्रद्रोही"नेता 🇮🇳 एक "भ्रष्ट"पुलिस अफसर 🇮🇳 और एक" गरीब" दलित महिला, 🇮🇳 Ye - होना,"अनिवार्य" शर्त है।! 🇮🇳 इन फिल्मों के "गीतकार और संगीतकार" भी, "मुस्लिम" हों ..... 🇮🇳तभी तो ,"एक गाना,"मौला" के नाम का बनेगा .... और जिसे गाने वाला,"पाकिस्तान" से आना जरूरी है। 🇮🇳इस"अंडरवर्ड"की,"असिलियत" को ,"पहचानो".... और "हिन्दू समाज" को,' संगठित" करो..... अपनी अपने जमीर को जगाओ तब ही, तुम, "तुम्हारे धर्म" की "रक्षा" कर पाओगे !!!। *🇮🇳 सेंड करो अपने सभी सोए हुए हिन्दू भाइयों को जगाओ वंदे मातरम🇮🇳* 💐🙏🏻 *🚩जागो हिन्दू जागो🚩* *॥भारत माता की जय॥🇮🇳* *॥जय माता की॥*

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' *🙏गोद में सिर🙏* *एक लड़की ने, एक सन्त जी को बताया कि मेरे पिता बहुत बीमार हैं और अपने पलंग से उठ भी नहीं सकते क्या आप उनसे मिलने हमारे घर पे आ सकते हैं।* *सन्त जी नै कहा, बेटी मैं ज़रूर आऊँगा, जब सन्त जी उनसे मिलने आये तो देखा कि एक बीमार और लाचार आदमी पलंग पर दो तकियों पर सिर रखकर लेटा हुआ है।* *लेकिन एक खाली कुर्सी उसके पलँग के सामने पड़ी थी।* *सन्त जी ने उस बूढ़े और बीमार आदमी से पूछा, कि मुझे लगता है कि शायद आप मेरे ही आने की उम्मीद कर रहे थे।* *उस वृद्ध आदमी ने कहा, जी नहीं, आप कौन हैं?* *सन्त जी ने अपना परिचय दिया और फिर कहा मुझे ये खाली कुर्सी देखकर लगा कि आप को मेरे आने का आभास हो गया है।* *वो आदमी बोला, सन्त जी, अगर आपको अगर बुरा न लगे तो कृपया कमरे का दरवाज़ा बंद कर दीजिये। संत जी को थोड़ी हैरानी तो हुई, फिर भी सन्त जी ने दरवाज़ा बंद कर दिया।* *वो बीमार आदमी बोला कि दरअसल इस खाली कुर्सी का राज़ मैंने आजतक भी किसी को नहीं बताया। अपनी बेटी को भी नहीं, दरअसल अपनी पूरी ज़िंदगी में मैं ये जान नहीं सका कि प्रार्थना कैसे की जाती है। लेकिन मैं हर.रोज मंदिर जाता ज़रूर था लेकिन कुछ समझ नहीं आता था।* *लगभग चार साल पहले मेरा एक दोस्त मुझे मिलने आया, उसने मुझे बताया, कि हर प्रार्थना भगवान से सीधे ही हो सकती है। उसी ने मुझे सलाह दी कि एक खाली कुर्सी अपने सामने रखो और ये विश्वास करो कि भगवान खुद इस कुर्सी पर तुम्हारे सामने बैठे हैं, फिर भगवान से ठीक वैसे ही बातें करना शुरू करो, जैसे कि अभी तुम मुझसे कर रहे हो!,वो हमारी हर फरियाद सुनता है, और जब मैंने ऐसा ही करके देखा मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर तो मैं रोज़ दो-दो घंटे तक ऐसे ही भगवान से बातें करने लगा।* *लेकिन मैं इस बात का ख़ास ध्यान रखता था कि मेरी बेटी कभी मुझे ऐसा करते न देख ले। अगर वो देख लेती तो उसे लगता कि मैं पागल हो गया हूँ।* *ये सुनकर सन्त जी की आँखों में, प्रेम और भाव से आँसू बहने लगे, सन्त जी ने उस बुजुर्ग से कहा कि आप सबसे ऊँची भक्ति कर रहे हो, फिर उस बीमार आदमी के सिर पर पर हाथ रखा और कहा अपनी सच्ची प्रेम भक्ति को ज़ारी रखो।* *सन्त जी, अपने आश्रम में लौट गये, लेकिन पाँच दिन बाद वही बेटी सन्त जी से मिलने आई और उन्हें बताया कि जिस दिन आप मेरे पिता जी से मिले थे, वो बेहद खुश थे, लेकिन कल सुबह चार बजे मेरे पिता जी ने प्राण त्याग दिये हैं।* *बेटी ने बताया, कि मैं जब घर से अपने काम पर जा रही थी तो उन्होंने मुझे बुलाया मेरा माथा प्यार से चूमा, उनके चेहरे पर बहुत शांति थी, उनकी आँखे आँसुओं से भरी हुई थीं, लेकिन वापिस लौटकर मैंने एक अजीब सी चीज़ भी देखी वो ऐसी मुद्रा में अपने बिस्तर पर बैठे थे जैसे खाली कुर्सी पर उन्होंने ने किसी की गोद में अपना सिर झुका रखा हो, जबकि कुर्सी तो हमेशा की तरह ख़ाली थी।* *सन्त जी, मेरे पिता जी ने ख़ाली कुर्सी के आगे सिर क्यों झुका रखा था?* *बेटी से पिता का ये हाल सुन कर सन्त जी फूटफूट कर रोने लगे और मालिक के आगे फरियाद करने लगे, हे मालिक, मैं भी,जब इस दुनिया से जाऊं तो ऐसे ही जाऊं, मुझ पर भी ऐसी ही कृपा करना।* *यदि हम भी इसी तरह अपने सतगुरू की गोद में बैठकर, यहाँ से जाना चाहते हैं तो हर पल अपने प्रभु की हाज़री को हर जगह महसूस करेगें, एक दिन हमारी अवस्था भी ज़रूर बदलेगी जी* *सजण सेई, नाल मैं,* *चलदेयां नाल चलण,* *जित्थे, लेखा मँगिये,* *तित्थे खड़े दिसण।* 🙏🏻🤲🏻 *वाहेगुरुजीं*🤲🏻🙏🏻

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✋✋ *मै काँग्रेस हूं।* ✋✋◆ ◆मै हिंदुओं का यमराज हूं। ◆मैने ही हिंदू मुक्त पाकिस्तान बनाया। ◆21लाख हिंदुओं का कत्ल होने के बाद भी पाक को 55 करोड रुपये दिये। ◆जीतकर भी हिंदू मुक्त अलग बांगलादेश बनाया। ◆पाक से आये हिंदू लोगों पर लाठीचार्ज करवाया। ◆धर्म के आधार पर बटवारा करते हुये भी 7 करोड मुस्लिमों को देश मे रखा। ◆हिंदू मुक्त कश्मीर बनाया ◆मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की स्थापना की। ◆"सेक्युलर" शब्द संविधान में घुसाया। ◆आठ राज्योंमें हिंदू अल्पसंख्यक बनाये। ◆AMU मे मुस्लिम शब्द लगाया। ◆BHU में हिंदू शब्द लगाने का विरोध किया। ◆कशमीरी मसला जानबुझकर UN ले कर गया। ◆कश्मीर समस्या जटील बनायी। ◆JK में धारा 35(A),370 लगाई। ◆पाक के 93,000 सैनिक छोडकर जीता हुआ POK वापस गिफ्ट किया। ◆90,000 sq km के साथ कैलाश मानसरोवर चीन को सुपुर्द किया। ◆JK में रोहिंग्याओं को बसाया। ◆बांगलादेशियों को देश में घुसा कर वोट बैंक बढाया ◆NRC का विरोध किया। ◆टुकडे गैंग और नकसलियों का समर्थन किया। ◆आतंकीयों के बचाव के लिये रात दो बजे कोर्ट खुलवाये। ◆सरदार पटेल को PM बनने से रोका। ◆सुभाष बाबू को काँग्रेस अध्यक्ष बनने से रोका। ◆2700 सिखोंका हत्याकांड किया। ◆दिवाली के दिन शंकरचार्य को खुन के झुटे आरोप में जेल डाला। ◆साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को झुटे आरोप में जेल में डाला। ◆"भगवा आतंकवाद" कहकर हिंदुओंको बदनाम किया। ◆दुरदर्शन का "सत्यम शिवम सुंदरम" लोगो हटाया। ◆केंद्रिय नवोदय विद्यालय के लोगो में से "असतो मा सत गमय" श्लोक हटाया। ◆"वंदेमातरम्" को राष्ट्रगान करने के लिये विरोध किया। ◆26/11 के पीछे हिंदूओंका हाथ बताया। ◆तीन तलाक की तुलना श्रीराम ने सीता को छोडने से की ◆आर्मी को धर्म के आधार पर गिनती कर बांटने की कोशिश की। ◆देश की सम्पत्ति पर सबसे पहले "अल्पसंख्यकों" का अधिकार बताया। ◆मेरे वकिलों ने आतंकी टुकडे गैंग, और नक्सलियों के केस लडे। ◆देश में इमरजेन्सी लगाकर लोकतंत्र का गला घोटा। ◆"भारतमाता की जय" "वंदेमातरम" का नारा किसी भी रैली में नही देते। ◆गौरक्षा के लिये आंदोलन करने वाले साधुओं पर गोली चलाकर सैकडो साधुओं की 1966 में हत्या की। ◆हज को सबसिडी दी और अमरनाथ यात्रा पर टैक्स लगाया। ◆सोमनाथ मंदिर बनाने के लिये सरदार पटेल का विरोध किया। ◆ सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन करने जाने वाले राष्ट्रपति डाँ. राजेंद्र प्रसाद का विरोध किया। ◆ मंदिरमें लडके लडकियाँ छेडने जाते ऐसा कहा। ◆विदेशोंमे जाकर देश को बदनाम किया। ◆RSS को "मुस्लिम ब्रदरहुड" जैसा आतंकी संगठन कहा। ◆करोडों दोगले हिंदु साथ होते हुये "काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी" कहा। ◆"मै किसी भी प्रकार के हिंदुत्व पर विश्वास नही रखता" ऐसा कहा। ◆ PM मोदीको सैकडो गालियाँ दी। ◆श्रीराम को काल्पनिक बताकर अफिडेविट दिया।और रामसेतू तोडनेकी कोशिश की। ◆भारत को UN में मिलने वाली वीटो का अधीकार चीन को दिया। ◆ 2019 के घोषणापत्र में देशद्रोह कानुन हटानेकी और आर्मी के अधिकार कम करने की बात की। JK मे आर्मी हटाने की भी बात की। ◆यदी आप सब "भोले" "सेक्युलर" हिंदूओंका साथ मिले, तो पुरा हिंदूस्तान हिंदू मुक्त बनायेंगे। और आरोप RSS पर लगा देंगे। ★ ये मेसेज 🕉️एक हकीकत1971 की 😢 जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी उस समय फील्ड मार्शल मानेकशॉ आर्मी चीफ थे, इंदिरा गाँधी ने उन्हें पाकिस्तान पर चढाई करने का आदेश दिया... इसके जवाब में जनरल मानेकशॉ ने कहा सैनिक तैयार हैे, पर उचित समय पर युद्ध करेंगे। लेकिन इंदिरा गाँधी ने तुरंत चढाई करने का आदेश दिया... परंतु, उचित समय पर ही सेना ने चढ़ाई करके सिर्फ 13 दिनों में पूर्वी पाकिस्तान को बांगलादेश बना दिया... उचित समय आने पर श्री मानेक्शा इंदिरा गाँधी से बोले..."मै आपके राजकाज में दखल नही देता.. वैसे ही आप भी सैन्य कार्यवाही में दखल मत दीजिये"... इस के पश्चात 1971 के बाद से जनरल माणेकशा जी का वेतन बंद कर दिया गया... परंतु, माँ भारती के इस सपूत ने कभी भी अपने वेतन की मांग नही की... 25 साल बाद जब वो हॉस्पिटल में थे तब एक दिन श्री ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, राष्ट्रपति पद पर रहते उनसे मिलने गए... उस वक्त बातचीत के दौरान ये बात राष्ट्रपति श्री कलाम साहब को पता चली कि जिस व्यक्ति ने अपने देश के लिए 5-5 युद्ध लडे, उस योद्धा को 1971 के बाद से वेतन ही नही दिया गया... तब उन्होंने तत्काल कार्यवाही करके उनकी शेष राशि का भुगतान लगभग 1.3 करोड़ रुपये का चेक उनको भिजवाया... ऐसे वीर योद्धा को भी इस महान गाँधी परिवार ने नही छोड़ा... अत्यन्त ही शर्मनाक बात है। आज उस महान योद्धा की पुण्यतिथि है,🙏🙏 जय हिंद जय भारत🇮🇳 सोचिए समझिए व सब को समझाइए

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*🦃 मयूर पंख का रहस्योद्घाटन 🦃* "वनवास के दौरान माता सीताजी को प्यास लगी, तभी श्रीरामजी ने चारों ओर देखा, तो उनको दूर-दूर तक जंगल ही जंगल दिख रहा था। कुदरत से प्रार्थना की ~ हे वन देवता आसपास जहाँ कहीं पानी हो,वहाँ जाने का मार्ग कृपा कर सुझाईये। तभी वहाँ एक मयूर ने आकर श्रीरामजी से कहा कि आगे थोड़ी दूर पर एक जलाशय है।चलिए मैं आपका मार्ग पथ प्रदर्शक बनता हूँ, किंतु , मार्ग में हमारी भूल चूक होने की संभावना है। श्रीरामजी ने पूछा ~ वह क्यों ? तब मयूर ने उत्तर दिया कि ~ मैं उड़ता हुआ जाऊंगा और आप चलते हुए आएंगे, इसलिए मार्ग में , मैं अपना एक-एक पंख बिखेरता हुआ जाऊंगा।उस के सहारे आप जलाशय तक पहुँच ही जाओगे। यहां पर एक बात स्पष्ट कर दूं कि, मयूर के पंख, एक विशेष समय एवं एक विशेष ऋतु में ही बिखरते हैं। अगर वह अपनी इच्छा विरुद्ध पंखों को बिखेरेगा, तो उसकी मृत्यु हो जाती है। और वही हुआ ! अंत में जब मयूर अपनी अंतिम सांस ले रहा होता है,तब उसने मन में ही कहा कि वह कितना भाग्यशाली है, कि जो जगत की प्यास बुझाते हैं, ऐसे प्रभु की प्यास बुझाने का उसे सौभाग्य प्राप्त हुआ।मेरा जीवन धन्य हो गया।अब मेरी कोई भी इच्छा शेष नहीं रही। तभी भगवान श्रीराम ने मयूर से कहा कि,मेरे लिए तुमने जो मयूर पंख बिखेरकर, अपने जीवन का त्यागकर,मुझ पर जो ऋणानुबंध चढ़ाया है, मैं उस ऋण को अगले जन्म में जरूर चुकाऊंगा .... *★तुम्हारे पंख अपने सिर पर धारण करके★* तत्पश्चात अगले जन्म में श्री कृष्ण अवतार में उन्होंने अपने माथे(मुकुट)पर मयूर पंख को धारण कर वचन अनुसार उस मयूर का ऋण उतारा था। 📍 तात्पर्य यही है कि 📍 *अगर भगवान को ऋण उतारने के लिए पुनः जन्म लेना पड़ता है, तो हम तो मानव हैं।न जाने हम कितने ही ऋणानुबंध से बंधे हैं?* उसे उतारने के लिए हमें तो कई जन्म भी कम पड़ जाएंगे। ~~ अर्थात ~~ जो भी भला हम कर सकते हैं इसी जन्म में हमें करना है. [ ] चिन्तन का विषय [ ]

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🙏🙏जय श्री कृष्ण जी 🌹🌹राधे जी ठाकुर जी की महिमा अपरम्पार है *ये कथा रात को सोने से पहले घर मे सबको सुनायें* सेवाराम और मोतीलाल दो घनिष्ठ मित्र थे । दोनों ही गली-गली जाकर पीठ पर पोटली लादकर कपड़े बेचने का काम करते थे । सर्दियों के दिन थे वह गांव-गांव जाकर कपड़े बेच रहे थे तभी एक झोपड़ी के बाहर एक बुढ़िया जो कि ठंड से कांप रही थीतो सेवाराम ने अपनी पोटली से एक कंबल निकालकर उस माई को दिया और कहां माई तुम ठंड से कांप रही हो यह कंबल ओढ़ लो... . बूढ़ी माई कंबल लेकर बहुत खुश हुई और जल्दी जल्दी से उस ने कंबल से अपने आप को ढक लिया और सेवाराम को खूब सारा आशीर्वाद दिया। . तभी उसने सेवाराम को कहा मेरे पास पैसे तो नहीं है लेकिन रुको मैं तुम्हें कुछ देती हूं। . वह अपनी झोपड़ी के अंदर गई तभी उसके हाथ में एक बहुतही सुंदर छोटी सी ठाकुर जी की प्रतिमा थी। . वह सेवाराम को देते हुए बोली कि मेरे पास देने के लिए पैसे तो नहीं है लेकिन यह ठाकुर जी है। . इसको तुम अपनी दुकान पर लगा कर खूब सेवा करना देखना तुम्हारी कितनी तरक्की होती है। यह मेरा आशीर्वाद है। . मोतीराम बुढ़िया के पास आकर बोला, अरे ओ माता जी क्यों बहाने बना रही हो.. . अगर पैसे नहीं है तो कोई बात नहीं लेकिन हमें झूठी तसल्ली मत दो हमारे पास तो कोई दुकान नहीं है। . हम इसको कहां लगाएंगे। इनको तुम अपने पास ही रखो। . लेकिन सेवाराम जो कि बहुत ही नेक दिल था और ठाकुर जी को मानने वाला था वह बोला.. . नहीं-नहीं माताजी अगर आप इतने प्यार से कह रही हैं तो यह आप मुझे दे दो। पैसों की आप चिंता मत करो.. . सेवाराम ने जल्दी से अपने गले में पढ़े हुए परने में ठाकुर जी को लपेट लिया और उनको लेकर चल पड़ा। . बुढ़िया दूर तक उनको आशीर्वाद दे रही थी.. हरी तुम्हारा ध्यान रखेंगे ठाकुर जी तुम्हारा ध्यान रखेंगे। . वह तब तक आशीर्वाद देती रही जब तक कि वह दोनों उनकी आंखों से ओझल ना हो गए। . ठाकुर जी का ऐसा ही चमत्कार हुआ अब धीरे-धीरे दोनों की कमाई ज्यादा होने लगी.. . अब उन्होंने एक साइकिल खरीद ली.. अब साइकिल पर ठाकुरजी को आगे टोकरी में रखकर और पीछे पोटली रखकर गांव गांव कपड़े बेचने लगे। . अब फिर उनको और ज्यादा कमाई होने लगी तो उन्होंने एक दुकान किराए पर ले ले और वहां पर ठाकुर जी को बहुत ही सुंदर आसन पर विराजमान करके दुकान का मुहूर्त किया। . धीरे-धीरे दुकान इतनी चल पड़ी कि अब सेवाराम और मोती लाल के पास शहर में बहुत ही बड़ी बड़ी कपड़े की दुकाने और कपड़े की मिलें हो गई। . एक दिन मोतीलाल सेवाराम को कहता कि देखो आज हमारे पास सब कुछ है यह हम दोनों की मेहनत का नतीजा है.. . लेकिन सेवाराम बोला नहीं नहीं हम दोनों की मेहनत के साथ- साथ यह हमारे ठाकुर जी हमारे हरि की कृपा है। . मोतीलाल बात को अनसुनी करके वापस अपने काम में लग गया। . एक दिन सेवाराम की सेहत थोड़ी ढीली थी इसलिए वह दुकान पर थोड़ी देरी से आया.. . मोतीलाल बोलाअरे दोस्त आज तुम देरी से आए हो तुम्हारे बिना तो मेरा एक पल का गुजारा नहीं तुम मेरा साथ कभी नाछोड़ना। . सेवाराम हंसकर बोला अरे मोतीलाल चिंता क्यों करते हो मैं नहीं आऊंगा तो हमारे ठाकुर जी तो है ना। . यह कहकर सेवा राम अपने काम में लग गया। पहले दोनों का घर दुकान के पास ही होता था लेकिन अब दोनों ने अपना घर दुकान से काफी दूर ले लिया। . अब दोनों ही महल नुमा घर में रहने लगे। दोनों ने अपने बच्चों को खूब पढ़ाया लिखाया। . सेवाराम के दो लड़के थे दोनों की शादी कर दी थी और मोती लाल के एक लड़का और एक लड़की थी। . मोतीलाल ने अभी एक लड़के की शादी की थी अभी उसने अपनी लड़की की शादी करनी थी। . सेहत ढीली होने के कारण सेवाराम अब दुकान पर थोड़े विलंब से आने लगा तो एक दिन वह मोतीलाल से बोला.. . अब मेरी सेहत ठीक नहीं रहती क्या मैं थोड़ी विलम्ब से आ सकता हूं.. . मोतीलाल ने कहा हां भैया तुम विलम्ब से आ जाओ लेकिन आया जरूर करो मेरा तुम्हारे बिना दिल नहीं लगता। . फिर अचानक एक दिन सेवाराम 12:00 बजे के करीब दुकान पर आया.. . लेकिन आज उसके चेहरे पर अजीब सी चमक थी चाल में एक अजीब सी मस्ती थी चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी । . वह आकर गद्दी पर बैठ गया... मोतीलाल ने कहा भैया आज तो तुम्हारी सेहत ठीक लग रही है.. . सेवाराम ने कहा भैया ठीक तो नहीं हूं लेकिन आज से मैं बस केवल 12:00 बजे आया करूंगा और 5:00 बजे चला जाया करूंगा। मैं तो केवल इतना ही दुकान पर बैठ सकता हूं। . मोतीलाल ने कहा कोई बात नहीं जैसी तुम्हारी इच्छा.. . अब तो सेवाराम रोज 12:00 बजे आता और 5:00 बजे चला जाता लेकिन उसकी शक्ल देखकर ऐसा नहीं लगता था कि वह कभी बीमार भी है। . लेकिन मोतीलाल को अपने दोस्त पर पूरा विश्वास था कि वह झूठ नहीं बोल सकता और मेहनत करने से वह कभी पीछे नहीं हट सकता। . एक दिन मोतीलाल की बेटी की शादी तय हुई तो वह शादी का निमंत्रण देने के लिए सेवाराम के घर गया। . घर जाकर उसको उसके बेटा बहू सेवाराम की पत्नी सब नजर आ रहे थे.. लेकिन सेवाराम नजर नहीं आ रहा था.. . उसने सेवाराम की पत्नी से कहा भाभी जी सेवाराम कहीं नजर नहीं आ रहा.. . उसकी पत्नी एकदम से हैरान होती हुई बोली यह आप क्या कह रहे हैं ? . तभी वहां उसके बेटे भी आ गए और कहने लगी काका जीआप कैसी बातें कर रहे हो.. हमारे साथ कैसा मजाक कर रहे हो.. . मोतीलाल बोला कि मैंने ऐसा क्या पूछ लिया मैं तो अपने प्रिय दोस्त के बारे में पूछ रहा हूं.. . क्या उसकी तबीयत आज भी ठीक नही है..? क्या वह अंदर आराम कर रहा है..? . मै खुद अंदर जाकर उसको मिल आता हूं... . मोतीलाल उसके कमरे में चला गया लेकिन सेवाराम उसको वहां भी नजर नहीं आया.. . तभी अचानक उसकी नजर उसके कमरे में सेवाराम के तस्वीर पर पड़ी.. . वह एकदम से हैरान होकर सेवा राम की पत्नी की तरफ देखता हुआ बोला... . अरे भाभी जी यह क्या आपने सेवाराम की तस्वीर पर हार क्यों चढ़ाया हुआ है.. . सेवा राम की पत्नी आंखों में आंसू भर कर बोली, मुझे आप से ऐसी उम्मीद नहीं थी भैया कि आप ऐसा मजाक करेंगे..!! . मोतीलाल को कुछ समझ नहीं आ रहा था.. . तभी सेवाराम का बेटा बोला क्या आपको नहीं पता कि पिताजी को गुजरे तो 6 महीने हो चुके हैं.!! . मोतीलाल को तो ऐसा लगा कि जैसे उसके सिर पर बिजली गिर पड़ी हो। . वह एकदम से थोड़ा लड़खडाता हुआ पीछे की तरफ हटा और बोला ऐसा कैसे हो सकता है वह तो हर रोज दुकान पर आते हैं। . बीमार होने के कारण थोड़ा विलंब से आता है.. . वह 12:00 बजे आता है और 5:00 बजे चला जाता है.. . उसकी पत्नी बोली ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको पता ना हो . आप ही तो हर महीने उनके हिस्से का मुनाफे के पैसे हमारे घर देने आते हो.. . 6 महीनों से तो आप हमें दुगना मुनाफा दे कर जा रहे हो.. . मोतीलाल का तो अब सर चकरा गया उसने कहा मैं तो कभी आया ही नहीं..!! . 6 महीने हो गए यह क्या मामला है.. . तभी उसको सेवाराम की कही बात आई मैं नहीं रहूंगा तो मेरे हरी है ना मेरे ठाकुर जी है ना वह आएंगे... . मोतीलाल को जब यह बातें याद आई तो वह जोर जोर से रोने लगा और कहने लगा हे ठाकुर जी... हे हरि आप अपने भक्तों के शब्दों का कितना मान रखते हो.. . जोकि अपने विश्राम के समय.. मंदिर के पट 12:00 बजे बंद होते हैं और 5:00 बजे खुलते हैं.. . और आप अपने भक्तों के शब्दों का मान रखने के लिए कि मेरे हरी आएंगे मेरे ठाकुर जी आएंगे तो आप अपने आराम के समय मेरी दुकान पर आकर अपने भक्तों का काम करते थे.. . इतना कहकर वह फूट-फूट कर रोने लगा और कहने लगा ठाकुर जी आप की लीला अपरंपार है.. . मैं ही सारी जिंदगी नोट गिनने में लगा रहा असली भक्त तो सेवाराम था जो आपका प्रिय था.. . आपने उसको अपने पास बुला लिया और उसके शब्दों का मान रखने के लिए आप उसका काम खुद स्वयं कर रहे थे... . और उसके हिस्से का मुनाफा भी उसके घर मेरे रूप में पहुँचा रहे थे.. . इतना कहकर वह भागा भागा दुकान की तरफ गया और वहां जाकर जहां पर ठाकुर जी जिस गद्दी पर आकर बैठते थे.. . जहां पर अपने चरण रखते थे वहां पर जाकर गद्दी को अपने आंखों से मुंह से चुमता हुआ चरणों में लौटता हुआ जार जार रोने लगा.. . और ठाकुर जी की जय जयकार करने लगा। . ठाकुर जी तो हमारे ऐसे हैं.. सेवाराम को उन पर विश्वास था कि मैं ना रहूंगा तो मेरे ठाकुर जी मेरा सारा काम संभालेंगे। 💥 कथासार💥 विश्वास से तो बेड़ा पार है इसलिए हमें हर काम उस पर विश्वास रख कर अपनी डोरी उस पर छोड़ देनी चाहिए। जिनको उन पर पूर्ण विश्वास है वह उनकी डोरी कभी भी नहीं अपने हाथ से छूटने देंते। जय हो ठाकुर जी🙏राधे राधे । 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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