R.G.P.Bhardwaj Apr 10, 2020

माता वैष्णो देवी की अमर कथा 🔸🔸🔹🔸🔸🔸🔹🔸🔸 वैष्णो देवी उत्तरी भारत के सबसे पूजनीय और पवित्र स्थलों में से एक है। यह मंदिर पहाड़ पर स्थित होने के कारण अपनी भव्यता व सुंदरता के कारण भी प्रसिद्ध है। वैष्णो देवी भी ऐसे ही स्थानों में एक है जिसे माता का निवास स्थान माना जाता है। मंदिर, 5,200 फीट की ऊंचाई और कटरा से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हर साल लाखों तीर्थ यात्री मंदिर के दर्शन करते हैं।यह भारत में तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद दूसरा सर्वाधिक देखा जाने वाला धार्मिक तीर्थस्थल है। वैसे तो माता वैष्णो देवी के सम्बन्ध में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं लेकिन मुख्य 2 कथाएँ अधिक प्रचलित हैं। माता वैष्णो देवी की प्रथम कथा!!!!! मान्यतानुसार एक बार पहाड़ों वाली माता ने अपने एक परम भक्तपंडित श्रीधर की भक्ति से प्रसन्न होकर उसकी लाज बचाई और पूरे सृष्टि को अपने अस्तित्व का प्रमाण दिया। वर्तमान कटरा कस्बे से 2 कि.मी. की दूरी पर स्थित हंसाली गांव में मां वैष्णवी के परम भक्त श्रीधर रहते थे। वह नि:संतान होने से दु:खी रहते थे। एक दिन उन्होंने नवरात्रि पूजन के लिए कुँवारी कन्याओं को बुलवाया। माँ वैष्णो कन्या वेश में उन्हीं के बीच आ बैठीं। पूजन के बाद सभी कन्याएं तो चली गई पर माँ वैष्णो देवी वहीं रहीं और श्रीधर से बोलीं- ‘सबको अपने घर भंडारे का निमंत्रण दे आओ।’ श्रीधर ने उस दिव्य कन्या की बात मान ली और आस – पास के गाँवों में भंडारे का संदेश पहुँचा दिया। वहाँ से लौटकर आते समय गुरु गोरखनाथ व उनके शिष्य बाबा भैरवनाथ जी के साथ उनके दूसरे शिष्यों को भी भोजन का निमंत्रण दिया। भोजन का निमंत्रण पाकर सभी गांववासी अचंभित थे कि वह कौन सी कन्या है जो इतने सारे लोगों को भोजन करवाना चाहती है? इसके बाद श्रीधर के घर में अनेक गांववासी आकर भोजन के लिए एकत्रित हुए। तब कन्या रुपी माँ वैष्णो देवी ने एक विचित्र पात्र से सभी को भोजन परोसना शुरू किया। भोजन परोसते हुए जब वह कन्या भैरवनाथ के पास गई। तब उसने कहा कि मैं तो खीर – पूड़ी की जगह मांस भक्षण और मदिरापान करुंगा। तब कन्या रुपी माँ ने उसे समझाया कि यह ब्राह्मण के यहां का भोजन है, इसमें मांसाहार नहीं किया जाता। किंतु भैरवनाथ ने जान – बुझकर अपनी बात पर अड़ा रहा। जब भैरवनाथ ने उस कन्या को पकडऩा चाहा, तब माँ ने उसके कपट को जान लिया। माँ ने वायु रूप में बदलकरत्रिकूट पर्वत की ओर उड़ चली। भैरवनाथ भी उनके पीछे गया। माना जाता है कि माँ की रक्षा के लिए पवनपुत्र हनुमान भी थे। मान्यता के अनुसार उस वक़्त भी हनुमानजी माता की रक्षा के लिए उनके साथ ही थे। हनुमानजी को प्यास लगने पर माता ने उनके आग्रह पर धनुष से पहाड़ पर बाण चलाकर एक जलधारा निकाला और उस जल में अपने केश धोए। आज यह पवित्र जलधारा बाणगंगा के नाम से जानी जाती है, जिसके पवित्र जल का पान करने या इससे स्नान करने से श्रद्धालुओं की सारी थकावट और तकलीफें दूर हो जाती हैं। इस दौरान माता ने एक गुफा में प्रवेश कर नौ माह तक तपस्या की। भैरवनाथ भी उनके पीछे वहां तक आ गया। तब एक साधु ने भैरवनाथ से कहा कि तू जिसे एक कन्या समझ रहा है, वह आदिशक्ति जगदम्बा है। इसलिए उस महाशक्ति का पीछा छोड़ दे। भैरवनाथ साधु की बात नहीं मानी। तब माता गुफा की दूसरी ओर से मार्ग बनाकर बाहर निकल गईं। यह गुफा आज भी अर्धकुमारी या आदिकुमारी या गर्भजून के नाम से प्रसिद्ध है। अर्धक्वाँरी के पहले माता की चरण पादुका भी है। यह वह स्थान है, जहाँ माता ने भागते – भागते मुड़कर भैरवनाथ को देखा था। गुफा से बाहर निकल कर कन्या ने देवी का रूप धारण किया। माता ने भैरवनाथ को चेताया और वापस जाने को कहा। फिर भी वह नहीं माना। माता गुफा के भीतर चली गई। तब माता की रक्षा के लिए हनुमानजी ने गुफा के बाहर भैरव से युद्ध किया। भैरव ने फिर भी हार नहीं मानी जब वीर हनुमान निढाल होने लगे, तब माता वैष्णवी ने महाकाली का रूप लेकर भैरवनाथ का संहार कर दिया। भैरवनाथ का सिर कटकर भवन से 8 किमी दूर त्रिकूट पर्वत की भैरव घाटी में गिरा। उस स्थान को भैरोनाथ के मंदिर के नाम से जाना जाता है। जिस स्थान पर माँ वैष्णो देवी ने हठी भैरवनाथ का वध किया, वह स्थान पवित्र गुफा’ अथवा ‘भवन के नाम से प्रसिद्ध है। इसी स्थान पर माँ काली (दाएँ), माँ सरस्वती (मध्य) और माँ लक्ष्मी (बाएँ) पिंडी के रूप में गुफा में विराजित हैं। इन तीनों के सम्मिलत रूप को ही माँ वैष्णो देवी का रूप कहा जाता है। इन तीन भव्य पिण्डियों के साथ कुछ श्रद्धालु भक्तों एव जम्मू कश्मीर के भूतपूर्व नरेशों द्वारा स्थापित मूर्तियाँ एवं यन्त्र इत्यादी है। कहा जाता है कि अपने वध के बाद भैरवनाथ को अपनी भूल का पश्चाताप हुआ और उसने माँ से क्षमादान की भीख माँगी। माता वैष्णो देवी जानती थीं कि उन पर हमला करने के पीछे भैरव की प्रमुख मंशा मोक्ष प्राप्त करने की थी, उन्होंने न केवल भैरव को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति प्रदान की, बल्कि उसे वरदान देते हुए कहा कि मेरे दर्शन तब तक पूरे नहीं माने जाएँगे, जब तक कोई भक्त मेरे बाद तुम्हारे दर्शन नहीं करेगा। उसी मान्यता के अनुसार आज भी भक्त माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद 8 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर भैरवनाथ के दर्शन करने को जाते हैं। इस बीच वैष्णो देवी ने तीन पिंड (सिर) सहित एक चट्टान का आकार ग्रहण किया और सदा के लिए ध्यानमग्न हो गईं। इस बीच पंडित श्रीधर अधीर हो गए। वे त्रिकुटा पर्वत की ओर उसी रास्ते आगे बढ़े, जो उन्होंने सपने में देखा था, अंततः वे गुफ़ा के द्वार पर पहुंचे, उन्होंने कई विधियों से ‘पिंडों’ की पूजा को अपनी दिनचर्या बना ली, देवी उनकी पूजा से प्रसन्न हुईं, वे उनके सामने प्रकट हुईं और उन्हें आशीर्वाद दिया। तब से, श्रीधर और उनके वंशज देवी मां वैष्णो देवी की पूजा करते आ रहे हैं। माता वैष्णो देवी की अन्य कथा!!!!! हिन्दू पौराणिक मान्यताओं में जगत में धर्म की हानि होने और अधर्म की शक्तियों के बढऩे पर आदिशक्ति के सत, रज और तम तीन रूप महासरस्वती, महालक्ष्मी और महादुर्गा ने अपनी सामूहिक बल से धर्म की रक्षा के लिए एक कन्या प्रकट की। यह कन्या त्रेतायुग में भारत के दक्षिणी समुद्री तट रामेश्वर में पण्डित रत्नाकर की पुत्री के रूप में अवतरित हुई। कई सालों से संतानहीन रत्नाकर ने बच्ची को त्रिकुटा नाम दिया, परन्तु भगवान विष्णु के अंश रूप में प्रकट होने के कारण वैष्णवी नाम से विख्यात हुई। लगभग 9 वर्ष की होने पर उस कन्या को जब यह मालूम हुआ है भगवान विष्णु ने भी इस भू-लोक में भगवान श्रीराम के रूप में अवतार लिया है। तब वह भगवान श्रीराम को पति मानकर उनको पाने के लिए कठोर तप करने लगी। जब श्रीराम सीता हरण के बाद सीता की खोज करते हुए रामेश्वर पहुंचे। तब समुद्र तट पर ध्यानमग्र कन्या को देखा। उस कन्या ने भगवान श्रीराम से उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने को कहा। भगवान श्रीराम ने उस कन्या से कहा कि उन्होंने इस जन्म में सीता से विवाह कर एक पत्नीव्रत का प्रण लिया है। किंतु कलियुग में मैं कल्कि अवतार लूंगा और तुम्हें अपनी पत्नी रूप में स्वीकार करुंगा। उस समय तक तुम हिमालय स्थित त्रिकूट पर्वत की श्रेणी में जाकर तप करो और भक्तों के कष्ट और दु:खों का नाश कर जगत कल्याण करती रहो। जब श्री राम ने रावण के विरुद्ध विजय प्राप्त किया तब मां ने नवरात्रमनाने का निर्णय लिया। इसलिए उक्त संदर्भ में लोग, नवरात्र के 9 दिनों की अवधि में रामायण का पाठ करते हैं। श्री राम ने वचन दिया था कि समस्त संसार द्वारा मां वैष्णो देवी की स्तुति गाई जाएगी, त्रिकुटा, वैष्णो देवी के रूप में प्रसिद्ध होंगी और सदा के लिए अमर हो जाएंगी। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

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R.G.P.Bhardwaj Apr 10, 2020

🍃मेथी एक गुणकारी औषधि🍃 🌼🌼〰🌼🌼〰🌼🌼〰🌼🌼 हमारे देश में सभी स्थानों पर मेथी का साग रुचि पूर्वक खाया जाता है।। मेथी के अंकुरित बीजों की स्वास्थ्यवर्धक सब्जी बनाकर भी सेवन करते हैं।। मेथी एक एंटी आक्सीडेंट,, प्राकृतिक एंटीबायोटिक एवं रक्तशोधक औषधि है।। मेथी ८० प्रकार के वातरोगों को नष्ट करने वाली प्रभावी औषधि है।। मधुमेह में भी इसकी बड़ी उपयोगिता है।। आम इत्यादि के अचार जो खट्टे होने से अम्लीयता के दोष से भरे होने के कारण वात का दर्द बढ़ाने वाले होते हैं,, उस दोष को कम करने के लिए अचार में मेथी का प्रयोग परंपरागत ढंग से करते आ रहे हैं।। मेथी में प्रोटीन,, विटामिन तथा आयरन,, पोटैशियम,, फास्फोरस,, कैल्शियम आदि खनिज लवणों का भंडार है।। दूध पिलाने वाली माताओं के लिए दुग्ध वर्धक,, स्तन््यग्रंथि विकासक है ।। हृदय रोग एवं रक्तचाप को नियंत्रित करने का गुण है।। बड़ी आंत के कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक है।। सौंदर्यवर्धक है।। हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को नष्ट करती है।। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।। वायु नाशक,, पौष्टिक तथा मंद जठराग्नि को तीव्र करती है । मोटापा नियंत्रित करती है।। पाचन संबंधी दोष जैसे-- गैस,, अफरा,, अजीर्ण को दूर करने वाला है।। मेथी में मृदुविरेचक गुण है।। इसके बीजों को पानी में भिगोकर उसके पानी को चेचक के रोगी को शांतिदायक पेय के रूप में पिलाया जाता है।। यह कृमि नाशक तथा कफरोग निवारक है।। 🍃उपयोग🍃 गठिया संधिवात में👉 (१) ५ ग्राम मेथी दाना पानी के साथ सुबह शाम निगल लें।। (२) मेथी के पत्तों को पीसकर आटा में मिलाकर बिना तेल के पराठे बनाकर खाएं।। (३) मेथी के लड्डू बनाकर शीतकाल में नवंबर से फरवरी माह तक नियमित सेवन करें।। (४) मेथी के पत्तों का साग या मेथी दाना अंकुरित कर उसकी सब्जी बनाकर खाना चाहिए।। (५) ३० ग्राम अंकुरित मेथी नित्य प्रातः सेवन करें।। शीत स्थल से बचें।। सुबह शाम १-१ घंटा अपनी स्थिति के अनुसार यथाशक्ति टहलना चाहिए।। नित्य तेल मालिस करना,, यथाशक्ति आसन प्राणायाम करें।। अनाज की अपेक्षा फलों का रस,, फल एवं हरी सब्जियाें का अधिक सेवन करें।। इससे रक्तशोधन होगा।। जोड़ों की चिकनाई बढ़ेगी।। अस्थि क्षरण रुकेगा।। नए ऊतकों का निर्माण होगा।। गठिया संधिवात जटिल रोग हैं,, इनके लिए लंबे समय तक पथ्य परहेज करना चाहिए।। खटाई से बचें।। गरम पानी से स्नान करें।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 माता को दूध की कमी में👉 स्तनपान कराने वाली माताओं को मेथी का लड्डू खिलाने के बाद गोदुग्ध पिलाने से तथा शतावरी चूर्ण एवं सफेद जीरा ३-३ ग्राम सेवन करने से मां का दूध बढ़ने लगता है।। मेथी में डावोस्जेनिन नामक तत्व होता है जो दूध का उत्पादन बढ़ाने वाला होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 हाथ पेेैरों के दर्द में👉 मेथी को घी में भूनकर पीस कर गुड़ की चासनी में थोड़ा घी मिलाकर घोंट कर छोटे छोटे लड्डू बनाकर सुबह-शाम १५-२० दिनों तक १-१ लड्डू सेवन करें।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 ️जीर्ण अतिसार में👉 (१) ५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण तथा १ ग्राम सोंठ,, १० ग्राम गुड़ तथा २०० ग्राम मथी हुई दही मिलाकर पीने से लाभ होता है।। (२) १० ग्राम मेथी दाना पीसकर १५० ग्राम दही में मिलाकर दिन में २-३ बार सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।। पथ्य के रूप में उबालकर ठंडा पानी,, नींबू पानी,, अच्छी तरह पका हुआ केला,, दही,, ईसबगोल की भूसी,, विल्ब चूर्ण तथा पुराने चावल का भात दें।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 प्रदर रोग में👉 ५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण थोड़े गुड़ एवं घी मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिन चबा चबाकर खाने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 कब्ज में👉 (१) एक चम्मच मेथी दाना प्रति दिन सुबह शाम पानी के साथ निगल लें।। (२) ३ ग्राम मेथी दाना चूर्ण गुड़ या पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।। मेथी के पत्तों का साग बना कर खाने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 बहुमूत्र में👉 मेथी के पत्तों का ताजा रस एक कप,, २ ग्राम कत्था,, ४ ग्राम देशी खाँड मिलाकर नित्य पीने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 लू लगने पर👉 गरमी के दिनों में पर्याप्त पानी न पीने से लू जानलेवा हो जाती है।। मेथी के सूखे ५ ग्राम पत्तों को एक गिलास पानी में भिगोकर २ घंटे बाद मसलकर छान लें,, थोड़ा शहद मिलाकर शरबत बना कर पीने से लू का असर मिटता है।। सहायक उपचार में कच्चे आम का पन्ना बनाकर पीना चाहिए।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 मधुमेह में👉 (१) २० ग्राम मेथी दाना रात को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें।। प्रात: मसलकर व छानकर पी लें।। यह क्रम नित्य बनाए रखें।। (२) मेथी दाना अंकुरित कर ३० ग्राम नित्य सेवन करें।। (३) मेथी का साग,, मेथी दाना की सब्जी सप्ताह में ३-४ दिन सेवन करें।। सावधानी👉 मधुमेह के रोगी चावल,, आलू,, शकरकंद,, मैदा,, चीनी,, गुड़,, केला से परहेज करें।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 जोड़ों की सूजन में👉 मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर थोड़ा गुण करके पुल्टिस बनाकर बांधने से सूजन मिटती है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 खूनी बवासीर में👉 (१) मेथी के बीज पीसकर १५ ग्राम चूर्ण २५० ग्राम पानी में उबालकर जब आधा शेष बचे तब उतारकर ठंढ़ा करके पिलाने से खून गिरना बंद हो जाता है।। (२) १५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण को २५० ग्राम दूध में उबाल कर पीने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 बुखार,, सरदी,, जुकाम,, खांसी में👉 (१) मेथी का साग बना कर खाने से लाभ होता है।। (२) १० मेथी दाना चूर्ण एक चम्मच शहद तथा दो ग्राम नींबू रस के साथ चाटने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 हृदय रोग में👉 मेथी दाना नियमित सेवन करने से हानि कारक कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है।। मेथी में मौजूद पोटैशियम तत्व रक्तचाप तथा हृदय गति को नियंत्रित,, संतुलित रखने का काम करता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 कील मुंहासों के दाग धब्बों में👉 मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लेप करने से दाग धब्बे मिटते हैं।। त्वचा में निखार आता है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 बालों के रोग में👉 बालों का झड़ना,, सफेद होना,, बालों का न बढ़ना,, रूसी होना आदि बालों की स्वास्थ्य समस्याओं में मेथी के पत्तों को नारियल के दूध में मिलाकर पेस्ट बना कर बालों की त्वचा में लगाने से लाभ होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 मासिक धर्म की अनियमितता में👉 मेथी दाने का नियमित सेवन करने से अनियमितता दूर होती है।। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में अनेक समस्याएं जैसे -- गुमी लगना,, डिप्रेशन,, चिड़चिड़ापन,, तनाव,, चिंता,, अनिद्रा आदि होती हैं,, इन्हें कम करने के में मेथी दाना लाभदायक होता है।। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 प्रसव के बाद👉 गर्भाशय की शुद्धि एवं संकुचन को बढ़ाने के लिए मेथी के लड्डू का सेवन करना चाहिए।। प्रसव के बाद ज्वर आदि में👉 प्रसव के बाद प्रसूति का ज्वर आदि रोग होने पर एक किलो मेथी को महीन पीस कर उतना ही घी मिलाकर ३ किलो दूध में धीमी आँच पर पकाएं,, जब गाढ़ा हो जाए तब ३ किलो देशी खाँड की चासनी बनाकर उसमें मिलाकर २० ग्राम प्रति दिन खाने से प्रसूति रोगों से बचाव होता है।। बल वृद्धि होती है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 मेथी की स्वास्थ्यवर्धक रोटियां👉 (१) मेथी के ताजे पत्तों का रस आटे में मिलाकर रोटी बनाकर खाएं।। (२) मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर,, पेस्ट बना कर आटे में मिलाकर पौष्टिक एवं स्वादिष्ट रोटी का सेवन करें।। स्वाद के लिए उचित मात्रा में अजवाइन,, जीरा,, धनिया,, सेंधा नमक,, काली मिर्च आटे में मिला लेना चाहिए।। मेथी की रोटी में रक्तशोधक,, वात विकार नाशक तथा कब्ज निवारक गुण होते हैं।। ✏✏✏ 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰

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R.G.P.Bhardwaj Apr 10, 2020

एक सभ्रांत प्रतीत होने वाली अतीव सुन्दरी ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं । उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है जो जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई ! उस 'सुंदर' महिला ने एयरहोस्टेस को कहा कि वह उसके लिए नियत सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पायेगी, क्योंकि साथ की सीट पर एक दोनों हाथ विहीन व्यक्ति बैठा हुआ है | उस सुन्दरी ने एयरहोस्टेस से सीट बदलने हेतु आग्रह किया | असहज हुई एयरहोस्टेस ने पूछा, "मैम क्या मुझे कारण बता सकती है"? 'सुंदर' महिला ने जवाब दिया: "मैं ऐसे लोगों को पसंद नहीं करती। मैं ऐसे व्यक्ति के पास बैठकर यात्रा नहीं कर पाउंगी "। दिखने में सभ्रांत और विनम्र प्रतीत होने वाली महिला के यह उद्गार सुनकर एयर हॉस्टेज़ अचंभित हो गई । सुन्दरी ने एक बार फिर एयरहोस्टेस से जोर देकर कहा कि मैं उस सीट पर नहीं बैठ सकती और मुझे कोई दूसरी सीट दे दी जाए । एयरहोस्टेस ने खाली सीट की तलाश में चारों ओर नजर घुमाई, पर कोई भी सीट खाली नहीं दिखी । एयरहोस्टेस ने महिला से कहा कि "मैडम इस इकोनोमी क्लास में कोई सीट रिक्त नहीं है, किन्तु यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखना हमारा दायित्व है, अतः मैं वायुयान के कप्तान से बात करती हूँ, कृपया तब तक थोडा धैर्य रखें "। ऐसा कहकर होस्टेस कप्तान से बात करने चली गई | कुछ समय बाद उसने लौट कर महिला को बताया, "महोदया! आपको जो असुविधा हुई, उसके लिए बहुत खेद है | इस पूरे विमान में, केवल एक सीट खाली है और वह प्रथम श्रेणी में है। मैंने हमारी टीम से बात की और हमने एक असाधारण निर्णय लिया। एक यात्री को इकोनॉमी क्लास से प्रथम श्रेणी में भेजने का कार्य हमारी कंपनी के इतिहास में पहली बार हो रहा है ... "। 'सुंदर' महिला अत्यंत प्रसन्न हो गई, किन्तु इसके पहले कि वह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती और एक शब्द भी बोल पाती ... एयरहोस्टेस उस अपाहिज और दोनों हाथ विहीन व्यक्ति की ओर बढ़ गई और विनम्रता पूर्वक उनसे पूछा "सर, क्या आप प्रथम श्रेणी में जा सकेंगे ? क्योंकि हम नहीं चाहते कि आप एक अशिष्ट यात्री के साथ यात्रा करने की त्रासदी भुगतें । " यह सुनकर प्रत्येक यात्री ने ताली बजाकर इस निर्णय का स्वागत किया। वह अतीव सुन्दरी महिला तो अब शर्म से नजरें ही नहीं उठा पा रही थी। तब उस अपाहिज व्यक्ति ने खड़े होकर कहा, "मैं एक भूतपूर्व सैनिक हूँ और मैंने एक ऑपरेशन के दौरान कश्मीर सीमा पर हुए बम विस्फोट में अपने दोनों हाथ खोये थे । सबसे पहले, जब मैंने इन देवी जी की चर्चा सुनी, तब मैं सोच रहा था: मैंने भी किन लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली और अपने हाथ खोये ? लेकिन जब आप सभी की प्रतिक्रिया देखी तो अब अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा है कि मैंने अपने देश और देशवासियों की खातिर अपने दोनों हाथ खोये । "और इतना कह कर, वह प्रथम श्रेणी में चले गए। 'सुंदर' महिला पूरी तरह से शर्मिंदा होकर सर झुकाए सीट में गढ़ गई। उस अतीव सौंदर्य का भी कोई मूल्य नहीं अगर विचारों में उदारता न हो ...🙏🏻!

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R.G.P.Bhardwaj Apr 10, 2020

#जय_श्री_गणेश, #हर_हर_महादेव, #जय_भवानी 🚩 🚩 ⛳ ⛳ ⛳ #राम_जी_की_सेना_चली, ⛳ ⛳ ⛳ 🚩श्रीराम जी की सेना चली, हर हर महादेव, हर हर महादेव 🚩 पापियों के नाश को …………. धर्मं के प्रकाश को ………. पापियों के नाश को, धर्मं के प्रकाश को रामजी की सेना चली, रामजी की सेना चली श्री रामजी की सेना चली, रामजी की सेना चली. पाप अनाचार में, घोर अन्धकार में एक नई ज्योति जली, एक नई ज्योति जली श्री रामजी की सेना चली, रामजी की सेना चली. निशिचर हीन करेंगे धरती, यह प्राण है श्री राम का जब तक काम न पूरण होगा नाम नही विश्राम का उसे मिटानें चलें के जिसका मंत्र वयम रक्षाम का समय आचाला निकट राम और रावण के संग्राम का समय महा संग्राम का तीन लोक धन्य हैं ……...... देवता प्रस्सन्न हैं .......... तीन लोक धन्य हैं, देवता प्रस्सन्न हैं आज मनोकामना फली, आज मनोकामना फली श्री रामजी की सेना चली, रामजी की सेना चली. रामचन्द्रजी के संग लक्ष्मण कर में लेकर बाण चले लिए विजय विश्वास ह्रदय में संग वीर हनुमान चले सेना संग सुग्रीव, नील, नल, अंगद छाती तान चले उसे बचाए कौन के जिसका वध कराने भगवान चले वध कराने भगवान चले आगे रघुनाथ हैं …….. वीर साथ साथ हैं ………. आगे रघुनाथ हैं, वीर साथ साथ हैं एक से एक बलि, एक से एक बलि श्री रामजी की सेना चली, रामजी की सेना चली. प्रभु लंका पर डेरा डाले, जब महासागर पार हो कब हो सफल अभियान हमारा, कब सपना साकार हो पाप अनीति मिटे धरती से, धर्मं की जाया जाया कार हो कब हो विजयी राम हमारे, कब रावण की हार हो कब रावण की हार हो राम जी से आस है .......... राम पे विश्वास है ....... राम जी से आस है, राम पे विश्वास है राम जी करेंगे भली, राम जी करेंगे भली श्री रामजी की सेना चली, रामजी की सेना चली. हर हर महादेव, हर हर महादेव जाया भवानी, जाया भवानी, जाया भवानी

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R.G.P.Bhardwaj Apr 10, 2020

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R.G.P.Bhardwaj Apr 10, 2020

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R.G.P.Bhardwaj Apr 10, 2020

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R.G.P.Bhardwaj Apr 10, 2020

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