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क्या भगवान शिव को अर्पित नैवेद्य ग्रहण करना चाहिए? 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸🔸〰️ सौवर्णे नवरत्नखण्ड रचिते पात्रे घृतं पायसं भक्ष्यं पंचविधं पयोदधियुतं रम्भाफलं पानकम्। शाकानामयुतं जलं रुचिकरं कर्पूरखण्डोज्ज्वलं ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्या प्रभो।। स्वीकुरु॥ *शिवमानसपूजा* "मैंने नवीन रत्नजड़ित सोने के बर्तनों में घीयुक्त खीर, दूध, दही के साथ पाँच प्रकार के व्यंजन, केले के फल, शर्बत, अनेक तरह के शाक, कर्पूर की सुगन्धवाला स्वच्छ और मीठा जल और ताम्बूल — ये सब मन से ही बनाकर आपको अर्पित किया है। भगवन्! आप इसे स्वीकार कीजिए।" सृष्टि के आरम्भ से ही समस्त देवता, ऋषि-मुनि, असुर, मनुष्य विभिन्न ज्योतिर्लिंगों, स्वयम्भूलिंगों, मणिमय, रत्नमय, धातुमय और पार्थिव आदि लिंगों की उपासना करते आए हैं। अन्य देवताओं की तरह शिवपूजा में भी नैवेद्य निवेदित किया जाता है। पर शिवलिंग पर चढ़े हुए प्रसाद पर *चण्ड* का अधिकार होता है। गणों के स्वामी *चण्ड* भगवान शिवजी के मुख से प्रकट हुए हैं। ये सदैव शिवजी की आराधना में लीन रहते हैं और *भूत-प्रेत, पिशाच* आदि के स्वामी हैं। *चण्ड* का भाग ग्रहण करना यानी *भूत-प्रेतों का अंश खाना* माना जाता है। शिव-नैवेद्य ग्राह्य और अग्राह्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ शिवपुराण की *विद्येश्वरसंहिता* के २२वें अध्याय में इसके सम्बन्ध में स्पष्ट कहा गया है — चण्डाधिकारो यत्रास्ति तद्भोक्तव्यं न मानवै:। चण्डाधिकारो नो यत्र भोक्तव्यं तच्च भक्तित:॥ (२२।१६) "जहाँ चण्ड का अधिकार हो, वहाँ शिवलिंग के लिए अर्पित नैवेद्य मनुष्यों को ग्रहण नहीं करना चाहिए। जहाँ चण्ड का अधिकार नहीं है, वहाँ का शिव-नैवेद्य मनुष्यों को ग्रहण करना चाहिए।" किन शिवलिंगों के नैवेद्य में चण्ड का अधिकार नहीं है? इन लिंगों के प्रसाद में *चण्ड* का अधिकार नहीं है, अत: ग्रहण करने योग्य है। ज्योतिर्लिंग —बारह ज्योतिर्लिंगों (सौराष्ट्र में *सोमनाथ*, श्रीशैल में *मल्लिकार्जुन*, उज्जैन में *महाकाल*, ओंकार में *परमेश्वर*, हिमालय में *केदारनाथ*, डाकिनी में *भीमशंकर*, वाराणसी में *विश्वनाथ*, गोमतीतट में *त्र्यम्बकेश्वर*, चिताभूमि में *वैद्यनाथ*, दारुकावन में *नागेश्वर*, सेतुबन्ध में *रामेश्वर* और शिवालय में *द्युश्मेश्वर*) का नैवेद्य ग्रहण करने से सभी पाप भस्म हो जाते हैं। शिवपुराण की *विद्येश्वरसंहिता* में कहा गया है कि *काशी विश्वनाथ* के स्नानजल का तीन बार आचमन करने से शारीरिक, वाचिक व मानसिक तीनों पाप शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं। *स्वयम्भूलिंग* — जो लिंग भक्तों के कल्याण के लिए स्वयं ही प्रकट हुए हैं, उनका नैवेद्य ग्रहण करने में कोई दोष नहीं है। *सिद्धलिंग* — जिन लिंगों की उपासना से किसी ने सिद्धि प्राप्त की है या जो सिद्धों द्वारा प्रतिष्ठित हैं, जैसे — *काशी* में शुक्रेश्वर, वृद्धकालेश्वर, सोमेश्वर आदि लिंग देवता-सिद्ध-महात्माओं द्वारा प्रतिष्ठित और पूजित हैं, उन पर चण्ड का अधिकार नहीं है, अत: उनका नैवेद्य सभी के लिए ग्रहण करने योग्य है। *बाणलिंग (नर्मदेश्वर)* — बाणलिंग पर चढ़ाया गया सभी कुछ जल, बेलपत्र, फूल, नैवेद्य — प्रसाद समझकर ग्रहण करना चाहिए। जिस स्थान पर (गण्डकी नदी) शालग्राम की उत्पत्ति होती है, वहाँ के उत्पन्न शिवलिंग, पारदलिंग, पाषाणलिंग, रजतलिंग, स्वर्णलिंग, केसर के बने लिंग, स्फटिकलिंग और रत्नलिंग इन सब शिवलिंगों के लिए समर्पित नैवेद्य को ग्रहण करने से चान्द्रायण व्रत के समान फल प्राप्त होता है। शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव की मूर्तियों में चण्ड का अधिकार नहीं है, अत: इनका प्रसाद लिया जा सकता है। ‘प्रतिमासु च सर्वासु न, चण्डोऽधिकृतो भवेत्॥ जिस मनुष्य ने शिव-मन्त्र की दीक्षा ली है, वे सब शिवलिंगों का नैवेद्य ग्रहण कर सकता है। उस शिवभक्त के लिए यह नैवेद्य ‘महाप्रसाद’ है। जिन्होंने अन्य देवता की दीक्षा ली है और भगवान शिव में भी प्रीति है, वे ऊपर बताए गए सब शिवलिंगों का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। शिव-नैवेद्य कब नहीं ग्रहण करना चाहिए? 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ शिवलिंग के ऊपर जो भी वस्तु चढ़ाई जाती है, वह ग्रहण नहीं की जाती है। जो वस्तु शिवलिंग से स्पर्श नहीं हुई है, अलग रखकर शिवजी को निवेदित की है, वह अत्यन्त पवित्र और ग्रहण करने योग्य है। जिन शिवलिंगों का नैवेद्य ग्रहण करने की मनाही है वे भी शालग्राम शिला के स्पर्श से ग्रहण करने योग्य हो जाते हैं। शिव-नैवेद्य की महिमा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जिस घर में भगवान शिव को नैवेद्य लगाया जाता है या कहीं और से शिव-नैवेद्य प्रसाद रूप में आ जाता है वह घर पवित्र हो जाता है। आए हुए शिव-नैवेद्य को प्रसन्नता के साथ भगवान शिव का स्मरण करते हुए मस्तक झुका कर ग्रहण करना चाहिए। आए हुए नैवेद्य को *‘दूसरे समय में ग्रहण करूँगा’*, ऐसा सोचकर व्यक्ति उसे ग्रहण नहीं करता है, वह पाप का भागी होता है। जिसे शिव-नैवेद्य को देखकर खाने की इच्छा नहीं होती, वह भी पाप का भागी होता है। शिवभक्तों को शिव-नैवेद्य अवश्य ग्रहण करना चाहिए क्योंकि शिव-नैवेद्य को देखने मात्र से ही सभी पाप दूर हो जाते है, ग्रहण करने से करोड़ों पुण्य मनुष्य को अपने-आप प्राप्त हो जाते हैं। शिव-नैवेद्य ग्रहण करने से मनुष्य को हजारों यज्ञों का फल और शिव सायुज्य की प्राप्ति होती है। शिव-नैवेद्य को श्रद्धापूर्वक ग्रहण करने व स्नानजल को तीन बार पीने से मनुष्य ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो जाता है। मनुष्य को इस भावना का कि भगवान शिव का नैवेद्य अग्राह्य है, मन से निकाल देना चाहिये क्योंकि 'कर्पूरगौरं करुणावतारम्' शिव तो सदैव ही कल्याण करने वाले हैं। जो *‘शिव’* का केवल नाम ही लेते है, उनके घर में भी सब मंगल होते हैं। *सुमंगलं तस्य गृहे विराजते।* *शिवेति वर्णैर्भुवि यो हि भाषते। 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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शिव सहस्त्रनाम 〰️〰️🔸〰️〰️ ॐ स्थिराय नमः॥ॐ स्थाणवे नमः॥ॐ प्रभवे नमः॥ॐ भीमाय नमः॥ॐ प्रवराय नमः॥ॐ वरदाय नमः॥ॐ वराय नमः॥ॐ सर्वात्मन नमः॥ ॐ सर्वविख्याताय नमः॥ ॐ सर्वस्मै नमः॥ ॐ सर्वकाराय नमः॥ॐ भवाय नमः॥ॐ जटिने नमः॥ॐ चर्मिणे नमः॥ ॐ शिखण्डिने नमः॥ ॐ सर्वांङ्गाय नमः॥ ॐ सर्वभावाय नमः॥ ॐ हराय नमः॥ ॐ हरिणाक्षाय नमः॥ ॐ सर्वभूतहराय नमः॥ ॐ प्रभवे नमः॥ ॐ प्रवृत्तये नमः॥ ॐ निवृत्तये नमः॥ ॐ नियताय नमः॥ ॐ शाश्वताय नमः॥ ॐ ध्रुवाय नमः॥ ॐ श्मशानवासिने नमः॥ ॐ भगवते नमः॥ ॐ खेचराय नमः॥ ॐ गोचराय नमः॥ ॐ अर्दनाय नमः॥ ॐ अभिवाद्याय नमः॥ ॐ महाकर्मणे नमः॥ ॐ तपस्विने नमः॥ ॐ भूतभावनाय नमः॥ ॐ उन्मत्तवेषप्रच्छन्नाय नमः॥ ॐ सर्वलोकप्रजापतये नमः॥ ॐ महारूपाय नमः॥ ॐ महाकायाय नमः॥ ॐ वृषरूपाय नमः॥ ॐ महायशसे नमः॥ ॐ महात्मने नमः॥ ॐ सर्वभूतात्मने नमः॥ ॐ विश्वरूपाय नमः॥ ॐ महाहनवे नमः॥ ॐ लोकपालाय नमः॥ ॐ अंतर्हितात्मने नमः॥ ॐ प्रसादाय नमः॥ ॐ हयगर्दभाय नमः॥ ॐ पवित्राय नमः॥ (50) ॐ महते नमः॥ ॐ नियमाय नमः॥ ॐ नियमाश्रिताय नमः॥ ॐ सर्वकर्मणे नमः॥ ॐ स्वयंभूताय नमः॥ ॐ आदये नमः॥ ॐ आदिकराय नमः॥ ॐ निधये नमः॥ ॐ सहस्राक्षाय नमः॥ ॐ विशालाक्षाय नमः॥ ॐ सोमाय नमः॥ ॐ नक्षत्रसाधकाय नमः॥ ॐ चंद्राय नमः॥ ॐ सूर्याय नमः॥ ॐ शनये नमः॥ ॐ केतवे नमः॥ ॐ ग्रहाय नमः॥ ॐ ग्रहपतये नमः॥ ॐ वराय नमः॥ ॐ अत्रये नमः॥ ॐ अत्र्यानमस्कर्त्रे नमः॥ ॐ मृगबाणार्पणाय नमः॥ ॐ अनघाय नमः॥ ॐ महातपसे नमः॥ ॐ घोरतपसे नमः॥ ॐ अदीनाय नमः॥ ॐ दीनसाधककराय नमः॥ ॐ संवत्सरकराय नमः॥ ॐ मंत्राय नमः॥ ॐ प्रमाणाय नमः॥ ॐ परमन्तपाय नमः॥ ॐ योगिने नमः॥ ॐ योज्याय नमः॥ ॐ महाबीजाय नमः॥ ॐ महारेतसे नमः॥ ॐ महाबलाय नमः॥ ॐ सुवर्णरेतसे नमः॥ ॐ सर्वज्ञाय नमः॥ ॐ सुबीजाय नमः॥ ॐ बीजवाहनाय नमः॥ ॐ दशबाहवे नमः॥ ॐ अनिमिषाय नमः॥ ॐ नीलकण्ठाय नमः॥ ॐ उमापतये नमः॥ ॐ विश्वरूपाय नमः॥ ॐ स्वयंश्रेष्ठाय नमः॥ ॐ बलवीराय नमः॥ ॐ अबलोगणाय नमः॥ ॐ गणकर्त्रे नमः॥ ॐ गणपतये नमः॥ (100) ॐ दिग्वाससे नमः॥ ॐ कामाय नमः॥ ॐ मंत्रविदे नमः॥ ॐ परममन्त्राय नमः॥ ॐ सर्वभावकराय नमः॥ ॐ हराय नमः॥ ॐ कमण्डलुधराय नमः॥ ॐ धन्विते नमः॥ ॐ बाणहस्ताय नमः॥ ॐ कपालवते नमः॥ ॐ अशनिने नमः॥ ॐ शतघ्निने नमः॥ ॐ खड्गिने नमः॥ ॐ पट्टिशिने नमः॥ ॐ आयुधिने नमः॥ ॐ महते नमः॥ ॐ स्रुवहस्ताय नमः॥ ॐ सुरूपाय नमः॥ ॐ तेजसे नमः॥ ॐ तेजस्करनिधये नमः॥ ॐ उष्णीषिणे नमः॥ ॐ सुवक्त्राय नमः॥ ॐ उदग्राय नमः॥ ॐ विनताय नमः॥ ॐ दीर्घाय नमः॥ ॐ हरिकेशाय नमः॥ ॐ सुतीर्थाय नमः॥ ॐ कृष्णाय नमः॥ ॐ श्रृगालरूपाय नमः॥ ॐ सिद्धार्थाय नमः॥ ॐ मुण्डाय नमः॥ ॐ सर्वशुभंकराय नमः॥ ॐ अजाय नमः॥ ॐ बहुरूपाय नमः॥ ॐ गन्धधारिणे नमः॥ ॐ कपर्दिने नमः॥ ॐ उर्ध्वरेतसे नमः॥ ॐ उर्ध्वलिंगाय नमः॥ ॐ उर्ध्वशायिने नमः॥ ॐ नभस्थलाय नमः॥ ॐ त्रिजटाय नमः॥ ॐ चीरवाससे नमः॥ ॐ रूद्राय नमः॥ ॐ सेनापतये नमः॥ ॐ विभवे नमः॥ ॐ अहश्चराय नमः॥ ॐ नक्तंचराय नमः॥ ॐ तिग्ममन्यवे नमः॥ ॐ सुवर्चसाय नमः॥ ॐ गजघ्ने नमः॥ (150) ॐ दैत्यघ्ने नमः॥ ॐ कालाय नमः॥ ॐ लोकधात्रे नमः॥ ॐ गुणाकराय नमः॥ ॐ सिंहसार्दूलरूपाय नमः॥ ॐ आर्द्रचर्माम्बराय नमः॥ ॐ कालयोगिने नमः॥ ॐ महानादाय नमः॥ ॐ सर्वकामाय नमः॥ ॐ चतुष्पथाय नमः॥ ॐ निशाचराय नमः॥ ॐ प्रेतचारिणे नमः॥ ॐ भूतचारिणे नमः॥ ॐ महेश्वराय नमः॥ ॐ बहुभूताय नमः॥ ॐ बहुधराय नमः॥ ॐ स्वर्भानवे नमः॥ ॐ अमिताय नमः॥ ॐ गतये नमः॥ ॐ नृत्यप्रियाय नमः॥ ॐ नृत्यनर्ताय नमः॥ ॐ नर्तकाय नमः॥ ॐ सर्वलालसाय नमः॥ ॐ घोराय नमः॥ ॐ महातपसे नमः॥ ॐ पाशाय नमः॥ ॐ नित्याय नमः॥ ॐ गिरिरूहाय नमः॥ ॐ नभसे नमः॥ ॐ सहस्रहस्ताय नमः॥ ॐ विजयाय नमः॥ ॐ व्यवसायाय नमः॥ ॐ अतन्द्रियाय नमः॥ ॐ अधर्षणाय नमः॥ ॐ धर्षणात्मने नमः॥ ॐ यज्ञघ्ने नमः॥ ॐ कामनाशकाय नमः॥ ॐ दक्षयागापहारिणे नमः॥ ॐ सुसहाय नमः॥ ॐ मध्यमाय नमः॥ ॐ तेजोपहारिणे नमः॥ ॐ बलघ्ने नमः॥ ॐ मुदिताय नमः॥ ॐ अर्थाय नमः॥ ॐ अजिताय नमः॥ ॐ अवराय नमः॥ ॐ गम्भीरघोषाय नमः॥ ॐ गम्भीराय नमः॥ ॐ गंभीरबलवाहनाय नमः॥ ॐ न्यग्रोधरूपाय नमः॥ (200) ॐ न्यग्रोधाय नमः॥ ॐ वृक्षकर्णस्थितये नमः॥ ॐ विभवे नमः॥ ॐ सुतीक्ष्णदशनाय नमः॥ ॐ महाकायाय नमः॥ ॐ महाननाय नमः॥ ॐ विश्वकसेनाय नमः॥ ॐ हरये नमः॥ ॐ यज्ञाय नमः॥ ॐ संयुगापीडवाहनाय नमः॥ ॐ तीक्ष्णतापाय नमः॥ ॐ हर्यश्वाय नमः॥ ॐ सहायाय नमः॥ ॐ कर्मकालविदे नमः॥ ॐ विष्णुप्रसादिताय नमः॥ ॐ यज्ञाय नमः॥ ॐ समुद्राय नमः॥ ॐ वडमुखाय नमः॥ ॐ हुताशनसहायाय नमः॥ ॐ प्रशान्तात्मने नमः॥ ॐ हुताशनाय नमः॥ ॐ उग्रतेजसे नमः॥ ॐ महातेजसे नमः॥ ॐ जन्याय नमः॥ ॐ विजयकालविदे नमः॥ ॐ ज्योतिषामयनाय नमः॥ ॐ सिद्धये नमः॥ ॐ सर्वविग्रहाय नमः॥ ॐ शिखिने नमः॥ ॐ मुण्डिने नमः॥ ॐ जटिने नमः॥ ॐ ज्वालिने नमः॥ ॐ मूर्तिजाय नमः॥ ॐ मूर्ध्दगाय नमः॥ ॐ बलिने नमः॥ ॐ वेणविने नमः॥ ॐ पणविने नमः॥ ॐ तालिने नमः॥ ॐ खलिने नमः॥ ॐ कालकंटकाय नमः॥ ॐ नक्षत्रविग्रहमतये नमः॥ ॐ गुणबुद्धये नमः॥ ॐ लयाय नमः॥ ॐ अगमाय नमः॥ ॐ प्रजापतये नमः॥ ॐ विश्वबाहवे नमः॥ ॐ विभागाय नमः॥ ॐ सर्वगाय नमः॥ ॐ अमुखाय नमः॥ ॐ विमोचनाय नमः॥ (250) ॐ सुसरणाय नमः॥ ॐ हिरण्यकवचोद्भाय नमः॥ ॐ मेढ्रजाय नमः॥ ॐ बलचारिणे नमः॥ ॐ महीचारिणे नमः॥ ॐ स्रुत्याय नमः॥ ॐ सर्वतूर्यनिनादिने नमः॥ ॐ सर्वतोद्यपरिग्रहाय नमः॥ ॐ व्यालरूपाय नमः॥ ॐ गुहावासिने नमः॥ ॐ गुहाय नमः॥ ॐ मालिने नमः॥ ॐ तरंगविदे नमः॥ ॐ त्रिदशाय नमः॥ ॐ त्रिकालधृगे नमः॥ ॐ कर्मसर्वबन्ध–विमोचनाय नमः॥ ॐ असुरेन्द्राणां बन्धनाय नमः॥ ॐ युधि शत्रुवानाशिने नमः॥ ॐ सांख्यप्रसादाय नमः॥ ॐ दुर्वाससे नमः॥ ॐ सर्वसाधुनिषेविताय नमः॥ ॐ प्रस्कन्दनाय नमः॥ ॐ विभागज्ञाय नमः॥ ॐ अतुल्याय नमः॥ ॐ यज्ञविभागविदे नमः॥ ॐ सर्वचारिणे नमः॥ ॐ सर्ववासाय नमः॥ ॐ दुर्वाससे नमः॥ ॐ वासवाय नमः॥ ॐ अमराय नमः॥ ॐ हैमाय नमः॥ ॐ हेमकराय नमः॥ ॐ अयज्ञसर्वधारिणे नमः॥ ॐ धरोत्तमाय नमः॥ ॐ लोहिताक्षाय नमः॥ ॐ महाक्षाय नमः॥ ॐ विजयाक्षाय नमः॥ ॐ विशारदाय नमः॥ ॐ संग्रहाय नमः॥ ॐ निग्रहाय नमः॥ ॐ कर्त्रे नमः॥ ॐ सर्पचीरनिवसनाय नमः॥ ॐ मुख्याय नमः॥ ॐ अमुख्याय नमः॥ ॐ देहाय नमः॥ ॐ काहलये नमः॥ ॐ सर्वकामदाय नमः॥ ॐ सर्वकालप्रसादाय नमः॥ ॐ सुबलाय नमः॥ ॐ बलरूपधृगे नमः॥ (300) ॐ सर्वकामवराय नमः॥ ॐ सर्वदाय नमः॥ ॐ सर्वतोमुखाय नमः॥ ॐ आकाशनिर्विरूपाय नमः॥ ॐ निपातिने नमः॥ ॐ अवशाय नमः॥ ॐ खगाय नमः॥ ॐ रौद्ररूपाय नमः॥ ॐ अंशवे नमः॥ ॐ आदित्याय नमः॥ ॐ बहुरश्मये नमः॥ ॐ सुवर्चसिने नमः॥ ॐ वसुवेगाय नमः॥ ॐ महावेगाय नमः॥ ॐ मनोवेगाय नमः॥ ॐ निशाचराय नमः॥ ॐ सर्ववासिने नमः॥ ॐ श्रियावासिने नमः॥ ॐ उपदेशकराय नमः॥ ॐ अकराय नमः॥ ॐ मुनये नमः॥ ॐ आत्मनिरालोकाय नमः॥ ॐ संभग्नाय नमः॥ ॐ सहस्रदाय नमः॥ ॐ पक्षिणे नमः॥ ॐ पक्षरूपाय नमः॥ ॐ अतिदीप्ताय नमः॥ ॐ विशाम्पतये नमः॥ ॐ उन्मादाय नमः॥ ॐ मदनाय नमः॥ ॐ कामाय नमः॥ ॐ अश्वत्थाय नमः॥ ॐ अर्थकराय नमः॥ ॐ यशसे नमः॥ ॐ वामदेवाय नमः॥ ॐ वामाय नमः॥ ॐ प्राचे नमः॥ ॐ दक्षिणाय नमः॥ ॐ वामनाय नमः॥ ॐ सिद्धयोगिने नमः॥ ॐ महर्षये नमः॥ ॐ सिद्धार्थाय नमः॥ ॐ सिद्धसाधकाय नमः॥ ॐ भिक्षवे नमः॥ ॐ भिक्षुरूपाय नमः॥ ॐ विपणाय नमः॥ ॐ मृदवे नमः॥ ॐ अव्ययाय नमः॥ ॐ महासेनाय नमः॥ ॐ विशाखाय नमः॥ (350) ॐ षष्टिभागाय नमः॥ ॐ गवाम्पतये नमः॥ ॐ वज्रहस्ताय नमः॥ ॐ विष्कम्भिने नमः॥ ॐ चमुस्तंभनाय नमः॥ ॐ वृत्तावृत्तकराय नमः॥ ॐ तालाय नमः॥ ॐ मधवे नमः॥ ॐ मधुकलोचनाय नमः॥ ॐ वाचस्पतये नमः॥ ॐ वाजसनाय नमः॥ ॐ नित्यमाश्रमपूजिताय नमः॥ ॐ ब्रह्मचारिणे नमः॥ ॐ लोकचारिणे नमः॥ ॐ सर्वचारिणे नमः॥ ॐ विचारविदे नमः॥ ॐ ईशानाय नमः॥ ॐ ईश्वराय नमः॥ ॐ कालाय नमः॥ ॐ निशाचारिणे नमः॥ ॐ पिनाकधृगे नमः॥ ॐ निमितस्थाय नमः॥ ॐ निमित्ताय नमः॥ ॐ नन्दये नमः॥ ॐ नन्दिकराय नमः॥ ॐ हरये नमः॥ ॐ नन्दीश्वराय नमः॥ ॐ नन्दिने नमः॥ ॐ नन्दनाय नमः॥ ॐ नंन्दीवर्धनाय नमः॥ ॐ भगहारिणे नमः॥ ॐ निहन्त्रे नमः॥ ॐ कालाय नमः॥ ॐ ब्रह्मणे नमः॥ ॐ पितामहाय नमः॥ ॐ चतुर्मुखाय नमः॥ ॐ महालिंगाय नमः॥ ॐ चारूलिंगाय नमः॥ ॐ लिंगाध्यक्षाय नमः॥ ॐ सुराध्यक्षाय नमः॥ ॐ योगाध्यक्षाय नमः॥ ॐ युगावहाय नमः॥ ॐ बीजाध्यक्षाय नमः॥ ॐ बीजकर्त्रे नमः॥ ॐ अध्यात्मानुगताय नमः॥ ॐ बलाय नमः॥ ॐ इतिहासाय नमः॥ ॐ सकल्पाय नमः॥ ॐ गौतमाय नमः॥ ॐ निशाकराय नमः॥ (400) ॐ दम्भाय नमः॥ ॐ अदम्भाय नमः॥ ॐ वैदम्भाय नमः॥ ॐ वश्याय नमः॥ ॐ वशकराय नमः॥ ॐ कलये नमः॥ ॐ लोककर्त्रे नमः॥ ॐ पशुपतये नमः॥ ॐ महाकर्त्रे नमः॥ ॐ अनौषधाय नमः॥ ॐ अक्षराय नमः॥ ॐ परब्रह्मणे नमः॥ ॐ बलवते नमः॥ ॐ शक्राय नमः॥ ॐ नीतये नमः॥ ॐ अनीतये नमः॥ ॐ शुद्धात्मने नमः॥ ॐ मान्याय नमः॥ ॐ शुद्धाय नमः॥ ॐ गतागताय नमः॥ ॐ बहुप्रसादाय नमः॥ ॐ सुस्पप्नाय नमः॥ ॐ दर्पणाय नमः॥ ॐ अमित्रजिते नमः॥ ॐ वेदकराय नमः॥ ॐ मंत्रकराय नमः॥ ॐ विदुषे नमः॥ ॐ समरमर्दनाय नमः॥ ॐ महामेघनिवासिने नमः॥ ॐ महाघोराय नमः॥ ॐ वशिने नमः॥ ॐ कराय नमः॥ ॐ अग्निज्वालाय नमः॥ ॐ महाज्वालाय नमः॥ ॐ अतिधूम्राय नमः॥ ॐ हुताय नमः॥ ॐ हविषे नमः॥ ॐ वृषणाय नमः॥ ॐ शंकराय नमः॥ ॐ नित्यंवर्चस्विने नमः॥ ॐ धूमकेताय नमः॥ ॐ नीलाय नमः॥ ॐ अंगलुब्धाय नमः॥ ॐ शोभनाय नमः॥ ॐ निरवग्रहाय नमः॥ ॐ स्वस्तिदायकाय नमः॥ ॐ स्वस्तिभावाय नमः॥ ॐ भागिने नमः॥ ॐ भागकराय नमः॥ ॐ लघवे नमः॥(450) ॐ उत्संगाय नमः॥ ॐ महांगाय नमः॥ ॐ महागर्भपरायणाय नमः॥ ॐ कृष्णवर्णाय नमः॥ ॐ सुवर्णाय नमः॥ ॐ सर्वदेहिनामिनिन्द्राय नमः॥ ॐ महापादाय नमः॥ ॐ महाहस्ताय नमः॥ ॐ महाकायाय नमः॥ ॐ महायशसे नमः॥ ॐ महामूर्धने नमः॥ ॐ महामात्राय नमः॥ ॐ महानेत्राय नमः॥ ॐ निशालयाय नमः॥ ॐ महान्तकाय नमः॥ ॐ महाकर्णाय नमः॥ ॐ महोष्ठाय नमः॥ ॐ महाहनवे नमः॥ ॐ महानासाय नमः॥ ॐ महाकम्बवे नमः॥ ॐ महाग्रीवाय नमः॥ ॐ श्मशानभाजे नमः॥ ॐ महावक्षसे नमः॥ ॐ महोरस्काय नमः॥ ॐ अंतरात्मने नमः॥ ॐ मृगालयाय नमः॥ ॐ लंबनाय नमः॥ ॐ लम्बितोष्ठाय नमः॥ ॐ महामायाय नमः॥ ॐ पयोनिधये नमः॥ ॐ महादन्ताय नमः॥ ॐ महाद्रष्टाय नमः॥ ॐ महाजिह्वाय नमः॥ ॐ महामुखाय नमः॥ ॐ महारोम्णे नमः॥ ॐ महाकोशाय नमः॥ ॐ महाजटाय नमः॥ ॐ प्रसन्नाय नमः॥ ॐ प्रसादाय नमः॥ ॐ प्रत्ययाय नमः॥ ॐ गिरिसाधनाय नमः॥ ॐ स्नेहनाय नमः॥ ॐ अस्नेहनाय नमः॥ ॐ अजिताय नमः॥ ॐ महामुनये नमः॥ ॐ वृक्षाकाराय नमः॥ ॐ वृक्षकेतवे नमः॥ ॐ अनलाय नमः॥ ॐ वायुवाहनाय नमः॥ (500) ॐ गण्डलिने नमः॥ ॐ मेरूधाम्ने नमः॥ ॐ देवाधिपतये नमः॥ ॐ अथर्वशीर्षाय नमः॥ ॐ सामास्या नमः॥ ॐ ऋक्सहस्रामितेक्षणाय नमः॥ ॐ यजुः॥ पादभुजाय नमः॥ ॐ गुह्याय नमः॥ ॐ प्रकाशाय नमः॥ ॐ जंगमाय नमः॥ ॐ अमोघार्थाय नमः॥ ॐ प्रसादाय नमः॥ ॐ अभिगम्याय नमः॥ ॐ सुदर्शनाय नमः॥ ॐ उपकाराय नमः॥ ॐ प्रियाय नमः॥ ॐ सर्वाय नमः॥ ॐ कनकाय नमः॥ ॐ काञ्चनवच्छये नमः॥ ॐ नाभये नमः॥ ॐ नन्दिकराय नमः॥ ॐ भावाय नमः॥ ॐ पुष्करथपतये नमः॥ ॐ स्थिराय नमः॥ ॐ द्वादशाय नमः॥ ॐ त्रासनाय नमः॥ ॐ आद्याय नमः॥ ॐ यज्ञाय नमः॥ ॐ यज्ञसमाहिताय नमः॥ ॐ नक्तंस्वरूपाय नमः॥ ॐ कलये नमः॥ ॐ कालाय नमः॥ ॐ मकराय नमः॥ ॐ कालपूजिताय नमः॥ ॐ सगणाय नमः॥ ॐ गणकराय नमः॥ ॐ भूतवाहनसारथये नमः॥ ॐ भस्मशयाय नमः॥ ॐ भस्मगोप्त्रे नमः॥ ॐ भस्मभूताय नमः॥ ॐ तरवे नमः॥ ॐ गणाय नमः॥ ॐ लोकपालाय नमः॥ ॐ आलोकाय नमः॥ ॐ महात्मने नमः॥ ॐ सर्वपूजिताय नमः॥ ॐ शुक्लाय नमः॥ ॐ त्रिशुक्लाय नमः॥ ॐ संपन्नाय नमः॥ ॐ शुचये नमः॥ (550) ॐ भूतनिशेविताय नमः॥ ॐ आश्रमस्थाय नमः॥ ॐ क्रियावस्थाय नमः॥ ॐ विश्वकर्ममतये नमः॥ ॐ वराय नमः॥ ॐ विशालशाखाय नमः॥ ॐ ताम्रोष्ठाय नमः॥ ॐ अम्बुजालाय नमः॥ ॐ सुनिश्चलाय नमः॥ ॐ कपिलाय नमः॥ ॐ कपिशाय नमः॥ ॐ शुक्लाय नमः॥ ॐ आयुषे नमः॥ ॐ पराय नमः॥ ॐ अपराय नमः॥ ॐ गंधर्वाय नमः॥ ॐ अदितये नमः॥ ॐ ताक्ष्याय नमः॥ ॐ सुविज्ञेयाय नमः॥ ॐ सुशारदाय नमः॥ ॐ परश्वधायुधाय नमः॥ ॐ देवाय नमः॥ ॐ अनुकारिणे नमः॥ ॐ सुबान्धवाय नमः॥ ॐ तुम्बवीणाय नमः॥ ॐ महाक्रोधाय नमः॥ ॐ ऊर्ध्वरेतसे नमः॥ ॐ जलेशयाय नमः॥ ॐ उग्राय नमः॥ ॐ वंशकराय नमः॥ ॐ वंशाय नमः॥ ॐ वंशानादाय नमः॥ ॐ अनिन्दिताय नमः॥ ॐ सर्वांगरूपाय नमः॥ ॐ मायाविने नमः॥ ॐ सुहृदे नमः॥ ॐ अनिलाय नमः॥ ॐ अनलाय नमः॥ ॐ बन्धनाय नमः॥ ॐ बन्धकर्त्रे नमः॥ ॐ सुवन्धनविमोचनाय नमः॥ ॐ सयज्ञयारये नमः॥ ॐ सकामारये नमः॥ ॐ महाद्रष्टाय नमः॥ ॐ महायुधाय नमः॥ ॐ बहुधानिन्दिताय नमः॥ ॐ शर्वाय नमः॥ ॐ शंकराय नमः॥ ॐ शं कराय नमः॥ ॐ अधनाय नमः॥ (600) ॐ अमरेशाय नमः॥ ॐ महादेवाय नमः॥ ॐ विश्वदेवाय नमः॥ ॐ सुरारिघ्ने नमः॥ ॐ अहिर्बुद्धिन्याय नमः॥ ॐ अनिलाभाय नमः॥ ॐ चेकितानाय नमः॥ ॐ हविषे नमः॥ ॐ अजैकपादे नमः॥ ॐ कापालिने नमः॥ ॐ त्रिशंकवे नमः॥ ॐ अजिताय नमः॥ ॐ शिवाय नमः॥ ॐ धन्वन्तरये नमः॥ ॐ धूमकेतवे नमः॥ ॐ स्कन्दाय नमः॥ ॐ वैश्रवणाय नमः॥ ॐ धात्रे नमः॥ ॐ शक्राय नमः॥ ॐ विष्णवे नमः॥ ॐ मित्राय नमः॥ ॐ त्वष्ट्रे नमः॥ ॐ ध्रुवाय नमः॥ ॐ धराय नमः॥ ॐ प्रभावाय नमः॥ ॐ सर्वगोवायवे नमः॥ ॐ अर्यम्णे नमः॥ ॐ सवित्रे नमः॥ ॐ रवये नमः॥ ॐ उषंगवे नमः॥ ॐ विधात्रे नमः॥ ॐ मानधात्रे नमः॥ ॐ भूतवाहनाय नमः॥ ॐ विभवे नमः॥ ॐ वर्णविभाविने नमः॥ ॐ सर्वकामगुणवाहनाय नमः॥ ॐ पद्मनाभाय नमः॥ ॐ महागर्भाय नमः॥ चन्द्रवक्त्राय नमः॥ ॐ अनिलाय नमः॥ ॐ अनलाय नमः॥ ॐ बलवते नमः॥ ॐ उपशान्ताय नमः॥ ॐ पुराणाय नमः॥ ॐ पुण्यचञ्चवे नमः॥ ॐ ईरूपाय नमः॥ ॐ कुरूकर्त्रे नमः॥ ॐ कुरूवासिने नमः॥ ॐ कुरूभूताय नमः॥ ॐ गुणौषधाय नमः॥ (650) ॐ सर्वाशयाय नमः॥ ॐ दर्भचारिणे नमः॥ ॐ सर्वप्राणिपतये नमः॥ ॐ देवदेवाय नमः॥ ॐ सुखासक्ताय नमः॥ ॐ सत स्वरूपाय नमः॥ ॐ असत् रूपाय नमः॥ ॐ सर्वरत्नविदे नमः॥ ॐ कैलाशगिरिवासने नमः॥ ॐ हिमवद्गिरिसंश्रयाय नमः॥ ॐ कूलहारिणे नमः॥ ॐ कुलकर्त्रे नमः॥ ॐ बहुविद्याय नमः॥ ॐ बहुप्रदाय नमः॥ ॐ वणिजाय नमः॥ ॐ वर्धकिने नमः॥ ॐ वृक्षाय नमः॥ ॐ बकुलाय नमः॥ ॐ चंदनाय नमः॥ ॐ छदाय नमः॥ ॐ सारग्रीवाय नमः॥ ॐ महाजत्रवे नमः॥ ॐ अलोलाय नमः॥ ॐ महौषधाय नमः॥ ॐ सिद्धार्थकारिणे नमः॥ ॐ छन्दोव्याकरणोत्तर-सिद्धार्थाय नमः॥ ॐ सिंहनादाय नमः॥ ॐ सिंहद्रंष्टाय नमः॥ ॐ सिंहगाय नमः॥ ॐ सिंहवाहनाय नमः॥ ॐ प्रभावात्मने नमः॥ ॐ जगतकालस्थालाय नमः॥ ॐ लोकहिताय नमः॥ ॐ तरवे नमः॥ ॐ सारंगाय नमः॥ ॐ नवचक्रांगाय नमः॥ ॐ केतुमालिने नमः॥ ॐ सभावनाय नमः॥ ॐ भूतालयाय नमः॥ ॐ भूतपतये नमः॥ ॐ अहोरात्राय नमः॥ ॐ अनिन्दिताय नमः॥ ॐ सर्वभूतवाहित्रे नमः॥ ॐ सर्वभूतनिलयाय नमः॥ ॐ विभवे नमः॥ ॐ भवाय नमः॥ ॐ अमोघाय नमः॥ ॐ संयताय नमः॥ ॐ अश्वाय नमः॥ ॐ भोजनाय नमः॥(700) ॐ प्राणधारणाय नमः॥ ॐ धृतिमते नमः॥ ॐ मतिमते नमः॥ ॐ दक्षाय नमः॥ ॐ सत्कृयाय नमः॥ ॐ युगाधिपाय नमः॥ ॐ गोपाल्यै नमः॥ ॐ गोपतये नमः॥ ॐ ग्रामाय नमः॥ ॐ गोचर्मवसनाय नमः॥ ॐ हरये नमः॥ ॐ हिरण्यबाहवे नमः॥ ॐ प्रवेशिनांगुहापालाय नमः॥ ॐ प्रकृष्टारये नमः॥ ॐ महाहर्षाय नमः॥ ॐ जितकामाय नमः॥ ॐ जितेन्द्रियाय नमः॥ ॐ गांधाराय नमः॥ ॐ सुवासाय नमः॥ ॐ तपः॥सक्ताय नमः॥ ॐ रतये नमः॥ ॐ नराय नमः॥ ॐ महागीताय नमः॥ ॐ महानृत्याय नमः॥ ॐ अप्सरोगणसेविताय नमः॥ ॐ महाकेतवे नमः॥ ॐ महाधातवे नमः॥ ॐ नैकसानुचराय नमः॥ ॐ चलाय नमः॥ ॐ आवेदनीयाय नमः॥ ॐ आदेशाय नमः॥ ॐ सर्वगंधसुखावहाय नमः॥ ॐ तोरणाय नमः॥ ॐ तारणाय नमः॥ ॐ वाताय नमः॥ ॐ परिधये नमः॥ ॐ पतिखेचराय नमः॥ ॐ संयोगवर्धनाय नमः॥ ॐ वृद्धाय नमः॥ ॐ गुणाधिकाय नमः॥ ॐ अतिवृद्धाय नमः॥ ॐ नित्यात्मसहायाय नमः॥ ॐ देवासुरपतये नमः॥ ॐ पत्ये नमः॥ ॐ युक्ताय नमः॥ ॐ युक्तबाहवे नमः॥ ॐ दिविसुपर्वदेवाय नमः॥ ॐ आषाढाय नमः॥ ॐ सुषाढ़ाय नमः॥ ॐ ध्रुवाय नमः॥ (750) ॐ हरिणाय नमः॥ ॐ हराय नमः॥ ॐ आवर्तमानवपुषे नमः॥ ॐ वसुश्रेष्ठाय नमः॥ ॐ महापथाय नमः॥ ॐ विमर्षशिरोहारिणे नमः॥ ॐ सर्वलक्षणलक्षिताय नमः॥ ॐ अक्षरथयोगिने नमः॥ ॐ सर्वयोगिने नमः॥ ॐ महाबलाय नमः॥ ॐ समाम्नायाय नमः॥ ॐ असाम्नायाय नमः॥ ॐ तीर्थदेवाय नमः॥ ॐ महारथाय नमः॥ ॐ निर्जीवाय नमः॥ ॐ जीवनाय नमः॥ ॐ मंत्राय नमः॥ ॐ शुभाक्षाय नमः॥ ॐ बहुकर्कशाय नमः॥ ॐ रत्नप्रभूताय नमः॥ ॐ रत्नांगाय नमः॥ ॐ महार्णवनिपानविदे नमः॥ ॐ मूलाय नमः॥ ॐ विशालाय नमः॥ ॐ अमृताय नमः॥ ॐ व्यक्ताव्यवक्ताय नमः॥ ॐ तपोनिधये नमः॥ ॐ आरोहणाय नमः॥ ॐ अधिरोहाय नमः॥ ॐ शीलधारिणे नमः॥ ॐ महायशसे नमः॥ ॐ सेनाकल्पाय नमः॥ ॐ महाकल्पाय नमः॥ ॐ योगाय नमः॥ ॐ युगकराय नमः॥ ॐ हरये नमः॥ ॐ युगरूपाय नमः॥ ॐ महारूपाय नमः॥ ॐ महानागहतकाय नमः॥ ॐ अवधाय नमः॥ ॐ न्यायनिर्वपणाय नमः॥ ॐ पादाय नमः॥ ॐ पण्डिताय नमः॥ ॐ अचलोपमाय नमः॥ ॐ बहुमालाय नमः॥ ॐ महामालाय नमः॥ ॐ शशिहरसुलोचनाय नमः॥ ॐ विस्तारलवणकूपाय नमः॥ ॐ त्रिगुणाय नमः॥ ॐ सफलोदयाय नमः॥ (800) ॐ त्रिलोचनाय नमः॥ ॐ विषण्डागाय नमः॥ ॐ मणिविद्धाय नमः॥ ॐ जटाधराय नमः॥ ॐ बिन्दवे नमः॥ ॐ विसर्गाय नमः॥ ॐ सुमुखाय नमः॥ ॐ शराय नमः॥ ॐ सर्वायुधाय नमः॥ ॐ सहाय नमः॥ ॐ सहाय नमः॥ ॐ निवेदनाय नमः॥ ॐ सुखाजाताय नमः॥ ॐ सुगन्धराय नमः॥ ॐ महाधनुषे नमः॥ ॐ गंधपालिभगवते नमः॥ ॐ सर्वकर्मोत्थानाय नमः॥ ॐ मन्थानबहुलवायवे नमः॥ ॐ सकलाय नमः॥ ॐ सर्वलोचनाय नमः॥ ॐ तलस्तालाय नमः॥ ॐ करस्थालिने नमः॥ ॐ ऊर्ध्वसंहननाय नमः॥ ॐ महते नमः॥ ॐ छात्राय नमः॥ ॐ सुच्छत्राय नमः॥ ॐ विख्यातलोकाय नमः॥ ॐ सर्वाश्रयक्रमाय नमः॥ ॐ मुण्डाय नमः॥ ॐ विरूपाय नमः॥ ॐ विकृताय नमः॥ ॐ दण्डिने नमः॥ ॐ कुदण्डिने नमः॥ ॐ विकुर्वणाय नमः॥ ॐ हर्यक्षाय नमः॥ ॐ ककुभाय नमः॥ ॐ वज्रिणे नमः॥ ॐ शतजिह्वाय नमः॥ ॐ सहस्रपदे नमः॥ ॐ देवेन्द्राय नमः॥ ॐ सर्वदेवमयाय नमः॥ ॐ गुरवे नमः॥ ॐ सहस्रबाहवे नमः॥ ॐ सर्वांगाय नमः॥ ॐ शरण्याय नमः॥ ॐ सर्वलोककृते नमः॥ ॐ पवित्राय नमः॥ ॐ त्रिककुन्मंत्राय नमः॥ ॐ कनिष्ठाय नमः॥ ॐ कृष्णपिंगलाय नमः॥ (850) ॐ ब्रह्मदण्डविनिर्मात्रे नमः॥ ॐ शतघ्नीपाशशक्तिमते नमः॥ ॐ पद्मगर्भाय नमः॥ ॐ महागर्भाय नमः॥ ॐ ब्रह्मगर्भाय नमः॥ ॐ जलोद्भावाय नमः॥ ॐ गभस्तये नमः॥ ॐ ब्रह्मकृते नमः॥ ॐ ब्रह्मिणे नमः॥ ॐ ब्रह्मविदे नमः॥ ॐ ब्राह्मणाय नमः॥ ॐ गतये नमः॥ ॐ अनंतरूपाय नमः॥ ॐ नैकात्मने नमः॥ ॐ स्वयंभुवतिग्मतेजसे नमः॥ ॐ उर्ध्वगात्मने नमः॥ ॐ पशुपतये नमः॥ ॐ वातरंहसे नमः॥ ॐ मनोजवाय नमः॥ ॐ चंदनिने नमः॥ ॐ पद्मनालाग्राय नमः॥ ॐ सुरभ्युत्तारणाय नमः॥ ॐ नराय नमः॥ ॐ कर्णिकारमहास्रग्विणमे नमः॥ ॐ नीलमौलये नमः॥ ॐ पिनाकधृषे नमः॥ ॐ उमापतये नमः॥ ॐ उमाकान्ताय नमः॥ ॐ जाह्नवीधृषे नमः॥ ॐ उमादवाय नमः॥ ॐ वरवराहाय नमः॥ ॐ वरदाय नमः॥ ॐ वरेण्याय नमः॥ ॐ सुमहास्वनाय नमः॥ ॐ महाप्रसादाय नमः॥ ॐ दमनाय नमः॥ ॐ शत्रुघ्ने नमः॥ ॐ श्वेतपिंगलाय नमः॥ ॐ पीतात्मने नमः॥ ॐ परमात्मने नमः॥ ॐ प्रयतात्मने नमः॥ ॐ प्रधानधृषे नमः॥ ॐ सर्वपार्श्वमुखाय नमः॥ ॐ त्रक्षाय नमः॥ ॐ धर्मसाधारणवराय नमः॥ ॐ चराचरात्मने नमः॥ ॐ सूक्ष्मात्मने नमः॥ ॐ अमृतगोवृषेश्वराय नमः॥ ॐ साध्यर्षये नमः॥ ॐ आदित्यवसवे नमः॥ (900) ॐ विवस्वत्सवित्रमृताय नमः॥ ॐ व्यासाय नमः॥ ॐ सर्गसुसंक्षेपविस्तराय नमः॥ ॐ पर्ययोनराय नमः॥ ॐ ऋतवे नमः॥ ॐ संवत्सराय नमः॥ ॐ मासाय नमः॥ ॐ पक्षाय नमः॥ ॐ संख्यासमापनाय नमः॥ ॐ कलायै नमः॥ ॐ काष्ठायै नमः॥ ॐ लवेभ्यो नमः॥ ॐ मात्रेभ्यो नमः॥ ॐ मुहूर्ताहः॥क्षपाभ्यो नमः॥ ॐ क्षणेभ्यो नमः॥ ॐ विश्वक्षेत्राय नमः॥ ॐ प्रजाबीजाय नमः॥ ॐ लिंगाय नमः॥ ॐ आद्यनिर्गमाय नमः॥ ॐ सत् स्वरूपाय नमः॥ ॐ असत् रूपाय नमः॥ ॐ व्यक्ताय नमः॥ ॐ अव्यक्ताय नमः॥ ॐ पित्रे नमः॥ ॐ मात्रे नमः॥ ॐ पितामहाय नमः॥ ॐ स्वर्गद्वाराय नमः॥ ॐ प्रजाद्वाराय नमः॥ ॐ मोक्षद्वाराय नमः॥ ॐ त्रिविष्टपाय नमः॥ ॐ निर्वाणाय नमः॥ ॐ ह्लादनाय नमः॥ ॐ ब्रह्मलोकाय नमः॥ ॐ परागतये नमः॥ ॐ देवासुरविनिर्मात्रे नमः॥ ॐ देवासुरपरायणाय नमः॥ ॐ देवासुरगुरूवे नमः॥ ॐ देवाय नमः॥ ॐ देवासुरनमस्कृताय नमः॥ ॐ देवासुरमहामात्राय नमः॥ ॐ देवासुरमहामात्राय नमः॥ ॐ देवासुरगणाश्रयाय नमः॥ ॐ देवासुरगणाध्यक्षाय नमः॥ ॐ देवासुरगणाग्रण्ये नमः॥ ॐ देवातिदेवाय नमः॥ ॐ देवर्षये नमः॥ ॐ देवासुरवरप्रदाय नमः॥ ॐ विश्वाय नमः॥ ॐ देवासुरमहेश्वराय नमः॥ ॐ सर्वदेवमयाय नमः॥(950) ॐ अचिंत्याय नमः॥ ॐ देवात्मने नमः॥ ॐ आत्मसंबवाय नमः॥ ॐ उद्भिदे नमः॥ ॐ त्रिविक्रमाय नमः॥ ॐ वैद्याय नमः॥ ॐ विरजाय नमः॥ ॐ नीरजाय नमः॥ ॐ अमराय नमः॥ ॐ इड्याय नमः॥ ॐ हस्तीश्वराय नमः॥ ॐ व्याघ्राय नमः॥ ॐ देवसिंहाय नमः॥ ॐ नरर्षभाय नमः॥ ॐ विभुदाय नमः॥ ॐ अग्रवराय नमः॥ ॐ सूक्ष्माय नमः॥ ॐ सर्वदेवाय नमः॥ ॐ तपोमयाय नमः॥ ॐ सुयुक्ताय नमः॥ ॐ शोभनाय नमः॥ ॐ वज्रिणे नमः॥ ॐ प्रासानाम्प्रभवाय नमः॥ ॐ अव्ययाय नमः॥ ॐ गुहाय नमः॥ ॐ कान्ताय नमः॥ ॐ निजसर्गाय नमः॥ ॐ पवित्राय नमः॥ ॐ सर्वपावनाय नमः॥ ॐ श्रृंगिणे नमः॥ ॐ श्रृंगप्रियाय नमः॥ ॐ बभ्रवे नमः॥ ॐ राजराजाय नमः॥ ॐ निरामयाय नमः॥ ॐ अभिरामाय नमः॥ ॐ सुरगणाय नमः॥ ॐ विरामाय नमः॥ ॐ सर्वसाधनाय नमः॥ ॐ ललाटाक्षाय नमः॥ ॐ विश्वदेवाय नमः॥ ॐ हरिणाय नमः॥ ॐ ब्रह्मवर्चसे नमः॥ ॐ स्थावरपतये नमः॥ ॐ नियमेन्द्रियवर्धनाय नमः॥ ॐ सिद्धार्थाय नमः॥ ॐ सिद्धभूतार्थाय नमः॥ ॐ अचिन्ताय नमः॥ ॐ सत्यव्रताय नमः॥ ॐ शुचये नमः॥ ॐ व्रताधिपाय नमः॥ ॐ पराय नमः॥ ॐ ब्रह्मणे नमः॥ ॐ भक्तानांपरमागतये नमः॥ ॐ विमुक्ताय नमः॥ ॐ मुक्ततेजसे नमः॥ ॐ श्रीमते नमः॥ ॐ श्रीवर्धनाय नमः॥ ॐ श्री जगते नमः॥ (1000 ) ॐ पूर्णमदः॥ पूर्णमिदं पूर्णात पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।। ॐ शांतिः॥ शांतिः॥ शांतिः॥ 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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