Ravindra Rana May 27, 2020

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Ravindra Rana May 27, 2020

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Ravindra Rana May 27, 2020

हे जगत के आधार! हे ब्रह्मा!हे विष्णु! हे परमसत्ता शिव 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 आप हम पर अनंत-अनंत कृपा बरसाते हो! हम पात्र हो या ना हो,तब भी आप अपनी कृपा और दया करते है। हे प्यारे देव! हमारे समस्त दोषों को दूर कीजिए,हमे सद्बुद्धि, सुमति दीजिए।हमें सन्मार्ग दिखाइए!हम सदैव अपनी भक्ति को निरंतर बढ़ाते हुए आपके श्रीचरणों के प्रति सदा ध्यान लगाये रहे। हे भगवन! हमारी श्रद्धा, हमारी भक्ति निरंतर बढ़ती रहे,हमारी लगन दृढ होती जाये। हमारे विश्वास में सदा अभिवृद्धि हो। हमारे ह्रदय में सदैव अपनी ज्योति बसायें,हमारी आत्मा को आलोकित करें। हे प्यारे देव! हम सभी भक्तों का निवेदन है कि इस असार संसार में,इस उलझन भरे जीवन के पथ पर हम सुगमता से चलते हुए अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त कर सकें। हे दाता! हमें आशीर्वाद दो!हमें उलझनों से पार होने की सद्बुद्धि प्रदान करो। जीवन के टेढ़े-मेढ़े और उलझनों से युक्त मार्गो पर हमारा मन संतुलित बना रहे और हमारी हिम्मत कभी न टूटे। हे प्यारे प्रभु! हमारा हर दिन शुभ दिन बन जाये,हर कर्म शुभ कर्म बन जाये। हमारा अंतःकरण पवित्र हो,हमारा जीवन खुशियों और आनंद से भरपूर हो जाये। 🙏ॐ शांतिः शांतिः शांतिः🙏

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Ravindra Rana May 25, 2020

🚩🙏ऊँ नमःशिवाय शिवोऽहम् 🙏🚩 🚩🚩ऊँ जय श्री राम रामाय नमः 🚩🚩 🔱🚩🔱🚩🔱🚩🔱🚩🔱🚩🔱 🙏🌹*🌹🙏 *"रिश्ता" ऐसा हो* जिस पर नाज़ हो,* *कल जितना"भरोसा"था*उतना ही आज हो,..! *"रिश्ता" सिर्फ वो नहीं जो* "ग़म या ख़ुशी" में साथ दे,* *"रिश्ते" तो वो हैं जो हर पल* *अपनेपन का एहसास दें!* *🙏🌹🌹🙏 *रिश्तों में विश्वास मौजूद हैं तो* *मौन भी समझ आ जायेगा* *औऱ विश्वास नहीं हैं तो शब्दों से भी* *गलतफहमी हो जायेंगी* *जो लोग आपके पद प्रतिष्ठा* *और पैसे से जुड़े हैं वो लोग* *केवल सुख में आपके साथ* *खड़े रहेंगे और जो लोग आपकी* *वाणी विचार और व्यवहार से* *जुड़े हैं वो लोग संकट में भी* *आपके लिये खड़े रहेंगे* *इसका मतलब ये नहीं के* *पद प्रतिष्ठा वालों से मुँह मोड़ लो,* *बल्कि जो आपके वाणी व्यवहार से* *प्यार करते है, उन्हें मौका न देना की* *वो कभी आपसे मुँह मोड़ें* 🌹 *🙏🙏* 🌹 ♻🏵 *जय सियाराम* 🏵♻

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Ravindra Rana May 23, 2020

*💐कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम्* *वसुदेव सुतं देवं कंस* *चाणूर्मर्दनम्।* *देवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।।💐* कृष्ण...जिस नाम में ही आकर्षण निहित हो और आकर्षण भी ऐसा दिव्य, जो अनंत काल से जन मानस पर छाया हो। कृष्ण चरित्र जितना मोहक, उतना ही रहस्यमय...जितना चंचल, उतना ही गंभीर... जितना सरल, उतना ही जटिल...मानो प्रकृति का हर रूप अपने व्यतीक्रम के साथ उनके व्यक्तित्व में समाहित है। इतने आयामों को अपने में समेटे, कि युगों-युगों से लेखनी उनके महत्व का वर्णन करना चाहती है, किंतु हर बार नित नूतन आयाम के सम्मुख आने पर नेति-नेति कह नत मस्तक हो जाती है। एक तरफ यह हमें कृष्ण की मनोहारी लीलाओं का संस्मरण करवट है तो दूसरी तरफ उन लीलाओं के गूढ़ अर्थ को समझने को ललचाता भी है। कृष्ण के लोकनायक, संघर्ष शील, पुरुषार्थी, कर्मयोगी व युगांधर होने के महत्व को प्रतिपादित करता है। विष्णु का सोलह कला युक्त कृष्ण का अवतार सचमुच ही अद्भुद है, सीमारहित, व्याख्या से परे, कृष्ण के जीवन पर जितना भी लिखा गया है, उतना किसी और अवतार पर नहीं। किसी कृष्ण भक्त वैष्णव विद्वान का भी इन आयामों को जानकर अचंभित होना स्वाभाविक है, तो फिर हम तो ठहरे सामान्य मनुष्य है। कृष्ण की विराटता अनंतता और सर्व कालिक प्रासंगिकता ही कृष्ण तत्व के प्रति असीमित आकर्षण का कारण है। कृष्ण हर रूप में अद्भुद हैं, ब्रज वृंदावन के कान्हा हो, मुरली मनोहर, माखन चोर, गोपाल राधेकृष्ण, नन्द नंदन, यशोदा के लाल, रास रचैया, गोपी कृष्ण हो या देवकी नंदन, द्रौपदी के सखा, पांडवों के तारणहार वासुदेव, वे द्वारका के द्वारकाधीश, वे राधा मीरा गोपियों का विरह हैं, और उनकी आराधना भी, वे सूरदास की दृष्टि हैं, तो रसखान का अमृत भी हैं, किंतु अपने हर रूप में पूर्ण और अनंत। कृष्ण जैसा कोई पुत्र नहीं, उन सा कोई प्रेमी नहीं, कोई सखा नहीं, कोई भाई नहीं, कोई योद्धा नहीं, कोई दार्शनिक नहीं, कोई कूटनीतिज्ञ नहीं... वे हर रूप में चमत्कार करते हैं। "अनेक रूप रूपाय विष्णवे प्रभु विष्णवे" वे अतिमानवीय हैं, दैवीय हैं, किन्तु फिर भी सर्वसुलभ हैं। भक्त की एक आर्त पुकार पर नंगे पैर दौड़े चले आने वाले कृष्ण के कौन से रूप की व्याख्या की जाए और क्या सचमुच व्याख्या संभव है? जटिल प्रश्न है। कृष्ण भारत की प्रज्ञा हैं, मेधा हैं। उनका संपूर्ण जीवन ही एक पाठशाला है। वे ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्ति योग का उद्गम हैं। वे पुरुषार्थ का, प्रेम का अनंत सागर हैं। जिसमें गोते लगाने वाले को कौन-सा अद्भुद कोष हाथ लगता है, यह गोते लगाने वाला ही जानता है। कृष्ण सच में जगद गुरु ही हैं। कृष्ण के जन्म से उनकी लीला संवरण तक हर घटना अपने आप में गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को समेटे हुए हैं, जो हमें भी यह विश्वास दिलाती है, कि हर घटना एक दूजे से जुड़ी है। और निर्धारित क्रम में उसका होना पूर्व निर्धारित है। स्थूल से सूक्ष्म की यात्रा है, कृष्ण तत्व का अनुभव। कृष्ण जन्म के समय बेड़ियों का टूटना ईश्वरीय अनुग्रह के पश्चात हर जीवात्मा का, हर बंधन से मुक्त होना दर्शाता है। यहां कृष्ण परम तत्व हैं। सहस्त्रार पर उस परम तत्व को अनुभव कर ही भव सागर तरता है, यह संदेश वसुदेव के यमुना को पार करने में निहित है। यहां कृष्ण योगेश्वर हैं, साधना का महत्त्व बताते हुए। जन्म के बाद कई भयानक राक्षकों का वध मानवीय वृत्त‍ियों के मान मर्दन का पर्याय है, यहां कृष्ण इन्द्रियों के दमन की वकालत करते हुए योगी हैं। इंद्र की पूजा का विरोध कर्मकांड का विरोध है, गोवर्धन की पूजा प्रकृति के संरक्षण का प्रत्यक्ष प्रयास है। जब वे मथुरा भेजे जाने वाले दूध का विरोध कर ग्वाल बाल पर उसके अधिकार की बात करते हैं, तो वे गरीबी, कुपोषण के उन्मूलन और अन्याय का विरोध करने वाले समाज सुधारक हैं। राधिका के साथ पवित्र प्रेम और उद्दात भक्ति के साथ प्लूटो प्रेम को दर्शाते हैं। रास रचाते, मुरली बजाते कृष्ण स्थूल जीवन में ललित कलाओं के महत्व का प्रतिपादन करते हुए एक दक्ष कलाकार हैं, तो सूक्ष्म रूप में साधना में रत किसी प्राणी को होने वाले अनुभवों के रूप में इन दोनों कलाओं का वर्णन करते हैं। गोपाल बन कृषि प्रधान धरा पर पशु धन के संरक्षण का संदेश देते हैं। ब्रजमंडल से पलायन, जीवन में कर्म धर्म व आदर्शों की स्थापना को व्यक्तिगत सुख से ऊपर रखने का अद्भुद व सर्वकालिक प्रासंगिक प्रयास है। कंस का वध अधर्म व अन्याय के विनाश हेतु संरक्षित बल के प्रयोग की आवश्यकता बताता है। कुब्जा का उद्धार, सोलह हजार राजकुमारियों का उद्धार, द्रोपदी की रक्षा समाज में नारी अस्मिता को स्थापित करने का माध्यम है। सुदामा से प्रेम मित्र भाव की पराकाष्ठा है। शिशुपाल वध सहनशील होते हुए भी, अति होने पर बल प्रयोग व दंड विधान को अपनाने की अनिवार्यता दर्शाता है। महाभारत का युद्ध धर्म और अधर्म के बीच सतत चलने वाले द्वंद्व का चित्रण है। महाभारत जीवन के कटु यथार्थ का संग्रह है और मानवीय जीवन के इन कटु अनुभवों से कैसे सत्य व धर्म ( धारयेति इति धर्म:) की स्थापना की जाए, यही कृष्ण का शाश्वत संदेश है। गीता के रूप में नीति और प्रबंधन के चमत्कारी सूत्र केवल किसी ईश्वरीय सत्ता के मुख से ही निःसृत हो सकते हैं। जिन्होंने गीता पढ़ी है, वे ही इस चमत्कार का अनुभव कर सकते हैं। कृष्ण की तरह किसी अवतार की प्रतीक्षा हम करें, यह भी ठीक नहीं, किन्तु कृष्ण तत्व को, जगद्गुरु के स्वरूप को आत्मसात कर यदि हम अपने और अपने समाज के प्रबंधन के सूत्रों को समझ सकें, तो ही इस मानव जीवन की सार्थकता है। इसी में हर जीव का कल्याण है। श्री कृष्ण ही हर जीव के गुरु हैं। उधर भटकने की बजाय श्री कृष्ण को अपना गुरु बनाएं। 💐जय श्री राधेकृष्ण💐*💐कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम्* *वसुदेव सुतं देवं कंस* *चाणूर्मर्दनम्।* *देवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।।💐*

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Ravindra Rana May 23, 2020

🙏जीवन की सहजता खोने न दें 🙏 एक बार एक छोटा सा पारिवारिक कार्यक्रम चल रहा था। उसमें बहुत लोग उपस्थित थे। उस कार्यक्रम में बहुत ही बढ़िया बासमती चावल का पुलाव बन रहा था, सभी का मन पुलाव में लगा हुआ था। खाने में देर हो रही थी,भूख भी खूब लग रही थी। आखिर खाने में पुलाव परोसा गया, खाना शुरू ही होने वाला था कि रसोईयें ने आकर कहा कि पुलाव सम्हल कर खाईयेगा क्योंकि शायद उसमें एकाद कंकड़ रह गया है वह किसी के भी मुंह में आ सकता हैं। मैंने बहुत से कंकड़ निकाल दिए हैं, फिर भी एकाद रह गया होगा तो दांत के नीचे आ सकता हैं। यह सुनकर सभी लोग बहुत सम्हल कर खाना खाने लगे सभी को लग रहा था कि कंकड़ उसी के मुंह में आयेगा। यह सोचकर खाने का सारा मजा किरकिरा हो गया। और पुलाव खाने की जो प्रबल इच्छा थी वह भी थम गई। सब लोग बिना कुछ बोले, बिना किसी हंसी मजाक के भोजन करने लगे। जब सबने खाना खा लिया तब उन्होंने रसोईयें को बुलाया और पूछा कि तुमने ऐसा क्यों कहा था। जबकि कंकड़ तो भोजन में था ही नहीं हमें किसी को भी नही लगा , तब रसोईये ने कहा कि मैंने अच्छी तरह से चावल बिने थे, लेकिन चावल में कंकड़ ज्यादा थे इसलिए मुझे लगा एकाद रह गया होगा। यह सुनकर सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे। खाने के बाद किसी को कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था सब निराश हो गए थे क्योंकि सभी का ध्यान कंकड़ में था खाने का स्वाद कोई भी नही ले पा रहा था इसलिए सब निराश हो गए। यही परिस्थिति हमारी आज की हैं। एक वायरस को लेकर हम हमारी आजादी खो बैठे हैं। हर वस्तु,व्यक्ति,प्राणि पर शंका कर रहे हैं। आज तक जो लोग हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं, जैसे दूध वाला, फल वाला,सब्जीवाला, पेपर वाला इन लोगों पर से भी हमारा विश्वास उठ गया है। और हम हमारा आज का सुहाना दिन खो बैठे हैं। और शारीरिक रूप से भी थकान महसूस कर रहे हैं। यह सब, कुछ हद, तक हमारी सोच पर भी निर्भर हैं। इसलिए इससे बहार निकलना है तो वाइरस को नहीं अपने आप को मजबूत करिए। अपने विचारों को सकारात्मक दिशा दीजिये । ईश्वर की कृपा से सब कुछ जल्दी ही अच्छा हो जाएगा। अच्छे दिनों के लिए अच्छी शुरुआत कीजिये और अपने आप को मजबूत व सकारात्मक बनाइये, हमारी जिन्दगी कितनी बेहतर हो जाएगी। 🙏जय श्री राधे कृष्णा🙏

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Ravindra Rana May 22, 2020

😡 *अकड़ और अभिमान* *एक मानसिक बीमारी है।।* ⏲️ *जिसका इलाज कुदरत* *ओर समय जरूर करता है।।* 😊 *समझदारी की बातें* *सिर्फ़ दो ही लोग करते हैं।।* 👳‍♂️ *एक वो...* *जिसकी उम्र और तर्जुबा दोनों अधिक हो।।* ✌️ *दूसरा वो...* *जिसने बहुत कम उम्र में,* *अच्छा और बुरा दोनो वक़्त देखा हो।।* 😗Never waste your feelings on someone who doesn't value them. 😎 “The difference between a successful person and other IS 💪 Not lack of strength,. or Lack of knowledge but rather a lack of WILL.” *G☕D* *〽 🌞 ➰n❗ng* 👚 *कपड़ों की मैचिंग बिठाने से सिर्फ शरीर सुंदर दिखेगा...!* 👬 *रिश्तों एवं हालातों से मैचिंग बैठा लीजिये जिंदगी सुंदर बन जायेगी...!* 😷😷😷 👳‍♂️ *इस शहर में मज़दूर जैसा दर बदर कोई नहीं,* 🏚️ *जिसने सब के घर बनाए उसका कोई घर नहीं..☹️*हर हर हर महादेव 🌹🕉🌹

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