Ramit Singh Jan 26, 2020

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Ramit Singh Jan 26, 2020

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Ramit Singh Jan 24, 2020

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Ramit Singh Jan 22, 2020

*माता संतोषी के व्रत में रखें इस एक बात का ध्यान, गलती हुई तो बुरा होगा परिणाम* *माता संतोषी व्रत* शुक्रवार के दिन मां-संतोषी का व्रत-पूजन किया जाता है। यह दिन माता संतोषी को समर्पित होता है। इस दिन पूजा-अर्चना करना बहुत ही शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन व्रत रखकर माता की आराधना करना लाभदायक होता है। ऐसा करने से सभी मानोकामनाएं पूरी होती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से जिसने भी माता का व्रत किया उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं लेकिन व्रत के साथ इस बात का ध्यान रखें कि इस दिन संतोषी माता की व्रत कथा का पाठ करना भी जरूरी होता हैं। मानते हैं कि बिना पाठ किए बिना माता संतोषी का व्रत अधूरा होता है। आइए जानते हैं एस्ट्रो गुरु परियालजी से इस व्रत और कथा के बारे में- *सास के अत्याचार से परेशान थी बहू* एक वृद्धा थी, जिसका एक बेटा था। बेटा कुछ काम नहीं करता था। वृद्धा ने बेटे की शादी करवा दी। शादी के बाद वो बहू से सारे काम करवाती थी, लेकिन उसे ठीक से एक समय का खाना भी नहीं दिया करती थी। बेटा अपनी पत्नी को दिन-रात काम करता देखता था लेकिन अपनी मां से कुछ नहीं कह पाता था। बहू उपले थापती, रसोई का काम करती, कपड़े धोती, साफ-सफाई करती। इसी में उसका पूरा दिन निकल जाता था। एक दिन लड़के ने मां से बोला, ‘मां मैं परदेश जा रहा हूं’ । मां ने भी बेटे को जाने के अनुमति दे दी। इसके बाद वह अपनी पत्नी के पास जाकर बोला, ‘मैं परदेश जा रहा हूूं तो तुम मुझे अपनी कोई निशानी दे दो’। यह सुनकर बहू बोली, ‘मेरे पास तो कोई निशानी नहीं है, मैं आपको क्या दूं’ । यह कहते हुए वह अपने पति के चरणों में गिरकर रोने लगी। इससे पति के जूतों पर गोबर से सने हाथों की छाप बन गई। *रोते-रोते मंदिर पहुंची बहू* बेटे के परदेश जाने के बाद सास का बहू पर अत्याचार और बढ़ गया। वह उसे और ज्यादा परेशान करने लगी। जिसके बाद बहू रोते-रोते एक दिन मंदिर चली गई। मंदिर में उसने देखा कि बहुत सारी औरतें पूजा कर रहीं थीं। उसने औरतों से व्रत और पूजा के बारे में पूछा तो उसे पता चला कि वे सब संतोषी माता का व्रत कर रहीं हैं। उन्होंने बताया कि इस व्रत से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं । आगे बताया कि, ‘हर शुक्रवार को स्नान करने के बाद लोटे में जल और गुड़-चने का प्रसाद लेना। सच्चे मन से माता संतोषी की आराधना करना। खटाई भूलकर भी मत खाना और ना किसी को दान में देना। एक वक्त का भोजन करना।’ व्रत की जानकारी लेने के बाद बहू हर शुक्रवार को माता संतोषी का व्रत रखने लगी। *माता का व्रत रखने से दूर हुए कष्ट* माता की कृपा से कुछ ही दिनों बाद पति का खत आ गया और कुछ ही दिनों में पैसे भी आ गए। जिसके बाद उसने प्रसन्न मन से फिर माता का व्रत रखा और मंदिर जाकर सभी औरतों से कहा, ‘माता संतोषी की कृपा से मेरे पति का खत और रुपए आए हैं’ जिसे सुनकर अन्य सभी औरतें भी श्रद्धा से व्रत रखने लगीं। बहू ने कहा, ‘हे मां! जब मेरा पति घर आ जाएगा तो मैं आपके व्रत का उद्यापन करूंगी। ’ जिसके बाद माता संतोषी उसके पति के सपने में आई और कहा कि तुम अपने घर क्यों नहीं जाते? जवाब में पति ने कहा, ‘सेठ का सारा सामान अभी बिका नहीं है, पैसे नहीं आए हैं अभी’। जिसके बाद वह सेठ के पास गया और उसे अपने सपने की सारी बात बताई और घर जाने कि इजाज़त मांगी लेकिन सेठ ने मना कर दिया। माता संतोषी की कृपा से कई सारे व्यापारी आए और सेठ का सारा सामान बिक गया। कर्ज़दार भी धन लौटा गए। जिसके बाद साहूकार ने उसे घर जाने की इजाज़त दे दी। *उद्यापन के समय बहू से हो गई एक गलती* पति घर लौट आया। घर आकर उसने अपनी मां और पत्नी को बहुत सारे रुपए दिए। पत्नी ने कहा मुझे संतोषी माता के व्रत का उद्यापन करना है। उसने सभी को बुलाया और खुशी मन से सारी तैयारियाँ की। पड़ोस की एक औरत को यह सब देख जलन होने लगी। जिसके बाद उसने अपने बच्चों को सिखाया कि खाने के समय खटाई जरूर मांगना। बच्चों ने ठीक वैसा किया जैसा उसकी मां ने सिखाया था, वह खाते समय खटाई मांगने लगे तो बहू ने पैसे देकर बच्चों को बहलाने की कोशिश की। जिसके बाद बच्चे उन्हीं पैसों से दुकान जाकर इमली-खटाई खरीदकर खाने लगे। ऐसा होने से संतोषी मां काफी क्रोधित हुईं। नगर के राजा के दूत उसके पति को पकड़कर ले जाने लगे, बहु की स्थिति फिर से पहले जैसे होने लगी, जिसके बाद वह तुरंत मंदिर गई और माता से पूछा कि मां मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है, मेरे से ऐसी क्या गलती हो गई है, तब मां ने कहा, ‘उद्यापन में बच्चों ने इमली-खटाई खाई हैं जिसका परिणाम तुम्हें भुगतना पड़ रहा है। ’ जिसके बाद बहू ने तुरंत व्रत के उद्यापन का संकल्प लिया। *व्रत के दौरान रखें एक बात का ध्यान* संकल्प के बाद वह मंदिर से निकली तो रास्ते में उसे पति आता दिखाई पड़ गया। पति बोला कि जो इतना धन कमाया था राजा के पास उसका कर चुकाने गया था। फिर दोनों घर चले गए। जिसके बाद उसने अगले शुक्रवार को विधिवत व्रत का उद्यापन किया, जिससे संतोषी मां खुश हुई। 9 महीने के बाद बहू को एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। संतोषी मां की कृपा से सास, बहू और बेटा हंसी-खुशी रहने लगे। कहते हैं संतोषी माता की कृपा से व्रत रखने वाले सभी स्त्री-पुरुष सुखी रहते हैं और उनकी हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हालांकि माता का व्रत रखने वालों को एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि खट्टी चीजों से परहेज करना चाहिए। ना ही खाना चाहिए और ना ही किसी को दान में देना चाहिए, इससे मां नाराज हो सकती हैं।

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Ramit Singh Jan 20, 2020

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Ramit Singh Jan 16, 2020

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Ramit Singh Jan 14, 2020

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Ramit Singh Jan 14, 2020

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