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🔴गुरु सिर्फ मार्गदर्शक हैँ. साधना, स्वाध्याय, संयम और सेवा द्वारा शिष्य को ही स्वयं का उद्धार करना होता है. ईश्वर केवल उन्हीं की सहायता करते हैँ जो🔴गुरु सिर्फ मार्गदर्शक हैँ. साधना, स्वाध्याय, संयम और सेवा द्वारा शिष्य को ही स्वयं का उद्धार करना होता है. ईश्वर केवल उन्हीं की सहायता करते हैँ जो अपनी सहायता आप करना चाहते हैँ. 🔴आत्मिक प्रगति मनुष्य के समर्थता का अवलंबन माँगती है। उपासना की जाए पर सदगुरु का अवलंबन लेकर तो निश्चित ही सारी सफलताएँ ऋद्धि-सिद्धि के रूप में प्राप्त होने लगेंगे। सदगुरु के बिना कोई भी आध्यात्मिक पथ पर आगे नहीं बढ़ पाया है।ऐसी गुरुसत्ता मित्र के रूप में, मार्गदर्शक के रूप में मिल जाए तो जीवन धन्य हो जाता है। गायत्री उपासना सदगुरु से जुड़कर और भी परिणाम देने वाली फलदाई साधना बन जाती है। -आचार्य श्रीराम शर्मा -वांग्मय ०१ 🔴दुनियाँ में चाहे कितनी भी बुराई क्यों न हो, यदि हर व्यक्ति अपने आप को सुसंस्कृत बनाने का संकल्प ले लें , तो वह बुराईयों की प्रतिक्रिया से बच सकता है।इमर्सन ने कहा था कि-"मुझे नरक में भी भेज दिया जाए तो अपने लिए वहाँ भी स्वर्ग बना लूँगा।"यह बात अक्षरशः सत्य है।मन:स्थिति ही परिस्थितियों की निर्माती है वह यदि मनुष्य चाहे तो हजार प्रतिकूलताओं से जूझकर स्वयं के माध्यम से अपने लिए वैसा ही वातावरण बना सकता है। -आचार्य श्रीराम शर्मा -वांग्मय ०१-सिद्धि के रूप में प्राप्त होने लगेंगे। सदगुरु के बिना कोई भी आध्यात्मिक पथ पर आगे नहीं बढ़ पाया है।ऐसी गुरुसत्ता मित्र के रूप में, मार्गदर्शक के रूप में मिल जाए तो जीवन धन्य हो जाता है। गायत्री उपासना सदगुरु से जुड़कर और भी परिणाम देने वाली फलदाई साधना बन जाती है। - 🔴दुनियाँ में चाहे कितनी भी बुराई क्यों न हो, यदि हर व्यक्ति अपने आप को सुसंस्कृत बनाने का संकल्प ले लें , तो वह बुराईयों की प्रतिक्रिया से बच सकता है।इमर्सन ने कहा था कि-"मुझे नरक में भी भेज दिया जाए तो अपने लिए वहाँ भी स्वर्ग बना लूँगा।"यह बात अक्षरशः सत्य है।मन:स्थिति ही परिस्थितियों की निर्माती है वह यदि मनुष्य चाहे तो हजार प्रतिकूलताओं से जूझकर स्वयं के माध्यम से अपने लिए वैसा ही वातावरण बना सकता है। -

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