Kumarpal Shah Sep 24, 2020

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Kumarpal Shah Sep 24, 2020

🕉️ namah shivay ✔️ @Bhava & Mudra To communicate ideas through gesture and posture is called “Mudrá”. Mudrá literally means “externalization of internal Bháva (ideation)”. There are only a few spiritual Mudrás where the internal ideation is not externalized. Mudrás are also considered as postures which exercise the nerves and muscles. With respect to Bhava, a Mudrá expresses Bháva without creating any sound. For example, if you call someone to come near you, you make a particular movement of your palm. When you tell somebody to go away you make another kind of movement with your palm. Similarly, when you feel very hot and need a fan you make a particular style of movement with your hand. Again, when you feel thirsty and need a glass of water to drink, you make a particular corresponding Mudrá. Thus while offering something respectfully to your superior you make a forward and then downward movement of both palms with palms upwards. But such offerings meant for those who have died – or the “Pitrpuruśa” is made by another type of movement of the palms rotated sideways. Similarly, there are Dharma Cakra Pravartana Mudrá, Varábhaya Mudrá and many others. Among the Mudrás, some are meant for the psycho-spiritual benefit of sádhakas. Similarly, there are some bad Mudrás which are used in Avidyá Tantra. For instance, while cursing somebody, the forefinger is raised and used. In Saḿskrta the forefinger is called “Tarjanii”, which means “scolding”. The movement of the forefinger represents vanity, and therefore at the time of Japa the use of this finger should be avoided. Mudrá directly touches the Mind. For instance, if one calls to a person, as soon as the sound vibrations of “Come” touch the person’s ears, they directly reach the mind. But the person can be made to understand through Mudrás (gestures of the fingers) also. Similar are the cases of expressing that one feels hot and sweaty, that one feels thirsty, etc., without speaking, through different physical gestures. Hence, Mudrá has Shánta Bháva (it is peaceful, calm). The posture of sitting which creates Madhura Bháva in the body is known as Lalita mudrá or Lalitásana. You will see different idols from ancient times of Devas and Devis (gods and goddesses) sitting on lotus flowers in Lalita Mudrá.

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Kumarpal Shah Sep 24, 2020

🕉️ namah shivay ✔️ @ 🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞 ⛅ दिनांक 24 सितम्बर 2020 ⛅ दिन - गुरुवार ⛅ विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076) ⛅ शक संवत - 1942 ⛅ अयन - दक्षिणायन ⛅ ऋतु - शरद ⛅ मास - अधिक अश्विन ⛅ पक्ष - शुक्ल ⛅ तिथि - अष्टमी रात्रि 07:01 तक तत्पश्चात नवमी ⛅ नक्षत्र - मूल रात्रि 06:10 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा ⛅ योग - सौभाग्य रात्रि 09:55 तक तत्पश्चात शोभन ⛅ राहुकाल - दोपहर 02:01 शाम 03:32 तक ⛅ सूर्योदय - 06:29 ⛅ सूर्यास्त - 18:31 ⛅ दिशाशूल - दक्षिण दिशा में ⛅ व्रत पर्व विवरण - 💥 विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 💥 अष्टमी तिथि के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 गंगा स्नान का फल 🌷 🍏🌿 जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगा स्नान का फल मिलता है । (पद्म पुराण , उत्तर खंड) 🙏🏻 Lok Kalyan Setu Dec' 2012 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 शरीर में कही भी तकलीफ हो तो 🌷 👉🏻 भगवान को प्रार्थना करके हाथ की हथेली रगड़े...... ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ मेरी आरोग्य शक्ति जग रही है | फिर जहाँ भी शरीर में तकलीफ हो उधर लगाने से आरोग्य के कण, आरोग्य की शक्ति सुक्ष्म कण उस रोग को मिटाने की बड़ी मदद करते है | 👉🏻 हाथ रगड़ के ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ करके हाथ मुँह पे घुमाने से चेहरा प्रभावशाली हो जाता है | 👉🏻 आँखों पर घुमाते है ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ आँखों की रौशनी बरक़रार होती है, आँखों की ज्योति बढती है | 👉🏻 माथे पर घुमाये जहाँ चोटी रखते है ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ .....मस्तक में स्मृति शक्ति, निर्णय शक्ति का विकास होता है, मानसिक तनाव दूर होता है | मानसिक तनाव का मुख्य कारण है मलिन चित्तवृत्तियाँ | भगवान का नाम जपने से मलिन चित्तवृत्तियाँ भाग जाती है | 🙏🏻 Pujya Bapuji Vadodara 24th Nov' 2012 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 शुभ कार्य के लिए निषिद्ध काल 🌷 👉🏻 डेढ़ घंटे के लिए राहू का समय माना जाता है, इसे काल राहू कहते है ज्योतिषशास्त्र में, उस काल राहू के समय कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए या यात्रा के लिए न निकले उससे पहले निकल जाहिए या उसके बाद | ➡ सोमवार को काल राहू का समय होता है सुबह को – ७.३० बजे से ९.०० बजे तक ➡ मंगलवार को काल राहू का समय होता है दोपहर को - ३.०० बजे से ४.३० बजे तक ➡ बुधवार को काल राहू का समय होता है दोपहर को -१२.०० बजे से १.३० बजे तक ➡ गुरुवार को काल राहू का समय होता है दोपहर को - १.३० बजे से ३.०० बजे तक ➡ शुक्रवार को काल राहू का समय होता है सुबह को – १०.३० बजे से १२.०० बजे तक ➡ शनिवार को काल राहू का समय होता है सुबह को – ९.०० बजे से १०.३० बजे तक ➡ रविवार को काल राहू का समय होता है श्याम – ४.३० बजे से ६.०० बजे तक 🙏🏻 तो इस समय में शुभकार्य वर्जित है और यात्रा उस समय न करके उसके पहले या उसके बाद शुभ माना जाता है | परन्तु अगर कोई व्यक्ति जरुरी इस राहू के टाइम निकले या कुछ काम करे ह्रदयपूर्वक भगवान नाम जप करके जाये तो भगवान का नाम सर्व मंगलसों से मुक्ति भी दिलाता है | फिर भी जहाँ तहाँ अपनी भक्ति खर्च नहीं करनी चाहिये | हम जप-तप करते है की इसलिए खर्च करे | 🙏🏻 Shri Sureshanandji Vadodara 24th Nov' 2012 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻 t.me/hindupanchang

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