Rajpal Chhoker🙏 May 28, 2020

श्री द्वारिका नगरी का रहस्य और इतिहास ... गुजरात का द्वारकाधीश शहर वह स्थान है जहाँ 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद द्वारिका नगरी बसाई थी। जिस स्थान पर उनका निजी महल 'हरि गृह' था वहाँ आज प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर है। इसलिए कृष्ण भक्तों की दृष्टि में यह एक महान् तीर्थ है। वैसे भी द्वारका नगरी आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित देश के चार धामों में से एक है। यही नहीं द्वारका नगरी पवित्र सप्तपुरियों में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर मूल मंदिर का निर्माण भगवान कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने करवाया था। कई द्वारों का शहर होने के कारण 'द्वारिका' इसका नाम पड़ा। इस शहर के चारों ओर बहुत ही लंबी दीवार थी जिसमें कई द्वार थे। वह दीवार आज भी समुद्र के तल में स्थित है। द्वारिका भारत के सबसे प्राचीन नगरों में से एक है । ये 7 नगर हैं- द्वारिका, मथुरा, काशी, हरिद्वार, अवंतिका, कांची और अयोध्या। द्वारिका को द्वारावती, कुशस्थली, आनर्तक, ओखा-मंडल, गोमती द्वारिका, चक्रतीर्थ, अंतरद्वीप, वारिदुर्ग, उद्धिमध्य स्थान भी कहा जाता है। गुजरात राज्य के पश्चिमी सिरे पर समुद्र के किनारे स्थित 4 धामों में से 1 धाम और 7 पवित्र पुरियों में से 1 पुरी है द्वारिका। द्वारिका 2 हैं- गोमती द्वारिका, बेट द्वारिका। गोमती द्वारिका धाम है, बेट द्वारिका पुरी है। बेट द्वारिका के लिए समुद्र मार्ग से जाना पड़ता है। मंदिर को वर्तमान स्वरूप 16वीं शताब्दी में प्राप्त हुआ था। द्वारिकाधीश मंदिर से लगभग 2 किमी दूर एकांत में रुक्मिणी का मंदिर है। कहते हैं, दुर्वासा के श्राप के कारण उन्हें एकांत में रहना पड़ा था । प्राचीन इतिहास की खोज करने वाले इतिहासकारों के अनुसार द्वारिका विश्‍व का सबसे रहस्यमय शहर है। इस शहर पर अभी भी शोध जारी है। द्वारिका नगरी कैसे जाएं । ट्रेन: द्वारका देश के कई शहरों से रेल नेटवर्क के जरिए कनेक्टेड है। द्वारका रेलवे स्टेशन तक आपको रोज कई ट्रेनें मिल जाएंगी। एक बार द्वारका स्टेशन पहुंचने पर आपके लिए मंदिर जाना आसान है, क्योंकि स्टेशन और मंदिर के बीच की दूरी महज एक किलोमीटर है। सड़क मार्ग: द्वारका देश के लगभग सभी बड़े शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। आप न सिर्फ खुद की गाड़ी से वहां पहुंच सकते हैं बल्कि मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको कई बस सर्विस भी मिल जाएंगी, जिसे आप अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकते हैं। एयरप्लेन से: द्वारका पहुंचने के लिए कोई भी सीधी फ्लाइट नहीं है। द्वारका से सबसे नजदीक का एयरपोर्ट जामनगर है जो यहां से 47 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा आप पोरबंदर एयरपोर्ट तक की फ्लाइट भी ले सकते हैं। यह एयरपोर्ट द्वारका से करीब 98 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से आप कैब ले सकते हैं, जो आपको सीधे द्वारकाधीश मंदिर पहुंचाएगी। दोनों की एयरपोर्ट्स के लिए देश की बड़े शहरों से आसानी से फ्लाइट मिल जाएगी। जय हिन्द जय जवान जय किसान जय भारत 🇮🇳 By. Raj Pal Singh https://youtu.be/14GKSOphpzU

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Rajpal Chhoker🙏 May 27, 2020

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Rajpal Chhoker🙏 May 26, 2020

अमरकंटक :  अमरकंटक मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में स्थित है। अमरकंटक रीवा से 160 मील और पेंड्रा रेलवे स्टेशन से 15 मील दूर नर्मदा तथा सोन नदी के उद्गम-स्थान के रूप में प्रख्यात है। अमरकंटक पठार समुद्रतट से 2500 फ़ुट से 3500 फ़ुट तक ऊँचा है। नर्मदा का उदगम एक पर्वतकुण्ड में बताया जाता है। अमरकंटक को आम्रकूट भी कहते हैं। यह तीर्थ, श्राद्ध-स्थान और सिद्ध क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है। अमरकंटक में नर्मदा के उद्गम स्थान के पर्वत को सोम भी कहा गया है। अमरकंटक ऋक्षपर्वत का एक भाग है, जो पुराणों में वर्णित सप्तकुल पर्वतों में से एक है। भारत के पर्यटन स्थलों में अमरकंटक प्रसिद्ध तीर्थ और नयनाभिराम पर्यटन स्थल है। विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतमालाओं के बीच 1,065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह हरा-भरा होने के साथ-साथ अपने में कई रहस्य समेटे हुए हैं। आश्चर्य नहीं कि यहां के बंदर भी आपको ध्यान करते हुए मिल जाएंगे । भारत की प्रमुख 7 नदियों में से अनुपम नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक है और यह मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की पुष्पराजगढ़ तहसील के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित अमरकंटक पवित्र स्थलों में गिना जाता है। यहां एक प्राचीन कमंडल है, जो हमेशा पानी से भरा रहता है। यहां का वातावरण इतना सुंदर है कि यहां महज तीर्थयात्रियों का ही नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमियों का भी तांता लगा रहता है । दिल्‍ली से अमरकंटक की दूरी 989 किलोमीटर है. नागपुर से यह 445 किलोमीटर दूर है । अमरकंटक जाने के लिए अक्‍टूबर से मार्च तक का समय सबसे अच्‍छा है । दर्शनीय स्‍थल :- नर्मदा उद्गमः यहां नर्मदा के उद्गम पर पवित्र मंदिर है जहां तीर्थयात्रियों की कतारें लगी रहती हैं । सोनमुडाः यह सोन नदी का उद्गम है । अमरकंटक के जर्रे-जर्रे में नर्मदा और सोन की असफल प्रेम कहानी की अनुगूंज सुनाई देती है। भृगु कमंडलः यहां एक प्राचीन कमंडल है जो हमेशा पानी से भरा रहता है । धूनी पानीः यहां घने जंगल में गर्म पानी का सोता है । यह पानी औषधीय गुणों से संपन्न होने के कारण इस पानी से स्नान करने से शरीर के असाध्य रोग ठीक हो जाते हैं। कबीर चबूतरा : इस स्थल पर संत कबीर ने कई वर्ष बिताए थे। यह स्थल दो महान संत गुरुनानक देव और संत कबीर का मिलन स्थल होने से सिख और कबीरपंथियों दोनों के लिए विशेष महत्वपूर्ण है कपिलधारा :- यह बेहद खूबसूरत पिकनिक स्थल है और यहां जल प्रपात भी है। यह अमरकंटक का प्रसिद्ध झरना है। यहीं पर नर्मदा नदी लगभग 100 फुट की ऊंचाई से गिरती है। यहां कभी कपिल मुनि भी निवास करते थे। दुग्धधाराः यह 50 फीट ऊंचा प्रपात है । जब पानी गिरता है तो दूध की तरह सफेद दिखाई देता है । माई की बगिया :- यहां मंदिर के साथ-साथ एक खूबसूरत बगीचा है। अमरकटंक के मंदिरों की संख्या 24 हैं। कबीरा चौरा, भृगु कमण्डल और पुष्कर बांध भी देखने योग्य हैं। घाटों में बसे अमरकंटक के ग्राम में भव्य शिखरों वाले मंदिर और कई धर्मशालाएं हैं। कैसे पहुंचा जाएं :- वायु मार्ग: मध्‍यप्रदेश में जबलपुर सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है, यह 228 किलोमीटर दूर है । रायपुर और छत्तिसगढ़ 230 किलोमीटर दूर है । वहां से प्रीपेड कैब से अमरकंटक तक पहुंचा जा सकता है । सड़क मार्ग: अमरकंटक मध्‍यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सड़कों से जुड़ा हुआ है. यहां जाने के लिए सबसे अच्‍छी सड़क बिलासपुर सड़क है । रेल मार्ग: यहां पहुंचने के लिए बिलासपुर रेल सबसे सुविधाजन‍क है । अन्‍य रेलमार्ग पेंड्रा रोड और अनूपपुर है । दक्षिण-पूर्व रेलवे के कटनी-बिलासपुर रेल मार्ग पर पेन्ड्रा रोड (42 किमी) निकटतम रेलवे स्टेशन हैं। जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 By . Raj Pal Singh http://chamanrishi.blogspot.com/2020/05/blog-post_24.html

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Rajpal Chhoker🙏 May 25, 2020

कन्याकुमारी मंदिर...कन्याकुमारी ऋषि-मुनियों और अवतारों की भूमि 'भारत' एक रहस्यमय देश है। धरती के 70.8% प्रतिशत भाग पर समुद्र है जिसमें से 14% भाग पर बसा है विराट हिन्द महासागर। भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और जिसके 13 राज्यों की सीमा से समुद्र लगा हुआ है ।। चारों धाम की यात्रा में सभी तरह के नजारों के दर्शन हो जाते हैं । अगर घूमने का मन करे तो एक बार कन्याकुमारी जरूर जाएं । 1.कन्याकुमारी :  कन्याकुमारी हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थस्थल के साथ साथ तमिलनाडु राज्य का एक शहर है। कन्याकुमारी दक्षिण भारत के महान शासकों चोल, चेर, पांड्य के अधीन रहा है। यह मध्यकाल में विजयानगरम् साम्राज्य का भी हिस्सा रहा है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने असुर बाणासुर को वरदान दिया था कि कुंवारी कन्या के अलावा किसी के हाथों उसका वध नहीं होगा। प्राचीनकाल में भारत पर शासन करने वाले राजा भरत को 8 पुत्री और 1 पुत्र था। भरत ने अपने साम्राज्य को 9 बराबर हिस्सों में बांटकर अपनी संतानों को दे दिया। दक्षिण का हिस्सा उनकी पुत्री कुमारी को मिला। कुमारी शिव की भक्त थीं और भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं। विवाह की तैयारियां होने लगीं लेकिन नारद मुनि चाहते थे कि बाणासुर का कुमारी के हाथों वध हो जाए। इस कारण शिव और देवी कुमारी का विवाह नहीं हो पाया। कुमारी को शक्ति देवी का अवतार माना जाने लगा और बाणासुर  के वध के बाद कुमारी की याद में ही दक्षिण भारत के इस स्थान को 'कन्याकुमारी' कहा जाने लगा। यहां के समुद्री तट पर ही कुमारी देवी का मंदिर है, जहां देवी पार्वती के कन्या रूप को पूजा जाता है। मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को कमर से ऊपर के वस्त्र उतारने पड़ते हैं। प्रचलित कथा के अनुसार देवी का विवाह संपन्न न हो पाने के कारण बच गए दाल-चावल बाद में कंकर बन गए। आश्चर्यजनक रूप से कन्याकुमारी के समुद्र तट की रेत में दाल और चावल के आकार और रंग-रूप के कंकर बड़ी मात्रा में देखे जा सकते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त : कन्याकुमारी अपने सूर्योदय के दृश्य के लिए काफी प्रसिद्ध है। सुबह हर होटल की छत पर पर्यटकों की भारी भीड़ सूरज की अगवानी के लिए जमा हो जाती है। शाम को सागर में डूबते सूरज को देखना भी यादगार होता है। उत्तर की ओर करीब 2-3 किलोमीटर दूर एक सनसेट प्वॉइंट भी है। घूमने जाए तो यहां का आनन्द जरूर लें विवेकानंद रॉक मेमोरियल – Vivekananda Rock Memorial कन्याकुमारी में प्रतिष्ठित स्मारकों में से एक, विवेकानंद रॉक मेमोरियल तट से 100 मीटर की दूरी पर स्थित है । और कन्याकुमारी में प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। छोटे रॉक द्वीप को नौका द्वारा पहुंचा जा सकता है और इसमें दो मुख्य संरचनाएं शामिल हैं। स्वामी विवेकानंद मंडपम और श्रीपद मंडपम स्मारक के दो मुख्य परिसर हैं और लाखों पर्यटकों द्वारा यह अक्सर दौरा किया जाता है। 4. सुविन्द्रम – Suchindram एक मंदिर शहर, सुचितंदम कन्याकुमारी शहर से 11 किलोमीटर दूर स्थित है।यहां के मंदिर विशिष्ट द्रविड़ शैली में बने हैं और बड़े पैमाने पर गोपुरों के साथ सजे हुए हैं जो सभी द्रविड़ मंदिरों की एक सामान्य विशेषता हैं। उच्चतम गोपुरम 134 फीट ऊंचा है और मंदिरों के अंदर कई अति सुंदर रॉक कट स्तंभ और गेटवे खेल रहे हैं।एक प्राचीन मंदिर शहर होने के नाते यह प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों द्वारा अक्सर जाता है। 5. गांधी स्मारक – Gandhi Smarak यह स्मारक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित है। यही पर महात्मा गांधी की चिता की अस्थियाँ रखी हुई है। इस स्मारक की स्थापना 1956 में हुई थी। महात्मा गांधी 1937 में यहां आए थे। उनकी मृत्यु के बाद 1948 में कन्याकुमारी में ही उनकी अस्थियां विसर्जित की गई थी। स्मारक को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर सूर्य की प्रथम किरणें उस स्थान पर पड़ती हैं जहां महात्मा की राख रखी हुई है। 6. तिरुवल्लुवर प्रतिमा – Thiruvalluvar Statue विशाल 133 फीट की विशाल प्रतिमा सेंट काव्य तिरुवल्लुवर का है, जिसे भारत में सबसे बड़ी तमिल कवियों में से एक माना जाता था। तिरुवल्लुवर प्रतिमा एशिया में सबसे बड़ी है और 1 जनवरी 2000 को इसका अनावरण किया गया था। मूर्ति का मस्तूल कलात्मक रूप से डिज़ाइन किया गया है और इसे 10 हाथियों से सजाया गया है जो विभिन्न दिशाओं को दर्शाता है। https://youtu.be/awJs-Qdk7lk

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Rajpal Chhoker🙏 May 23, 2020

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Rajpal Chhoker🙏 May 20, 2020

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Rajpal Chhoker🙏 May 20, 2020

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