RAJNEESH MAKOL Feb 24, 2021

. *न्यायधीश का दंड* अमेरिका में एक पंद्रह साल का लडका था, स्टोर से चोरी करता हुआ पकडा गया. पकडे जाने पर गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में, स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया. जज ने जुर्म सुना और लडके से पूछा, *"तुमने क्या सचमुच कुछ चुराया था* *ब्रैड और पनीर का पैकेट.?* लडके ने नीचे नजरें कर के जवाब दिया : *हाँ.* जज : *क्यों.?* लडका : *मुझे जरुरत थी.* जज : *खरीद लेते.* लडका : *पैसे नहीं थे.* जज : *घर वालों से ले लेते.* लडका : *घर में सिर्फ मां है.* *बीमार और बेरोजगार है, ब्रैड और* *पनीर भी उसी के लिए चुराई थी.* जज : *तुम कुछ काम नहीं करते.?* लडका : *करता था एक कार वाश में.* *मां की देखभाल के लिए, एक दिन की* *छुट्टी की थी, तो मुझे निकाल दिया गया.* जज : *तुम किसी से मदद मांग लेते.?* लडका : *सुबह से घर से निकला था,* *तकरीबन पचास लोगों के पास गया,* *बिल्कुल आखिर में ये कदम उठाया...* जिरह खत्म हुई, जज ने फैसला सुनाना शुरु किया, *चोरी और खुसूसन ब्रैड की चोरी,* *बहुत शर्मनाक जुर्म है. और इस जुर्म के* *हम सब जिम्मेदार हैं.* अदालत में मौजूद हर शख्स मुझ सहित, सब मुजरिम हैं, इसलिए यहाँ मौजूद हर शख्स पर, दस-दस डालर का जुर्माना लगाया जाता है. दस डालर दिए बगैर कोई भी यहां से बाहर नहीं निकल सकेगा. ये कह कर जज ने दस डालर अपनी जेब से बाहर निकाल कर रख दिए. और फिर पेन उठाया, लिखना शुरु किया : *इसके अलावा मैं स्टोर पर एक हजार डालर का जुर्माना करता हूं. कि उसने एक भूखे बच्चे से गैर इंसानी सुलूक* *करते हुए, पुलिस के हवाले किया.* *अगर चौबीस घंटे में जुर्माना जमा नहीं किया, तो कोर्ट स्टोर सील करने का* *हुक्म दे देगी.* *जुर्माने की पूर्ण राशि इस लडके को देकर, कोर्ट उस लडके से माफी तलब करती है.* फैसला सुनने के बाद, कोर्ट में मौजूद लोगों के आंखों से आंसू तो बरस ही रहे थे, उस लडके के भी हिचकियां बंध गईं. वह लडका बार बार, जज को देख रहा था. जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गये. *क्या हमारा समाज, सिस्टम और अदालत इस तरह के निर्णय के लिए तैयार हैं.?* *चाणक्य ने कहा है कि यदि कोई भूखा व्यक्ति रोटी चोरी करता पकडा जाए. तो उस देश के लोगों को शर्म आनी चाहिए.* *यह रचना बहुत ही प्यारी है.* *दिल को छू गयी तो सोचा* *आप से भी शेयर कर लूं.*

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RAJNEESH MAKOL Feb 18, 2021

*बेईमानी का पैसा शरीर के एक एक अंग फाड़कर निकलता है।* *एक सच्ची कहानी* रमेश चंद्र शर्मा जो पंजाब के 'खन्ना' नामक शहर में एक मेडिकल स्टोर चलाते थे,उन्होंने अपने जीवन का एक पृष्ठ खोल कर सुनाया जो पाठकों की आँखें भी खोल सकता है और शायद उस पाप से,जिस में वह भागीदार बना, उससे भी बचा सकता है। रमेश चंद्र शर्मा का मेडिकल स्टोर जो कि अपने स्थान के कारण काफी पुराना और अच्छी स्थिति में था। लेकिन जैसे कि कहा जाता है कि *धन एक व्यक्ति के दिमाग को भ्रष्ट कर देता है* और यही बात रमेश चंद्र जी के साथ भी घटित हुई। रमेश जी बताते हैं कि मेरा मेडिकल स्टोर बहुत अच्छी तरह से चलता था और मेरी आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी थी। अपनी कमाई से मैंने जमीन और कुछ प्लॉट खरीदे और अपने मेडिकल स्टोर के साथ एक क्लीनिकल लेबोरेटरी भी खोल ली। लेकिन मैं यहां झूठ नहीं बोलूंगा। मैं एक बहुत ही लालची किस्म का आदमी था क्योंकि मेडिकल फील्ड में दोगुनी नहीं बल्कि कई गुना कमाई होती है। शायद ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं जानते होंगे कि मेडिकल प्रोफेशन में 10 रुपये में आने वाली दवा आराम से 70-80 रुपये में बिक जाती है। लेकिन अगर कोई मुझसे कभी दो रुपये भी कम करने को कहता तो मैं ग्राहक को मना कर देता। खैर, मैं हर किसी के बारे में बात नहीं कर रहा हूं, सिर्फ अपनी बात कर रहा हूं। वर्ष 2008 में, गर्मी के दिनों में एक बूढ़ा व्यक्ति मेरे स्टोर में आया। उसने मुझे डॉक्टर की पर्ची दी। मैंने दवा पढ़ी और उसे निकाल लिया। उस दवा का बिल 560 रुपये बन गया। बूढ़े ने उसने अपनी सारी जेब खाली कर दी लेकिन उसके पास कुल 180 रुपये थे। मैं उस समय बहुत गुस्से में था क्योंकि मुझे काफी समय लगा कर उस बूढ़े व्यक्ति की दवा निकालनी पड़ी थी और ऊपर से उसके पास पर्याप्त पैसे भी नहीं थे। बूढ़ा दवा लेने से मना भी नहीं कर पा रहा था। शायद उसे दवा की सख्त जरूरत थी। फिर उस बूढ़े व्यक्ति ने कहा, "मेरी मदद करो। मेरे पास कम पैसे हैं और मेरी पत्नी बीमार है। हमारे बच्चे भी हमें पूछते नहीं हैं। मैं अपनी पत्नी को इस तरह वृद्धावस्था में मरते हुए नहीं देख सकता।" लेकिन मैंने उस समय उस बूढ़े व्यक्ति की बात नहीं सुनी और उसे दवा वापस छोड़ने के लिए कहा। यहां पर मैं एक बात कहना चाहूंगा कि वास्तव में उस बूढ़े व्यक्ति की दवा की कुल राशि 120 रुपये ही बनती थी। अगर मैंने उससे 150 रुपये भी ले लिए होते तो भी मुझे 30 रुपये का मुनाफा ही होता। लेकिन मेरे लालच ने उस बूढ़े लाचार व्यक्ति को भी नहीं छोड़ा। फिर मेरी दुकान पर खड़े एक दूसरे ग्राहक ने अपनी जेब से पैसे निकाले और उस बूढ़े आदमी के लिए दवा खरीदी। लेकिन इसका भी मुझ पर कोई असर नहीं हुआ। मैंने पैसे लिए और बूढ़े को दवाई दे दी। समय बीतता गया और वर्ष 2009 आ गया। मेरे इकलौते बेटे को ब्रेन ट्यूमर हो गया। पहले तो हमें पता ही नहीं चला। लेकिन जब पता चला तो बेटा मृत्यु के कगार पर था। पैसा बहता रहा और लड़के की बीमारी खराब होती गई। प्लॉट बिक गए, जमीन बिक गई और आखिरकार मेडिकल स्टोर भी बिक गया लेकिन मेरे बेटे की तबीयत बिल्कुल नहीं सुधरी। उसका ऑपरेशन भी हुआ और जब सब पैसा खत्म हो गया तो आखिरकार डॉक्टरों ने मुझे अपने बेटे को घर ले जाने और उसकी सेवा करने के लिए कहा। उसके पश्चात 2012 में मेरे बेटे का निधन हो गया। मैं जीवन भर कमाने के बाद भी उसे बचा नहीं सका। 2015 में मुझे भी लकवा मार गया और मुझे चोट भी लग गई। आज जब मेरी दवा आती है तो उन दवाओं पर खर्च किया गया पैसा मुझे काटता है क्योंकि मैं उन दवाओं की वास्तविक कीमत को जानता हूं। एक दिन मैं कुछ दवाई लेने के लिए मेडिकल स्टोर पर गया और 100 रु का इंजेक्शन मुझे 700 रु में दिया गया। लेकिन उस समय मेरी जेब में 500 रुपये ही थे और इंजेक्शन के बिना ही मुझे मेडिकल स्टोर से वापस आना पड़ा। उस समय मुझे उस बूढ़े व्यक्ति की बहुत याद आई और मैं घर चला गया। *👉मैं लोगों से कहना चाहता हूं कि ठीक है कि हम सभी कमाने के लिए बैठे हैं क्योंकि हर किसी के पास एक पेट है। लेकिन वैध तरीके से कमाएं,ईमानदारी से कमाएं । गरीब लाचारों को लूट कर कमाई करना अच्छी बात नहीं है क्योंकि नरक और स्वर्ग केवल इस धरती पर ही हैं,कहीं और नहीं। और आज मैं नरक भुगत रहा हूं।* पैसा हमेशा मदद नहीं करता। हमेशा ईश्वर के भय से चलो। उसका नियम अटल है क्योंकि कई बार एक छोटा सा लालच भी हमें बहुत बड़े दुख में धकेल सकता है। जीवन शतरंज के खेल की तरह है और यह खेल आप ईश्वर के साथ खेल रहे हैं ... आपकी हर चाल के बाद अगली चाल ईश्वर चलता है। *जैसी करनी वैसा फल,आज नहीं तो निश्चित कल।* *🌸हम बदलेंगे,युग बदलेगा।*🌸

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RAJNEESH MAKOL Feb 17, 2021

*12 बातें जो हर सनातन धर्म अनुयायी को ध्यान रखनी चाहिए।* 1. क्या भगवान राम या भगवान कृष्ण कभी इंग्लैंड के *house of lord* के सदस्य रहे थे ? नहीं ना... तो फिर ये क्या ~Lord Rama, Lord Krishna~ लगा रखा है ? सीधे सीधे *भगवान राम, भगवान कृष्ण* कहिये - अंग्रेजी में भी. 2. किसी की मृत्यु होने पर ~RIP~ बिलकुल मत कहिये। यानी Rest In Peace जो दफ़नाने वालों के लिए कहा जाता है। आप कहिये - *"ओम शांति"*, अथवा *"मोक्ष प्राप्ति हो"* ! आत्मा कभी एक स्थान पर _आराम या विश्राम नहीं करती ! आत्मा का पुनर्जन्म होता है अथवा उसे मोक्ष मिलता है !_ 3. अपने रामायण एवं महाभारत जैसे ग्रंथों को कभी भी ~mythological~ मत कहियेगा. *"mythological" शब्द बना है "myth" से और "myth" शब्द बना है हिंदी के "मिथ्या" शब्द से।* *"मिथ्या" अर्थात 'झूठा' या 'जिसका कोई अस्तित्व ना हो'* और हमारे सभी देवी देवता, राम और कृष्ण *वास्तविक रूप में प्रकट हुए हैं* ये हमारा *गौरवशाली इतिहास* है और *राम एवं कृष्ण* हमारे ऐतिहासिक देवपुरुष हैं , _कोई ~mythological कलाकार~ नहीं !_ 4. _अपने इष्ट देवों का नाम आदर सहित लें। उनका मज़ाक न बनने दें !_ 5. हमारें मंदिरों को ~प्रार्थनागृह~ न कहें ! मंदिर *देवालय* होते हैं। _भगवान के निवासगृह_ ! वह ~प्रार्थनागृह~ नहीं होते ! _मंदिर में केवल प्रार्थना नहीं होती ! अन्य पूजा पद्धति में सिर्फ साप्ताहिक प्रार्थना होती है, जबकि हिंदू धर्म में ये नित्य कर्म है। 6. अपने बच्चों के जन्मदिन पर दीप ~बुझा~ के अपशकुन न करें ! अग्निदेव को न बुझाएँ ! *दीप प्रज्ज्वलित करना अर्थात प्रकाश का संचार करना* अपितु बच्चों को दीप की प्रार्थना सिखायें *"तमसो मा ज्योतिर्गमय"* ( _हे अग्नि देवता, मुझे अंधेरे से उजाले की ओर जाने का रास्ता बताएँ_ ) ये सारे प्रतीक बच्चों के मस्तिष्क में गहरा असर करते हैं ! 7. क्या आप भगवान से डरते हैं ? नहीं ना, डरना भी नहीं चाहिए, *क्योंकि भगवान तो चराचर में विद्यमान हैं*। अजन्मा, परोपकारी, न्यायकारी और सर्वशक्तिमान हैं ! इतना ही नहीं हम मे स्वयं भगवान का अंश मौजुद है! तो फिर अपने आपको "God Fearing" अर्थात भगवान से डरने वाला मत कहिये. *God Believer या भगवान में विश्वास रखने वाला कहिए* 8. कभी भी किसी को बधाई देनी हो तो 'बधाई' या 'शुभकामनाएँ' शब्द का प्रयोग कीजिये और बधाई स्वीकार करनी हो तो धन्यवाद शब्द प्रयोग कीजिये। ~मुबारक और शुक्रिया~ शब्द का प्रयोग न किया जाए क्योंकि इनके अर्थ अलग हैं. 9. हिन्दुओं में 7 फेरे लेकर विवाह किया जाता है। कोई कॉन्ट्रैक्ट का विवाह नहीं होता। इसलिए TV आदि फिल्में देखकर देखकर भेड़चाल में अपनी धर्मपत्नी को ~बीवी~ मत कहिए। यदि आप उन्हें अपनी जीवन संगिनी मानते हैं तो पत्नी शब्द प्रयोग कीजिये। यदि आप उनको कॉन्ट्रैक्ट के साथ ब्याह कर लाये हैं तो आप बीवी कह सकते हैं । ध्यान रहे, विश्व में केवल उनका सम्मान होता है जो स्वयं का सम्मान करते है ! यह पोस्ट किसी के विरुद्ध नहीं है, ये बस अपनी सनातन संस्कृति के लिए आदर है। *सनातन धर्म के मान के लिए, सम्मान बढ़ाने के लिए इन विचारों को अपने सभी मित्रों एवं संबंधियों के साथ अवश्य ही साझा (Share) करें, और अपने हिन्दू होने पर गर्व और गौरव करें.* *🙏🏿।। भारत माता की जय।।🙏🏿*

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RAJNEESH MAKOL Feb 9, 2021

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RAJNEESH MAKOL Feb 4, 2021

एक जोड़े को बाबा जी के कहे अनुसार *भजन सिमरन करने की आदत थी। ऐसा लगता था, कि मानो उन्होंने सतगुरु से अपॉइंटमेंट फिक्स कर रखी थी। चाहे कुछ भी हो जाए, वह दोनों निर्धारित समय पर भजन सिमरन जरूर करते थे। क्यूंकि वह समझते थे, कि इस समय पर हमारी बाबा जी से अपोंत्मेंट फिक्स है। और बाबा जी हमारा इंतजार कर रहे होंगे। बाबा जी कभी किसी को निराश नहीं करते। इस पति और पत्नी को एक विशेष समय पर सुबह उठने और भजन सिमरन में बैठने की आदत थी।* आम तौर पर पति थोड़ी देर के लिए बैठता था। और उठ जाता था, लेकिन पत्नी भजन सिमरन के लिए पूरा समय देती थी। वह लंबे समय तक भजन पर बैठती थी, पति अपनी पत्नी के लिए बहुत खुश था। पति का हर रोज एक नियम था, कि जैसे ही उसकी पत्नी भजन सिमरन कर के उठती। वह पीने के लिए उस के पास एक कप चाय तैयार कर रखता था। ऐसा बहुत दिनों, महीनों से चला आ रहा था। जैसे ही पत्नी भजन सिमरन के बाद अपनी आँखे खोलती, वह अपने सामने चाय के साथ पति को मुस्कुराते हुए पाती। वह दोनों अपनी इस दिनचर्या का पूरा पालन कर रहे थे। *एक दिन पत्नी उठती है, कया देखती है। कि उस के पति अभी उठे ही नहीं है। वह उन के पास जाती है, और अपने पति को वह मृत पाती है। उसे एक दम बहुत बड़ा सदमा लगता है, वह खुद से कहती है। कि मेरा भजन सिमरन का भी समय हो रहा है। क्यूंकि बाबा जी के साथ अपॉइंटमेंट फिक्स कि है, अब मैं क्या करूं? वह रोती है। लेकिन फिर वह बाबा जी से प्रार्थना करती है। कि मैं अपना कर्तव्य पूरा करूंगी, कृपया मुझे माफ़ कर दो। अगर मैं फ़ोन कॉल करती हूं, तो सब रिश्तेदार दोस्त घर मे आना शुरू कर देंगे। और मैं अपना भजन सिमरन पूरा नहीं कर पाऊंगी। मजबूत दिल और आंखों में आसूं के साथ वह अपने पति को एक बेडशीट मे ढंकने के बाद, भजन सिमरन मे बैठ गई। और पूरे ढाई घंटे आसूं भरी आंखों से भजन सिमरन किया। ढाई घंटे के बाद उस ने सब को दुखद समाचार देने लिए आंखें खोली। जैसे ही वह अपनी आंखें खोलती है, तो अपने सामने चाय के कप के साथ अपने पति को मुस्कुराता हुआ पाती है।* जो लोग अपना कर्तव्य पूरा करते हैं। तो वह मालिक भी हमें कभी निराश नहीं करते है। वह अपने वचन को पूरा करते है, कि मैं तुम्हारे साथ हूं और तुम्हे कभी निराश नही होने दूंगा। यह हमें समझने और विश्वास करने की आवश्यकता है। *हमें भी हर रोज बिना नागा भजन सिमरन इस सोच के साथ करना चाहिए। कि बाबा जी के साथ हमारी अपॉइंटमेंट फिक्स है। हम बैठे या ना बैठें पर वह सतगुरु हर रोज जरूर आते है।*

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RAJNEESH MAKOL Feb 4, 2021

*आनंदित रहने की कला* एक राजा बहुत दिनों से विचार कर रहा था कि वह राजपाट छोड़कर *अध्यात्म* (ईश्वर की खोज) में समय लगाए । राजा ने इस बारे में बहुत सोचा और फिर अपने गुरु को अपनी समस्याएँ बताते हुए कहा कि उसे राज्य का कोई योग्य वारिस नहीं मिल पाया है । राजा का बच्चा छोटा है, इसलिए वह राजा बनने के योग्य नहीं है । जब भी उसे कोई पात्र इंसान मिलेगा, जिसमें राज्य सँभालने के सारे गुण हों, तो वह राजपाट छोड़कर शेष जीवन अध्यात्म के लिए समर्पित कर देगा । *गुरु ने कहा, "राज्य की बागड़ोर मेरे हाथों में क्यों नहीं दे देते ? क्या तुम्हें मुझसे ज्यादा पात्र, ज्यादा सक्षम कोई इंसान मिल सकता है ?"* राजा ने कहा, *"मेरे राज्य को आप से अच्छी तरह भला कौन संभल सकता है ?* *लीजिए, मैं इसी समय राज्य की बागड़ोर आपके हाथों में सौंप देता हूँ ।"* गुरु ने पूछा, *"अब तुम क्या करोगे ?"* राजा बोला, *"मैं राज्य के खजाने से थोड़े पैसे ले लूँगा, जिससे मेरा बाकी जीवन चल जाए ।"* गुरु ने कहा, *"मगर अब खजाना तो मेरा है, मैं तुम्हें एक पैसा भी लेने नहीं दूँगा ।"* राजा बोला, *"फिर ठीक है, "मैं कहीं कोई छोटी-मोटी नौकरी कर लूँगा, उससे जो भी मिलेगा गुजारा कर लूँगा ।"* गुरु ने कहा, *"अगर तुम्हें काम ही करना है तो मेरे यहाँ एक नौकरी खाली है । क्या तुम मेरे यहाँ नौकरी करना चाहोगे ?"* राजा बोला, *"कोई भी नौकरी हो, मैं करने को तैयार हूँ ।"* *गुरु ने कहा, "मेरे यहाँ राजा की नौकरी खाली है । मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे लिए यह नौकरी करो और हर महीने राज्य के खजाने से अपनी तनख्वाह लेते रहना ।"* एक वर्ष बाद गुरु ने वापस लौटकर देखा कि राजा बहुत खुश था । अब तो दोनों ही काम हो रहे थे । जिस अध्यात्म के लिए राजपाट छोड़ना चाहता था, वह भी चल रहा था और राज्य सँभालने का काम भी अच्छी तरह चल रहा था । अब उसे कोई चिंता नहीं थी । *क्या परिवर्तन हुआ ?* *कुछ भी तो नहीं!* *राज्य वही,* *राजा वही,* *काम वही;* *बस दृष्टिकोण बदल गया ।* इसी तरह जीवन में अपना दृष्टिकोण बदलें । मालिक बनकर नहीं, बल्कि यह सोचकर सारे कार्य करें की, *"मैं ईश्वर कि नौकरी कर रहा हूँ"* *अब ईश्वर ही जाने।* *सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दें ।* *फिर आप हर समस्या और परिस्थिति में खुशहाल रह पाएँ। 🙏🙏🙏 सदैव प्रसन्न रहिये जो प्राप्त है-वो पर्याप्त है

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RAJNEESH MAKOL Feb 2, 2021

*अलौकिक प्रसन्नता* अपने अतिथि , एक करोड़पति से पूछा ,आपने जीवन में सबसे अधिक खुशी का एहसास कब महसूस किया? करोड़पति ने कहा - मैं जीवन में खुशियों के चार पड़ावों से गुजरा हूँ , और आखिरकार मैंने सच्ची खुशी को समझा! पहला चरण धन और साधनों का संचय करना था.. लेकिन इस स्तर पर मुझे कोई खुशी नहीं मिली! फिर मूल्यवान वस्तुओं को इकट्ठा करने का दूसरा चरण लेकिन मुझे एहसास हुआ कि इसका प्रभाव भी अस्थायी है . और मूल्यवान चीजों की चमक लंबे समय तक नहीं रहती है! फिर बड़े प्रोजेक्ट्स पाने का तीसरा चरण आया जैसे क्रिकेट टीम खरीदना , टूरिस्ट रिसोर्ट खरीदना आदि , लेकिन यहाँ भी मुझे वह खुशी नहीं मिली , जिसकी मैंने कल्पना की थी! चौथी बार तब जब मेरे एक मित्र ने मुझे एक कहानी सुनाई की *"कभी कहीं एक मालन को रोज़ राजा की सेज़ को फूलों से सजाने का काम दिया गया था। वो अपने काम में बहुत निपुण थी। एक दिन सेज़ सजाने के बाद उसके मन में आया की वो रोज़ तो फूलों की सेज़ सजाती है, पर उसने कभी खुद फूलों के सेज़ पर सोकर नहीं देखा था।"* *कौतुहल-बस वो दो घड़ी फूल सजे उस सेज़ पर सो गयी। उसे दिव्य आनंद मिला। ना जाने कैसे उसे नींद आ गयी।* *कुछ घंटों बाद राजा अपने शयन कक्ष में आये। मालन को अपनी सेज़ पर सोता देखकर राजा बहुत गुस्सा हुआ। उसने मालन को पकड़कर सौ कोड़े लगाने की सज़ा दी।* *मालन बहुत रोई, विनती की, पर राजा ने एक ना सुनी। जब कोड़े लगाने लगे तो शुरू में मालन खूब चीखी चिल्लाई, पर बाद में जोर-जोर से हंसने लगी।* *राजा ने कोड़े रोकने का हुक्म दिया और पूछा - "अरे तू पागल हो गयी है क्या? हंस किस बात पर रही है तू?"* *मालन बोली - "राजन! मैं इस आश्चर्य में हंस रही हूँ कि जब दो घड़ी फूलों की सेज़ पर सोने की सज़ा सौ कोड़े हैं, तो पूरी ज़िन्दगी हर रात ऐसे बिस्तर पर सोने की सज़ा क्या होगी?"* *राजा को समझ आ गया कि जो कर्म हम इस लोक में करते हैं, उससे परलोक में हमारी सज़ा या पुरस्कार तय होते हैं।उसने तुंरन्त अपना शेष जीवन जन कल्याण में लगा दिया।* कहानी सुनाकर मित्र ने कहा- दोस्त क्यों न ईश्वर की तुमपर हुई इस असीम कृपा को तुम भी जनकल्याण में लगाओ। विकलांगों के लिए व्हीलचेयर खरीदो, मैंने तुरंत उन्हें खरीदा लेकिन मेरे दोस्त ने जोर देकर कहा कि मैं उसके साथ चलूँ और विकलांग बच्चों को व्हीलचेयर सोंपू . मैं तैयार हो गया, मैंने ये कुर्सियाँ अपने हाथों से जरूरतमंद बच्चों को दीं . मैंने चेहरों पर खुशी की अजीब चमक देखी! !! मैंने उन सभी विकलांगों को कुर्सियों पर बैठे , घूमते और मस्ती करते देखा, ऐसा लगा जैसे वे किसी पिकनिक स्थल पर पहुंचे हों !! जब मैं जगह छोड़ रहा था , तब बच्चों में से एक ने मेरे पैर पकड़ लिए . मैंने धीरे से अपने पैरों को मुक्त करने की कोशिश की , लेकिन बच्चा मेरे चेहरे को घूरता रहा! मैं नीचे झुका और बच्चे से पूछा - क्या आपको कुछ और चाहिए? बच्चे के जवाब ने न केवल मुझे खुश किया बल्कि मेरी जिंदगी भी पूरी तरह से बदल दी ! !! *बच्चे ने कहा "मैं आपके चेहरे को याद करना चाहता हूँ , ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूँ , तो मैं आपको पहचानने में सक्षम हो जाऊँगा और एक बार फिर से आपको धन्यवाद दूँगा"!* *आज हम ऐसे मददगार बनें , और जरूरतमंदों के प्रति ऐसी सहानुभूति प्रकट करें , जो अमिट छाप छोड़ दे ! और वे लोग हमारे चेहरे को आजीवन विस्मृत न कर पाएं !! आइए हम भी धन नही पूण्य कमाने की ओर आगे बढ़े।* सेवा कर्म करे हरदम,जीवन सफल बनायें, सब मिलकर,अपने सामर्थ्य से,सेवासदन बनाये!!

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RAJNEESH MAKOL Feb 1, 2021

एक सभा में गुरु जी ने प्रवचन के दौरान एक 30 वर्षीय युवक को खडा कर पूछा कि - आप मुम्बई मेँ जुहू चौपाटी पर चल रहे हैं और सामने से एक सुन्दर लडकी आ रही है , तो आप क्या करोगे ? युवक ने कहा - उस पर नजर जायेगी, उसे देखने लगेंगे। गुरु जी ने पूछा - वह लडकी आगे बढ गयी , तो क्या पीछे मुडकर भी देखोगे ? लडके ने कहा - हाँ, अगर धर्मपत्नी साथ नहीं है तो। (सभा में सभी हँस पडे) गुरु जी ने फिर पूछा - जरा यह बताओ वह सुन्दर चेहरा आपको कब तक याद रहेगा ? युवक ने कहा 5 - 10 मिनट तक, जब तक कोई दूसरा सुन्दर चेहरा सामने न आ जाए। गुरु जी ने उस युवक से कहा - अब जरा कल्पना कीजिये.. आप जयपुर से मुम्बई जा रहे हैं और मैंने आपको एक पुस्तकों का पैकेट देते हुए कहा कि मुम्बई में अमुक महानुभाव के यहाँ यह पैकेट पहुँचा देना... आप पैकेट देने मुम्बई में उनके घर गए। उनका घर देखा तो आपको पता चला कि ये तो बडे अरबपति हैं। घर के बाहर 10 गाडियाँ और 5 चौकीदार खडे हैं। उन्हें आपने पैकेट की सूचना अन्दर भिजवाई , तो वे महानुभाव खुद बाहर आए। आप से पैकेट लिया। आप जाने लगे तो आपको आग्रह करके घर में ले गए। पास में बैठाकर गरम खाना खिलाया। चलते समय आप से पूछा - किसमें आए हो ? आपने कहा- लोकल ट्रेन में। उन्होंने ड्राइवर को बोलकर आपको गंतव्य तक पहुँचाने के लिए कहा और आप जैसे ही अपने स्थान पर पहुँचने वाले थे कि उस अरबपति महानुभाव का फोन आया - भैया, आप आराम से पहुँच गए.. अब आप बताइए कि आपको वे महानुभाव कब तक याद रहेंगे ? युवक ने कहा - गुरु जी ! जिंदगी में मरते दम तक उस व्यक्ति को हम भूल नहीं सकते। गुरु जी ने युवक के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा — "यह है जीवन की हकीकत।" "सुन्दर चेहरा थोड़े समय ही याद रहता है, पर सुन्दर व्यवहार जीवन भर याद रहता है।" बस यही है जीवन का गुरु मंत्र... अपने चेहरे और शरीर की सुंदरता से ज़्यादा अपने व्यवहार की सुंदरता पर ध्यान दें.. जीवन अपने लिए आनंददायक और दूसरों के लिए अविस्मरणीय प्रेरणादायक बन जाएगा.. जीवन का सबसे अच्छा योग *सहयोग* हैै, और सबसे बुरा आसन *आश्वासन।*

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