Radhe Shivansh May 4, 2021

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Radhe Shivansh Apr 28, 2021

किशोरी जी की कृपा . वृंदावन मे एक संत के पास कुछ शिष्य रहते थे उनमे से एक शिष्य मंद बुद्धि का था। . एक बार गुरु देव ने सभी शिष्यों को अपने करीब बुलाया और सब को एक मास के लिए ब्रज मे अलग-अलग स्थान पर रहने की आज्ञा दी और... . उस मंद बुद्धि को बरसाने जाकर रहने को कहा। . मंद बुद्धि ने बाबा से पुछा बाबा मेरे रहने खाने की व्यवस्था वहा कौन करेगा। . बाबा ने हंस कर कह दिया राधा रानी... . कुछ दिनों बाद एक एक करके सब बालक लौट आए पर वो मंद बुद्धि बालक नही आया। . बाबा को चिंता हुई के दो मास हो गए मंद बुद्धि बालक नही आया जाकर देखना चाहिए... . बाबा अपने शिष्य की सुध लेने बरसाने आ गए। . बाबा ने देखा एक सुन्दर कुटिया के बाहर एक सुन्दर बालक बहुत सुन्दर भजन कर रहा है... . बाबा ने सोचा क्यों ना इन्ही से पुछा जाए। . बाबा जैसे ही उनके करीब गए वो उठ कर बाबा के चरणों में गिर गया और बोला आप आ गए गुरु देव ! . बाबा ने पुछा ये सब कैसे तु ठीक कैसे हो गया... . शिष्य बोला बाबा आपके ही कहने से किशोरी जी ने मेरे रहने खाने पीने की व्यवस्था की और मुझे ठीक कर भजन करना भी सिखाया। . बाबा अपने शिष्य पर बरसती किशोरी जी की कृपा को देख खुब प्रसन्न हुए और मन ही मन सोचने लगे मेरे कारण मेरी किशोरी जी को कितना कष्ट हुआ। . उन्होंने मेरे शब्दो का मान रखते हुए मेरे शिष्य पर अपनी सारी कृपा उड़ेल दी। . इसलिए कहते है गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते।💗🙏

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Radhe Shivansh Apr 27, 2021

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Radhe Shivansh Apr 24, 2021

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Radhe Shivansh Apr 10, 2021

. "चिड़िया के बच्चे" जब महाभारत का युद्ध प्रारम्भ हो रहा था, इधर से पांड़वो की सेना तैयार थी उधर से कौरवों की सेना तैयार थी। दोनों सेनाएं आपस में टकराने के लिए बिल्कुल तैयार थी तो उस समय युद्ध क्षेत्र बीच में एक चिड़िया के अंडे पड़े हुए थे। उस चिड़िया ने अभी-अभी वो अंडे दिए थे और उसकी आँखों में आँसू थे, वो रो रही थी कि दोनों तरफ से सेनाएं आपस मे टकराएंगी और मेरे ये बच्चे तो संसार में आने से पहले ही खत्म हो जाएंगे। उस चिडिया ने इस दु:ख की घडी मे भगवान से विनती की "हे प्रभु ! जिसकी कोई नहीं सुनता उसकी तो आप सुनते हो।" उस छोटी सी चिड़िया ने भगवान से प्रार्थना की प्रभु अब तो आप ही कुछ कर सकते है और उसी समय युद्ध प्रारम्भ हुआ। दोनों सेनाएं परस्पर टकराई, महा भयंकर युद्ध हुआ। बडे-बडे महारथी युद्ध मे मारे गये। चारों तरफ सैनिकों के लाशों के ढ़ेर थे। महाभारत युद्ध के उपरांत अर्जुन के रथ को लेकर श्रीकृष्ण कुरुक्षेत्र की भूमि से निकलकर जा रहे है, पांडव युद्ध जीत चुके है। भगवान अर्जुन के रथ को लेकर जा रहे है तो नीचे भूमि पर एक रथ का घंटा पड़ा हुआ है। भगवान के हाथ में घोड़ो को हांकने वाला चाबुक है। भगवान ने उस पड़े हुए घंटे पे‌ जोर से चाबुक को मारा तो वो घंटा पलट गया और जैसे ही वो घंटा पलटा तो उसके अंदर से चिड़िया के नन्हे बच्चे फुदकते हुए बाहर निकले और उड़कर वहाँ से चले गए। ये देखकर अर्जुन को बड़ा आश्चर्य हुआ और अर्जुन भगवान से बोले "केशव ! ये मैं क्या देख रहा हूँ ? इतना भीषण युद्ध जो ना पहले कभी हुआ और ना आगे शायद होगा। ऐसा ये भीषण महाभारत युद्ध जिसमे भीष्म पितामह, कर्ण और गुरु द्रौण, जैसे योद्धा नहीं बचे। जिस युद्ध में दुर्योधन जैसे बलशाली नहीं बचे। ऐसे भीषण संग्राम में इन चिड़िया के बच्चों की रक्षा किसने की ?" भगवान मुस्कुराने लगे और बोले "अर्जुन ! अभी भी नहीं समझा ? अरे पगले जिसने तुझे बचाया है, उसने ही तो इनको बचाया है। श्री राधे राधे जी

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Radhe Shivansh Apr 8, 2021

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Radhe Shivansh Apr 8, 2021

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