prakash patel May 15, 2021

🌀 एक्यूप्रेशर 🔑 ट्रीटमेंट अपनाये और After Operation Problem को मिटाये। 💎 After Operation Problems के एक्यूप्रेशर बिंदु शरीर पर कहां कहां स्थित हैं? यह एक्यूप्रेशर बिंदु किस दिशा में दबाव देकर कितनी सेकंड मिनिट लेना चाहिए? एक्यूप्रेशर पॉइंट ट्रीटमेंट की संपूर्ण जानकारी देंगे, ताकि आप एक्यूप्रेशर पॉइंट ट्रीटमेंट खुद ले सकें और स्वस्थ हो सकें। एक्यूप्रेशर पॉइंट ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। 💎 After Operation Problem बिमारी/समस्या के मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार 🌀Acupressure 🔑 Point में बदलाव आसकता है। जानकारी के लिए संपर्क करें। 🏥 AUM HEALTH CARE 🏥 (Acupressure Clinic) 🏥 स्वस्थ & स्लीम होने की दुनियामें आपका स्वागत है। 🏥 👉 દરોજ નવી નવી એક્યુપ્રેશર અને ઘરેલુ ઉપચાર.. માહિતી મેળવવા જોડાવ અમારા ફેસબુક ગ્રુપમાં નીચે આપેલ લિંક દ્વારા.... 🌸 Face Book group 🌸 https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ Acupressure Planet 🏡 स्वास्थ्य मंदिर 👉हर गंभीर बिमारी ऐक्युप्रेशर थेरापीसे मिटाये।

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prakash patel May 15, 2021

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prakash patel May 15, 2021

*पानी से जुड़ी बुरी आदतें आपके लिए बन सकती हैं जहर 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 https://www.facebook.com/groups/367351564605027/permalink/487081792632003/ 🌼〰〰🌼〰〰 पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। कहते हैं शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दिनभर में कम से कम आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। पानी पीना फायदेमंद तो होता ही है लेकिन तब जब सही मात्रा में और सही तरीके से पीया जाए। अगर पानी को गलत तरीके से पीया जाए या गलत समय में अधिक मात्रा में पीया जाए तो वह शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, ऐसा आयुर्वेद में वर्णित है। आयुर्वेद को जीवन का विज्ञान माना जाता है,भोजन से लेकर जीवनशैली तक की चर्चाएं इस शास्त्र में समाहित हैं। आज हम आयुर्वेदिक ग्रन्थ अष्टांग संग्रह (वाग्भट्ट) में बताए गए पानी पीने के कुछ कायदों से आपको रूबरू कराने का प्रयास करते हैं। चलिए जानते हैं पानी कब, कैसे और कितना पीना चाहिए…… 1. भक्तस्यादौ जलं पीतमग्निसादं कृशा अङ्गताम!! खाना खाने से पहले यदि पानी पिया जाए तो यह जल अग्निमांद (पाचन क्रिया का मंद हो जाना) यानी डायजेशन में दिक्कत पैदा करता है।* 💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ 2. अन्ते करोति स्थूल्त्वमूध्र्वएचामाशयात कफम! खाना खाने के बाद पानी पीने से शरीर में भारीपन और आमाशय के ऊपरी भाग में कफ की बढ़ोतरी होती है। सरल शब्दों में कहा जाए तो खाने के तुरंत बाद अधिक मात्रा में पानी पीने से मोटापा बढ़ता है व कफ संबंधी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं। 3. प्रयातिपित्तश्लेष्मत्वम्ज्वरितस्य विशेषत:!! आयुर्वेद के अनुसार बुखार से पीड़ित व्यक्ति प्यास लगने पर ज्यादा मात्रा में पानी पीने से बेहोशी, बदहजमी, अंगों में भारीपन, मितली, सांस व जुकाम जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। 4. आमविष्टबध्यो :कोश्नम निष्पिपासोह्यप्यप: पिबेत! आमदोष के कारण होने वाली समस्याओं जैसे अजीर्ण और कब्ज जैसी स्थितियों में प्यास न लगने पर भी गुनगुना) पानी पीते रहना चाहिए। 5. मध्येमध्यान्ग्तामसाम्यं धातूनाम जरणम सुखम!! खाने के बीच में थोड़ी मात्रा में पानी पीना शरीर के लिए अच्छा होता है। आयुर्वेद के अनुसार खाने के बीच में पानी पीने से शरीर की धातुओं में समानता आती है और खाना बेहतर ढंग से पचता है। 6. अतियोगेसलिलं तृषय्तोपि प्रयोजितम! प्यास लगने पर एकदम ज्यादा मात्रा में पानी पीना भी शरीर के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। ऐसा करने से पित्त और कफ दोष से संबंधित बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। 7. यावत्य: क्लेदयन्त्यन्नमतिक्लेदोह्य ग्निनाशन:!! पानी उतना ही पीना चाहिए जो अन्न का पाचन करने में जरूरी हो, दरअसल अधिक पानी पीने से भी डायजेशन धीमा हो जाता है। इसलिए खाने की मात्रा के अनुसार ही पानी पीना शरीर के लिए उचित रहता है। 8. बिबद्ध : कफ वाताभ्याममुक्तामाशाया बंधन:! 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ *पच्यत* क्षिप्रमाहार:कोष्णतोयद्रवी कृत:!! कफ और वायु के कारण जो भोजन नहीं पचा है उसे शरीर से बाहर कर देता है। गुनगुना पानी उसे आसानी से पचा देता है। (सभी सन्दर्भ सूत्र अष्टांग संग्रह अध्याय 6 के 41-42,33-34 एवं 36-37 से लिए गए हैं) ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये। 👉 https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/

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prakash patel May 15, 2021

💎 गुग्गुल गोंद के उपयोग.... . किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर उसमे से जो स्त्राव निकलता है वह सूखने पर भूरा और कडा हो जाता है उसे गोंद कहते है .यह शीतल और पौष्टिक होता है . उसमे उस पेड़ के ही औषधीय गुण भी होते है . आयुर्वेदिक दवाइयों में गोली या वटी बनाने के लिए भी पावडर की बाइंडिंग के लिए गोंद का इस्तेमाल होता है . 💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ • कीकर या बबूल का गोंद पौष्टिक होता है . • नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है .पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है। • आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है। • सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है। • बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के समकक्ष होती है। • हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है । हींग दो किस्म की होती है - एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में । किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं । इस चीरे लगे स्थान से अगले करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है । इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है । हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है कत्थई पड़ने लगता है ।यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है और वे संक्रमण मुक्त रहती है । पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है और इससे पौधों की वृद्धि बढ़िया होती • गुग्गुल एक बहुवर्षी झाड़ीनुमा वृक्ष है जिसके तने व शाखाओं से गोंद निकलता है, जो सगंध, गाढ़ा तथा अनेक वर्ण वाला होता है. यह जोड़ों के दर्द के निवारण और धुप अगरबत्ती आदि में इस्तेमाल होता है . • प्रपोलीश- यह पौधों द्धारा श्रावित गोंद है जो मधुमक्खियॉं पौधों से इकट्ठा करती है इसका उपयोग डेन्डानसैम्बू बनाने मंच तथा पराबैंगनी किरणों से बचने के रूप में किया जाता है।🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ • ग्वार फली के बीज में ग्लैक्टोमेनन नामक गोंद होता है .ग्वार से प्राप्त गम का उपयोग दूध से बने पदार्थों जैसे आइसक्रीम , पनीर आदि में किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई व्यंजनों में भी इसका प्रयोग किया जाता है.ग्वार के बीजों से बनाया जाने वाला पेस्ट भोजन, औषधीय उपयोग के साथ ही अनेक उद्योगों में भी काम आता है। • इसके अलावा सहजन , बेर , पीपल , अर्जुन आदि पेड़ों के गोंद में उसके औषधीय गुण मौजूद होते है . ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/

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💎 गुग्गुल गोंद के उपयोग.... . किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर उसमे से जो स्त्राव निकलता है वह सूखने पर भूरा और कडा हो जाता है उसे गोंद कहते है .यह शीतल और पौष्टिक होता है . उसमे उस पेड़ के ही औषधीय गुण भी होते है . आयुर्वेदिक दवाइयों में गोली या वटी बनाने के लिए भी पावडर की बाइंडिंग के लिए गोंद का इस्तेमाल होता है . 💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ • कीकर या बबूल का गोंद पौष्टिक होता है . • नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है .पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है। • आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है। • सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है। • बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के समकक्ष होती है। • हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है । हींग दो किस्म की होती है - एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में । किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं । इस चीरे लगे स्थान से अगले करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है । इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है । हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है कत्थई पड़ने लगता है ।यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है और वे संक्रमण मुक्त रहती है । पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है और इससे पौधों की वृद्धि बढ़िया होती • गुग्गुल एक बहुवर्षी झाड़ीनुमा वृक्ष है जिसके तने व शाखाओं से गोंद निकलता है, जो सगंध, गाढ़ा तथा अनेक वर्ण वाला होता है. यह जोड़ों के दर्द के निवारण और धुप अगरबत्ती आदि में इस्तेमाल होता है . • प्रपोलीश- यह पौधों द्धारा श्रावित गोंद है जो मधुमक्खियॉं पौधों से इकट्ठा करती है इसका उपयोग डेन्डानसैम्बू बनाने मंच तथा पराबैंगनी किरणों से बचने के रूप में किया जाता है।🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ • ग्वार फली के बीज में ग्लैक्टोमेनन नामक गोंद होता है .ग्वार से प्राप्त गम का उपयोग दूध से बने पदार्थों जैसे आइसक्रीम , पनीर आदि में किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई व्यंजनों में भी इसका प्रयोग किया जाता है.ग्वार के बीजों से बनाया जाने वाला पेस्ट भोजन, औषधीय उपयोग के साथ ही अनेक उद्योगों में भी काम आता है। • इसके अलावा सहजन , बेर , पीपल , अर्जुन आदि पेड़ों के गोंद में उसके औषधीय गुण मौजूद होते है . ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/

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