PRABHAT KUMAR Apr 19, 2019

🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔 🔔🍁🔔🍁🔔🍁 #जय__माता__दी 🔔🍁🔔🍁🔔🍁 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔 🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟 सभी आदरणीय साथियों को मंगलमय शुभ प्रभात 🙏 🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟⭐🌟 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔 आदिशक्ति का अवतरण सृष्टि के आरंभ में हुआ था। कभी सागर की पुत्री सिंधुजा-लक्ष्मी तो कभी पर्वतराज हिमालय की कन्या अपर्णा-पार्वती। तेज, द्युति, दीप्ति, ज्योति, कांति, प्रभा और चेतना तथा जीवन शक्ति संसार में जहां कहीं भी दिखाई देती है, वहां देवी का ही दर्शन होता है। ऋषियों की विश्व दृष्टि तो सर्वत्र विश्वरूपा देवी को ही देखती है, इसलिए माता दुर्गा ही महाकाली महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में प्रकट होती है। 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔 श्रीमद्भागवत में लिखा है कि देवी ही भगवान ब्रह्मा भगवान विष्णु और भगवान महेश का रूप धर संसार का पालन और संहार करती हैं। देवी सारी सृष्टि को उत्पन्न तथा नाश करने वाली परम शक्ति है। देवी ही पुण्यात्माओं की समृद्धि एवं पापाचारियों की दरिद्रता है। जगन्माता दुर्गा सुकृती मनुष्यों के घर संपत्ति, पापियों के घर में दुर्बुद्धिरूपी अलक्ष्मी, विद्वानों के हृदय में बुद्धि व विद्या, सज्जनों में श्रद्धा व भक्ति तथा कुलीन महिलाओं में लज्जा एवं मर्यादा के रूप में निवास करती है। 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔 मार्कंडेयपुराण कहता है कि ‘हे देवि! तुम सारे वेद-शास्त्रों का सार हो। संसाररूपी महासागर को पार कराने वाली नौका तुम हो। भगवान विष्णु के हृदय में निरंतर निवास करने वाली माता लक्ष्मी तथा शशिशेखर भगवान शंकर की महिमा बढ़ाने वाली माता गौरी भी तुम ही हो।’ 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔 विंध्यवासिनी धाम प्रमुख शक्तिपीठों में एक है। मार्कंडेय पुराण में वर्णित देवी महात्म्य में कहा गया है कि जब देव-असुर संग्राम हुआ और देवता राक्षसों से पराजित होने लगे तो वे भगवान विष्णु के पास शरणागत हुए। तब भगवान विष्णु सर्वप्रथम अपने तेज को स्वयं से अलग करते हैं, फिर सभी देवता अपना-अपना तेज भाग देते हैं और उसी से आद्यशक्ति मां प्रकट होती हैं। दार्शनिक रूप से इसे काल (समय) के अग्नि रूप में प्रदर्शित किया गया। उसका वर्ण काला, किंतु सिंदूर से आवेष्ठित है और उससे किरणें निकलती रहती हैं । वह सभी प्राणियों की स्वामिनी हैं। ब्रह्मा, विष्णु, देवतागण, दैत्य, पशु-पक्षी एवं संपूर्ण चर-अचर जगत उन्हीं के प्रभाव से संचालित होते हैं। 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔 मुख्य रूप से चामुंडा संहार और विनाश की अधिष्ठात्री देवी हैं. आद्यशक्ति सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। उन्हें ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के रूप में कार्य करने वाली महाशक्ति कहा गया है और त्रिदेवों की स्त्री शक्ति के रूप में भी स्मरण किया जाता है। देवी पुराण में यही शक्ति दुर्गा, उमा, शिवा देवी, ब्राह्मणी, विंध्यवासिनी, चामुंडा, शक्ति, पराशक्ति, गौरी, कात्यायनी, कौशिकी, पार्वती, नारायणी, मीना, धूमा, अंबिका, लक्ष्मी, चंडी, कपालिनी, काली, महिषासुर मर्दनी, नंदा, भवानी, तारा, वैष्णवी, महालक्ष्मी, श्वेता एवं योगेश्वरी आदि सैकड़ों नामों से जानी जाती है। सभी देवियों की मूल प्रकृति, कार्य एवं महत्व एक हैं। विंध्याचल पर्वत के मस्तक पर विराजमान होने के कारण यही आद्यशक्ति विंध्यवासिनी देवी के रूप में प्रसिद्ध हुईं। यह लोकहित के लिए विंध्य क्षेत्र में महासरस्वती, महाकाली एवं महालक्ष्मी का रूप धारण करती हैं। यद्यपि बाबा भोलेनाथ को काशी बहुत प्रिय है, परंतु शक्ति की उपस्थिति के कारण विंध्य क्षेत्र भी उन्हें उतना ही प्रिय है। इसी कारण इसे छोटी काशी कहा जाता है। 🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔🍁🔔 #नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से ली गई है 📰📰📰 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰

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PRABHAT KUMAR Apr 18, 2019

🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 🌻🅾️Ⓜ️🌻 #ऊँ_भगवते_वासुदेवाय_नमः 🌻🅾️Ⓜ️🌻 🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 #सभी_आदरणीय_साथियों_को_नमस्कार_शुभ_प्रभात 🙏 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 धर्मिक ग्रंथों व शास्त्रों में एेेसी कई कथाएं दी गई हैं, जिनसे हमें प्रभु की महिमा व उनके द्वारा अपने भक्तों को दिए गए वरदानों आदि के बारे में पता लगता है। तो आईए आज हम आपको एेसी ही एक कथा के बारे में बताएं जो भगवान विष्णु व शकंर के बारे में है। जिसमें विष्णु भगवान ने शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अपना नेत्रदान कर दिया था। परंतु एेसा क्या हुआ था जो भगवान विष्णु को शिव शंकर को अपने नेत्र अर्पित करने पड़े थे, इसके बारे में शायद ही किसी को पता होगा। 🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 #पौराणिक_कथा 🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 सनातन धर्म में भगवान विष्णु को संसार का पालनहार माना जाता है। भगवान विष्णु को सनातन धर्म के तीन प्रमुख ईश्वरीय रूपों "ब्रह्मा, विष्णु, महेश" में से एक रूप माना जाता है तथा भगवान विष्णु ही नारायण, हरि पालक और स्वयं श्रीभगवान हैं। सनातन धर्म के दार्शनिक खंड अनुसार भगवान नारायण के हर चित्र व मूर्ति में उन्हें सुदर्शन चक्र धारण किए दिखाया जाता है। 🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 क्या आप जानते हैं कि यह सुदर्शन चक्र उन्हें स्वयं परमेश्वर शिव ने जगत कल्याण हेतु दिया था। परमेश्वर शिव द्वारा श्रीहरि को वरदान स्वरुप सुदर्शन चक्र देने के पीछे पुराणों में एक वृतांत आता है। शास्त्रानुसार एक बार जब दैत्यों के अत्याचार बहुत बढ़ गए तब सभी देवगण श्रीहरि के पास आए। देवगणों के समस्या समाधान हेतु भगवान विष्णु ने शिवधाम कैलाश जाकर शिवशंकर से प्रार्थना की। 🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 परमेश्वर शिव को प्रसन्न करने हेतु भगवान श्रीहरि ने शिवसहस्त्रनामावली से परमेश्वर की उपासना की अर्थात हजार नामों से भगवान शंकर की स्तुति की। भगवान विष्णु ने शिवशंकर के प्रत्येक नाम के उच्चारण के साथ एक कमल का फूल परमेश्वर शिव को अर्पित किया। तब परमेश्वर शिव ने श्रीहरि की परीक्षा लेने के लिए उनके द्वारा लाए एक हजार कमल में से एक कमल का फूल विलुप्त कर दिया । भगवान विष्णु परमेश्वर शिव की माया से अनजान रहे तथा इस बात का पता न लगा सके कि एक फूल आखिर गया कहां। क्योंकि ये तो देवों के देव महादेव कि महामाया थी जिससे स्वयं श्रीभगवान भी न बच पाए। 🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 परंतु विष्णु तो सर्वोत्तम परम शिवभक्त थे। अतः एक फूल कम पाकर भगवान विष्णु उसे ढूंढ़ने का प्रयास करने लगे परंतु उन्हें फूल नहीं मिला। तब परम शिवभक्त श्रीहरि विष्णु ने एक फूल की पूर्ति हेतु अपना एक नेत्र निकालकर परमेश्वर शिव को अर्पित कर दिया। श्रीहरि विष्णु की अटल भक्ति देखकर परमेश्वर शिवशंकर अतिप्रसन्न हुए तथा विष्णु के समक्ष प्रकट होकर भगवान विष्णु को नए नाम "कमलनयन" से पुकारा तथा उनसे वरदान मांगने के लिए कहा। 🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 तब श्रीहरि ने भगवान शंकर से एक ऐसे अजेय शस्त्र का वरदान मांगा जिसकी सहायता से वे देवगणों को दैत्यों के प्रकोप से मुक्त कर सकें। फलस्वरूप परमेश्वर शिव ने विष्णु को अपना सुदर्शन चक्र दिया। श्रीनारायण ने उसी सुदर्शन चक्र से असुरों का संहार किया। इस प्रकार सुरों को असुरों से मुक्ति मिली तथा शिवस्वरूप सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु के साथ सदैव शिव की माया के रूप में जुड गया। 🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻🅾️Ⓜ️🌻 #नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से ली गई है 📰📰📰 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰

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PRABHAT KUMAR Apr 17, 2019

🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🍁🍁🍁🍁🍁 *#ऊँ__गं__गणपते__नमः* 🍁🍁🍁🍁🍁 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_मंगलमय_शुभ_प्रभात* 🙏 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *भगवान गणेश स्वयं रिद्धि-सिद्धि के दाता और शुभ-लाभ के प्रदाता हैं। वे भक्तों की बाधा, संकट, रोग-दोष तथा दरिद्रता को दूर करते हैं। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि श्री गणेश जी विशेष पूजा का दिन बुधवार है। इस दिन भगवान की पूजा सच्चें मन से करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। साथ ही अगर आपकी कुंडली में बुध ग्रह अशुभ स्थिति में है तो इस दिन पूजा करने से वह भी शांत हो जाता है। इसके अलावा मिथुन व कन्या राशि(जन्मकुंडली के अनुसार) वाले जातकों के स्वामी बुध होते हैं और और बुध के देवता श्री गणेश है, अत: इस राशि वाले जातकों को भी हमेशा श्री गणेश की पूजा करते रहना चाहिए।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *हर दिन सुबह स्नान पूजा करके गणेश जी को गिन कर पांच दूर्वा ( एक तरह की हरी घास) अर्पित करें। दुर्वा गणेश जी के मस्तक पर रखना चाहिए। चरणों में दुर्वा नहीं रखें।दुर्वा अर्पित करते हुए मंत्र बोलें #'इदं_दुर्वादलं_ऊं_गं_गणपतये_नमः'* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *शास्त्रों में के अनुसार शमी ही एक मात्र पौधा है जिसकी पूजा से गणेश जी और शनि दोनों प्रसन्न होते हैं। ऐसे माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी रावण पर विजय पाने के लिए शमी की पूजा की थी।शमी गणेश जी को अत्यंत प्रिय है। शमी के कुछ पत्ते नियमित गणेश जी को अर्पित करें तो घर में धन एवं सुख की वृद्घि होती है।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए पवित्र चावल अर्पित करें। पवित्र चावल उसे कहा जाता है जो टूटा हुआ नहीं हो। उबले हुए धान से तैयार चावल का पूजा में प्रयोग नहीं करें।सूखा चावल गणेश जी को नहीं चढ़ाएं। चावल का गीला करें फिर, #'इदं_अक्षतम्_ऊं_गं_गणपतये_नमः' मंत्र बोलते हुए तीन बार गणेश जी को चावल चढ़ाएं।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *सिंदूर की लाली गणेश जी को बहुत पसंद है। गणेश जी की प्रसन्नता के लिए लाल सिंदूर का तिलक लगाएं। गणेश जी को तिलक लगाने के बाद अपने माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं। इससे गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है।इससे आर्थिक क्षेत्र में आने वाली परेशानी और विघ्न से गणेश जी रक्षा करते हैं। गणेश जी को सिंदूर चढ़ाते समय मंत्र बोलें, #'सिन्दूरं_शोभनं_रक्तं_सौभाग्यं_सुखवर्धनम्_शुभदं_कामदं_चैव_सिन्दूरं_प्रतिगृह्यताम्_ओम_गं_गणपतये_नमः'* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *गणेश जी का एक दांत परशुराम जी से युद्ध में टूट गया था। इससे अन्य चीजों को खाने में गणेश जी को तकलीफ होती है, क्योंकि उन्हें चबाना पड़ता है।मोदक काफी मुलायम होता है जिससे इसे चबाना नहीं पड़ता है। यह मुंह में जाते ही घुल जाता है। इसलिए गणेश जी को मोदक बहुत ही प्रिय है।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *गणपति बप्पा की पूजा में तुलसी का प्रयोग न करें, तुलसी को इनकी पूजा में निषिद्ध बताया गया है।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰

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PRABHAT KUMAR Apr 16, 2019

♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ ♻️♻️ #जय_श्री_राम__जय__जय__महावीर__हनुमान ♻️♻️ ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ 🙏 #सभी_आदरणीय_साथियों_को_मंगलमय_शुभ_दिवस 🙏 ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ हनुमान जी के कई नाम हैं जिनमें बजरंगबली, महावीर, केसरी नंदन और संकट मोचन नाम काफी लोकप्रिय है। यह नाम हनुमान जी को उनके गुण और कर्मों के कारण प्राप्त हुए हैं। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ हनुमान जी के अंग बज्र के समान हैं इसलिए यह बजरंगबली कहलाते हैं। इनसे बड़ा कोई वीर नहीं है इसलिए यह महावीर कहलाते हैं। केसरी के पुत्र होने के कारण यह केसरी नंदन और भक्तों के हर संकट दूर करने वाले हैं इसलिए संकट मोचन कहलाते हैं। हनुमान चालिसा में कहा भी गया है कि ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ #को_नहिं_जानत_है_जग_में_कपि_संकट_मोचन_नाम_तिहारो' ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ हनुमान जी न केवल भक्तों के संकटहर्ता हैं बल्कि इन्होंने अपने प्रभु श्री राम को भी कई बार संकट से निकाला है। इसलिए राम जी ने हनुमान जी को संकट मोचन नाम दिया है और सृष्टि के अंत तक पृथ्वी पर रह कर मनुष्य को संकट से निकालने का आशीर्वाद दिया है। तो आइये देखें हनुमान जी ने कब कब भगवान श्रीराम जी को संकट से निकाला। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ #जब_पहली_बार_हनुमान_जी_भगवान_श्री_राम_जी_के_संकट_मोचक_बने ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ सीता हरण के बाद राम और लक्ष्मण जब सीता की तलाश में भटकर रहे थे इसी क्रम में राम और हनुमान जी की मुलाकात हुई। इसके बाद से हनुमान जी ने कई बार राम जी को संकट से निकाला। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ सबसे पहले तो हनुमान जी ने अपने प्रभु श्री राम जी की मित्रता सुग्रीव से करवाकर राम जी को एक बड़ी वानर सेना का साथ दिला दिया। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ इसी सेना की मदद से राम जी ने सीता की तलाश की और रावण को युद्घ में पराजित करने में सफल हुए। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ #हनुमान_जी_ने_दूर_की_भगवान_श्री_राम_जी_की_यह_चिंता ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ हनुमान जी ने दूसरी बार रामचंद्र जी को उस समय संकट से निकाला जब सब तरफ से राम जी निराश हो रहे थे और सीता का पता नहीं चल पा रहा था। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ ऐसे समय में हनुमान जी ने समुद्र पार करके यह पता लगाया कि सीता का हरण करके रावण लंका ले गया और देवी सीता रावण की अशोक वाटिका में राम के आने का इंतजार कर रही है। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ हनुमान जी से प्राप्त सूचना के बाद ही राम जी अपनी सेना लेकर लंका की ओर चले थे। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ #जब_प्राण_पर_आए_संकट_हनुमान_बने_संकट_मोचक ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ तीसरी बार हनुमान जी ने राम जी को तब संकट से निकाला जब शक्ति बाण से मूर्च्छित हुए लक्ष्मण जी के प्राण संकट में आ गए। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ ऐसे समय में सुषेण नाम के वैद्य के कहने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आए। इस बूटी के प्रयोग से लक्ष्मण जी के प्राण बचे। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ नाग पाश में जब राम लक्ष्मण बंधे थे उस समय भी हनुमान जी ने राम गरूड़ को बुलाकर राम जी के संकट दूर किए थे। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ #होने_वाली_थी_राम_लक्ष्मण_की_बलि_हनुमान_बने_संकट_मोचक ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ रावण की मृत्यु के बाद अपने भाई का बदला लेने के लिए अहिरावण ने नींद में राम लक्ष्मण का हरण कर लिया। जब हनुमान जी को यह बात मालूम हुई तो वह अहिरावण की खोज में चल पड़े। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ राम लक्ष्मण को ढूंढते हुए हनुमान जी पाताल में पहुंचे। इन्होंने देखा कि अहिरावण देवी की पूजा कर रहा है और राम लक्ष्मण की बलि देने वाला है।* ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ ऐसे संकट के समय में हनुमान जी ने अहिरावण का अंत करके राम लक्ष्मण के प्राण बचाए। ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️ #नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 ( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। ) ♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️♻️

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