Neha G Feb 11, 2020

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Neha G Feb 6, 2020

स्वस्थ और निरोगी जीवन ? *हमारी दैनिक दिनचर्या* ? हम सभी एक नए वायरस का सामना करने जा रहे कोरोना वायरस जिसका कोई वेक्सीन नही है इलाज नही है । सावधानियां है हाथ अच्छे से दिनभर धोएं(साबुन, डेटॉल) और धोकर ही मुह, आँख, नाक आदि का स्पर्श करें ।किसी बीमार व्यक्ति के सम्पर्क में आने से बचे । गत कुछ वर्षों से हम देख रहे है मेडिकल फील्ड में नित नए वायरस का आगमन और अटेक हो रहा है । ऐसा आज से नही प्राचीनकाल से चला आ रहा है जब बीमारियों के कारण गाव के गाँव खत्म हो जाते थे लोग गाव छोड़ देते थे । आपने देखा होगा कि कुछ लोग आजीवन स्वस्थ रहते है और कुछ सदैव बीमार ।ऐसा उस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है ।हर व्यक्ति की प्रकृति अलग अलग होती है । आयुर्वेद ने इसे वात कफ और पित्त के रूप में बताया है और उसी अनुसार रोग के प्रकार और लक्षण होते है । रोगों का शरीर पर आक्रमण और उससे बचाव इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी रोग प्रतिक्रमण क्षमता केसी है । हमे अपने शरीर मे रोगों से लड़ने की शक्ति पैदा करनी होगी । यह क्षमता एक दिन में विकसित नही की जा सकती इसके लिए जरूरत है हम नियमित अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे । *स्वस्थ रहने के लिए क्या करे* ? *आहार* (1) अपने जीवन को स्वयं एक प्रयोगशाला बनाये और जाने क्या आपके लिए लाभदायक है ।यह जरूरी नही की जो दूसरों के लिए लाभदायक है वह आपके लिए भी उपयोगी हो । (2) पाचन क्रिया पर पूर्ण ध्यान देवे ।शरीर को कभी भी कब्ज का शिकार न होने दे ।वे ही खाद्य वस्तुए अपने मीनू में शामिल करें जो आपके पाचन में सहयोगी हो ।अनेक लोग अपने जीवन को चूजी बना लेते है और खाने के मामले में दुखी हो जाते है । आप आज से ही अपनी सोच को बदले मुझे वही खाना है जो मेरे लिए हितकर है आप देखेंगे कि कुछ ही समय मे आप को जो चीजे अच्छी नही लगती थी वे प्रिय लगने लगी है । (3) अपने भोजन में आयुर्वेद अनुसार सभी 6 रसों का समावेश करे - कटु(कड़वा)(प्याज, लहसन,, अदरक,नीम, ), , तिक्त(तीखा)(मिर्च, करेला,हल्दी, काफी) मीठा, नमकीन(लवण), कसाय(जामुन, आंवला) , खट्टा(अम्ल) । (4) मौसम के अनुसार उँगने वाली सभी सब्जियों और फलो का भरपूर उपयोग करे ।और वे स्थानीय हो। याने जरूरी यह नही की मंहगे फल ही लाभदायक है बस वे ताजे हो और केमिकल रहित हो इसका ध्यान रखे ।सब्जी, फलो को(वाश) धोकर ही उपयोग करे । (5) अनाज का प्रयोग सीमित करे और विभिन्न अनाजो को समय समय पर अपने भोजन में शामिल करे ।मधुमेह के रोगियों के लिए जो और चना का आटा उपयोगी है । आपके भोजन में अनाज की मात्रा एक चौथाई हो ।आधा हिस्सा सलाद और शेष सब्जियों का हो ।सलाद का सेवन भोजन से पूर्व करे । (6) आहार में समय का ध्यान रखे प्रातः काल नाश्ता जिसमे आप फल और कच्ची सब्जियों सलाद आदि को प्राथमिकता दे ।अंकुरित अनाज लाभदायक है ।इसमे आप हरे धनिये , प्याज, लहसन आदि को भी शामिल करें ।दोपहर का भरपेट भोजन ले और रात्रि भोजन अल्प और सुपाच्य ले यह सोने से 3 घण्टे पूर्व ले ले । (7) तुलसी, अदरक, कड़ी पत्ता, पुदिना, हरा धनिया आदि का समय समय पर नियमित सेवन करे ।ये अल्कलाइन है ।अम्रत है । (8) फिल्टर तेल का प्रयोग करे रिफाइंड तो बिल्कुल ही बंद कर देवे ।और हो सके तो किचन में तेल की मात्रा बिल्कुल कम कर दे ।हमारे देश मे मुगफली का उत्पादन केवल 2 प्रतिशत है आप समझ सकते है हम सब मिलावटी तेल का प्रयोग कर रहे है जिसे केमिकल द्वारा साफ कर खाने योग्य बनाया जा रहा है । (9) शकर, मैदा और नमक के उपयोग में सावधानी जरूरी है ।सेंधा नमक का उपयोग करे ।शकर को बनाने में प्रयुक्त केमिकल आपको नुकसान पहुचा रहा है ।इसी प्रकार आयोडीन युक्त समुद्री नमक नुकसान पहुँचा रहा है । *आओ हम योग व्यायाम विहार पर चर्चा करे* (10) यह सिद्ध हो चुका है कि योग से अनेक प्रकार के रोगों का समाधान हो रहा है ।किंतु योग में जरूरी नही की हम कठिन योगों का प्रयोग करे ।सामान्य और जरूरी योग को अपने जीवन मे अपनाए ।जरूरी यह है कि आप योग को सीखे।कैसे और कब करे ।भोजन के बाद तो कभी न करे । प्रातः खाली पेट या शाम को भोजन के एक घण्टे पूर्व ।भोजन के 3 से 4 घण्टे बाद । (11) वाक को अपने जीवन मे शामिल करें रोज 4 से 5 किलोमीटर वाक जरूरी है ।इसमें मौसम का ध्यान रखे । ज्यादा ठंड मे सूर्योदय पर ही निकले । (12) विभिन्न प्रकार के एक्सरसाइज , जिम को भी आप अपना सकते है ।नृत्य भी एक प्रकार से व्यायाम ही है । कुल मिलाकर 40 मिनिट का समय योग, वाक या एक्सरसाइज दैनिक जीवन मे जरूरी है । *मॉनसिक तनाव, निंद्रा और मेडिटेशन* (13) भरपूर नींद जरूरी है ।6 घण्टे कम से कम रात्रि में आवश्यक है । (14) मॉनसिक तनाव अनेक रोगों का कारण बन चुका है डाइबिटीज और केंसर जैसे रोगों में भी तनाव का कही न कही बहुत योगदान है ।तनाव को टाले ।अच्छा करने की कोशिश करे ।कर्म प्रधान बने बाकी सब भाग्य पर छोड़े ।आप श्रेष्ठ कर्म से भले ही भाग्य न बदल सके किन्तु उसकी दिशा जरूर बदल देंगे ।बस एक संकल्प ले किसी भी समस्या या विवाद का निर्णय तुरन्त नही लेंगे कुछ पल रुके, स्थान बदले, चिंतन करे फिर निर्णय ले । (15) कम से कम 10 मिनिट अपने प्रभु, ईश्वर , आराध्य का स्मरण प्रतिदिन करे । *संगीत, प्रकृति और पर्यावरण* (16) आपका जीवन पूर्णतः ऑक्सीजन पर निर्भर है ।सुबह अपने बन्द घरो के दरवाजे खोल दे जिससे घर मे शुद्ध वायु का प्रवेश हो ।वो सभी प्रयास करे जिससे आपको ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन मिले आपके शरीर मे जितनी ज्यादा और अच्छी ऑक्सीजन रहेगी उतने ही आप निरोगी रहेंगे । (17) प्रकृति के जितने आप करीब रहेंगे उतने ही ज्यादा स्वस्थ रहेंगे ।भौतिक संसाधन केवल सुख दे सकते है दीर्घ जीवन नही (18) संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाये यह आपके तनाव को दूर करने और अनेक रोगों में भी लाभदायक है । *पेय जल* (19) जल के चयन में सावधानी रखें ।जल उतना हमेशा पिये जितना आपके शरीर के लिए जरूरी है ।कभी भी किसी पैमाने पर न जाये हर व्यक्ति की प्रकृति अलग अलग है ।जरूरत अनुसार ज्यादा से ज्यादा जल का ग्रहण करे । (20) भोजन के 30 से 40 मिनिट बाद ही पर्याप्त जल का सेवन करे ऐसा ही भोजन के पूर्व कर सकते है । (21) आर ओ वाटर से बचे। 500 टी डी एस तक का जल ले सकते है आर ओ का जल 50 टी डी एस के लगभग या कम होता है यह मिनरल रहित या कम मिनरल है । (22) आपका जल 7 पी एच का हो यह एक आदर्श मापदण्ड है ।इससे कम का एसिडिक और अधिक का जल अल्कलाइन होता है ।अल्कलाइन जल के सेवन से अनेक रोगों में लाभ मिलता है ।किंतु अधिक अल्कलाइन जल भी न ले । *मोटापा* (24) मोटापा को कभी अपने जीवन पर हावी न होने दे ।यह अनेक रोगों की जड़ है । (25) ब्लड प्रेशर और ब्लड सुगर की जांच समय समय पर कराते रहे ।युवाओ के लिए भी यह जरूरी है । *जीवनशैली* (26) बचपन से ही उक्त टिप्स का पालन जरूरी है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी हो ।आजकल बच्चे और युवक अनेक रोगों का शिकार हो रहे है कारण है उनमें रोगों से लड़ने की ताकत ही विकसित नही हो पाती ।

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Neha G Feb 4, 2020

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Neha G Jan 30, 2020

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