smt neelam sharma Dec 2, 2021

🌹🌹🌹 *भगवान के नाम की महिमा*🌹🌹🌹 एक अनपढ़(गँवार) आदमी एक महात्मा जी के पास जाकर बोला ‘‘महाराज ! हमको कोई सीधा-साधा नाम बता दो, हमें भगवान का नाम लेना है। महात्माजी ने कहा- तुम ‘अघमोचन-अघमोचन’ ("अघ" माने पाप, "मोचन" माने छुड़ाने वाला) नाम लिया करो ।’’ अब वह बेचारा गाँव का गँवार आदमी "अघमोचन-अघमोचन" करता हुआ चला तो पर गाँव जाते-जाते "अ" भूल गया। वह 'घमोचन-घमोचन" बोलने लगा। एक दिन वह हल जोत रहा था और "घमोचन-घमोचन" कर रहा था, उधर वैकुंठ लोक में भगवान भोजन करने बैठे ही थे कि घमोचन नाम का उच्चारण सुन उनको हँसी आ गयी। लक्ष्मीजी ने पूछा-‘प्रभू! आप क्यों हँस रहे हो ? भगवान बोले- आज हमारा भक्त एक ऐसा नाम ले रहा है कि वैसा नाम तो किसी शास्त्र में है ही नहीं। उसी को सुनकर मुझे हँसी आ गयी है। ‘‘लक्ष्मी जी बोली- प्रभू! तब तो हम उसको देखेंगे और सुनेंगेे कि वह कैसा भक्त है और कौन-सा नाम ले रहा है।’’ लक्ष्मी-नारायण दोनों उसी खेत के पास पहुँच गए जहाँ वह हल जोतते हुए "घमोचन-घमोचन" का जप कर रहा था । पास में एक गड्ढा था भगवान स्वयं तो वहाँ छिप गये और लक्ष्मीजी भक्त के पास जाकर पूछने लगीं- ‘‘अरे, तू यह क्या घमोचन-घमोचन बोले जा रहा है ?’’ उन्होंने एक बार, दो बार, तीन बार पूछा परंतु उसने कुछ उत्तर ही नही दिया। उसने सोचा कि इसको बताने में हमारा नाम-जप छूट जायेगा। अतः वह "घमोचन-घमोचन" करते रहा, बोला ही नहीं। जब बार-बार लक्ष्मी जी पूछती रहीं तो अंत में उसको आया गुस्सा, गाँव का आदमी तो था ही, बोला : ‘‘जा ! तेरे भरतार (पति) का नाम ले रहा हूँ क्या कराेगी ।’’ अब तो लक्ष्मी जी डर गयी ,कि यह तो हमको पहचान गया। फिर बोलीं- ‘‘अरे, तू मेरे भरतार (पति) को जानता है क्या? कहाँ है मेरा भरतार?’’ एक बार, दो बार, तीन बार पूछने पर वह फिर झुँझलाकर बोला ‘‘वहाँ गड्ढे में है, जाना है तुझे भी उस गड्ढे मे..??? लक्ष्मी जी समझ गयीं कि इसने हमको पक्का पहचान लिया बोली प्रभू! बाहर आ जाओ अब छिपने से कोई फायदा नही है... ...और तब भगवान उसी गड्ढे से बाहर निकल कर वहाँ आ गये और बोले ‘‘लक्ष्मी ! देख लिया, 'मेरे नाम की महिमा' ! यह अघमोचन और घमोचन का भेद भले ही न समझता हो लेकिन यह जप तो हमारा ही कर रहा था। हम तो समझते हैं... यह घमोचन नाम से हमको ही पुकार रहा था। जिसके कारण मुझे इसको दर्शन देना पड़ा। भगवान ने भक्त को दर्शन देकर कृतार्थ किया कोई भी भक्त शुद्ध-अशुद्ध, टूटे- फूटे शब्दों से अथवा गुस्से में भी कैसे भी भगवान का नाम लेता है तब भी भगवान का ह्रदय उससे मिलने को लालायित हो उठता है और खुद को भक्त से मिलने को रोक नहीं पाता है । 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 *🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼* *शुभ बृहस्पतिवार जय गुरुदेव नमः: *🌻जय श्री हरि🌻*

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smt neelam sharma Nov 30, 2021

┉┅━━━━━━━━━━━━━━━┅┉    *❀꧁ω#जय_श्री_हनुमानω꧂❀*              शुभ दिवस अभिनंदन जो खेल गये प्राणो पे, श्री राम के लिए, एक बार तो हाथ उठालो, मेरे हनुमान के लिए । एक बार तो हाथ उठालो, मेरे हनुमान के लिए । सागर को लांग के इसने, सीता का पता लगाया, प्रभु राम नाम का डंका, लंका में जाके बजाया , माता अंजनी की ऐसी, संतान के लिए । ॥ एक बार तो हाथ उठालो…॥ लक्षमण को बचाने की जब, सारी आशाये टूटी, ये पवन वेग से जाकर, लाये संजीवन बूटी, पर्वत को उठाने वाले, बलवान के लिए । ॥ एक बार तो हाथ उठालो…॥ विभीषण जब इनकी भक्ति पर, जब प्रश्न आज उठाया तो चीर के सीना अपना, श्री राम का दरश कराया इन परम भक्त हनुमान, माता अंजनी के संतान के लिए । ॥ एक बार तो हाथ उठालो…॥ सालासर में भक्तो की, ये पूरी करे मुरादे, मेहंदीपुर ये सोनू. दुखियो के दुखारे काटे, दुनिया से निराले इसके, दोनों धाम के लिए । ॥ एक बार तो हाथ उठालो…॥     *❀꧁ω#जय_श्री_हनुमानω꧂❀* ┉┅━━━━━━━━━━━━━━━┅┉

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smt neelam sharma Nov 29, 2021

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 . *"प्रिया-प्रियतम की लीला"* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 एक बार राधाजी के मन में कृष्ण दर्शन की बड़ी लालसा थी, ये सोचकर महलन की अटारी पर चढ़ गईं और खिडकी से बाहर देखने लगीं कि शायद श्यामसुन्दर यहीं से आज गईया लेकर निकलें। (अब हमारी प्यारी जू के ह्रदय में कोई बात आये और लाला उसे पूरा न करें ऐसा तो हो ही नहीं सकता।) जब राधा रानी जी के मन के भाव श्याम सुन्दर ने जाने तो आज उन्होंने सोचा क्या क्यों न साकरीखोर से (जो कि लाडली जी के महलन से होकर जाता है) होते हुए जाएँ, अब यहाँ महलन की अटारी पे लाडली जी खड़ी थीं। तब उनकी मईया कीर्ति रानी उनके पास आईं और बोली- "अरी राधा बेटी ! देख अब तू बड़ी है गई है, कल को दूसरे घर ब्याह के जायेगी, तो सासरे वारे काह कहेंगे, जा लाली से तो कछु नाय बने है, बेटी कुछ नहीं तो दही बिलोना तो सीख ले।" अब लाडली जी ने जब सुना तो अब अटारी से उतरकर दही बिलोने बैठ गईं, पर चित्त तो प्यारे में लगा है। लाडली जी खाली मथानी चला रही हैं, घड़े में दही नहीं है इस बात का उन्हें ध्यान ही नहीं है, बस बिलोती जा रही हैं। उधर श्याम सुन्दर नख से शिख तक राधारानी के इस रूप का दर्शन कर रहे हैं, बिल्वमंगल जी ने इस झाँकी का बड़ा सुन्दर चित्रण किया है। *👣श्री राधा चरण 👣* ¸.•*""*•.¸  *Զเधे Զเधे .......*  लाला गईया चराके लौट तो आये हैं पर लाला भी प्यारी जू के ध्यान में खोये हुए हैं, और उनका मुखकमल पके हुए बेर के समान पीला हो गया है। पीला इसलिए हो गया है, क्योंकि राधा रानी गोरी हैं और उनके श्रीअंग की काँति सुवर्ण के समान है, इसलिए उनका ध्यान करते-करते लाला का मुख भी उनके ही समान पीला हो गया है। इधर जब एक सखी ने देखा कि राधा जी ऐसे दही बिलो रही हैं, तो वह झट कीर्ति मईया के पास गई और बोली मईया जरा देखो, राधा बिना दही के माखन निकाल रही है, अब कीर्ति जी ने जैसे ही देखा तो क्या देखती हैं, श्रीजी का वैभव देखो, मटकी के ऊपर माखन प्रकट है। सच है लाडली जी क्या नहीं कर सकतीं, उनके के लिए फिर बिना दही के माखन निकलना कौन सी बड़ी बात है। इधर लाला भी खोये हुए है नन्द बाबा बोले लाला- जाकर गईया को दुह लो। अब लाला पैर बाँधने की रस्सी लेकर गौ शाला की ओर चले है, गईया के पास तो नहीं गए वृषभ (सांड) के पास जाकर उसके पैर बाँध दिए और दोहनी लगाकर दूध दुहने लगे। अब बाबा ने जब देखा तो बाबा का तो वात्सल्य भाव है बाबा बोले- देखो मेरो लाला कितनो भोरो है, इत्ते दिना गईया चराते है गए, पर जा कू इत्तो भी नाय पता है, कि गौ को दुहो जात है कि वृषभ को, मेरो लाल बडो भोरो है। और जब बाबा ने पास आकर देखा तो दोहनी दूध से लबालब भरी है, बाबा देखते ही रह गए, सच है हमारे लाला क्या नहीं कर सकते, वे चाहे गईया तो गईया, वृषभ को भी दुह सकते हैं। *"जय जय श्री राधे"*

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