Smt Neelam Sharma May 14, 2021

*🔱॥ ॐ श्रीमहादेव्यै नमः ॥🔱* *🔥श्री महामाई वंदना 🔥* *🔥प्रातः स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहार-भूषाम् दिव्यायुधैर्जितसुनील-सहस्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् 🔥* *🔥भावार्थः शरद् कालीन चन्द्रमा के समान उज्ज्वल आभावाली, उत्तम रत्नों से जड़ित मकरकुण्डलों तथा हारों से सुशोभित, दिव्यायुधों से दीप्त सुन्दर नीले हजारों हाथों वाली, लाल कमल की आभायुक्त चरणों वाली परम ईशरूपिणी भगवती दुर्गा देवी का मैं प्रातः काल स्मरण करता हूँ🔥* 🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊 *आपका आज का दिवस शुभ एवं मंगलमय हो, श्री भगवती देवी माँ , आपकी समस्त कामनाओं की पूर्ति करें, 🌹🙏जय माता दी🙏🌹

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Smt Neelam Sharma May 13, 2021

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 तुलसीदास जी जब “रामचरितमानस” लिख रहे थे, तो उन्होंने एक चौपाई लिखी :-- *सिय राम मय सब जग जानी।* *करहु प्रणाम जोरी जुग पानी।।* *अर्थात :-* पूरे संसार में श्री राम का निवास है, सब में भगवान हैं और हमें उनको हाथ जोड़कर प्रणाम कर लेना चाहिए। चौपाई लिखने के बाद तुलसीदास जी विश्राम करने अपने घर की ओर चल दिए। रास्ते में जाते हुए उन्हें एक लड़का मिला और बोला -- अरे महात्मा जी, इस रास्ते से मत जाइये, आगे एक बैल गुस्से में लोगों को मारता हुआ घूम रहा है। और आपने तो लाल वस्त्र भी पहन रखे हैं तो आप इस रास्ते से बिल्कुल मत जाइये। तुलसीदास जी ने सोचा – ये कल का बालक मुझे चला रहा है। मुझे पता है – सब में राम का वास है। मैं उस बैल को हाथ जोड़ लूँगा और शान्ति से चला जाऊंगा। लेकिन तुलसीदास जी जैसे ही आगे बढ़े और इससे पहले की बैल को हाथ जोड़ पाते बिगड़े बैल ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी और वो बुरी तरह गिर पड़े। अब तुलसीदास जी घर जाने की बजाय सीधे उस जगह पहुंचे जहाँ वो रामचरित मानस लिख रहे थे। और उस चौपाई को फाड़ने लगे, तभी वहां हनुमान जी प्रकट हुए और बोले - श्रीमान ये आप क्या कर रहे हैं ? तुलसीदास जी उस समय बहुत गुस्से में थे, वो बोले – ये चौपाई बिल्कुल गलत है। ऐसा कहते हुए उन्होंने हनुमान जी को सारी बात बताई। हनुमान जी मुस्कुराकर तुलसीदास जी से बोले – श्रीमान, ये चौपाई तो शत प्रतिशत सही है। आपने उस बैल में तो श्री राम को देखा लेकिन उस बच्चे में राम को नहीं देख पाए, जो आपको बचाने आये थे। भगवान तो बालक के रूप में आपके पास पहले ही आये थे लेकिन आपने देखा ही नहीं। ऐसा सुनते ही तुलसीदास जी ने हनुमान जी को गले से लगा लिया। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *,, घर पर रहें... शायद यही राम जी की इच्छा हो ....* 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 जो प्रशासन ने कहा, वो हो सकता है कि राम जी ने ही कहा हो..... 💐💐💐💐💐💐💐💐 गंगा बड़ी न गोदावरी, न तीर्थ बड़े प्रयाग। सकल तीर्थ का पुण्य वहीं, जहाँ हृदय राम का वास।। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *👏👏 जय सिया के राम जी* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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Smt Neelam Sharma May 9, 2021

*माँ* आप सभी मातृ शक्तियों को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया।। *अर्थात, माता के समान कोई छाया नहीं है, माता के समान कोई सहारा नहीं है। माता के समान कोई रक्षक नहीं है और माता के समान कोई प्रिय चीज नहीं है।* 'माँ' यह वो अलौकिक शब्द है, जिसके स्मरण मात्र से ही रोम−रोम पुलकित हो उठता है, हृदय में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ता है और मनो मस्तिष्क स्मृतियों के अथाह समुद्र में डूब जाता है। 'माँ' वह अमोघ मंत्र है, जिसके उच्चारण मात्र से ही हर पीड़ा का नाश हो जाता है। 'माँ' की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता है, नौ महीने तक गर्भ में रखना, प्रसव पीड़ा झेलना, स्तनपान करवाना, रात−रात भर बच्चे के लिए जागना, खुद गीले में रहकर बच्चे को सूखे में रखना, मीठी−मीठी लोरियां सुनाना, ममता के आंचल में छुपाए रखना, तोतली जुबान में संवाद व अठखेलियां करना, पुलकित हो उठना, ऊंगली पकड़कर चलना सिखाना, प्यार से डांटना−फटकारना, रूठना−मनाना, दूध−दही−मक्खन का लाड़−लड़ाकर खिलाना−पिलाना, बच्चे के लिए अच्छे−अच्छे सपने बुनना, बच्चे की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करना और बड़े होने पर भी वही मासूमियत और कोमलता भरा व्यवहार.....ये सब ही तो हर 'माँ' की मूल पहचान है। इस सृष्टि के हर जीव और जन्तु की 'माँ' की यही मूल पहचान है। मां का अर्थ ही होता है पृथ्वी पर ईश्वर उपस्थिति वैसे तो मां के साथ हर दिन ही जन्नत सा महसूस होता है पर इसके लिए एक विशेष दिन बनाया गया है *मातृ दिवस* मातृ दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य मां के प्रति सम्मान और प्रेम को प्रदर्शित करना है। *आइए जानते हैं मातृ दिवस सर्वप्रथम कहां से प्रारंभ हुआ* मातृ दिवस मनाने का शुरुआत सर्वप्रथम ग्रीस देश में हुई थी, जहां देवताओं की मां को पूजने का चलन शुरु हुआ था। इसके बाद इसे त्योहार की तरह मनाया जाने लगा। हर मां अपने बच्चों के प्रति जीवन भर समर्पित होती है। मां के त्याग की गहराई को मापना भी संभव नहीं है लेकिन उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता को प्रकट करना हमारा कर्तव्य है। *भारत में मातृ दिवस मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस वर्ष भारत में मातृ दिवस 9 मई को मनाया जाएगा।* मैं अक्सर देखता हूं कि लोग अपनी माताजी को मातृ दिवस पर कोई ना कोई उपहार अवश्य ही भेंट करते हैं। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि माँ को देने लायक कोई उपहार नहीं हो सकता है। फिर भी, अगर आप अपनी माँ को मातृ दिवस पर कोई उपहार देना ही चाहते हैं केवल मातृ दिवस पर ही नहीं उन्हें प्रतिदिन सम्मान देना प्रारंभ करें। उनकी इच्छाओं का सम्मान करें। हमारा प्रयास रहना चाहिए जैसे बचपन में हमारी माता हमारा केवल चेहरा देखकर हमारे मन के भाव समझ जाती थी हमें भी बड़े होकर उनके मन के भावों को समझना चाहिए। आप प्रतिदिन उन्हें प्यार से गले भी लगा लेंगे तो उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान यही होगा। अपनी सामर्थ्य के अनुसार अपनी इच्छा अनुसार जो भी आप अपनी माता जी को देना चाहें उससे वह प्रसन्न हीं होंगी।🙏🏻🙏🏻 🙏🏻🙏🏻मां🙏🏻🙏🏻

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