🙏🙏MUST READ, ,कैसी थी ब्रजगोपियों की भक्तिॽ एक क्षण को भी विस्मरण हो जाए तो रोती हैं। एक क्षण को भी कृष्ण न दिखाई पड़े तो तड़फती हैं। लेकिन ऐसा तो साधारण प्रेम में भी कभी हो जाता है : प्रेमी न हो, प्रेयसी तड़फती है; प्रेयसी न हो तो प्रेमी तड़पता है। फर्क क्या है ब्रज की गोपियों की भक्ति में और साधारण प्रेमियों की भक्ति मेंॽ फर्क इतना है कि ब्रजगोपियां कृष्ण के प्रेम में हैं, लेकिन परिपूर्ण होशपूर्वक कि कृष्ण भगवान हैं। वह प्रेम किसी व्यक्ति का प्रेम नहीं, भगवत्ता का प्रेम है। अन्यथा फिर साधारण प्रेम हो जाएगा। कृष्ण को भी तुम ऐसे प्रेम कर सकते हो जैसे वे शरीर है, तुम्हारे जैसे ही एक व्यक्ति हैं। तब कृष्ण मौजूद भी हों तो भी तुम चूक गये। रुक्मणी कृष्ण की पत्नी है, लेकिन रुक्मणी का नाम कृष्ण के साथ अकसर लिया नहीं जाता - लिया ही नहीं जाता। सीता का नाम राम के साथ लिया जाता है। पार्वती का नाम शिव के साथ लिया जाता है। कृष्ण का नाम रुक्मणी के साथ और रुक्मणी का नाम कृष्ण के साथ नहीं लिया जाता। और राधा उनकी पत्नी नहीं है, याद रखना। कृष्ण-राधा कहना, । वह उनकी पत्नी नहीं है। पर क्या बात है, रुक्मणी कैसे विस्मृत हो गयीॽ रुक्मणी कैसे अलग-थलग पड़ गयीॽ रुक्मणी पत्नी थी और कृष्ण मेंं भगवान को न देख पायी, पुरुष को ही देखती रही-बस यही चूक हो गयी। वहीं राधा करीब आ गयी जहां रुक्मणी चूक गयी।🙏🙏🌲🌲🌷🌷

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