Namrata chhabra May 5, 2021

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Namrata chhabra May 5, 2021

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Namrata chhabra May 3, 2021

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Namrata chhabra May 3, 2021

🌹#श्री_ठाकुर_जी_की_मनमोहक_लीला🌹 आप सभी रसिक जन स्मरण करें एक बार निकुंज में स्वामिनी जू के मन इच्छा जाग्रत हुई कि प्रियतम चलो लुका-छिपी खेलेंगे,* *खुला मैदान है, कहीं कोई तरु कहीं कोई लता निकटवर्ती कोई दृष्टिगोचर नहीं होती। अब ऐसे खुले मैदान में कहाँ खेलेंगे, कहाँ छिपेंगे,* *पर स्वामिनी जू की आज्ञा है, प्रियतम ने कह दिया - जो आज्ञा प्रिया जू!* *अब आधी सखियाँ प्रियाजी की ओर हो गयी, और आधी सखियाँ लाल जी की ओर हो गयी।* *प्रियाजी ने कहा - प्यारे! पहले आप छिपिये, आँख बंद किया प्रियाजी ने और प्रियाजी की ओर की सब सहचरियों ने, और आँख खोला तो देखा क्या?* *कि जहाँ देखो, तहां लालजी हीं खड़े दिखाई दे रहे हैं, लाल जी और लाल जी की और की समस्त सहचरियां, लालजी का स्वरूप हो गयीं।* *प्रियाजी ने नेक (थोड़ी) देर लगाई और स्पर्श करके, प्रियतम का कर थाम के कहा - प्रियतम! बाहर आ जाईये।* *श्री लाल जी बड़े आश्चर्य में पड़ गये, प्रियाजी आपने कैसे पहचान लिया?* *प्रियाजी ने कहा - यह बाद में बताउंगी, अब हमारी बारी है, हम छिपेंगे ।* *अब लाल जी और लाल जी की ओर की समस्त सहचरियों ने आँख बंद की।* *फिर आँख खोला तो, क्या देखते है, दूर मैदान में दूर-दूर तक मोगरे की कलियों के ढेर पड़े हैं,* *प्रियतम बहुत देर तक कभी यहाँ जाएँ, कभी वहाँ जाएँ , कभी इधर देखे, कभी उधर देखें, फिर एक ढेर के पास आकर प्रियतम ने कहा -* *प्यारीजू! आप भी बाहर आ जाओ।* *प्रियाजी बाहर आयीं, पर प्रियाजी का आश्चर्य अधिक था, क्योंकि स्वामिनीजू ने तो स्पर्श करके प्रियतम को पहचाना, पर प्रियतम ने बिना स्पर्श किये।* *बोली - प्यारे! आपने कैसे पहचान लिया?* *तो लाल जी ने कहा - प्यारीजू! आपका तो स्वरूप और प्रभाव, सुभाव ही ऐसा है कि आप कहीं छुप ही नहीं सकतीं।* *आपकी समस्त सहचरियां जिन मोगरे की कलियों के ढेर में छिपी, वे तो सब कलियाँ ही रह गयीं,* *पर आप जिन मोगरे की कलियों के ढेर में छिपी थीं, वह सब कलियां आपके श्री अंग का स्पर्श पा के फूल बन गयीं।* *उससे मैंने झट पहचान लिया। अब दोनों जीते,* *तो ललिता जी को न्याय करना है, कि दोनों में से कौन जीता?* *अब देखिये कायदे से तो लाल जी जीते, क्योंकि प्रियाजी ने स्पर्श करके ढूंढा, और लाल जी ने बिना स्पर्श किये।* *पर ललिता जी बड़ी चतुर हैं, और बोली - लालजी ने खोजने में बड़ी देर कर दी, इसलिए जीतीं तो प्रियाजी।* *लेकिन यहाँ सहचरियों का पक्षपात देखिये, प्रियाजी को जिताया पर लाल जी को हराया नहीं- क्यों?* *जब सहचरियों ने कहा - स्वामिनीजू आप जीती हैं, हारने वाले को दण्ड मिलना चाहिए।* *तो, प्रियाजी ने ललिता जी से कहा - तू ही दण्ड निधारित कर दे,* *तो ललिता जी ने कहा दण्ड यह है कि लूका - छिपी का खेल खेलने से प्रियाजी श्रमित हो गयी हैं, इसलिए अब लाल जी प्रियाजी की चरण - सेवा करेंगे,* *और लाल जी को अपना मुंह माँगा मनोरथ मिलता है।* *यहाँ देखिये श्री प्रियाजी जीतकर भी रसका दान करती हैं,* *और श्री लाल जी हारकर भी रस का पान करते हैं,* *यही सहचरियों का मनोरथ है,* *यही श्री राधा चरण उपासना है,* *जो केवल श्री वृन्दावन की रस-रीति से, और श्री वृन्दावनेश्वरी के चरण हृदय में धारण करने पर हीं स्फूर्त होती है। हमारे पेज वृंदावन के श्याम को लाइक व फॉलो करें https://www.facebook.com/वृंदावन-के-श्याम-103438364981364/ 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 जय जय श्री कृष्ण जी लाड़ली जी सेवा संस्थान वृंदावनन बी -धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रसारण व श्री कृष्ण कथा प्राप्त करने के लिए आपके व्हाट्सएप पर नम्बर 8791423605 सेव करें🙏🏻🙏🏻

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Namrata chhabra May 1, 2021

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Namrata chhabra May 1, 2021

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