⛳⛳⛳ॐ नमः शिवाय ⛳⛳⛳⛳ #त्रिपुण्ड🌷 अक्‍सर आपने साधु-संतो या तपस्वियों, पंडितों के माथे पर चन्दन या भस्म से बनी तीन रेखाएं देखी होंगी. ये कोई साधारण रेखाएं नहीं हैं बल्कि इन्‍हें त्रिपुण्ड कहा जाता है. माथे पर चंदन या भस्म से बनी तीन रेखाएं त्रिपुण्ड कहलाती हैं. चन्दन या भस्म द्वारा तीन उंगुलियों की मदद से त्रिपुंड बनाया जाता है. त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं में 27 देवताओं का वास होता है. प्रत्येक रेखा में 9 देवताओं का वास होता हैं. त्रिपुण्ड धारण करने वालों पर शिव की विशेष कृपा होती है. ये विचार मन में ना रखें कि त्रिपुण्ड केवल माथे पर ही लगाया जाता है. त्रिपुण्ड शरीर के कुल 32 अंगों पर लगाया जाता है क्योंकि अलग- अलग अंग पर लगाए जाने वाले त्रिपुण्ड का प्रभाव और महत्व भी अलग है. इन अंगों में मस्तक, ललाट, दोनों कान, दोनों नेत्र, दोनों कोहनी, दोनों कलाई, ह्रदय, दोनों पाश्र्व भाग, नाभि, दोनों घुटने, दोनों पिंडली और दोनों पैर शामिल हैं. शरीर के हर हिस्से में देवताओं का वास माना गया है. मस्तक में शिव, केश में चंद्रमा, दोनों कानों में रुद्र और ब्रह्मा मुख में गणेश, दोनों भुजाओं में विष्णु और लक्ष्मी, ह्रदय में शंभू, नाभि में प्रजापति, दोनों उरुओं में नाग और नागकन्याएं, दोनों घुटनों में ऋषि कन्याएं, दोनों पैरों में समुद्र और विशाल पुष्ठभाग में सभी तीर्थ देवता रूप में रहते हैं. भस्म जली हुई वस्तुओं की राख होता है लेकिन सभी राख भस्म के रूप में प्रयोग करने योग्य नहीं होती हैं. भस्म के तौर पर उन्हीं राख का प्रयोग करना चाहिए, जो पवित्र कार्य के लिए किये गये हवन या यज्ञ से प्राप्त हो. शिव पुराण के अनुसार जो व्यक्ति नियमित अपने माथे पर भस्म से त्रिपुण्ड यानी तीन रेखाएं सिर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक धारण करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति शिव कृपा का पात्र बन जाता है. त्रिपुण्ड चंदन या भस्म से लगाया जाता है. चंदन और भस्म माथे को शीतलता प्रदान करता है. अधिक मानसिक श्रम करने से विचारक केंद्र में पीड़ा होने लगती है. ऐसे में त्रिपुण्ड ज्ञान-तंतुओं को शीतलता प्रदान करता है. इससे मानसिक शांति मिलती है.! 🌷🌷ॐ नमः शिवाय 🌷🌷 🌷🌷जय भोलेनाथ 🌷🌷

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