Mohit kushwaha Apr 12, 2021

घटस्थापना नवरात्रि हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। नवरात्रि को पूरे देश में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। मां भवानी की उपासना के नौ दिन भक्तों के लिए बेहद खास होते हैं। इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।  कई भक्त नवरात्रि के नौ दिन व्रत रखते हैं तो कई पहला और आखिरी रखकर मां दुर्गा की उपासना करते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की घटस्थापना करके और विधि-विधान से पूजा करने से माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू होकर 22 अप्रैल तक रहेंगे। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त- दिन- मंगलवार तिथि- 13 अप्रैल 2021 शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक। अवधि- 04 घंटे 15 मिनट घटस्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक।  कलश स्थापना का अर्थ नवरात्रि के समय ब्रह्मांड में उपस्थित शक्तितत्त्व का घट अर्थात कलश में आह्वान कर उसे सक्रिय करना। शक्तितत्व के कारण वास्तु में उपस्थित कष्टदायक तरंगें नष्ट हो जाती हैं। नवरात्र के पहले दिन पूजा की शुरुआत दुर्गा पूजा निमित्त संकल्प लेकर ईशानकोण में कलश-स्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना की सामग्री मिट्टी का पात्र, यह वेदी कहलाती है। शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें कंकर आदि न हो, 9 प्रकार के अनाज, पानी, मौली, गंगाजल(शुद्ध जल) ,साबुत सुपारी, फूल, दुर्वा, इत्र, पंचरत्न,सिक्का, आम के पत्ते, नारियल आदि।  घटस्थापना पूजा विधि सबसे पहले एक मिट्टी का पात्र लें। उसमें तीन लेयर में मिट्टी डालें। और 9 तरह के अनाज को मिट्टी में डालें और इसमें थोड़ा पानी डालें। अब एक कलश लें। इस पर स्वस्तिक बनाएं। फिर मौली या कलावा बांधें। इसके बाद कलश को गंगाजल और शुद्ध जल से भरें। इसमें साबुत सुपारी, फूल और दूर्वा डालें। साथ ही इत्र, पंचरत्न और सिक्का भी डालें। इसके मुंह के चारों ओर आम के पत्ते लगाएं। कलश के ढक्कन पर चावल डालें। देवी का ध्यान करते हुए कलश का ढक्कन लगाएं. अब एक नारियल लेकर उस पर कलावा बांधें। कलश पर स्वास्तिक का चिह्न जरूर बनाएं। कुमकुम से नारियल पर तिलक लगाकर नारियल को कलश के ऊपर रख दें। कलश के साथ आप कुछ फूल भी रख सकते हैं। मां दुर्गा का स्वागत करने के लिए इसे मंदिर में रखें। ढंककर रखें कलश कलश स्थापना करने से पहले ये ध्यान रखें कि जिस जगह कलश स्थापित किया जाएगा, वो जगह साफ होनी चाहिए। कलश स्थापना के लिए एक लकड़ी का पाटा लें और उस पर नया व साफ लाल कपड़ा बिछाएं। ध्यान देने वाली बात है कि कलश का मुंह खुला न छोड़ें। उसे ढक दें। वहीं अगर कलश को किसी ढक्कन से ढका है तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें।  कलश स्थापना का मंत्र कलशस्य मुखे विष्णु: कण्ठे रुद्र: समाश्रित:। मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणा: स्मृता:।। अर्थात् कलश के मुख में विष्णुजी,कण्ठ में रुद्र, मूल में ब्रह्मा और कलश के मध्य में सभी मातृशक्तियां निवास करती हैं। मां दुर्गा का ध्यान मंत्र विद्युद्‌दाम समप्रभां मृगपति स्कन्धस्थितां भीषणां कन्याभिः करवाल खेट विलसद्धस्ताभिरा सेविताम्‌ हस्तैश्चक्रगदासि खेट विशिखांशचापं गुणं तर्जनीं विभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे ।।  कलश स्थापना से लाभ अपने आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर देता है। घर में शांति और सुख लाता है। नारियल को शुभ फल देने वाला माना जाता है। घर के मंदिर में रखा गया कलश वहां का माहौल भक्तिमय बनाता है। आपको पूजा में एकाग्रता देता है। घर में बीमारियां हों तो नारियल का कलश उसको दूर करने में मदद करता है। कलश को भगवान गणेश का प्रतिरूप भी माना जाता है, इसलिए हमारे कामों में आ रही रुकावटों को दूर करता है।

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