Minakshi Tiwari Mar 30, 2020

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Minakshi Tiwari Mar 28, 2020

देखिए ऐसा है ....राशन तो 8,10 दिनों का सब ने कोशिश की ही है घर मे रखने की , ग्रोसरी स्टोर्स भी खुले हैं , सामान देर सवेर मिल ही जायेगा , क्योंकि भगवान की दया से हम सब इतने सम्पन तो हैं ही , पर एक प्रार्थना है के plz अगर आप रोज़ 2 सब्जी बनाते हैं तो अब 1 बनाइये , दाल हो सके तो थोड़ी पतली रखिये , कोशिश कीजिये चावल का एक दाना भी व्यर्थ ना हो , जितना ज़रूरत है उतना पकायें और अगर फिर भी बच जाए तो पहले उस बचे हुए खाने को खाये और ईश्वर को धन्यवाद दें के कम से कम मिल तो रहा है.... सीमित खाइये , संयमित खाइये ...... घर पर हैं तो हर घण्टे ये मत पूछिए सुनो , कुछ खाने को है क्या 🙈 समय से खाइये , कम खाइये 🙏 क्योंकि माना आपके पास पैसा है आप खरीद सकते हैं , आप 6 महीने तक का राशन स्टोर कर सकते हैं पर देश के पास संसाधन सीमित हैं ..... मैं अपनी हाउस मेड को छुट्टी देने से पहले पूछ रही थी अब क्या करोगी , कैसे करोगी , सामान स्टोर कर पाओगी , तो बोलती है दीदी, हम तो अगर चावल खाने हैं तो तभी आधा किलो चावल खरीद कर लाते हैं , 10 रुपये का तेल ले आते हैं , दूध तो हम खरीदते ही नही , काम पर कोई चाय पिला देता है तो पी लेते हैं 😟 तो ऐसे भी लोग हैं , ऐसा ना हो हम सब कुछ अपने घरों में इकट्ठा कर लें और ऐसे लोगो को और ज्यादा मुश्किल हो जाये अपने बारे में सोचिये पर दूसरों के बारे में भी सोचिये 🙏 परीक्षा का समय है मुझे उम्मीद है के हम सब अच्छे मार्क्स के साथ इस परीक्षा में उत्तीण होंगे 🙏

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Minakshi Tiwari Mar 27, 2020

*अब समझ आया* *पूर्वजों के समय में* 1. शौचालय और स्नानघर निवास स्थान के बाहर होते थे। 2.क्यों बाल कटवाने के बाद या किसी के दाह संस्कार से वापस घर आने पर बाहर ही स्नान करना होता था बिना किसी व्यक्ति या समान को हाथ लगाए हुए। 3. क्यों पैरो की चप्पल या जूते घर के बाहर उतारा जाता था, घर के अंदर लेना निषेध था। 4. क्यों घर के बाहर पानी रखा जाता था और कही से भी घर वापस आने पर हाथ पैर धोने के बाद अंदर प्रवेश मिलता था। 5.क्यों जन्म या मृत्यु के बाद घरवालों को 10 या 13 दिनों तक सामाजिक कार्यों से दूर रहना होता था। 6. क्यों किसी घर में मृत्यु होने पर भोजन नहीं बनता था । 7. क्यों मृत व्यक्ति और दाह संस्कार करने वाले व्यक्ति के वस्त्र शमशान में त्याग देना पड़ता था। 8. क्यों भोजन बनाने से पहले स्नान करना जरूरी था और कोसे के गीले कपड़े पहने जाते थे। 9.क्यों स्नान के पश्चात किसी अशुद्ध वस्तु या व्यक्ति के संपर्क से बचा जाता था। 10.क्यों प्रातःकाल स्नान कर घर में अगरबत्ती,कपूर,धूप एवम घंटी और शंख बजा कर पूजा की जाती थी। हमने अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित नियमों को ढकोसला समझ छोड़ दिया और पश्चिम का अंधा अनुसरण करने लगे। आज कॉरोना वायरस ने हमें फिर से अपने संस्कारों की याद दिला दी है,उनका महत्व बताया है। हिन्दू धर्म, ज्ञान और परंपरा हमेशा से समृद्ध रही है। आज वक्त है अपनी आंखो पर पड़ी धूल झाड़ने और ये उच्च संस्कार अपने परिवार और बच्चो को देने का। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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Minakshi Tiwari Mar 27, 2020

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