MANOJ VERMA Dec 18, 2017

भगवान् के दर्शन 🚩
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महर्षि रमण से कुछ भक्तों ने पूछा, 'क्या हमें भगवान् के दर्शन हो सकते हैं ?'
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'हां, क्यों नहीं हो सकते ? परंतु भगवान् को देखने के लिए उन्हें पहचानने वाली आंखें चाहिए होती हैं,' महर्षि रमण ने भक्तों को बताया।
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'एक सप्ताह तक ...

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स्वर्णिम अवसर:
बगरू (जयपुर) में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रचारिका सुश्री श्रीधरी दीदी के विलक्षण दार्शनिक प्रवचन एवं रसमय संकीर्तन का आयोजन।

सत्संग प्रेमी महानुभाव !
इस विकराल कलिकाल में अनेक अज्ञानी असंतो द्वारा ईश्वरप्राप्ति के अनेक म...

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MANOJ VERMA Dec 16, 2017

श्रीकृष्ण सूर्य के समान हैं, और माया अन्धकारमय है। जहां श्रीकृष्ण हैं वहां फिर माया का कुछ भी अधिकार नहीं है। अतः श्रीकृष्ण भक्ति के बिना न तो बुद्धि ही विशुद्ध हो सकती है और न यह जीव माया के चंगुल से छुटकारा पा सकता है। .......जगद्गुरु श्री कृपाल...

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उधार करते-करते अनंत जनम बीत गये, देव दुर्लभ मानव देह भी कूकर-शूकर की ही भाँति बस भरण-पोषण में बीत रहा है।
.......जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

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अगर वास्तविक महापुरुष मिल जाये और उसकी वास्तविक शरणागति हो जाये तो कुछ भी असम्भव नहीं । अनन्त नगण्य जीव महापुरुष बने हैं । तुम क्यों नहीं बन सकते ?

: - - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

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किसी भी व्यवहार को संसार अच्छा या सही नहीं मान सकता! वह उसमे भी कुछ किन्तु परन्तु अवश्य लगायेगा, वह स्वभाव (nature) है।

----जगद्गुरुत्तम श्री कृपालुजी महाराज।
राधे - राधे।

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दिव्य प्रेम मन्दिर
श्री वृन्दावन धाम
राधे राधे

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MANOJ VERMA Dec 12, 2017

स्वयं से पुछो - ' तुमने कितने घण्टे साधना करने में लगाये ? बी.ए ., एम.ए . करने में तो दस गुना समय दिया - पेट के लिये । ईश्वरीय काम के लिये कितने घण्टे दिये ? और चाहते हो ' पूरा लाभ मिल जाये ।

: - - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज...

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