Manoj manu Mar 8, 2021

🚩🙏🌹happy woman's day 🌹🌹🙏 आप सभी को अंतरास्ट्रीय महिला दिवस की अनेकानेक हार्दिक शुभ कामनायें एवं मंगलमय बधाईयाँ : - 🌹🌿यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः 🌿🌹 🌿🌹यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः🌹 वैदिक काल में कोई भी धार्मिक कार्य नारी की उपस्थिति के बगैर शुरू नहीं होता था। उक्त काल में यज्ञ और धार्मिक प्रार्थना में यज्ञकर्ता या प्रार्थनाकर्ता की पत्नी का होना आवश्यक माना जाता था। नारियों को धर्म और राजनीति में भी पुरुष के समान ही समानता हासिल थी। वे वेद पढ़ती थीं और पढ़ाती भी थीं। मैत्रेयी, गार्गी जैसी नारियां इसका उदाहरण है। ऋग्वेद की ऋचाओं में लगभग 414 ऋषियों के नाम मिलते हैं जिनमें से 30 नाम महिला ऋषियों के हैं। यही नहीं नारियां युद्ध कला में भी पारंगत होकर राजपाट भी संभालती थी। ... परन्तु जैसे-जैसे हमने अपनी संस्कृति को भूलना शुरू किया, उसका पतन होने लगा और इसका दुषप्रभाव महिलाओं पर भी पड़ा और उनकी स्थिति और खराब होती गई। आज के समय में शिक्षा से समाज में महिलाओं के लिए जागरुकता आई है ,साथ ही महिलायें हर क्षेत्र में पुरुष से कंधे से कँधा मिलाकर स्वयं को सिद्ध भी कर रहीं हैं। 🌹🌹🌿🌹🌹राधे राधे जी 🌹🌹🌿🌹🌹🙏

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Manoj manu Mar 7, 2021

🚩🙏🌿🌹जय सियाराम जी 🌹🌿🌹🙏 🌹🌹श्री राम चरित मानस प्रभु श्री राम जी और केवट के प्रेम का अद्भुत अति सुंदर प्रसंग :- 🌹🌹जासु बियोग बिकल पसु ऐसें। प्रजा मातु पितु जिइहहिं कैसें॥ 🌹🌹बरबस राम सुमंत्रु पठाए। सुरसरि तीर आपु तब आए॥ भावार्थ:-जिनके वियोग में पशु इस प्रकार व्याकुल हैं, उनके वियोग में प्रजा, माता और पिता कैसे जीते रहेंगे? श्री रामचन्द्रजी ने जबर्दस्ती सुमंत्र को लौटाया। तब आप गंगाजी के तीर पर आए॥ 🌹🌹* मांगी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना॥ 🌹🌹चरन कमल रज कहुँ सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई॥ भावार्थ:-श्री राम ने केवट से नाव माँगी, पर वह लाता नहीं। वह कहने लगा- मैंने तुम्हारा मर्म (भेद) जान लिया। तुम्हारे चरण कमलों की धूल के लिए सब लोग कहते हैं कि वह मनुष्य बना देने वाली कोई जड़ी है,॥ 🌹🌹* छुअत सिला भइ नारि सुहाई। पाहन तें न काठ कठिनाई॥ तरनिउ मुनि घरिनी होइ जाई। बाट परइ मोरि नाव उड़ाई॥ भावार्थ:-जिसके छूते ही पत्थर की शिला सुंदरी स्त्री हो गई (मेरी नाव तो काठ की है)। काठ पत्थर से कठोर तो होता नहीं। मेरी नाव भी मुनि की स्त्री हो जाएगी और इस प्रकार मेरी नाव उड़ जाएगी, मैं लुट जाऊँगा (अथवा रास्ता रुक जाएगा, जिससे आप पार न हो सकेंगे और मेरी रोजी मारी जाएगी) (मेरी कमाने-खाने की राह ही मारी जाएगी)॥ 🌹🌹* एहिं प्रतिपालउँ सबु परिवारू। नहिं जानउँ कछु अउर कबारू॥ 🌹🌹जौं प्रभु पार अवसि गा चहहू। मोहि पद पदुम पखारन कहहू। भावार्थ:-मैं तो इसी नाव से सारे परिवार का पालन-पोषण करता हूँ। दूसरा कोई धंधा नहीं जानता। हे प्रभु! यदि तुम अवश्य ही पार जाना चाहते हो तो मुझे पहले अपने चरणकमल पखारने (धो लेने) के लिए कह दो॥ छन्द : 🌹* पद कमल धोइ चढ़ाइ नाव न नाथ उतराई चहौं। 🌿मोहि राम राउरि आन दसरथसपथ सब साची कहौं॥ 🌹बरु तीर मारहुँ लखनु पै जब लगि न पाय पखारिहौं। 🌿तब लगि न तुलसीदास नाथ कृपाल पारु उतारिहौं॥ भावार्थ:-हे नाथ! मैं चरण कमल धोकर आप लोगों को नाव पर चढ़ा लूँगा, मैं आपसे कुछ उतराई नहीं चाहता। हे राम! मुझे आपकी दुहाई और दशरथजी की सौगंध है, मैं सब सच-सच कहता हूँ। लक्ष्मण भले ही मुझे तीर मारें, पर जब तक मैं पैरों को पखार न लूँगा, तब तक हे तुलसीदास के नाथ! हे कृपालु! मैं पार नहीं उतारूँगा। 🏵🏵सोरठा : 🌿🌿* सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे। बिहसे करुनाऐन चितइ जानकी लखन तन॥ भावार्थ:-केवट के प्रेम में लपेटे हुए अटपटे वचन सुनकर करुणाधाम श्री रामचन्द्रजी जानकीजी और लक्ष्मणजी की ओर देखकर हँसे॥ चौपाई : 🌹🌹* कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेहिं तव नाव न जाई॥ बेगि आनु जलपाय पखारू। होत बिलंबु उतारहि पारू॥ भावार्थ:-कृपा के समुद्र श्री रामचन्द्रजी केवट से मुस्कुराकर बोले भाई! तू वही कर जिससे तेरी नाव न जाए। जल्दी पानी ला और पैर धो ले। देर हो रही है, पार उतार दे॥ 🌹🌹* जासु नाम सुमिरत एक बारा। उतरहिं नर भवसिंधु अपारा॥ 🌹🌹सोइ कृपालु केवटहि निहोरा। जेहिं जगु किय तिहु पगहु ते थोरा॥ भावार्थ:-एक बार जिनका नाम स्मरण करते ही मनुष्य अपार भवसागर के पार उतर जाते हैं और जिन्होंने (वामनावतार में) जगत को तीन पग से भी छोटा कर दिया था (दो ही पग में त्रिलोकी को नाप लिया था), वही कृपालु श्री रामचन्द्रजी (गंगाजी से पार उतारने के लिए) केवट का निहोरा कर रहे हैं!॥ 🌹🌹पद नख निरखि देवसरि हरषी। सुनि प्रभु बचन मोहँ मति करषी॥ 🌹🌹केवट राम रजायसु पावा। पानि कठवता भरि लेइ आवा॥ भावार्थ:-प्रभु के इन वचनों को सुनकर गंगाजी की बुद्धि मोह से खिंच गई थी (कि ये साक्षात भगवान होकर भी पार उतारने के लिए केवट का निहोरा कैसे कर रहे हैं), परन्तु (समीप आने पर अपनी उत्पत्ति के स्थान) पदनखों को देखते ही (उन्हें पहचानकर) देवनदी गंगाजी हर्षित हो गईं। (वे समझ गईं कि भगवान नरलीला कर रहे हैं, इससे उनका मोह नष्ट हो गया और इन चरणों का स्पर्श प्राप्त करके मैं धन्य होऊँगी, यह विचारकर वे हर्षित हो गईं।) केवट श्री रामचन्द्रजी की आज्ञा पाकर कठौते में भरकर जल ले आया॥ 🌹🌹* अति आनंद उमगि अनुरागा। चरन सरोज पखारन लागा॥ 🌿🌿बरषि सुमन सुर सकल सिहाहीं। एहि सम पुन्यपुंज कोउ नाहीं॥ भावार्थ:-अत्यन्त आनंद और प्रेम में उमंगकर वह भगवान के चरणकमल धोने लगा। सब देवता फूल बरसाकर सिहाने लगे कि इसके समान पुण्य की राशि कोई नहीं है॥ दोहा : 🌹* पद पखारि जलु पान करि आपु सहित परिवार। 🌿पितर पारु करि प्रभुहि पुनि मुदित गयउ लेइ पार॥ भावार्थ:-चरणों को धोकर और सारे परिवार सहित स्वयं उस जल (चरणोदक) को पीकर पहले (उस महान पुण्य के द्वारा) अपने पितरों को भवसागर से पार कर फिर आनंदपूर्वक प्रभु श्री रामचन्द्रजी को गंगाजी के पार ले गया॥ 🌿🌿राम वह सब करते हैं, जैसा केवट चाहता है। उसके श्रम को पूरा मान-सम्मान देते हैं। उसके स्थान को समाज में ऊंचा करते हैं। राम की संघर्ष और विजय यात्रा में उसके दाय को बड़प्पन देते हैं। त्रेता के संपूर्ण समाज में केवट की प्रतिष्ठा करते हैं। केवट भोईवंश का था तथा मल्लाह का काम करता था। केवट प्रभु श्रीराम का अनन्य भक्त था। केवट राम राज्य का प्रथम नागरिक बन जाता है। राम त्रेता युग की संपूर्ण समाज व्यवस्था के केंद्र में हैं, इसे सिद्ध करने की जरूरत नहीं है। 🌺🌿🌿जय श्री राम जी 🌿🌿🌺🙏

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Manoj manu Mar 6, 2021

🚩🏵जय श्री राम जी जय वीर बजरंग वली 🔔🙏 🌹रामदूत अतुलितबलधामा, अंजनीपुत्र पवनसुत नामा", ये पंक्तियाँ है तुलसीदास जी की लिखी गई बहुत ही प्रभावी कृति हनुमान चालीसा की। इसमें हनुमान जी को अतुलितबलधामा कहा गया, अतुलितबल धामा मतलब अद्वितीय, बेजोड़, अनुपम, अपरिमित,अतुल्य,अपार परम शक्तिशाली जिसके समान पूरा विश्व में कोई ना हो। हनुमान जी की शक्ति का वर्णन नहीं किया जा सकता। महासिंधु को लांघना, लंका दहन, संजीवनी के लिए द्रोंणगिरी को उठाना, रावण को मुक्का मार कर मूर्छित करना आदि ऐसे बहुत से प्रसंग है जो हनुमान जी को अतुलितबलधामा प्रमाणित करते है। हनुमान जी अतिशक्ति सम्पन्न तथा परम पराक्रमी होने के साथ-साथ अत्यंत बुद्धिमान, शास्त्रों के ज्ञाता, कुशल राजनीतिज्ञ, सरलता की मूर्ति, समस्त अमंगलो का नाश करने वाले तथा अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता है। हनुमान जी को चिरंजीवी भी कहा गया है। माता सीता ने हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान दिया था। 🌹अश्वथामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषण:। 🌿कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविन: ।। अर्थात अश्वथामा, राजा बलि, महर्षि व्यास, हनुमान जी, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सातों अमर है।🌿🌹🌹हनुमान जी महाराज सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें जय श्री राम जी 🌺🌿🌺🙏

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Manoj manu Mar 1, 2021

🚩🌹🌿ऊँ नमःशिवाय 🔔🌿🙏 🌹🌿🌹जीवन मंत्र :- भगवान शिव ने क्यों पीया था विष ,आज के संदर्भ में :- देवताओं और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से निकला विष भगवान शंकर ने अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ के नाम से प्रसिद्ध हुए। समुद्र मंथन का अर्थ है अपने मन को मथना, विचारों का मंथन करना। मन में असंख्य विचार और भावनाएं होती हैं, उन्हें मथ कर निकालना और अच्छे विचारों को अपनाना। हम जब अपने मन को मथेंगे तो सबसे पहले बुरे विचार ही निकलेंगे। यही विष हैं, विष बुराइयों का प्रतीक है। शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया। उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। शिव का विष पीना हमें यह संदेश देता है कि हमें बुराइयों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। बुराइयों का हर कदम पर सामना करना चाहिए। शिव द्वारा विष पीना यह भी सीख देता है कि यदि कोई बुराई पैदा हो रही हो तो हम उसे दूसरों तक नहीं पहुंचने दें। 🌹🌿🌹देवाधिदेव महादेव जी सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें हर हर महादेव जी 🌹🌿🙏

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Manoj manu Feb 28, 2021

🚩🌹जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी 🌹🌿🙏 🌿🌹🌹ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🌹 🏵🌿श्री राधा षोडश नाम स्त्रोत एवं महिमा :- भगवान नारायण ने श्रीराधा की स्तुति करते हुए उनके सोलह नाम और उनकी महिमा बतायी है :— 🌹राधा रासेस्वरी रासवासिनी रसिकेश्वरी । कृष्णप्राणाधिका कृष्णप्रिया कृष्णस्वरूपिणी ।। 🌹 कृष्णवामांगसम्भूता परमानन्दरूपिणी । कृष्णा वृन्दावनी वृन्दा वृन्दावनविनोदिनी ।। 🌹चन्द्रावली चन्द्रकान्ता शरच्चन्द्रप्रभानना । नामान्येतानि साराणि तेषामभ्यन्तराणि च ।। 🌹राधा राधा नाम को सपनेहूँ जो नर लेय । 🌿 🌹ताको मोहन साँवरो रीझि अपनको देय ।।🌿 🌿🌿भगवान श्रीकृष्ण का कथन है–‘उन राधा से भी अधिक उनका ‘राधा’ नाम मुझे मधुर और प्यारा लगता है । ‘राधा’ शब्द कान में पड़ते ही मेरे हृदय की सम्पूर्ण कलियांँ खिल उठती हैं । कोई भी मुझे प्रेम से राधा नाम सुनाकर खरीद सकता है । राधा नाम मेरा सदा बंधा-बंधाया मूल्य है । जिस समय मैं किसी के मुख से ‘रा’ सुन लेता हूँ, उसी समय उसे अपनी उत्तम भक्ति और प्रेम दे देता हूँ और ‘धा’ शब्द का उच्चारण करने पर तो मैं श्रीराधा का नाम सुनने के लोभ से उसके पीछे-पीछे चलने लगता हूँ । ’‘राधा’ इस एक नाम में जब इतनी शक्ति है तो श्रीराधा के षोडस नामों को यदि हृदय में धारण कर लिया जाए तो मनुष्य का जीवन कितनी उत्कृष्टता को प्राप्त हो जाएगा, इसे हम सोच भी नहीं सकते हैं । 🌹🌹श्रीराधा के षोडश नाम - महिमा :- *षोडस नामों का पाठ करने वालों के इसी जीवन में जन्म-जन्मान्तर के संचित पाप और शुभ-अशुभ कर्मों के भोग पूर्णतः नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य जीता हुआ ही मुक्त हो जाता है। *श्रीराधा के नामों के जप से श्रीकृष्ण के चरण-कमलों की दास्यभक्ति प्राप्त होती है । *इस षोडस नाम स्तोत्र के पाठ से मनुष्य को सभी अभिलाषित पदार्थ और सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है । *षोडश नाम स्तोत्र का पाठ मनुष्य को श्रीकृष्ण का-सा तेज, शिव के समान औढरदानीपन (दानशक्ति), योगशक्ति और उनकी स्मृति प्रदान करता है । *कई जन्मों तक श्रीकृष्ण की सेवा से उनके लोक की प्राप्ति होती है, किन्तु श्रीराधा की कृपा से साधक श्रीकृष्ण के गोलोक धाम को शीघ्र ही प्राप्त कर लेता है । *शरीर छूटने पर उनका नित्य सहचर/सहचरी होकर उसे युगलसरकार की सेवा प्राप्त होती है । *अष्ट सिद्धियों से युक्त उसे नित्य शरीर प्राप्त होता है तथा भगवान के साथ अनन्तकाल तक रहने का सुख, सारूप्य और उनका तत्वज्ञान प्राप्त होता है । 🌿🌹🌿जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी 🌹🌿🙏

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Manoj manu Feb 26, 2021

🚩🌿🏵🌿जय माता दी 🔔🌿🏵🌿🙏 🌹ऊँ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके🌿 🌹शरन्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।🌿 🌹🌹माँ दुर्गा के अस्त्र, शस्त्र और सवारी क्या संदेश देते हैं आईये जानते हैं शुभ संदेश :- 🏵🏵माँ के हाथ में सुदर्शन चक्र:- मांँ दुर्गा की तर्जनी में घूमता सुदर्शन चक्र इस बात का प्रतीक है कि पूरी दुनिया उनके अधीन है। सब उनके आदेश में हैं। वह बुराई को नष्ट कर धर्म का विकास करेगा और धर्म के अनुकूल वातावरण तैयार करने और पापों का नाश करने में सहायक होगा। 🌹🌹माँ के हाथों में तलवार:- मां दुर्गा के हाथ में सुशोभित तलवार की तेज धार और चमक ज्ञान का प्रतीक है। यह ज्ञान सभी संदेहों से मुक्त है। इसकी चमक और आभा यह बताती है कि ज्ञान के मार्ग पर कोई संदेह नहीं होता है। 🌺🌺मांँ के हाथों में 'ऊँ ":- इसी तरह दुर्गाजी के हाथ में इंगित ऊं परमात्मा का बोध कराता है। ऊं में ही सभी शक्तियां निहित हैं। 🏵🏵माँ को प्रिय है लाल रंग:- नवरात्र के अवसर पर नवदुर्गाओं को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, फूल-फल आैर श्रृंगार की वस्तुएं लाल रंग की होती हैं। जब कलश की स्थापना की जाती है, तो उसके ऊपर भी लाल कपड़े में लिपटा हुआ नारियल रखा जाता है। लाल मौली से ही रक्षा सूत्र बांधी जाती हैं। देवी को समर्पित चीजों में भी कहीं-न-कहीं लाल रंग का अवशेष, इसलिए रखा जाता है, ताकि पूजा अनुष्ठान में अग्नि तत्व ग्रह सूर्य और मंगल ग्रह की अनुकंपा बनी रहे। सूर्य को रुद्र यानी अग्नि भी कहते है। अग्नि और रुद्र का स्वरूप लाल ही होता है। मंगल जो कि सूर्य के समान तेजोमय हैं, का रंग भी लाल ही है। इसलिए माँ दुर्गा को लाल चीजें ही ज्यादातर भेंट की जाती हैं। 🌹🌹ऊर्जा का प्रतीक तीर-धनुष:- दुर्गा जी द्वारा धारित तीर-धनुष ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसी तरह माँ दुर्गा के हाथ में धारण वज्र दृढ़ता का प्रतीक है। अपने कार्य और भक्ति के प्रति दृढ़ता होनी चाहिए। वज्र की तरह दृढ़ रहें खुद को प्रभावित न होने दें, वज्र यही संकेत देता है। 🏵🏵माँ के हाथों में त्रिशूल :- त्रिशूल तीन गुणों का प्रतीक है। संसार में तीन तरह की प्रवृत्तियां होती हैं- सत यानी सत्यगुण, रज यानी सांसारिक और तम मतलब तामसी प्रवृत्ति। त्रिशूल के तीन नुकीले सिरे इन तीनों प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन गुणों पर हमारा पूर्ण नियंत्रण हो। त्रिशूल का यही संदेश है। 🌺🌺पवित्रता का प्रतीक शंख :- शंख ध्वनि व पवित्रता का प्रतीक है। यह ध्वनि शांति और समृद्धि की सूचक है। माँ के हाथों में शंख इसी बात का संदेश देता है कि मां के पास आने वाले सभी भक्त पूर्णत: पवित्र हो जाते हैं। माँ की भक्ति से हमारे मन से बुरे विचार स्वत: ही समाप्त हो जाते हैं। 🌺🌺कमल क्यों :- माता के हाथों में कमल का फूल है। जो हमें बताता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य रखने और कर्म करने से सफलता अवश्य मिलती है। जिस प्रकार कमल कीचड़ में रहकर उससे अछूता रहता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी सांसारिक कीचड़, वासना, लोभ, लालच से दूर होकर सफलता को प्राप्त करना चाहिए। खुद में आध्यात्मिक गुणवत्ता को विकसित करना चाहिए। 🏵🏵सिंह की सवारी :- सिंह को उग्रता और हिंसक प्रवृत्तियों का प्रतीक माना गया है। माँ दुर्गा सिंह पर सवार है, इसका मतलब यही है कि जो उग्रता और हिंसक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पा सकता है, वही शक्ति है। माँ दुर्गा हमें यही संदेश देती हैं कि जीवन में बुराई और अधर्म पर नियंत्रण कर हम भी शक्ति संपन्न बन सकते हैं और अधर्म पर नियंत्रण कर धर्म की राह पर चल सकते हैं।🌺🌿🌺माँ भगवती सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें -जय माता दी 🌿🌺🙏

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Manoj manu Feb 21, 2021

🚩🌿🌹जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी 🌈🎈🙏 🌹ना कुछ पाने की आशा ना कुछ खोने का डर🌿 🌿बस अपनी ही धुन, बस अपने सपनो का घर🌹 🎈काश मिल जाए फिर मुझे वो बचपन का पहर🌿 🚑🚲आज का बचपन :- आज के भागमभाग भरे जीवन में अक्सर यह देखा जाता है कि अधिकाँश परिवारों में अपने बच्चों से बात करने का भी समय नहीं है, और ना ही उनकी उम्र के अनुसार बच्चों को उचित मार्गदर्शन मिल पा रहा है। इसके अलावा आज घर - घर में बच्चे मोबाइल पर अपना अधिकाँश समय व्यतीत कर रहे हैं। जिससे उसका शारीरिक विकास तो बाधित हो ही रहा है वह सामाजिकता से भी दूर होते जा रहे हैं, मोबाइल से एक सीमा से अधिक समय तक का जुड़ाव अनेक शारिरिक समस्याओं को जन्म दे रहा है। आज सभी पालकों की यह एक अहम जिम्मेजदारी है कि वह अपने बच्चो की महती आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ साथ उन्हें सामाजिक निर्वहन से भी जोड़े। और उनकी आयु के अनुसार उन्हें विभिन्न खेलों के साथ में आपसी सहयोग व सहमति बनाने के अवसर अलब्ध करायें जिससे उनकी भविष्य की राह आसान बन सके। और वह एक सफल इंसान बन पायें। 🚣‍♀🍝काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था खेलने की मस्ती थी ये दिल अवारा था, कहाँ से कहाँ आ गए आज हम, वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था। 🎈🚖🎠🛴जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी 🍭🚑🏏🏀🌹🍏🍎🍥🍼✈️☔🎉🍧🍢🌿🌹🌹🙏

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