Manoj manu Sep 13, 2019

🚩🙏ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌸🌿🙏 बिनु सत्संग न हरी कथा तेहि बिनु मोह न भाग | मोह गए बिनु राम पद होए न दृढ अनुराग || श्री मद भागवत कथा-व्यास परम पूज्य पं श्री श्याम सुन्दर जी आचार्य 🌸(मेरे सहपाठी और परम मित्र) से श्री मदभागवत कथा श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसमें विभिन्न सुंदर कथा प्रसंगों ,सरल भावों, मघुर भजन संगीत के साथ कान्हा जी के नामकरण, पूतना प्रसंग, माखन चोरी, और मैया यशोदा -कान्हा जी के बीच मनोहारी सुंदर भावपूर्ण वात्सल्य भाव, कथा का वाचन किया गया,जिसमें - 🌿श्री कृष्ण जी की बाल लीलाओं और उनके भावों का सुंदर वर्णन, 🌿मनुष्य के प्रभाव और स्वभाव वाले जीवन की सुंदर व्याख्या, 🌿हम जहाँ भी हैं, जैसे भी हैं, जिस भी स्थिति में हों हमें हर पल हर क्षण अपने आराध्य का स्मरण रखना चाहिए, 🌿प्रभु के लिए सरतला कैसी हो, 🌿माता -पिता के प्रति हमारे कर्तव्यों का निर्वहन, 🌿गो वंश ,गौ माता का महत्व, 🌿 वास्तविक सुंदरता मन की होती है, 🌿जीवन की उचित दिशा क्या हो, 🌿अपनी मर्यादाऔं को कैसे निभायें , 🌿श्री गोवर्धन पर्वत पूजन , 🌿गिर्हस्थ आश्रम में रहते हुये ईश्वर भक्ति, इत्यादि का बहुत सुंदर वाचन किया गया, 🌿🌺राधे राधे जी 🌺🌿

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Manoj manu Sep 11, 2019

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Manoj manu Sep 10, 2019

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Manoj manu Sep 9, 2019

🚩🌿🙏ऊँ नमः शिवाय🌺🌿🙏 🌿🌼🎶शिव तांडव स्त्रोत ,महत्व :- भगवान शिव की आराधना व उपासना के लिए रचे गए सभी अन्‍य स्‍तोत्रों में रावण द्वारा गया गाया गया शिवतांडव स्तोत्र भगवान शिव को अत्‍यधिक प्रिय है, 🌸🌿 ऐसी मान्‍यता है कि शिवतांडव स्तोत्र द्वारा भगवान शिव की स्तुति करने से व्यक्ति को कभी भी धन-सम्पति की कमी नहीं होती, साथ ही व्‍यक्ति को उत्कृष्ट व्यक्तित्व की प्राप्ति होती है। यानी व्‍यक्ति का चेहरा तेजस्‍वी बनता है तथा उसके आत्‍मविश्‍वास में भी वृद्धि होती है। इस शिवतांडव स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करने से व्‍यक्ति को जिस किसी भी सिद्धि की महत्वकांक्षा होती है, भगवान शिव की कृपा से वह आसानी से पूर्ण हो जाती है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि इस स्तोत्र के नियमित पाठ से वाणी सिद्धि की भी प्राप्ति होती है। यानी व्‍यक्ति जो भी कहता है, वह वैसा ही घटित होने लगता है।  नृत्य, चित्रकला, लेखन, योग, ध्यान, समाधी आदि सिद्धियां भगवान शिव से ही सम्‍बंधित हैं, इसलिए शिवतांडव स्तोत्र का पाठ करने वाले को इन विषयों से सम्‍बंधित सफलता सहज ही प्राप्‍त होने लगती हैं। इतना ही नहीं, शनि को काल माना जाता है जबकि शिव महाकाल हैं, अत: शनि से पीड़ित व्‍यक्ति को इसके पाठ से बहुत लाभ प्राप्‍त है। साथ ही जिन लोगों की जन्‍म-कुण्‍डली में सर्प योग, कालसर्प योग या पितृ दोष होता है, उन लोगों के लिए भी शिवतांडव स्तोत्र  का पाठ करना काफी उपयोगी होता है, 🌸🌿🌿हर हर महादेव जी 🌿🌿🌺🌺 🌿🌿महादेव जी सदा कल्याण करें 🌿🌿

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Manoj manu Sep 7, 2019

🚩🌸🙏जय श्री गणेशाय नमः 🌸🌿🙏 वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ " एक स्मरण श्री गणेश जी का :--प्रथम पूज्य, आनंद, उत्साह और अपने आप में समग्र को समाहित करने वाले, रिद्धि सिद्धि के स्वामी, बुद्धि के दाता, छोटी सी मुस्कान और विना किसी विशेष पूजा बिधि से प्रसंनन होने बाले, स्थूल में सूकछम का रास्ता और ज्ञान देने वाले, चुटकियों में समस्या के समाधानकर्ता,कर्तव्य के निर्वहन का ज्ञान देने बाले, महान गृंथों की रचयिता, सभी के लिये समानता के सुन्दर भाव को बताने बाले, जीवन मूल्यों के महत्व को सार सारांश को समझाने बाले ,अनंत संभावनाओं के द्वार खोलने बाले देव हैं श्री गणेश जी , जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन। करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥ 🌸 गणपति विघ्नहर्ता हैं, इसलिए नाटिका से लेकर सभी प्रकार की पूजन, विवाह की , गृह प्रवेश जैसी समस्त विधियों के प्रारंभ में गणेश पूजन किया जाता है। ' पत्र अथवा अन्य कुछ लिखते समय सर्वप्रथ में॥ श्री गणेशाय नमः॥, ॥श्री सरस्वत्यै नमः ॥, ॥श्री गुरुभ्यो नमः ॥ किसी भी विषय का ज्ञान प्रथम बुद्धि द्वारा ही होता है व गणपति बुद्धि दाता हैं, इसलिए प्रथम ' ॥ श्री गणेशाय नमः ॥' लिखना चाहिए। विवेक बुद्धि उत्पन्न कर चित्त को शांत करनेवाले  ‘श्री गणेश ब्रह्मांड में विद्यमान दूषित शक्ति को आकर्षित करते हैं तथा मनुष्य की बुद्धि में विवेक उत्पन्न करते हैं । श्री गणेशोपासना संदेह को दृढ होने नहीं देती । बुद्धि स्थिर एवं चित्त शांत रहता है । बुद्धि से जो ज्ञान ग्रहण किया गया हो उसे शब्दबद्ध करना सरस्वती का कार्य है । सरस्वती को ज्ञानदेव ने ‘अभिनववाग्विलासिनी’ कहा है । महाभारत लिखने के लिए महर्षि व्यास को एक बुद्धिमान लेखक की आवश्यकता थी । यह कार्य करने के लिए उन्होंने श्री गणपति से ही प्रार्थना की थी। संतों द्वारा गौरवान्वित देवता :- विभिन्न साधनामार्गों के संत विभिन्न देवताओं के उपासक होते हैं, फिर भी सब संतों ने श्री गणेश की शरण जाकर याचना की है, उनका भावपूर्ण स्तवन किया है । सर्व संतों के लिए श्री गणेश अति पूजनीय देवता रहे । संत एकनाथजी ने भागवतटीका में श्री गणेश का प्रथम वंदन किया है – ‘ॐ अनादि आद्या । वेदवेदान्तविद्या । वंद्य ही परमावंद्या । स्वयंवेद्या श्रीगणेशा ॥’ संगीत तथा नृत्य में प्रवीण:- स्वरब्रह्म का आविष्कार अर्थात ओंकार । श्री गणेश को ‘ओंकारस्वरूप श्री गणेश’ के नाम से भी संबोधित किया है । वाक्देवता गणेश प्रसन्न होनेपर, वाक्सिद्धि प्राप्त हो जाती है । साधना को प्रारंभ की दिशा देना श्री गणपति किसी भी साधना को प्रारंभ की दिशा देने का कार्य करते हैं । 🌸बोलिये श्री गजानन महाराज की जय 🌸 🌿गणेश जी महाराज आप सभी के सारे मनोरथ पूर्ण करे, 🌸जय श्री गणेशाय नमः 🌼🌿🙏

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