Manoj manu Jul 16, 2019

🚩🌿🙏श्री कृष्ण शरणं ममं 🌺🌿🙏 🌿🌼गुरु ब्रह्म गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः गुरु साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः🌼🌿 आज गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर आप सभी को अनेकानेक हार्दिक शुभकामनाएं। और इस पुनीत अवसर पर प्रभु से प्रार्थना करते हैं, कि वे ऐसी कृपा करें कि हमारे जीवन में स्वयं आकर हमारे जीवन के हर पल के निर्णयों के समय हमारी बुद्धि और विवेक को जागरूक रखने के लिऐ हमारे हृदय में सदैव ही विराजमान रहें। और हमारे धर्म ग्रंथ श्रीगीता जी , श्रीरामचरितमानस जैसे अद्वितीय ग्रंथ सदैव ही हमारे जीवन में गुरु की भाँति मार्गदर्शन कराते रहें। यहि शुभाकाँक्षाओं एवं शुभप्रार्थना के साथ - पुनः गुरूपर्व की हार्दिक बधाईयाँ ,स्नेह वंदन नमन जी 🌺🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🙏

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Manoj manu Jul 11, 2019

🚩🌿🙏जय जय श्री राधे जी 🌺🙏 🌿🌷खुशहाल (खुश) कैसे रहें ,एक प्रयास :- जीवन में हम जो भी कार्य करते हैं वो खुशी की प्राप्ति के लिए ही करते हैं,और सदैव खुश रहना चाहते हैं परन्तु साथ ही हम ये भी सोचते हैं कि, खुश रहने के लिए कोई विशेष तरह के हालात होने चाहिये, तो आईये जानते हैं कि हम खुश कैसे रह सकते हैं :-- 🌿🌿हर पल अपने ईश्वर के निकट रहें 🌿🌿 (1) सबसे पहले तो हमें यह मानना होगा कि खुश रहना हमारी महत्वपूर्ण और बुनियादी जिम्मेदारी है, और उसको हमे पूरी भी करनी है , (2) :--खुशी हमारी मूल प्रकृति है ना कि दुखी रहना , इस प्रकृति की ही पहचान करना है, और उसका स्रोत कहीं और नहीं स्वयं हमारे भीतर ही है, (3):--चीजों के प्रति सही नजरिया अपनाना चाहिये, जो वास्तविक है उसकी पहचान करनी चाहिए, (4):-- हमें यह जानना होगा कि अपने मन में किन बातों को रखना है और किन को नहीं, (5):--- विचार प्रवाह में हमारा ध्यान सामान्यता:उस दिशा में जाता है जिसे हमारा मन महत्वपूर्ण मान लेता है, और हम स्वयं अपने मन को कष्टों का उद्गम स्थल बना लेते हैं, (6):-- अभिव्यक्त करना, यदि हम अपने जीवन में पीछे मुड़कर देखें जैसे कि बचपन में -तो हम पायेगें कि हमारे जीवन के खूबसूरत पल वे थे जब हमने खुशी को अभिव्यक्त किया था , (7):-- देने का भाव हमारा प्राकृतिक भाव है, ना कि संचय करना, इसको बढाना होगा, जो कि नि:ह स्वार्थ हो तो अति उत्तम होगा, (8):--अपने आप को जीवन कीै अहमियत का ग्यान करवाना, अपने मूल स्वरूप का आनंद लेना, जैसे कि कोई छोटा सा बालक प्राप्त करता है, (9):--जीवन की सही गुणवत्ता अधिक से अधिक शाँत और खुश रहने में है, ना कि मंहगे कपडे, अघिक सफलतायें, या कि बैंक बैलेंस में, (10):--किसी से किसी प्रकार की अपनी तुलना ना करें आप जैसे भी बहुत सुन्दर हैं अपने तन और मन से, और अपनी आर्थिक स्थिति से, (11):--जो बदला जा सके उसे बदलिये, जो बदला ना जा सके उसे स्वीकार कीजिये, और जो स्वीकारा न जा सके उससे दूर रहिये, (12):-- अपने कार्यों को खुशी प्राप्त करने के लिये ना करें , वरन उनको खुश होकर करें तो खुशी स्वयं ही मन को छू लेगी, (13):--पर्याप्ता का भाव, आत्म संतुष्टि का होना अनिवार्य है, आपके पास बहुत कुछ है, उसे पहचानना होगा, संतुष्ट होना चाहिए, (15) :--खुशी किसी वस्तु में नहीं है ,कोई साईकिल बाला भी खुश है तो कोई कार में बैठकर भी दु:खी , (16):-हमारे आस पास ऐसे बहुत से लोग होते हैं जो किसी कारण से खुश हैं, हम उनको देखकर भी खुश हो सकते हैं , (17):--अपने आस -पास के छोटे बच्चों से प्रेम पूर्वक बातें कीजिये ,उनकी भी सुनिये, मन खुश हो जाएगा, 🌿छोटी -छोटी खुशियों के पल निकले जाते रोज जहाँ, फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं, 🌿 तो हर पल खुश रहिये, मुस्कुराते रहिये आपको देखकर दुखी इंसान भी अपने दुःख भूलकर खुश हो जायेगे, जैसा कि हमारे साथ भी होता है, 🌿 "सोच बदलो तो सितारे बदल जायेंगे, नज़र को बदलो तो नजारे बदल जायेंगे, कश्तियाँ बदलने की जरूरत नहीं, दिशाओं को बदलो तो किनारे बदल जायेंगे " तो अपने चेहरे पे छोटी सी मुस्कान ला कर प्रेम पूर्वक बोल दीजिये 🌹राधे राधे जी 🌹🙏

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Manoj manu Jul 4, 2019

🚩🌿🙏जय जय श्री राधे जी 🌺🌿🙏 🌿"मौन " प्रकार, महत्व, विधि, और लाभ :-- 1)वाणी से :--वाणी को बश में रखना, नहीं बोलना, जरूरत के अनुसार ही बोलना , 2)मन से :--मन को स्थिर रखना, मन में बुरे बिचारों को नहीं लाना, अनात्म विचारों को त्यागना, आत्म(आध्यात्मिक) बिचारों को आत्मसाथ करना, बाह्य सुख की इक्षा से मुक्त होकर आँतरिक सुख में मस्त होना, 🌿मौन के लाभ:- (1)मौन शक्तिसंचय का एक अनूठा तरीका है। यह व्यक्ति को आध्यात्मिक दृष्टि से संपन्न बनाती है। मौन केवल आंतरिक दृष्टि से ही व्यक्ति को शक्ति संपन्न नहीं बनाता बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी यह शक्ति के अपव्यव को रोकता है। (2):--मौन के लाभ- मौन से मन की शक्ति बढ़ती है। शक्तिशाली मन में किसी भी प्रकार का भय, क्रोध, चिंता और व्यग्रता नहीं रहती। मौन का अभ्यास करने से सभी प्रकार के मानसिक विकार समाप्त हो जाते हैं। रात में नींद अच्छी आती है। (3):--इसके अतिरिक्त व्यक्ति लंबे समय तक ज्यादा सहज, सजग और तनाव रहित बना रहता है। इसके कारण कामकाज में होने वाली गलतियों को संभावना बहुत कम हो जाती है। (4):--मौन ऐसा उपाय है जिससे आंतरिक जगत के साथ बाहरी दुनिया में भी मदद मिलती है। इस उपाय से मन की चंचलता को नष्ट किया जा सकता है और जो भरपूर जिंदगी जीना चाहते हैं वह मौन से मन की शक्ति बढ़ा सकते हैं। (5):--अनियंत्रित बोली व्यक्ति को कई संकटों में फंसाती है। इसके कारण उसकी ऊर्जा यूं ही जाया हो जाती है।यदि सीमित और संयमित ढंग से वाणी का प्रयोग किया जाए तो यह व्यक्ति निरर्थक संघर्षों से बच जाता है, (6):--अनेक व्यसन से शरीर को बचाता है, स्वसथ़ शरीर में ही स्वसथ़ मन का वास होता है, (7):--ध्यान योग और मौन का निरंतर अभ्यास करने से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। (8):--जब तक वाणी को विश्राम नहीं देंगे तब तक मन शांत नहीं होगा, और जब तक मन शांत नहीं होगा ईश्वर भक्ति नहीं होगी, (9):--"अर्थहीन शब्दों से अर्थपूर्ण मौन अधिक अच्छा है, और भावहीन शब्दों से शब्दरहित भाव अच्छा है " (10) कैसे करें ,-क्या करें मौन में- मौन में सबसे पहले जुबान चुप होती है, लेकिन आप धीरे-धीरे मन को भी चुप करने का प्रयास करें। मन में चुप्पी जब गहराएगी तो आँखें, चेहरा और पूरा शरीर चुप और शांत होने लगेगा। तब इस संसार को नए सिरे से देखना शुरू करें। जैसे एक 2 साल का बच्चा देखता है। जरूरी है कि मौन रहने के दौरान सिर्फ श्वासों के आवागमन को ही महसूस करते हुए उसका आनंद लें। अवधि- वैसे तो मौन रहने का समय नियुक्ति नहीं किया जा सकता कहीं भी कभी भी और कितनी भी देर तक मौन रहकर मौन का लाभ पाया जा सकता है। किंतु फिर भी किसी भी नियुक्त समय और स्थान पर रहकर हर दिन ध्यान या मौन 20 मिनट से लेकर 1 घंटे तक किया जा सकता है। 🌺🌿🌿ऊँ शाँति शाँति शाँति 🌿🌿🌺🌺

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Manoj manu Jun 25, 2019

🚩🌿🙏जय श्री राम जी 🌺🌿🙏 🌿मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम 🌿न्यायप्रिय श्रीराम के गुण :-- भरत के लिए आदर्श भाई, हनुमान के लिए स्वामी, प्रजा के लिए नीति-कुशल व न्यायप्रिय राजा, सुग्रीव व केवट के परम मित्र और सेना को साथ लेकर चलने वाले व्यक्तित्व के रूप में भगवान राम को पहचाना जाता है। उनके इन्हीं गुणों के कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम से पूजा जाता है। भगवान राम विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहे। उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए सुखी राज्य की स्थापना की। स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। फिर चाहे राज्य त्यागने, बाली का वध करने, रावण का संहार करने या सीता को वन भेजने की बात ही क्यों न हो। दयालु स्वामी : - भगवान राम ने दया कर सभी को अपनी छत्रछाया में लिया। उनकी सेना में पशु, मानव व दानव सभी थे और उन्होंने सभी को आगे बढ़ने का मौका दिया। सुग्रीव को राज्य, हनुमान, जाम्बवंत व नल-नील को भी उन्होंने समय-समय पर नेतृत्व करने का अधिकार दिया। अपने दोस्तों से निभाया करीबी रिश्ता :- केवट हो या सुग्रीव, निषादराज या विभीषण। हर जाति, हर वर्ग के मित्रों के साथ भगवान राम ने दिल से करीबी रिश्ता निभाया। दोस्तों के लिए भी उन्होंने स्वयं कई संकट झेले। इतना ही नहीं शबरी के झूठे बेर खाकर प्रभु श्रीराम ने अपने भक्त के रिश्ते की एक मिसाल कायम की। सहनशील श्रीराम :- सहनशीलता एवं धैर्य भगवान राम का एक और गुण है। कैकेयी की आज्ञा से वन में चौदह वर्ष बिताना, समुद्र पर सेतु बनाने के लिए तपस्या करना, सीता को त्यागने के बाद राजा होते हुए भी संन्यासी की भांति जीवन बिताना उनकी सहनशीलता की पराकाष्ठा है। त्याग और समर्पण :- भगवान राम ने तीनों भाईयों लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के प्रति हमेसा त्याग और समर्पण का भाव रखा और स्नेह दिया। यही वजह थी कि भगवान राम के वनवास के समय लक्ष्मण उनके साथ वन गए और राम की अनुपस्थिति में राजपाट मिलने के बावजूद भरत ने भगवान राम के मूल्यों को ध्यान में रखकर सिंहासन पर रामजी की चरण पादुका रख जनता को न्याय दिलाया। कुशल प्रबंधक :- भगवान राम न केवल कुशल प्रबंधक थे, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाले थे। वे सभी को विकास का अवसर देते थे व उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते थे। उनके इसी गुण की वजह से लंका जाने के लिए उन्होंने व उनकी सेना ने पत्थरों का सेतु बना लिया था।🌸जय श्री राम जी 🌸 हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥ रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥ भावार्थ- हरि अनंत हैं (उनका कोई पार नहीं पा सकता) और उनकी कथा भी अनंत है। सब संत लोग उसे बहुत प्रकार से कहते-सुनते हैं। रामचंद्र के सुंदर चरित्र करोड़ों कल्पों में भी गाए नहीं जा सकते। 🙏प्रभु श्री राम चंद्र जी महाराज सदा सहाय करें 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🙏

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Manoj manu Jun 11, 2019

🚩🌿🙏जय माता दी 🌺🌿🙏 🌿मित्रों ,वर्तमान परिपेक्षय में मन को विचलित करने वाली घटनाओं ने अनेक प्रश्न खड़े कर दिये हैं, कुछ बिचार पंक्तियोंँ के रूप में प्रकट हुये हैं, सादर प्रस्तुत हैं :--बच्चे तो नादान हैं 🌿🌿 ना होने दो नजरों से ओझल बच्चे तो नादान हैं , हर पल रखो अपनी छाया में ,जाने कहाँ शैतान हैं , बालक भी कहाँ सुरक्षित ,मन का वहम निकालो तुम, समय ने ऐसी करवट ली है, इसको अब पहचान तुम, समझो अपनी जिम्मेदारी समय बडा बलबान है , ना होने दो नजरों से ओझल बच्चे तो नादान हैं , कौन है किसका ,कौन पराया मुश्किल ये पहचान है , रखो नजर हर पल बच्चों पर समय बडा बलबान है, गली -मुहल्ले में वो जब खेलें साथ सदा उनके रहना, डरना नहीं किसी से भी ,ये हर पल मन में रखना, परखो लोगों की नजरों को जाने कौन शैतान हैं, रखो नजर हर पल बच्चों पर, जाने कहाँ शैतान हैं, बेटी समझदार होने पर समझाओ अपनी मर्यादाऔं को, आधुनिकता की चहल पहल में भूल ना पाये कभी वो खुद को, बच्चे -तो मन अबोध हैं कोई भी उनको बहला सकता, बन जायें ढाल यदि हम ,क्या ऐसा नहीं हो सकता, रहो हमेसा संवादों में कहाँ गये - किससे मिलते , कौन हैं उनके मित्र और सहचर क्यूँ ना हम उनसे मिलते , उनके भी सुख -दु:ख में फिर हम साथ क्यूँ नहीं हो लेते , उनके लिए विश्वास में लेना यही समय की माँग है , ना होने दो नजरों से ओझल बच्चे तो नादान हैं बच्चे तो नादान हैं, बच्चे तो नादान हैं, बच्चे तो नादान हैं ,🌿🌿🌺🌺🌿🌿 जटिल प्रश्न :--जीवन की भागदौड़ सिर्फ बच्चों के लिए और समय नहीं है उन्हीं के लिए,❓ 🌿🌿🌿🌿 हरि ऊँ 🌿🌿🌿🌿🙏 🙏🌿रचयिता -मनोज "मनु "🌺🙏

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