Manoj manu Jun 11, 2019

🚩🌿🙏जय माता दी 🌺🌿🙏 🌿मित्रों ,वर्तमान परिपेक्षय में मन को विचलित करने वाली घटनाओं ने अनेक प्रश्न खड़े कर दिये हैं, कुछ बिचार पंक्तियोंँ के रूप में प्रकट हुये हैं, सादर प्रस्तुत हैं :--बच्चे तो नादान हैं 🌿🌿 ना होने दो नजरों से ओझल बच्चे तो नादान हैं , हर पल रखो अपनी छाया में ,जाने कहाँ शैतान हैं , बालक भी कहाँ सुरक्षित ,मन का वहम निकालो तुम, समय ने ऐसी करवट ली है, इसको अब पहचान तुम, समझो अपनी जिम्मेदारी समय बडा बलबान है , ना होने दो नजरों से ओझल बच्चे तो नादान हैं , कौन है किसका ,कौन पराया मुश्किल ये पहचान है , रखो नजर हर पल बच्चों पर समय बडा बलबान है, गली -मुहल्ले में वो जब खेलें साथ सदा उनके रहना, डरना नहीं किसी से भी ,ये हर पल मन में रखना, परखो लोगों की नजरों को जाने कौन शैतान हैं, रखो नजर हर पल बच्चों पर, जाने कहाँ शैतान हैं, बेटी समझदार होने पर समझाओ अपनी मर्यादाऔं को, आधुनिकता की चहल पहल में भूल ना पाये कभी वो खुद को, बच्चे -तो मन अबोध हैं कोई भी उनको बहला सकता, बन जायें ढाल यदि हम ,क्या ऐसा नहीं हो सकता, रहो हमेसा संवादों में कहाँ गये - किससे मिलते , कौन हैं उनके मित्र और सहचर क्यूँ ना हम उनसे मिलते , उनके भी सुख -दु:ख में फिर हम साथ क्यूँ नहीं हो लेते , उनके लिए विश्वास में लेना यही समय की माँग है , ना होने दो नजरों से ओझल बच्चे तो नादान हैं बच्चे तो नादान हैं, बच्चे तो नादान हैं, बच्चे तो नादान हैं ,🌿🌿🌺🌺🌿🌿 जटिल प्रश्न :--जीवन की भागदौड़ सिर्फ बच्चों के लिए और समय नहीं है उन्हीं के लिए,❓ 🌿🌿🌿🌿 हरि ऊँ 🌿🌿🌿🌿🙏 🙏🌿रचयिता -मनोज "मनु "🌺🙏

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Manoj manu Jun 3, 2019

🚩🌿🙏जय जय श्री राधे जी 🌿🌺🙏 🌿संकल्प - महत्वु,मंत्र, विधि, को जानते हैं : – किसी कार्य को पूर्ण करने के लिए द्रढ़ निश्चय कर लेना फिर चाहे परिस्तिथियाँ अनूकुल हो या प्रतिकूल , तब व्यक्ति के लिए उस कार्य की पूर्णता अंतिम लक्ष्य बन जाता है | यही संकल्प है | किन्तु पूजा – पाठ के समय संकल्प में द्रढ़ निश्चय के साथ -साथ ईश्वर से एक अरदास भी लगाई जाती है | पूजा पाठ में संकल्प का महत्व :-- हिन्दू धर्म में देवी देवताओ की पूजा के कई विधि विधान है | इन विधियों के पीछे ईश्वर की प्राप्ति के गुप्त मार्ग छिपे हुए है | हमें इन विधियों का अच्छे से अनुसरण करके पूजा करनी चाहिए जिससे कि हमें पूजा का अधिक से अधिक मनोवाँछित फल प्राप्त हो सके |पूजा में संकल्प के बारे में जानेंगे:- चाहे व्रत हो , या फिर कोई विशेष पूजा | यदि आप इन्हे कर रहे है तो फिर मजबूत इरादे (संकल्प )- के साथ करे | कैसे करे संकल्प :-- पूजा या व्रत शुरू करने से पहले दांये हाथ में जल, चावल और फूल और सिक्का ले ले | अब अपने इष्टदेव और स्वयं को साक्षी मानकर संकल्प करें | इसके लिए निचे दिया गया संस्कृत मंत्र बोल सकते है , संकल्प मंत्र :-- यह मंत्र किसी पंडित जी की मदद से ही बोले | इस मंत्र में कई जगह पर वैदिक कैलेंडर( पंचाँग) के अनुसार आप और आपकी जगह से जुड़ी जानकारियाँ काम में ली जाएगी | 🌿"‘ऊँ विष्णु र्विष्णुर्विष्णु : श्रीमद् भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्त्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेत वाराह कल्पै वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे युगे कलियुगे कलि प्रथमचरणे भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारत वर्षे भरत खंडे आर्यावर्तान्तर्गतैकदेशे —(अपने शहर नाम बोले )— नगरे —(अपने गाँव का नाम बोले )– ग्रामे वा बौद्धावतारे विजय नाम संवत्सरे श्री सूर्ये दक्षिणायने वर्षा ऋतौ महामाँगल्यप्रद मासोत्तमे शुभ भाद्रप्रद मासे शुक्ल पक्षे चतुर्थ्याम्‌ तिथौ भृगुवासरे हस्त नक्षत्रे शुभ योगे गर करणे तुला राशि स्थिते चन्द्रे सिंह राशि स्थिते सूर्य वृष राशि स्थिते देवगुरौ शेषेषु ग्रहेषु च यथा यथा राशि स्थान स्थितेषु सत्सु एवं ग्रह गुणगण विशेषण विशिष्टायाँ चतुर्थ्याम्‌ शुभ पुण्य तिथौ — +– गौत्रः –++– अमुक शर्मा, वर्मा, गुप्ता, दासो ऽहं मम आत्मनः श्रीमन्‌ महागणपति प्रीत्यर्थम्‌ यथालब्धोपचारैस्तदीयं पूजनं करिष्ये।”🌿 संकल्प नही करे तो क्या होता है :-- यदि किसी व्रत या पूजा पाठ से पहले आप संकल्प नही ले तो इसका फल देवताओ के राजा इंद्र को प्राप्त हो जाता है | अत: आपकी पूजा पूर्ण नही मानी जाती है | अत: आज से ही पूजा पाठ से पहले संकल्प लेना जरुर शुरू करे | 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🙏

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Manoj manu May 23, 2019

🚩🌿🙏जय श्री हरि जी 🌺🌿🙏 🌿🌿🌿सत्संग महिमा 🌿🌿🌿 🌿🌼🌿"सत्संग में बहुत लोग बैठते हैं -- पर सत्संग - - बहुत कम लोगौं में बैठता है, "🌼 बिनु सतसंग न हरि कथा तेहि बिनु मोह न भाग । मोह गएँ बिनु राम पद होइ न दृढ़ अनुराग ।। सत्संग के बिना हरि की कथा सुनने को नहीं मिलती, उसके बिना मोह नहीं भागता और मोह के गये बिना श्रीरामचन्द्र जी के चरणों में दृढ़ [अचल] प्रेम नहीं होता । जीव की उन्नति सत्संग से ही होती है. सत्संग से उसका स्वभाव परिवर्तित हो जाता है। सत्संग उसे नया जन्म देता है। जैसे, कचरे में चल रही चींटी यदि गुलाब के फूल तक पहुँच जाय तो वह देवताओं के मुकुट तक भी पहुँच जाती है। ऐसे ही महापुरूषों के संग से नीच व्यक्ति भी उत्तम गति को पा लेता है। परमात्मा की प्राप्ति और प्रभु के प्रति प्रेम उत्पन्न करने एवं बढ़ाने के लिए साधु पुरूष का संग करना और उनके उपदेशों को श्रद्धा व प्रेम से सुनकर तदनुसार आचरण करना, यह सत्संग है। जैसा संग, वैसा रंग। संग से ही मनुष्य की पहचान की जाती है। अतः अपनी उन्नति एवं वास्तविक सुख की प्राप्ति के लिए सदैव सत्संग करना चाहिए। शास्त्र कहते हैं कि मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है। मन शुद्ध कैसे होता है ? मन शुद्ध होता है विवेक से और विवेक कहाँ से मिलता है ?❓ बिनु सत्संग विवेक न होई। रामकृपा बिनु सुलभ न सोई।। सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और भगवान की कृपा के बिना सच्चे संत नहीं मिलते। तोते की तरह रट-रटकर बोलने वाले तो बहुत मिलते हैं, परंतु उस 'सत्' तत्त्व का अनुभव करने वाले महापुरूष विरले ही मिलते हैं। आत्मज्ञान को पाने के लिए रामकृपा, सत्संग और सदगुरू की कृपा आवश्यक है। जीवन में इन तीन बातों का होना अनिवार्य हैः-- सत्संग, भगवद् भजन और परोपकार। इनमें भी सत्संग की बड़ी भारी महिमा है। सत्संग का अर्थ है, सत् वस्तु का ज्ञान। परमात्मा की प्राप्ति और प्रभु के प्रति प्रेम उत्पन्न करने तथा बढ़ाने के लिए सत्पुरूषों को श्रद्धा एवं प्रेम से सुनना – यही सत्संग है। तुलसीदास जी ने कहा हैः जाहि बड़ाई चाहिए, तजे न उत्तम साथ। ज्यों पलास संग पान के, पहुँचे राजा हाथ।। जैसे, पलाश के फूल में सुगंध नहीं होने से उसे कोई पूछता नही है, परंतु वह भी जब पान का संग करता है तो राजा के हाथ तक भी पहुँच जाता है। इसी प्रकार जो उन्नति करना चाहता हो उसे महापुरूषों का संग करना चाहिए। 🌿🌿जय जय श्री राधे जी 🌿🌿🙏

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