*💎 बहुत सुन्दर पंक्ति 👌 जो मुस्कुरा😊 रहा है, उसे दर्द ने पाला होगा.., जो चल रहा है, उसके पाँव में छाला होगा., बिना संघर्ष के इन्सान चमक नहीं सकता, यारों., जो जलेगा उसी दिये में तो, उजाला होगा...। उदास होने के लिए उम्र पड़ी है, नज़र उठाओ सामने ज़िंदगी खड़ी है 🌹Good Morning 🌹 🙏🙏* *जय श्री राधे राधे जी 🙏 *प्रणाम का महत्व* 🙏 💎💎💎💎💎💎💎💎 *महाभारत का युद्ध चल रहा था -* *एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते हैं कि -* *"मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा"* *उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई -* *भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|* *तब -* *श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो -* *श्रीकृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए -* *शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो -* *द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने* - *"अखंड सौभाग्यवती भव" का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !!* *"वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्रीकृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?* *तब द्रोपदी ने कहा कि -* *"हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया -* *भीष्म ने कहा -* *"मेरे एक वचन को मेरे ही दूसरे वचन से काट देने का काम श्रीकृष्ण ही कर सकते है"* *शिविर से वापस लौटते समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि -* *"तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है "* - *" अगर तुम प्रतिदिन भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रोणाचार्य, आदि को प्रणाम करती होती और दुर्योधन- दुःशासन, आदि की पत्नियां भी पांडवों को प्रणाम करती होंती, तो शायद इस युद्ध की नौबत ही न आती "* - *......तात्पर्य्......* *वर्तमान में हमारे घरों में जो इतनी समस्याए हैं उनका भी मूल कारण यही है कि -* *"जाने अनजाने अक्सर घर के बड़ों की उपेक्षा हो जाती है "* *" यदि घर के बच्चे और बहुएँ प्रतिदिन घर के सभी बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें तो, शायद कि

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*कबीर के दोहे जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,। मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ ।। अर्थ : जो प्रयत्न करते हैं, वे कुछ न कुछ वैसे ही पा ही लेते हैं जैसे कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी में जाता है और कुछ ले कर आता है. लेकिन कुछ बेचारे लोग ऐसे भी होते हैं जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं और कुछ नहीं पाते. 🚩🚩🕉🔯🚩🚩 💖🌹🌹💖 बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो अत्यंत गरीब परिवार का एक  बेरोजगार युवक  नौकरी की तलाश में  किसी दूसरे शहर जाने के लिए  रेलगाड़ीसे  सफ़र कर रहा था | घर में कभी-कभार ही सब्जी बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटीयां ही रखी थी | आधा रास्ता गुजर जाने के बाद उसे भूख लगने लगी, और वह टिफिन में से रोटीयां निकाल कर खाने लगा | उसके खाने का तरीका कुछ अजीब था , वह रोटी का  एक टुकड़ा लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी के साथ कुछ और भी खा रहा हो, जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटीयां थीं!! उसकी इस हरकत को आस पास के और दूसरे यात्री देख कर हैरान हो रहे थे | वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता | सभी सोच रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था | आखिरकार  एक व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने उससे पूछ ही लिया की भैया तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, तुम्हारे पास सब्जी तो है ही नहीं फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी हो | तब उस युवक  ने जवाब दिया, “भैया , इस खाली ढक्कन में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन में यह सोच कर खा रहा हू की इसमें बहुत सारा आचार है,  मै आचार के साथ रोटी खा रहा हू  |”  फिर व्यक्ति ने पूछा , “खाली ढक्कन में आचार सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार का स्वाद आ रहा है ?” “हाँ, बिलकुल आ रहा है , मै रोटी  के साथ अचार सोचकर खा रहा हूँ और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा है |”, युवक ने जवाब दिया|  उसके इस बात को आसपास के यात्रियों ने भी सुना, और उन्ही में से एक व्यक्ति बोला , “जब सोचना ही था तो तुम आचार की जगह पर मटर-पनीर सोचते, शाही गोभी सोचते….तुम्हे इनका स्वाद मिल जाता | तुम्हारे कहने के मुताबिक तुमने आचार सोचा तो आचार का स्वाद आया तो और स्वादिष्ट चीजों के बारे में सोचते तो उनका स्वाद आता | सोचना ही था

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*जो प्राणी इन हनुमान जी के द्वादश नामो का नित्य पाठ करता है,,,उसे किसी प्रकार का कोई कष्ट नही होता अपितु,,वह प्राणी निरोग ,निडर,,रहता है,,,सभी बिगड़े काम बनते है,,,जय श्री राम ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री अंजनीपुत्राय नमः ॐ श्री वायु पुत्राय नमः ॐ श्री महा बलये नमः ॐ श्री रामेष्टाय नमः ॐ श्री फाल्गुन सखाय नमः ॐ श्री पिंगाक्षाय नमः ॐ श्री अमित विक्रमाय नमः ॐ श्री उदधि क्रमनाय नमः ॐ श्री सीता शोक विनाशाय नमः ॐ श्री लक्ष्मण प्राण दात्रये नमः ॐ श्री दशग्रीव दर्पहाय नमः जय श्री राम ,जय श्री राम, जय श्री राम,जय श्री राम, 🚩🕉🔯🚩 Mamta Kapoor: *🌲🌾🌾🌻🌹🌻🌾🌾 दुःख में स्वयं की एक अंगुली आंसू पोंछती है ; और सुख में दसो अंगुलियाँ ताली बजाती है ; जब स्वयं का शरीर ही ऐसा करता है तो दुनिया से क्या गिला-शिकवा करना...!! अतः हँसते रहिये, हँसाते रहिये और सबका भला करते रहिये..!! 💐💐💐 और एक बात पर ध्यान देना 👇🏻 आनंद का क्षण और अन्न का कण कभी मत छोड़ियो जहा मिले जब मिले जैसा मिले जितना मिले लेते रहिये। 🍃🍃🍃🌺🌺🍃🍃🍃 *_💐" सुंदरता से बढ़कर चरित्र है प्रेम से बढ़कर त्याग है ,, 🌿🍁🌿 " दौलत से बढ़कर मानवता है परंतु सुंदर रिश्ते से बढ़कर दुनियाँ में कुछ भी नहीं है ,,💐_* 🐾स्नेह वंदन🐾 😊🍀🙏🙏🍀😊 [🌹🌷Mamta Kapoor: *..🌹🌻🌾 अनमोल-मोती 🌾🌻🌹 चींटी से मेहनत सीखिए बगुले से तरकीब और मकड़ी से कारीगरी। "अपने विकास के लिए अंतिम समय तक संघर्ष कीजिए। संघर्ष ही जीवन है। "अपनी जिंदगी के किसी भी दिन को मत कोसना"...!!! 🙏🏻 "क्योंकि;" 🙏🏻 "अच्छा दिन खुशियाँ लाता है"..!!! "और बुरा दिन अनुभव;."..!!! "एक सफल जिंदगी के लिए दोनों जरूरी होती है"..!! .........✍ 🌺🌻☘सुप्रभात जी☘🌻🌺 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 आपका दिन शुभ और मंगलमय हो। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹* जय श्री राम ,जय श्री राम, जय श्री राम,जय श्री राम, 🚩🕉🔯🚩

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*🌹🌹🌹💞🍀rade rade ji🍀💞🌹🌹🌹 👭👭👭👭👭👭👭👭👭👭 👭 👭 👭 ⚓ जमीन अच्छी है 👭 👭 खाद अच्छा हो 👭 👭 परंतु 'पानी' अगर 👭 👭 'खारा' हो तो 👭 👭 फूल खिलते नहीं । 👭 👭 ⚓ भाव अच्छे हो 👭 👭 कर्म भी अच्छे हो 👭 👭 मगर 'वाणी' खराब हो तो 👭 👭 सम्बन्ध' कभी टिकते नहीं। 👭 💐💐 ❤ मन ऐसा रखो कि किसी को बुरा न लगे।💕 दिल ऐसा रखो कि किसी को दुःखी न करें। रिश्ता ऐसा रखो कि उसका अंत न हो 👌कोई भी व्यक्ति हमारा मित्र या शत्रु बनकर संसार में नही आता.. हमारा व्यवहार और शब्द ही लोगो को मित्र और शत्रु बनाते है.. *मायमन्दिर ग्रुप के सभी सम्मानित मित्रों, भाईयों एवं बहनों को मेरा सादर नमन👏।शुभ रविवार🎊🌹खुश रहे सुखी रहे 🙌🥰🎊🌹💐राम राम जी 🙏 आपका दिन मंगलमय हो🙌🌹💐🎊🙏 *"रोज़ सुबह उठकर एक बात याद रखें"* *"Return Ticket"* *"तो कन्फर्म है"* *"इसलिये मन भरकर जीयें"* *"मन में भरकर ना जीयें।"* *छोड़िए शिकायत..* *शुक्रिया अदा कीजिये...* *जितना है पास..* *पहले उसका मजा लीजिये...* *चाहे जिधर से गुज़रिये* *"मीठी" सी हलचल मचा दीजिये,* *उम्र का हर एक दौर मज़ेदार है* *अपनी उम्र का मज़ा लीजिये.* *🙏🏻शुभ प्रभात 🙏🏻*

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*🌷🌺🌸🌹🙏🙏🌹🌸🌺🌷 *धैर्य होना* *अत्यंत आवश्यक है*... 🍀🌼🍀🌼🍀👏🍀🌼🍀🌼 *माली यदि किसी पेड़ को* *सौ घड़े पानी से भी सीचे* *तब भी फल तो* *मौसम आने पर ही लगेगा*... 🍁🌻🍁🌻🍁🌻🍁🌻🍁🌻 *लंबा धागा और लंबी जुबान हमेशा उलझ जाती है....*_ 🍃🌸🍃🌸🍃🌸🍃🌸🍃🌸 _*इसलिए धागे को लपेट कर रखें और जुबान को समेट कर रखें....!!!!*_ 🌱🌷🌱🌷🌱🌷🌱🌷🌱🌷 *मैँ और मेरा भगवान* *दोनो ही बङे 'भुलक्कङ' है* 🌿🌺🌿🌺🌿🌺🌿🌺🌿🌺 *वो मेरी 'गलतियाँ' भूल जाते है* *और मै उनकी 'मेहरबानियाँ'*..!! *सब दुःख दूर होने* *के बाद मन प्रसन्न होगा* *ये हमारा भ्रम है..!* 🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁 *मन को प्रसन्न रखें* *सब दुःख दूर हो जायेंगे* *ये हकीकत है..!!* 🌷🌸🌷🌸🌷🌸🌷🌸🌷🌸 ☀🐚🐾🐾🐚☀ _*☀स्नेह वंदन ☀️*_ _*🕉🌹🙏 शुभ दोपहर🙏🌹🕉*_ _*💛🧡🧡💛*_ _*💚💙जय माता दी💙💚*_ *💚💛व्यस्त रहे,मस्त रहे, स्वस्थ रहे।💛💚* *💜😊""सदा मुस्कुराते रहिये""😊💜* *_💓💗आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो💗💓_* 🌴🌲🌺🌸🌷🌻👏👏🌻🌷🌸🌺🌲🌴*

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बिना पैसे की मुफ्त सलाह। डॉक्टर कभी भी नहीं बताएगा आप से फीस पर फीस लेता रहेगा मगर माजरा कुछ और हैं पढ़िए।👏🏻🌻👏🏻🛴🚲🏎🚘✈🚨🚓 👨‍🏫👩‍🏫 सभी *वरिष्ठ नागरिक* (55 से ऊपर की उम्र के) कृपया अवश्य पढ़ें, हो सकता है आपके लिए फायदेमंद हो .. *आप जानते हैं कि मन चाहे कितना ही जोशीला हो पर साठ की उम्र पार होने पर यदि आप अपनेआप को फुर्तीला और ताकतवर समझते हों तो यह गलत है। वास्तव में ढलती उम्र के साथ शरीर उतना ताकतवर और फुर्तीला नहीं रह जाता।* आपका शरीर ढलान पर होता है, जिससे ‘हड्डियां व जोड़ कमजोर होते हैं, पर *कभी-कभी मन भ्रम बनाए रखता है कि ‘ये काम तो मैं चुटकी में कर लूँगा’।* पर बहुत जल्दी सच्चाई सामने आ जाती है मगर एक नुकसान के साथ। सीनियर सिटिजन होने पर जिन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए, ऐसी कुछ टिप्स दे रहा हूं। -- *धोखा तभी होता है जब मन सोचता है कि ‘कर लूंगा’ और शरीर करने से ‘चूक’ जाता है। परिणाम एक एक्सीडेंट और शारीरिक क्षति* ये क्षति फ्रैक्चर से लेकर ‘हेड इंज्यूरी’ तक हो सकती है। यानी कभी-कभी जानलेवा भी हो जाती है। -- *इसलिए जिन्हें भी हमेशा हड़बड़ी में काम करने की आदत हो, बेहतर होगा कि वे अपनी आदतें बदल डालें।* *भ्रम न पालें, सावधानी बरतें क्योंकि अब आप पहले की तरह फुर्तीले नहीं रहे।* छोटी सी चूक कभी बड़े नुक़सान का कारण बन जाती है। -- *सुबह नींद खुलते ही तुरंत बिस्तर छोड़ खड़े न हों, क्योंकि आँखें तो खुल जाती हैं मगर शरीर व नसों का रक्त प्रवाह पूर्ण चेतन्य अवस्था में नहीं हो पाता ।* अतः पहले बिस्तर पर कुछ मिनट बैठे रहें और पूरी तरह चैतन्य हो लें। कोशिश करें कि बैठे-बैठे ही स्लीपर/चप्पलें पैर में डाल लें और खड़े होने पर मेज या किसी सहारे को पकड़कर ही खड़े हों। अक्सर यही समय होता है डगमगाकर गिर जाने का। -- गिरने की सबसे ज्यादा घटनाएं बाथरुम/वॉशरुम या टॉयलेट में ही होती हैं। आप चाहे अकेले हों, पति/पत्नी के साथ या संयुक्त परिवार में रहते हों लेकिन बाथरुम में अकेले ही होते हैं। -- *यदि आप घर में अकेले रहते हों, तो और अधिक सावधानी बरतें क्योंकि गिरने पर यदि उठ न सके तो दरवाजा तोड़कर ही आप तक सहायता पहुँच सकेगी, वह भी तब जब आप पड़ोसी तक समय से सूचना पहुँचाने में सफल हो सकेंगे।* — *याद रखें बाथरुम में भी मोबाइल साथ हो ताकि वक्त जरुरत काम आ सके।* -- देशी शौचालय के बजाय हमेशा यूरोपियन कमोड वाले शौचालय का ही इस्तेमाल करें। यदि न हो तो समय रहते बदलवा लें, इसकी तो जरुरत पड़नी ही है, अभी नहीं तो कुछ समय बाद। संभव हो तो कमोड के पास एक हैंडिल लगवा लें। कमजोरी की स्थिति में इसे पकड़ कर उठने के लिए ये जरूरी हो जाता है। बाजार में प्लास्टिक के वेक्यूम हैंडिल भी मिलते हैं, जो टॉइल जैसी चिकनी सतह पर चिपक जाते हैं, पर *इन्हें हर बार इस्तेमाल से पहले खींचकर जरूर जांच-परख लें।* -- *हमेशा आवश्यक ऊँचे स्टूल पर बैठकर ही नहायें।* बाथरुम के फर्श पर रबर की मैट जरूर बिछाकर रखें ताकि आप फिसलन से बच सकें। -- *गीले हाथों से टाइल्स लगी दीवार का सहारा कभी न लें, हाथ फिसलते ही आप ‘डिस-बैलेंस’ होकर गिर सकते हैं।* -- बाथरुम के ठीक बाहर सूती मैट भी रखें जो गीले तलवों से पानी सोख ले। कुछ सेकेण्ड उस पर खड़े रहें फिर फर्श पर पैर रखें वो भी सावधानी से। -- *अंडरगारमेंट हों या कपड़े, अपने चेंजरूम या बेडरूम में ही पहनें। अंडरवियर, पाजामा या पैंट खडे़-खडे़ कभी नहीं पहनें।* हमेशा दीवार का सहारा लेकर या बैठकर ही उनके पायचों में पैर डालें, फिर खड़े होकर पहनें, वर्ना दुर्घटना घट सकती है। *कभी-कभी स्मार्टनेस की बड़ी कीमत चुकानी पड़ जाती है।* -- अपनी दैनिक जरुरत की चीजों को नियत जगह पर ही रखने की आदत डाल लें, जिससे उन्हें आसानी से उठाया या तलाशा जा सके। *भूलने की आदत हो, तो आवश्यक चीजों की लिस्ट मेज या दीवार पर लगा लें, घर से निकलते समय एक निगाह उस पर डाल लें, आसानी रहेगी* -- जो दवाएं रोजाना लेनी हों, उनको प्लास्टिक के प्लॉनर में रखें जिससे जुड़ी हुई डिब्बियों में हफ्ते भर की दवाएँ दिन-वार के साथ रखी जाती हैं। *अक्सर भ्रम हो जाता है कि दवाएं ले ली हैं या भूल गये।प्लॉनर में से दवा खाने में चूक नहीं होगी।* -- *सीढ़ियों से चढ़ते उतरते समय, सक्षम होने पर भी, हमेशा रेलिंग का सहारा लें, खासकर ऑटोमैटिक सीढ़ियों पर।* ध्यान रहे अब आपका शरीर आपके मन का *ओबिडियेंट सरवेन्ट* नहीं रहा। — बढ़ती आयु में कोई भी ऐसा कार्य जो आप सदैव करते रहे हैं, उसको बन्द नहीं करना चाहिए। कम से कम अपने से सम्बन्धित अपने कार्य स्वयं ही करें। — *नित्य प्रातःकाल घर से बाहर निकलने, पार्क में जाने की आदत न छोड़ें, छोटी मोटी एक्सरसाइज भी करते रहें। नहीं तो आप योग व व्यायाम से दूर होते जाएंगे और शरीर के अंगों की सक्रियता और लचीला पन कम होता जाएगा। हर मौसम में कुछ योग-प्राणायाम अवश्य करते रहें।* — *घर में या बाहर हुकुम चलाने की आदत छोड़ दें। अपना पानी, भोजन, दवाई इत्यादि स्वयं लें जिससे शरीर में सक्रियता बनी रहे।* बहुत आवश्यक होने पर ही दूसरों की सहायता लेनी चाहिए। — *घर में छोटे बच्चे हों तो उनके साथ अधिक समय बिताएं, लेकिन उनको अधिक टोका-टाकी न करें। उनको प्यार से सिखायें।* -- *ध्यान रखें कि अब आपको सब के साथ एडजस्ट करना है न कि सब को आपसे।* -- इस एडजस्ट होने के लिए चाहे, बड़ा परिवार हो, छोटा परिवार हो या कि पत्नी/पति हो, मित्र हो, पड़ोसी या समाज। *एक मूल मंत्र सदैव उपयोग करें।* 1. *नोन* अर्थात नमक। भोजन के प्रति स्वाद पर नियंत्रण रखें। 2. *मौन* कम से कम एवं आवश्यकता पर ही बोलें। 3. *कौन* (मसलन कौन आया कौन गया, कौन कहां है, कौन क्या कर रहा है) अपनी दखलंदाजी कम कर दें। *नोन, मौन, कौन* के मूल मंत्र को जीवन में उतारते ही *वृद्धावस्था* प्रभु का वरदान बन जाएगी जिसको बहुत कम लोग ही उपभोग कर पाते हैं। *कितने भाग्यशाली हैं आप, इसको समझें।* *कृपया इस संदेश को अपने घर, रिश्तेदारों, आसपड़ोस के वरिष्ठ सदस्यों को भी अवश्य प्रेषित करें।* *Golden💛Health*🙏💲

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*🌄🌅🌞🌻🌷🙏⚜️⚜️🙏🌷🌻🌞🌅🌄 _*🔔१९🔔 अक्टूबर 🔔 शनिवार🔔२०१९🔔*_ 🌱🌷🌱🌷🌱🌷🌱🌷🌱🌷 *मंजिल इंसान के हौसले आजमाती है* *सपनों के परदे,* *आंखों से हटाती है* *किसी भी बात से हिम्मत* *ना हारना* *ठोकर ही इंसान को चलना* *सिखाती है* 🌱🌼🌱🌼🌱🌼🌱🌼🌱🌼 🙏💐🌞 *सुबह की राम राम* 🌞💐🙏 🌞 *सुप्रभात* 🌞 💐*शुभ शनिवार*💐 🌹 *आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो* 🌹 🙏🍀🌺🌼🌻🌷🔱🔱🌷🌻🌼🌺🍀 *ॐ नमश्रीमन्नारायण नमः ✍️अर्जुन ने अपने-आपको श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया था| अर्जुन होता हुआ भी, नहीं था, इसलिए कि उसने जो कुछ किया, अर्जुन के रूप में नहीं, श्रीकृष्ण के सेवक के रूप में किया| सेवक की चिंता स्वामी की चिंता बन जाती है| अर्जुन का युद्ध अपने ही पुत्र बब्रुवाहन के साथ हो गया, जिसने अर्जुन का सिर धड़ से अलग कर दिया... और कृष्ण दौड़े चले आए... उनके प्रिय सखा और भक्त के प्राण जो संकट में पड़ गए थे| अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा बब्रुवाहन ने पकड़ लिया और घोड़े की देखभाल की जिम्मेदारी अर्जुन पर थी| बब्रुवाहन ने अपनी मां चित्रांगदा को वचन दिया था कि मैं अर्जुन को युद्ध में परास्त करूंगा, क्योंकि अर्जुन चित्रांगदा से विवाह करने के बाद लौटकर नहीं आया था| और इसी बीच चित्रांगदा ने बब्रुवाहन को जन्म दिया था| चित्रांगदा अर्जुन से नाराज थी और उसने अपने पुत्र को यह तो कह दिया था कि तुमने अर्जुन को परास्त करना है लेकिन यह नहीं बताया था कि अर्जुन ही तुम्हारा पिता है... और बब्रुवाहन मन में अर्जुन को परास्त करने का संकल्प लिए ही बड़ा हुआ| शस्त्र विद्या सीखी, कामाख्या देवी से दिव्य बाण भी प्राप्त किया, अर्जुन के वध के लिए| और अब बब्रुवाहन ने अश्वमेध के अश्व को पकड़ लिया तो अर्जुन से युद्ध अश्वयंभावी हो गया| भीम को बब्रुवाहन ने मूर्छित कर दिया| और फिर अर्जुन और बब्रुवाहन का भीषण संग्राम हुआ| अर्जुन को परास्त कर पाना जब असंभव लगा तो बब्रुवाहन ने कामाख्या देवी से प्राप्त हुए दिव्य बाण का उपयोग कर अर्जुन का सिर धड़ से अलग कर दिया| श्रीकृष्ण को पता था कि क्या होने वाला है, और जो कृष्ण को पता था, वही हो गया| वे द्वारिका से भागे-भागे चले आए| दाऊ को कह दिया, "देर हो गई, तो बहुत देर हो जाएगी, जा रहा हूं|" कुंती विलाप करने लगी... भाई विलाप करने लगे... अर्जुन पांडवों का बल था| आधार था, लेकिन जब अर्जुन ��

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❤🌹*"कदर" होती हैं "इंसान" की "जरूरत" पड़ने पर ही, बिना ज़रूरत के तो "हीरे" भी "तिज़ोरी" में रहते हैं... रिश्तों को "जेबो" में नहीं,, हुज़ूर "दिलों" में रखिए... क्योंकि "वक़्त" से "शातिर",, कोई "जेबकतरा" नहीं होता.!!! 🙏 भक्त के अधीन भगवान.....👌 एक कसाई था सदना। वह बहुत ईमानदार था, वो भगवान के नाम कीर्तन में मस्त रहता था। यहां तक की मांस को काटते-बेचते हुए भी वह भगवद्नाम गुनगुनाता रहता था। एक दिन वह अपनी ही धुन में कहीं जा रहा था, कि उसके पैर से कोई पत्थर टकराया। वह रूक गया, उसने देखा एक काले रंग के गोल पत्थर से उसका पैर टकरा गया है। उसने वह पत्थर उठा लिया व जेब में रख लिया, यह सोच कर कि यह माँस तोलने के काम आयेगा। वापिस आकर उसने वह पत्थर माँस के वजन को तोलने के काम में लगाया। कुछ ही दिनों में उसने समझ लिया कि यह पत्थर कोई साधारण नहीं है। जितना वजन उसको तोलना होता, पत्थर उतने वजन का ही हो जाता है। धीरे-धीरे यह बात फैलने लगी कि सदना कसाई के पास वजन करने वाला पत्थर है, वह जितना चाहता है, पत्थर उतना ही तोल देता है। किसी को एक किलो मांस देना होता तो तराजू में उस पत्थर को एक तरफ डालने पर, दूसरी ओर एक किलो का मांस ही तुलता। अगर किसी को दो किलो चाहिए हो तो वह पत्थर दो किलो के भार जितना भारी हो जाता। इस चमत्कार के कारण उसके यहां लोगों की भीड़ जुटने लगी। भीड़ जुटने के साथ ही सदना की दुकान की बिक्री बढ़ गई। बात एक शुद्ध ब्राह्मण तक भी पहुंची। हालांकि वह ऐसी अशुद्ध जगह पर नहीं जाना चाहता थे, जहां मांस कटता हो व बिकता हो। किन्तु चमत्कारिक पत्थर को देखने की उत्सुकता उसे सदना की दुकान तक खींच लाई । दूर से खड़ा वह सदना कसाई को मीट तोलते देखने लगा। उसने देखा कि कैसे वह पत्थर हर प्रकार के वजन को बराबर तोल रहा था। ध्यान से देखने पर उसके शरीर के रोंए खड़े हो गए। भीड़ के छटने के बाद ब्राह्मण सदना कसाई के पास गया। ब्राह्मण को अपनी दुकान में आया देखकर सदना कसाई प्रसन्न भी हुआ और आश्चर्यचकित भी। बड़ी नम्रता से सदना ने ब्राह्मण को बैठने के लिए स्थान दिया और पूछा कि वह उनकी क्या सेवा कर सकता है! ब्राह्मण बोला- “तुम्हारे इस चमत्कारिक पत्थर को देखने के लिए ही मैं तुम्हारी दुकान पर आया हूँ, या युँ कहें कि ये चमत्कारी पत्थर ही मुझे खींच कर तुम्हारी दुकान पर ले आया है।" *बातों ही बातों में उन्होंने सदना कसाई को बताया कि जिसे पत्थर समझ कर वो माँस तोल रहा है, वास्तव में वो शालीग्राम जी हैं, जोकि भगवान का स्वरूप होता है। शालीग्राम जी को इस तरह गले-कटे मांस के बीच में रखना व उनसे मांस तोलना बहुत बड़ा पाप है।* सदना बड़ी ही सरल प्रकृति का भक्त था। ब्राह्मण की बात सुनकर उसे लगा कि अनजाने में मैं तो बहुत पाप कर रहा हूं। *अनुनय-विनय करके सदना ने वह शालिग्राम उन ब्राह्मण को दे दिया और कहा कि “आप तो ब्राह्मण हैं, अत: आप ही इनकी सेवा-परिचर्या करके इन्हें प्रसन्न करें।* मेरे योग्य कुछ सेवा हो तो मुझे अवश्य बताएं।“ *ब्राह्मण उस शालीग्राम शिला को बहुत सम्मान से घर ले आए। घर आकर उन्होंने श्रीशालीग्राम को स्नान करवाया, पँचामृत से अभिषेक किया व पूजा-अर्चना आरम्भ कर दी।* कुछ दिन ही बीते थे कि उन ब्राह्मण के स्वप्न में श्री शालीग्राम जी आए व कहा- *हे ब्राह्मण! मैं तुम्हारी सेवाओं से प्रसन्न हूं, किन्तु तुम मुझे उसी कसाई के पास छोड़ आओ।* स्वप्न में ही ब्राह्मण ने कारण पूछा तो उत्तर मिला कि- *तुम मेरी अर्चना-पूजा करते हो, मुझे अच्छा लगता है, परन्तु जो भक्त मेरे नाम का गुणगान - कीर्तन करते रहते हैं, उनको मैं अपने-आप को भी बेच देता हूँ। सदना तुम्हारी तरह मेरा अर्चन नहीं करता है परन्तु वह हर समय मेरा नाम गुनगुनाता रहता है जोकि मुझे अच्छा लगता है, इसलिए तो मैं उसके पास गया था।* ब्राह्मण अगले दिन ही, सदना कसाई के पास गया व उनको प्रणाम करके, सारी बात बताई व श्रीशालीग्रामजी को उन्हें सौंप दिया। *ब्राह्मण की बात सुनकर सदना कसाई की आंखों में आँसू आ गए। मन ही मन उन्होंने माँस बेचने-खरीदने के कार्य को तिलांजली देने की सोची और निश्चय किया कि यदि मेरे ठाकुर को कीर्तन पसन्द है, तो मैं अधिक से अधिक समय नाम-कीर्तन ही करूंगा l* इस संदेश को सिर्फ पड़कर भूल मत जाइएगा , हो सके तो मेरी तरह आप भी शेयर कर अपना जीवन धन्य कीजियेगा। धन्यवाद 🙏 एक भक्त का आग्रह

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