mahakal Vedic kendra Mar 25, 2021

आत्मा कैसे अवतरित होती है और क्यो आत्मा को अयोनिजा कहते है...….. आज बात करते है कि आत्मा अयोनिजा कैसे है या ज्योतिष में जन्म-कुंडली जन्म समय के आधार पर ही क्यों बनाई जाती है गर्भधारण के समय क्यो नही। एक प्रश्न या जिज्ञासा आज के समय मे एक बहुत बड़े शिक्षित वर्ग के मन में है या इसको अंधविश्वास समझते है। मैं हैरान तब हुआ जब बाबा रामदेव एक स्कूल कैंपस में आज के बच्चों को इसको अंधविश्वास बता रहे थे और कह रहे थे कि शरीर तो जन्म से 9 महीने पहले ही सुरु होजाता है तो उस दिन से जन्मकुण्डलुनी क्यो नही बनाते। इस लिए आज मैं सभी को इस अध्यात्म के रहस्य को बताता हूँ। माता के गर्भ में पल रहा शिशु एक परजीवी पिंडरूप है जो पूरी तरह अपनी माँ पर निर्भर है। वहाँ पर प्रकृति द्वारा पंच भौतिक तत्वों सहयोग से शिशु के भौतिक शरीर का निर्माण किया जाता है, जिन तत्वों की आपूर्ति माँ के शरीर से की जाती है। माँ के प्राणों से जीवित रहता है। न वह सांस लेता और न ही इसमें आत्मा होती, गर्भ में सिर्फ पिंड का पूर्ण-निर्माण होता है। शिशु के जन्म के समय, पहले आत्मा प्रवेश करती है, फिर स्वास की क्रिया होती है। शिशु की पहली किलकारी ही आत्मा का प्रवेश है। इसी आत्मा प्रवेश को आत्मा का अवतरित होना कहते है, इसलिए आत्मा को अयोनिजा (जो गर्भ में पोषित होकर स्त्री योनि से जन्म न ले, या जो सीधे शरीर मे अवतरित हो) कहा गया और यही कारण है ज्योतिषियों ने आत्मा के प्रवेश के समय को ही जन्म-कुंडलिनी का आधार माना, न की शरीर के निर्माण समय को। ये उसी तरह समझो जैसे कि घर की नींव रखने के दिन को ही गृह प्रवेश नही करते, गृह प्रवेश का समय भवन के पूरी तरह से तैयार होने के बाद ही होता है। इसी प्रकार आत्मा का शरीर में प्रवेश या अवतरित होना, शरीर के पूरी तरह बन जाने पर ही होता है। शिव, राम, कृष्ण ही अयोनिजा नही है, बल्कि हम सभी आत्मा के स्तर अयोनिजा ही है, मगर अज्ञान के कारण हम अपने-आप को शरीर और उस शरीर को दिए नाम ही मैं समझ बैठे है। बस ये रहस्य का आत्मा के नवजात शिशु में अवतरित होने का और ज्योतिष में जन्म समय को जन्मकुंडली का आधार मनाने का। अध्यात्म के रहस्य, सनातन धर्म के विज्ञान और साधना पथ के ज्ञान को समझने के लिए आप पेज को 👍Like करके जुड़ सकते है। पेज 👍Like, शेयर करें I #जय #श्री #महाकाल $$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$ How the soul is enlightened and the soul is called Ayonija ... ... .. Today, talk about how the soul is Ayonija or why a horoscope is created in astrology based on the time of birth, why not during pregnancy? A question or curiosity is in the mind of a very large educated class in today's times or thinks it as superstition. I was amazed when Baba Ramdev was saying a superstition to the children of today in a school campus and he was saying that the body is started 9 months before birth, then why do not make horoscopes from that day. So today I tell everyone the mystery of this spirituality. The baby born in the womb of a mother is a parasitic body that is completely dependent on her mother. There the physical body of the infant is produced by the physical elements of the panch by Nature, the body of which is supplied from the mother's body. Survives the mother's life. He did not breathe, nor did it have the soul, in the womb only the whole creation is done. At the time of the birth of a child, the first soul enters, then the action of the Swas occurs. The child's first killer is the entry of the soul. The same soul entry is said to be the manifestation of the soul, hence the soul is called Ayonija (which can not be born from the vagina, or which is directly implanted in the womb), and this is the reason why astrologers have called at the time of the entry of the soul. It is believed to be the basis of birth-Kundalini, and not the body's creation time. Think of it in the same way as the house does not enter the day of foundation, house entry time only after the building is fully prepared. In the same way, the soul's entry into the body or being transmitted is done only when the body becomes fully formed. Shiva, Ram and Krishna are not Ayonija, but we all have the level of the soul Ayonija, but due to ignorance, I understand the name given to the body and body. Simply embarking on the mystery of the soul in the infant and in the astrologer to celebrate the birth time of the horoscope. To understand the mystery of spirituality, the science of eternal religion and the path of sadhana path, you can join the page by 👍Like. Page 👍Like, Share I Jai Shri Mahakala

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mahakal Vedic kendra Mar 22, 2021

💐💐*डमरू की नाद (आवाज) में अद्भुत क्षमताएं 💐💐 डमरू बजने का लाभ: - पुराणानुसार भगवान शिव नटराज के डमरू से कुछ अचूक और चमत्कारी मंत्र निकले थे! कहते हैं कि यह मंत्र कई बीमारियों का इलाज कर सकते हैं! कोई भी कठिन कार्य हो शीघ्र सिद्धि प्राप्त होती है! उक्त मंत्र या सूत्रों के सिद्ध होने के बाद जपने से सर्प, बिच्छू के काटे का जहर उतर जाता है! ऊपरी बाधा हट जाती है! माना जाता है कि इससे ज्वर, सन्निपात आदि को भी उतारा जा सकता है! रहस्य- डमरू की ध्वनि जैसी ही ध्वनि हमारे अन्दर भी बजती रहती है, जिसे अ, उ और म या ॐ कहते हैं! हृदय की धड़कन व ब्रह्माण्ड की आवाज में भी डमरू के स्वर मिश्रित हैं! 🙏जय श्री महाकाल जी🙏

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