lalit mohan jakhmola May 31, 2020

*डर लगता है* *आमाशय*.......को डर लगता है जब आप सुबह का नाश्ता नहीं करते हैं। *किडनी* .........को डर लगता है जब आप 24 घण्टों में 10 गिलास पानी भी नहीं पीते। *गाल ब्लेडर*.............को डर लगता है जब आप 10 बजे रात तक भी सोते नहीं और सूर्योदय तक उठते नहीं हैं। *छोटी आँत*...........को डर लगता है जब आप ठंडा और बासी भोजन खाते हैं। *बड़ी आँतों*..........को डर लगता है जब आप तैलीय मसालेदार मांसाहारी भोजन करते हैं। *फेफड़ों*.........को डर लगता है जब आप सिगरेट और बीड़ी के धुएं, गंदगी और प्रदूषित वातावरण में सांस लेते है। *लीवर*........को डर लगता है जब आप भारी तला भोजन, जंक और फ़ास्ट फ़ूड खाते है। *हृदय*...........को डर लगता है जब आप ज्यादा नमक और केलोस्ट्रोल वाला भोजन करते है। *पैनक्रियाज*.........को डर लगता है जब आप स्वाद और फ्री के चक्कर में अधिक मीठा खाते हैं। *आँखों*.........को डर लगता है जब आप अंधेरे में मोबाइल और कंप्यूटर के स्क्रीन की लाइट में काम करते है। और *मस्तिष्क*.........को डर लगता है जब आप नकारात्मक चिन्तन करते हैं। आप अपने तन के कलपुर्जों को मत डरायें । ये सभी कलपुर्जे बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। जो उपलब्ध हैं वे बहुत महँगे हैं और शायद आपके शरीर में एडजस्ट भी न हो सकें। इसलिए अपने शरीर के कलपुर्जों को स्वस्थ रखे। *विश्व स्वास्थ्य दिवस पर आप सभी* *“स्वस्थ रहें ,मस्त रहें, व्यस्त रहें”

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lalit mohan jakhmola May 28, 2020

****मेरा देश, मेरा मुल्क, मेरा गांव महान*** @*मैं गाँव हूँ!!* *मैं वहीं गाँव हूँ जिसपर ये आरोप है* *कि यहाँ रहोगे तो भूखे मर जाओगे।* *मैं वहीं गाँव हूँ जिस पर आरोप है कि यहाँ अशिक्षा रहती है!* *मैं वहीं गाँव हूँ जिस पर असभ्यता और जाहिल गवाँर का भी आरोप है!* *हाँ मैं वहीं गाँव हूँ जिस पर आरोप लगाकर मेरे ही बच्चे मुझे छोड़कर दूर बड़े-बड़े शहरों में चले गए।* *जब मेरे बच्चे मुझे छोड़कर जाते हैं मैं रात भर सिसक सिसक कर रोता हूँ ,फिर भी मरा नही।मन में एक आश लिए आज भी निर्निमेष पलकों से बांट जोहता हूँ शायद मेरे बच्चे आ* *जायँ ,देखने की ललक में सोता भी नहीं हूँ*😢😭 *लेकिन हाय!जो जहाँ गया वहीं का हो गया।* *मैं पूछना चाहता हूँ अपने उन सभी बच्चों से क्या मेरी इस दुर्दशा के जिम्मेदार तुम नहीं हो?😢* *अरे मैंने तो तुम्हे कमाने के लिए शहर भेजा था और तुम मुझे छोड़ शहर के ही हो गए।मेरा हक कहाँ है?* *क्या तुम्हारी कमाई से मुझे घर,मकान,बड़ा स्कूल, कालेज,इन्स्टीट्यूट,अस्पताल,आदि बनाने का अधिकार नहीं है?ये* *अधिकार मात्र शहर को ही क्यों ? जब सारी कमाई शहर में दे दे रहे हो तो मैं कहाँ जाऊँ?मुझे मेरा हक क्यों नहीं मिलता?* *इस कोरोना संकट में सारे मजदूर गाँव भाग रहे हैं,गाड़ी नहीं तो सैकड़ों मील पैदल बीबी बच्चों के साथ चल दिये* *आखिर क्यों?जो लोग यह कहकर मुझे छोड़ शहर चले गए थे,कि गाँव में रहेंगे तो भूख से मर जाएंगे,वो किस आश विश्वास पर पैदल ही गाँव लौटने लगे?मुझे तो लगता है* *निश्चित रूप से उन्हें ये विश्वास है कि गाँव पहुँच जाएंगे तो जिन्दगी बच जाएगी,भर पेट भोजन मिल जाएगा, परिवार बच जाएगा।सच तो यही है कि गाँव कभी किसी को* *भूख से नहीं मारता ।* *😢*आओ मुझे फिर से सजाओ,मेरी* *गोद में फिर से चौपाल लगाओ,मेरे* *आंगन में चाक के पहिए घुमाओ,मेरे खेतों में अनाज* *उगाओ,खलिहानों में बैठकर ,खुद भी खाओ दुनिया को* *खिलाओ,महुआ ,पलास के पत्तों को बीनकर पत्तल बनाओ,गोपाल बनो,मेरे नदी ताल तलैया,बाग,बगीचे गुलजार करो,बच्चू बाबा की पीस पीस कर प्यार भरी गालियाँ,रामजनम काका के उटपटांग डायलाग, पंडिताइन की अपनापन वाली खीज और* *पिटाई,दशरथ साहू की आटे की मिठाई हजामत और मोची की दुकान,भड़भूजे की सोंधी महक,लईया, चना* *कचरी,होरहा,बूट,खेसारी सब आज भी तुम्हे पुकार रहे है।* *😢मैं तनाव भी कम करने का कारगर उपाय हूँ।मैं प्रकृति के गोद में जीने का प्रबन्ध कर सकता हूँ।मैं सब कुछ कर सकता हूँ !बस तू समय समय पर आया कर मेरे पास,अपने बीबी* *बच्चों को मेरी गोद में डाल कर निश्चिंत हो जा,दुनिया की कृत्रिमता को त्याग दें।फ्रीज का नहीं घड़े का पानी पी,त्यौहारों समारोहों में पत्तलों में खाने और* *कुल्हड़ों में पीने की आदत डाल,अपने मोची के जूते,और दर्जी के सिरे कपड़े पर इतराने की आदत डाल,हलवाई की मिठाई,खेतों की हरी सब्जियाँ,फल फूल,गाय का दूध ,बैलों की खेती पर विस्वास रख कभी संकट में नहीं पड़ेगा।हमेशा खुशहाल जिन्दगी चाहता है तो मेरे लाल मेरी गोद में आकर कुछ दिन खेल लिया कर तू भी खुश और मैं भी खुश।* *मैं गाँव हूँ!!* *मैं वहीं गाँव हूँ जिसपर ये आरोप है* *कि यहाँ रहोगे तो भूखे मर जाओगे।*😢🌴☔ *अपना गांव*** शुभ रात्रि वन्दन जी सादर***

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lalit mohan jakhmola May 26, 2020

****हमारी हर समस्या एवं हर प्रश्न का उत्तर है, हमारे ग्रंथों में*** ***गीता पढ़ने के दुर्लभ लाभ 1. जब हम पहली बार भगवत गीता पढ़ते हैं तो हम एक अंधे व्यक्ति के रूप मे पढ़ते हैं. बस इताना ही समझ मे आता हैं कि कौन किसके पिता, कौन किसकी बहन, कौन किसका भाई। बस इससे ज्यादा कुछ समझ मे नही आता 2. जब दुसरी बार भगवत गीता पढ़ते हैं तो हमारे मन मे सवाल जागते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया या उन्होंने वैसा क्यों किया 3. जब तीसरी बार भगवत गीता को पढेगे, तो हमें धीरे- धीरे उसके मतलब समझ मे आने शुरू हो जायेंगे। लेकिन हर एक को वो मतलब अपने तरीके से ही समझ मे आयेंगे 4. जब चौथी बार हम भगवन गीता को पढेंगे, तो हर एक पात्र की जो भावनायें हैं, इमोशन... उसको आप समझ पायेंगे कि किसके मन मे क्या चल रहा हैं। जैसे अर्जुन के मन मे क्या चल रहा हैं या दुर्योधन के मन मे क्या चल रहा हैं? इसको हम समझ पायेंगे 5. जब पाँचवी बार हम भागवत गीता को पढेंगे तो पूरा कुरूक्षेत्र हमारे मन मे खड़ा होता हैं, तैयार होता हैं, हमारे मन मे अलग- अलग प्रकार की कल्पनायें होती हैं 6. जब हम छठी बार भगवत गीता को पढ़ते हैं, तब हमें 0हैं और ऐसा ही लगता हैं कि सामने वो ही भगवान हैं, जो मुझे ये बता रहे हैं 8. और जब आठवीं बार भगवत गीता को पढ़ते हैं तब यह एहसास होता हैं कि कृष्ण कही बाहर नही हैं। वो तो हमारे अंदर हैं और हम उनके अंदर हैं जब हम आठ बार भगवत गीता पढ़ लेंगे तब हमें गीता का महत्व पता चलेगा कि संसार मे भगवत गीता से अलग कुछ हैं ही नही और इस संसार मे भगवत गीता ही हमारे मोक्ष का सबसे सरल उपाय हैं भगवत गीता मे ही मनुष्य के सारे प्रश्नों के उत्तर लिखें हैं। जो प्रश्न मनुष्य ईश्वर से पूछना चाहता हैं, वो बस गीता मे सहज ढ़़ग से लिखें हैं मनुष्य की सारी परेशानियों के उत्तर भगवत गीता मे लिखें हैं हरि ओम जय श्री कृष्णा गीता अमृत हैं****शुभ रात्रि वन्दन जी सादर****

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lalit mohan jakhmola May 23, 2020

***आज का सुविचार*** **श्री रामकृष्ण परमहंस जी की विचार धारा और कान्हा जी के भक्ति मय उधारी चुकाने के साथ*** @**एक संकलित लेख. ........ ###*🦃 मयूर पंख 🦃* वनवास के दौरान माता सीताजी को पानी की प्यास लगी, तभी श्रीरामजी ने चारों ओर देखा, तो उनको दूर-दूर तक जंगल ही जंगल दिख रहा था. कुदरत से प्रार्थना करी ~ हे जंगलजी ! आसपास जहाँ कहीं पानी हो, वहाँ जाने का मार्ग कृपया सुझाईये. तभी वहाँ एक मयूर ने आकर श्रीरामजी से कहा कि आगे थोड़ी दूर पर एक जलाशय है. चलिए मैं आपका मार्ग पथ प्रदर्शक बनता हूँ, किंतु मार्ग में हमारी भूल चूक होने की संभावना है. श्रीरामजी ने पूछा ~ वह क्यों ? तब मयूर ने उत्तर दिया कि ~ मैं उड़ता हुआ जाऊंगा और आप चलते हुए आएंगे, इसलिए मार्ग में मैं अपना एक-एक पंख बिखेरता हुआ जाऊंगा. उस के सहारे आप जलाशय तक पहुँच ही जाओगे. इस बात को हम सभी जानते हैं कि मयूर के पंख, एक विशेष समय एवं एक विशेष ऋतु में ही बिखरते हैं. अगर वह अपनी इच्छा विरुद्ध पंखों को बिखेरेगा, तो उसकी मृत्यु हो जाती है. और वही हुआ. अंत में जब मयूर अपनी अंतिम सांस ले रहा होता है, उसने मन में ही कहा कि वह कितना भाग्यशाली है, कि जो जगत की प्यास बुझाते हैं, ऐसे प्रभु की प्यास बुझाने का उसे सौभाग्य प्राप्त हुआ. मेरा जीवन धन्य हो गया. अब मेरी कोई भी इच्छा शेष नहीं रही. तभी भगवान श्रीराम ने मयूर से कहा कि मेरे लिए तुमने जो मयूर पंख बिखेरकर, मुझ पर जो ऋणानुबंध चढ़ाया है, मैं उस ऋण को अगले जन्म में जरूर चुकाऊंगा .... *★मेरे सिर पर धारण करके★* तत्पश्चात अगले जन्म में श्री कृष्ण अवतार में उन्होंने अपने माथे पर मयूर पंख को धारण कर वचन अनुसार उस मयूर का ऋण उतारा था. तात्पर्य यही है कि अगर भगवान को ऋण उतारने के लिए पुनः जन्म लेना पड़ता है, तो हम तो मानव हैं. न जाने हम कितने ही ऋणानुबंध से बंधे हैं. उसे उतारने के लिए हमें तो कई जन्म भी कम पड़ जाएंगे. ~~ अर्थात ~~ जो भी भला हम कर सकते हैं, इसी जन्म में हमें करना है. *🙏🙏 Radhey Radhey 🙏🙏*

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lalit mohan jakhmola May 20, 2020

🌻🙏🏻 जय श्री बद्री नारायण जी की*🙏🏻🌻 ****ऐ मन रख विश्वास प्रभु पर नित आनंद उठायेगा,, पक्का है विश्वास तेरा तो दुख भी सुख बन जायेगा।।_* _लहरें खायेंगी हिचकोले नैया डगमगायेगी,, है अगर विश्वास का चप्पू नैया डूब न पायेगी।।_ *_विश्वासी जन का ही होता भव से पार उतारा है,, विश्वासी जन को ही मिलता इस से सदा किनारा है।।_* _दुनिया का एतबार करेगा पग पग ठोकर खायेगा,,ईश्वर पर विश्वास रखेगा मंज़िल अपनी पायेगा।।_ *_भक्तों के विश्वास की दाता रखता आया लाज है,, दीन दयालु ने भक्तों का सदा संवारा काज है।।_* _कभी तेरा विश्वास न टूटे दुख आये या सुख आये,, कहे ‘‘भगवान श्री कृष्ण’''' डोल न जाना चाहे कुछ भी हो जाये।।_ 💦🙇🏻‍♂️ *शुभ प्रभातम*🙇🏻‍♂️💦

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lalit mohan jakhmola May 20, 2020

****जय श्री राधे कृष्णा जी*** ***प्रसंग..== एक नजर अपनी फोटो पर भी****** @*एक फोटोग्राफ़र ने दुकान के बाहर बोर्ड लगा रखा था।* *20 रु. में - आप जैसे हैं, वैसा ही फोटो खिंचवाएँ।* *30 रु.में - आप जैसा सोचते हैं, वैसा फोटो खिंचवाएँ।* *50 रु. में - आप जैसा लोगों को दिखाना चाहें, वैसा फोटो खिंचवाएँ।* *बाद में उस फोटोग्राफर ने अपने संस्मरण में लिखा,* *मैंने जीवनभर फोटो खींचे, लेकिन किसी ने भी 20 रु.वाला फोटो नहीं खिंचवाया, सभी ने 50 रु. वाले ही खिंचवाए....* *दोस्तों बस कुछ ऐसी ही हक़ीक़त है- ज़िंदगी की...* *हम हमेशा दिखावे के लिए ही जीते रहे है, हमने कभी अपनी वो 20 रुपये वाली जिंदगी जी ही नही!!!* *ये दुनिया भी कितनी निराली है!* *जिसकी आँखों में नींद है …. उसके पास अच्छा बिस्तर नहीं …जिसके पास अच्छा बिस्तर है …….उसकी आँखों में नींद नहीं …* *जिसके मन में दया है ….उसके पास किसी को देने के लिए धन नहीं* …. *और जिसके पास धन है उसके मन में दया नहीं …* *जिन्हें कद्र है रिश्तों की … उन से कोई रिश्ता रखना नही चाहता....* *जिनसे रिश्ता रखना चाहते हैं ….उन्हें रिश्तों की कद्र नहीं* *जिसको भूख है उसके पास खाने के लिए भोजन नहीं….* *और जिसके पास खाने के लिए भोजन है ………उसको भूख नहीं…* *कोई अपनों के लिए…. रोटी छोड़ देता है…तो कोई रोटी के लिए….. अपनों को….* लॉकडाउन काफ़ी कुछ समझा और सिखा रहा है !! 🙏🙏शुभ प्रभात जी🙏🙏

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