🌼k l tiwari🌼 Jun 29, 2019

🌼🌷जय श्री राम,जय जय सियाराम🌷🌼 🌸जय श्रीराम भक्त हनुमान महावीर 🌸 🏵️पवनतनय संकट हरन मंगल मूरत रूप,🏵️ 💐राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप।।🌺 ⚛️बंदउँ पवनकुमार खलवन पावक ज्ञान गहन,🔯 🍥जासु हृदय आगार बसहु राम सर चाप धार।।💮 ✳️श्रीराम आपका मंगल करें, शुभदोपहर वन्दन जी✳️ 🍥एक सिख भाई की कलम और उनके जज्बात🍥 🔯 🌸✍सदुपदेश👇🌸⚛️ मैंने बचपन में एक बार मां से कहा:_ _मां कूड़ेवाला आया है,_ _मां ने जवाब दिया:- बेटा कूड़े वाले तो हम हैं, वो तो सफाई वाला है।_ Waheguru ji *✍सदुपदेश👇* _अपना “दर्द” सबको ना बताएं ,_ _क्योंकि सबके घर में “मरहम” नहीं होता।_ _मगर “नमक” हर एक के घर में होता है..!_ WAHEGURU *✍सदुपदेश👇* _दूसरों की छांव में खड़े रहकर हम अपनी परछाई खो देते हैं,_ _अपनी परछाई के लिये हमें धूप में खड़ा होना पड़ता है ..!!_ WAHEGURU *✍सदुपदेश👇* _लोग चले हैं जन्नत को पाने की खातिर...._ _बेखबरों को इतला कर दो कि मां घर पर ही है...._ WAHEGURU *✍सदुपदेश👇* _कूड़े के ढेर में फेंकी रोटियां रोज ये बया करती हैं ,_ _कि पेट भरते ही इंसान अपनी औकात भूल जाता है।।_ WAHEGURU *✍सदुपदेश👇* _क्यों हम भरोसा करें गैरो पर,_ _जबकि हमें चलना है अपने ही पैरों पर...!_ WAHEGURU *_✍सदुपदेश_👇* _पता नहीं क्यों लोग रिश्ता छोड़ देते हैं मगर ज़िद नहीं छोड़ते !_ *WAHEGURU *✍ सदुपदेश👇* *कटु सत्य,* _ठंडी रोटी अक्सर उनके नसीब में होती है!_ _जो अपनों के लिए कमाई करके देरी से घर लोटते हैं।_ WAHEGURU *✍सदुपदेश👇* *अनकहे अल्फाज़* _वक्त का सितम देखिए जनाब औलाद कह रही है मुफ्त की रोटी खाता है बूढ़ा बाप.!!!_ WAHEGURU JI

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🌼k l tiwari🌼 Jun 28, 2019

🕉️🌻🌸श्री वृन्दावन बिहारीलाल की जय🌷🌻🕉️ 🔯आपका मंगल हो ऐसी मेरी कामना है⚛️ 🔯स्वस्थ रहें प्रसन्न रहें🔯 🔯🌼⚛️प्रस्तुत है एक रोचक जानकारी🔯🌼🔯 हम झूठा व बासी नही खाते ! अगली बार ये कहने से पहले सोचियेगा कुछ दिन पहले एक परिचित दावत के लिये उदयपुर के एक मशहूर रेस्टोरेंट में ले गये। मैं अक़्सर बाहर खाना खाने से कतराता हूँ, किन्तु सामाजिक दबाव तले जाना पड़ा। आजकल पनीर खाना रईसी की निशानी है, इसलिए उन्होंने कुछ डिश पनीर की ऑर्डर की। प्लेट में रखे पनीर के अनियमित टुकड़े मुझे कुछ अजीब से लगे। ऐसा लगा की उन्हें कांट छांट कर पकाया है। मैंने वेटर से कुक को बुलाने के लिए कहा, कुक के आने पर मैंने उससे पूछा पनीर के टुकड़े अलग अलग आकार के व अलग रंगों के क्यों हैं तो उसने कहा ये स्पेशल डिश है।" मैंने कहा की मैँ एक और प्लेट पैक करवा कर ले जाना चाहता हूं लेकिन वो मुझे ये डिश बनाकर दिखाये। सारा रेस्टोरेंट अकबका गया... बहुत से लोग थे जो खाना रोककर मुझे देखने लगे... स्टाफ तरह तरह के बहाने करने लगा। आखिर वेटर ने पुलिस के डर से बताया की अक्सर लोग प्लेटों में खाना,सब्जी सलाद व रोटी इत्यादी छोड़ देते हैं। रसोई में वो फेंका नही जाता। पनीर व सब्जी के बड़े टुकड़ों को इकट्ठा कर दुबारा से सब्जी की शक्ल में परोस दिया जाता है। प्लेटों में बची सलाद के टुकड़े दुबारा से परोस दिए जाते है । प्लेटों में बचे सूखे चिकन व मांस के टुकड़ों को काटकर करी के रूप में दुबारा पका दिया जाता है। बासी व सड़ी सब्जियाँ भी करी की शक्ल में छुप जाती हैं... ये बड़े बड़े होटलों का सच है। अगली बार जब प्लेट में खाना बचे तो उसे इकट्ठा कर एक प्लास्टिक की थैली में साथ ले जाएं व बाहर जाकर उसे या तो किसी जानवर को दे दें या स्वयं से कचरेदान में फेंके वरना क्या पता आपका झूठा खाना कोई और खाये या आप किसी और कि प्लेट का बचा खाना खाएं। दूसरा क़िस्सा भगवान कृष्ण की भूमि वृंदावन का है. वृंदावन पहुंच कर,मैँ मुग्ध होकर पावन धरा को निहार रहा था। जयपुर से लंबी यात्रा के बाद हम सभी को कड़ाके की भूख लगी थी सो एक साफ से दिखने वाले रेस्टोरेंट पर रुक गये । समय नष्ठ ना करने के लिए थाली मंगाई गई। एक साफ से ट्रे में दाल, सब्जी,चावल, रायता व साथ एक टोकरी में रोटियां आई। पहले कुछ कौर में ध्यान नही गया फिर मुझे कुछ ठीक नही लगा। मुझे रोटी में खट्टेपन का अहसास हुआ, फिर सब्जी की ओर ध्यान दिया तो देखा सब्जी में हर टुकड़े का रंग अलग अलग सा था। चावल चखा तो वहां भी माजरा गड़बड़ था। सारा खाना छोड़ दिया। फिर काउंटर पर बिल पूछा यो 650 का बिल थमाया। मैंने कहा 'भैया! पैसे तो दूँगा लेकिन एक बार आपकी रसोई देखना चाहता हूं" वो अटपटा गया और पूछने लगा "क्यों?" मैंने कहा "जो पैसे देता है उसे देखने का हक़ है कि खाना साफ बनता है या नहीँ?" इससे पहले की वो कुछ समख पाता मैंने होटल की रसोई की ओर रुख किया। आश्चर्य की सीमा ना रही जब देखा रसोई में कोई खाना नहीं पक रहा था। एक टोकरी में कुछ रोटियां पड़ी थी। फ्रिज खोल तो खुले डिब्बों में अलग अलग प्रकार की पकी हुई सब्जियां पड़ी हुई थी।कुछ खाने में तो फफूंद भी लगी हुई थी। फ्रिज से बदबू का भभका आ रहा था।डांटने पर रसोइये ने बताया की सब्जियां करीब एक हफ्ता पुरानी हैं। परोसने के समय वो उन्हें कुछ तेल डालकर कड़ाई में तेज गर्म कर देता है और धनिया टमाटर से सजा देता है। रोटी का आटा 2 दिन में एक बार ही गूंधता है। कई कई घण्टे जब बिजली चली जाती है तो खाना खराब होने लगता है तो वो उसे तेज़ मसालों के पीछे छुपाकर परोस देते हैं। रोटी का आटा खराब हो तो उसे वो नॉन बनाकर परोस देते हैं। मैंने रेस्टोरेंट मालिक से कहा कि "आप भी कभी यात्रा करते होंगे, इश्वेर करे जब अगली बार आप भूख से बिलबिला रहे हों तो आपको बिल्कुल वैसा ही खाना मिले जैसा आप परोसते हैं" उसका चेहरा स्याह हो गया.... आज आपको खतरो, धोखों व ठगी से सिर्फ़ जागरूकता ही बचा सकती है। क्यों कि भगवान को भी दुष्टों ने घेर रखा है। भारत से सही व गलत का भेद खत्म होता जा रहा है.... हर दुकान व प्रतिष्ठान में एक कोने में भगवान का बड़ा या छोटा मंदिर होता है। व्यापारी सवेरे आते ही उसमें धूप दीप लगाता है, गल्ले को हाथ जोड़ता है और फिर सामान के साथ आत्मा बेचने का कारोबार शुरू हो जाता है!!! भगवान से मांगते वक़्त ये नही सोचते की वो स्वयं दुनिया को क्या दे रहे हैं!!*** जागरूक बनिये!! और कोई चारा नही है मेरे पास भी यह मैसेज कहीं और से आया था,मुझे लगा कि आगे सेंड करना चाहिये। इसलिये कर दिया। हो सकता है आपको सब बातें सही न लगे, लेकिन जागरूक बनने में कोई बुराई नहीं है। हो सकता है कि आपको इन इस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ा हो, पर परिस्थितियां कभी भी एक समान नहीं होती ।

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