kamal May 24, 2020

*एक बहुत ही सुंदर कविता** दो बार पढें....... जो कह दिया वह *शब्द* थे ; जो नहीं कह सके वो *अनुभूति* थी ।। और, जो कहना है मगर ; कह नहीं सकते, वो *मर्यादा* है ।। *जिंदगी* का क्या है ? आ कर *नहाया*, और, *नहाकर* चल दिए ।। *बात पर गौर करना*- ---- *पत्तों* सी होती है कई *रिश्तों की उम्र*, आज *हरे*-------! कल *सूखे* -------! क्यों न हम, *जड़ों* से; रिश्ते निभाना सीखें ।। रिश्तों को निभाने के लिए, कभी *अंधा*, कभी *गूँगा*, और कभी *बहरा* ; होना ही पड़ता है ।। *बरसात* गिरी और *कानों* में इतना कह गई कि---------! *गर्मी* हमेशा किसी की भी नहीं रहती ।। *नसीहत*, *नर्म लहजे* में ही अच्छी लगती है । क्योंकि, *दस्तक का मकसद*, *दरवाजा* खुलवाना होता है; तोड़ना नहीं ।। *घमंड*-----------! किसी का भी नहीं रहा, *टूटने से पहले* , *गुल्लक* को भी लगता है कि ; *सारे पैसे उसी के हैं* । जिस बात पर , कोई *मुस्कुरा* दे; बात --------! बस वही *खूबसूरत* है ।। थमती नहीं, *जिंदगी* कभी, किसी के बिना ।। मगर, यह *गुजरती* भी नहीं, अपनों के बिना ।। *।। आपका प्रत्येक पल/क्षण शुभ हो ।।* 🙏🏻

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kamal May 11, 2020

*ॐॐॐ जय जयसियाराम ॐॐॐ* *राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली ।* *ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥* दौलत के दीवानों सुन लो, एक दिन ऐसा आएगा, धन यौवन और रूप खजाना, यँहा ही धरा रह जाएगा । सुन्दर काया माटी होगी,चर्चा होगी गली गली।। *ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली* प्यारे, मित्र,सगे सम्बंधी इक दिन तुझे भुलायेंगे, कल तक अपना जो कहते, अग्नि पर तुझे सुलायेंगे।। जगत सराय दो दिन की है, आखिर होगी चला चली। *ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥* क्यूँ करता है तेरी मेरी, छोड़ दे अभिमान को, झूठे धंदे छोड़ दे बन्दे, जप ले हरी के नाम को । दो दिन का यह चमन खिला है, फिर मुरझाये कलि कलि, *ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥* जिस जिस ने यह हीरे लूटे, वो तो मला माला हुए, दुनिया के जो बने पुजारी, आखिर वो कंगाल हुए । धन दौलत और माया वालों, मैं समझाऊं गली गली, ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥ *दिल से बोलें* *प्रेम से बोलें* *----हर दिन बोलें-----* *जय श्रीराम* जय श्री राम🦚🦚🦚🦚जय श्री राम जय हनुमान जी🦜🦜🦜🦜💖💘🙏🏿🌺🌷🍁🌸🌻🌹

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kamal May 7, 2020

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kamal May 7, 2020

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kamal Apr 27, 2020

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kamal Apr 24, 2020

*पहली बात,*महाभारत में*कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछी...* मेरी माँ ने मुझे जन्मते ही त्याग दिया,क्या ये मेरा अपराध था कि मेरा जन्म एक अवैध बच्चे के रूप में हुआ? *दूसरी बात* *महाभारत में* *कर्ण ने श्रीकृष्ण से पूछी...* दोर्णाचार्य ने मुझे शिक्षा देने से मना कर दिया था क्योंकि वो मुझे क्षत्रीय नहीं मानते थे, क्या ये मेरा कसूर था. *तीसरी बात* *महाभारत में* *कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछी...।* द्रौपदी के स्वयंवर में मुझे अपमानित किया गया, क्योंकि मुझे किसी राजघराने का कुलीन व्यक्ति नहीं समझा गया. *श्री कृष्ण मंद मंद मुस्कुराते* *हुए कर्ण को बोले, सुन...* हे कर्ण, मेरा जन्म जेल में हुआ था. ▪ मेरे पैदा होने से पहले मेरी मृत्यु मेरा इंतज़ार कर रही थी. ▪ जिस रात मेरा जन्म हुआ, उसी रात मुझे माता-पिता से अलग होना पड़ा. ▪ मैने गायों को चराया और गायों के गोबर को अपने हाथों से उठाया. ▪ जब मैं चल भी नहीं पाता था, तब मेरे ऊपर प्राणघातक हमले हुए. ▪ मेरे पास कोई सेना नहीं थी, कोई शिक्षा नहीं थी, कोई गुरुकुल नहीं था, कोई महल नहीं था, फिर भी मेरे मामा ने मुझे अपना सबसे बड़ा शत्रु समझा. ▪ बड़ा होने पर मुझे ऋषि सांदीपनि के आश्रम में जाने का अवसर मिला. ▪ जरासंध के प्रकोप के कारण, मुझे अपने परिवार को यमुना से ले जाकर सुदूर प्रान्त, समुद्र के किनारे द्वारका में बसना पड़ा. *हे कर्ण...* किसी का भी जीवन चुनौतियों से रहित नहीं है. सबके जीवन में सब कुछ ठीक नहीं होता. ▪ सत्य क्या है और उचित क्या है? ये हम अपनी आत्मा की आवाज़ से स्वयं निर्धारित करते हैं. ▪ इस बात से *कोई फर्क नहीं पड़ता,* कितनी बार हमारे साथ अन्याय होता है. ▪ इस बात से *कोई फर्क नहीं पड़ता,* कितनी बार हमारा अपमान होता है. ▪ इस बात से भी *कोई फर्क नहीं पड़ता,* कितनी बार हमारे अधिकारों का हनन होता है. *फ़र्क़ तो सिर्फ इस बात से पड़ता है* *कि हम उन सबका सामना किस प्रकार ज्ञान के साथ करते हैं.* *ज्ञान है तो ज़िन्दगी हर पल मौज़ है,*वरना समस्या तो सभी के साथ रोज है.*। 🚩🚩 जय श्री कृष्ण🚩🚩

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