J.JHA Dec 5, 2019

आज के गुरुघंटालो को समर्पित शिविर लगा है दीक्षा लेलो, शिविर लगा है दीक्षा लेलो । तंत्र खेल है, जी भर खेलो, शिविर लगा है, दीक्षा लेलो । दीक्षा क्या है रेवड़ियां हैं, तू भी लेले तू भी लेले । वही गुरु घंटाल बड़ा है, जिसके पीछे लाखों चेले । तंत्र-मन्त्र का मेला देखो, भूत-प्रेत का खेला देखो । कई हज़ारों फूंक रुपैया, हाथ लगे न धेला देखो । तंत्रज्ञान से क्या है लेना, कोई फिटकरी-हींग लगे ना । सब नौटंकी है नाटक है, नर्क लोक का है ये रेलम रेला । शिक्षा की तू बात न करियो, दीक्षा ले ले फिर जा मरियो । मन्त्र दिया है रटता रहियो, बलि के बकरे जा कटता रहियो । जो साधक धनवान है, वो तो गुरूदेव की जान है । उसकी सारी बातें प्यारी, उसपे गुरु जाए बलिहारी । जो चेला ठन-ठन गोपाल, उसकी यहाँ गले न दाल । उसका कभी लगे न फोन, उसकी व्यथा सुनेगा कौन ।। वो पिछला था ये अगला है, वो मूरख था ये पगला है । तेरा बावले क्या बदलेगा, किस चेले का क्या बदला है । तूने अब तक क्या की सिद्धि, रहा वही पिद्दी का पिद्दी । राह पकड़ ले अपने घर की, सिद्धि देखने छोड़ मुसद्दी । सिद्ध नहीं वो है गिद्ध पुराना, लोभी लम्पट कुटिल सयाना । ढोंगी को सबने पहचाना, पर कौन कहे काने को काना । बेसुर है ये ताल मग़र, साजिन्दे नही है पर है सब साज़ यहाँ । उपर वाले मालिक की पगलु आती लाठी में आवाज़ कहाँ ।। शिव शक्ति कल्याण करे । शिवशक्ति भक्ति, शक्ति, मुक्ति, सद्बुद्धि दे । भैरव सदा सहाय ।।

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J.JHA Dec 3, 2019

ॐ शिवगोरक्ष योगी आदेश ।। पगलु वाणी ।। ३-१२-२०१९ एक छोटी लड़की ने गुल्लक से सब सिक्के निकाले और उनको बटोर क जेब में रख लिया, और निकल पड़ी घर से एक केमिस्ट की दुकान पर । वो काउंटर के सामने खड़े होकर बोल रही थी पर छोटी सी लड़की किसी को नज़र नहीं आ रही थी, ना ही उसकी आवाज़ पर कोई गौर कर रहा था, सब व्यस्त थे | दुकान मालिक का कोई दोस्त बाहर देश से आया था वो भी उससे बात करने में व्यस्त था । तभी उसने जेब से एक सिक्का निकाल कर काउंटर पर फेका सिक्के की आवाज़ से सबका ध्यान उसकी ओर गया । लड़की की तरकीब काम आ गयी, दुकानदार उसकी ओर आया और उससे प्यार से पूछा क्या चाहिए बेटा ? उसने जेब से सब सिक्के निकाल कर अपनी छोटी सी हथेली पर रखे, और बोली मुझे “चमत्कार” चाहिए । दुकानदार समझ नहीं पाया उसने फिर से पूछा क्या चाहिए, लड़की फिर से बोली मुझे “चमत्कार” चाहिए, दुकानदार मुस्कुरा कर बोला, बेटा यहाँ चमत्कार नहीं मिलता । वो फिर बोली अगर दवाई मिलती है तो चमत्कार भी आपके यहाँ ही मिलेगा, दुकानदार बोला – बेटा आप से यह किसने कहा कि दवाई की दुकान पर चमत्कार मिलता है ? अब बच्ची ने विस्तार से बताना शुरु किया, अपनी तोतली जबान से बोली– मेरे भैया के सर में टुमर (ट्यूमर) हो गया है, पापा ने मम्मी को बता रहे थे कि डॉक्टर इलाज खर्च 4 लाख रुपये बता रहे है, अगर समय पर इलाज़ न हुआ तो कोई चमत्कार ही मेरे भाई को बचा सकता है । और अब इलाज करवाने की कोई संभावना भी नहीं है, वो रोते हुए माँ से कह रहे थे अपने पास कुछ बेचने को भी नहीं है, न कोई जमीन जायदाद है न ही गहने, सब इलाज़ में पहले ही खर्च हो गए है, मैं ठेले पर शब्जी बेचने वाला अपने बेटे की दवा के पैसे भी बड़ी मुश्किल से जुटा पा रहा हूँ । वो मालिक का दोस्त उसके पास आकर बैठ गया और प्यार से बोला अच्छा ! कितने पैसे लाई हो तुम चमत्कार खरीदने को । लड़की ने अपनी मुट्टी से सब रुपये उसके हाथो में रख दिए,उस व्यक्ति ने वो रुपये गिने 21 रुपये 50 पैसे थे । वो व्यक्ति हँसा और लड़की से बोला बच्चे तुमने चमत्कार खरीद लिया, चलो मुझे अपने घर भाई के पास ले चलो । वो व्यक्ति जो उस केमिस्ट का दोस्त था अपनी छुट्टी बिताने भारत आया था,और न्यूयार्क का एक प्रसिद्द न्यूरो सर्जन था, उसने उस बच्चे का इलाज 21 रुपये 50 पैसे में किया और वो बच्चा स्वस्थ हो गया । प्रभु ने उस लडकी को चमत्कार बेच दिया, वो बच्ची बड़ी श्रद्धा से उसको खरीदने चली थी वो उसको मिल गया ।। मिल जाते है भगवान भी और शैतान भी यंहा इंसान के रूप में । ये तुम पर निर्भर है कि तुम कैसा भाव दिल मे लेकर खोजते हो ।। शिव कल्याण करे । शिवशक्ति भक्ति, शक्ति, मुक्ति, सद्बुद्धि दे । भैरव सदा सहाय ।।

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