J.JHA Dec 7, 2019

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J.JHA Dec 7, 2019

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J.JHA Dec 7, 2019

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J.JHA Dec 7, 2019

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J.JHA Dec 7, 2019

ॐ शिव योगी आदेश ॐ *ईश्वर और विश्वास* एक संत महाशय समुद्री जहाज से यात्रा कर रहे थे, रास्ते में एक रात तुफान आने से जहाज को एक द्वीप के पास लंगर डालना पडा । सुबह पता चला कि रात आये तुफान से जहाज में कुछ खराबी आ गयी है, जहाज को एक दो दिन वहीं रोक कर उसकी मरम्मत करनी पडेगी । संत महाशय नें सोचा क्यों ना एक छोटी बोट से द्वीप पर चल कर घूमा जाये,अगर कोई मिल जाये तो उस तक प्रभु का संदेश पहँचाया जाय और उसे प्रभु का मार्ग बता कर प्रभु से मिलाया जाये । तो वह जहाज के केप्टन से इज़ाज़त ले कर एक छोटी बोट से द्विप पर गये, वहाँ इधर उधर घूमते हुवे तीन द्वीपवासियों से मिले । जो बरसों से उस सूने द्विप पर रहते थे । संत महाशय उनके पास जा कर बातचीत करने लगे। उन्होंने उनसे ईश्वर और उनकी आराधना पर चर्चा की, उन्होंने उनसे पूछा- क्या आप ईश्वर को मानाते हैं । वे सब बोले- “हाँ..। फिर संत महाशय ने पूछा- “आप ईश्वर की आराधना कैसे करते हैं । उन्होंने बताया- ''हम अपने दोनो हाथ ऊपर करके कहते हैं "हे ईश्वर हम आपके हैं,आपको सदैव याद करते हैं, आप भी हमें याद रखना । संत महाशय ने कहा- "यह प्रार्थना तो ठीक नही है । एक ने कहा- "तो आप हमें सही प्रार्थना सिखा दीजिये । संत महाशय ने उन सभी को ग्रंथ पढना, और प्रार्थना करना सिखाया । तब तक जहाज बन गया। संत अपने सफर पर आगे बढ गये । संत महाशय ने जहाज के डेक पर टहलते हुवे देखा, वह तीनो द्वीपवासी जहाज के पीछे‌-2 पानी पर दौडते हुवे आ रहे हैं । उन्होने हैरान होकर जहाज रुकवाया, और उन्हे ऊपर चढवाया । फिर उनसे इस तरह आने का कारण पूछा- “वे बोले ''महात्मा!! आपने हमें जो प्रार्थना सिखाई थी, हम उसे अगले दिन ही भूल गये। इसलिये आपके पास उसे दुबारा सीखने आये हैं, हमारी मदद कीजिये । संत महाशय ने कहा- ठीक है, पर यह तो बताओ तुम लोग पानी पर कैसे दौड सके । एक ने कहा- हम आपके पास जल्दी पहुँचना चाहते थे, सो हमने ईश्वर से विनती करके मदद माँगी और कहा,, हे ईश्वर, दौड तो हम लेगें बस आप हमें गिरने मत देना । और बस दौड पडे । अब संत महाशय सोच में पड गये,, उन्होने कहा- आप लोग और ईश्वर पर आपका विश्वास धन्य है । आपको अन्य किसी प्रार्थना की आवश्यकता नहीं है । आप तो बस पहले कि तरह प्रार्थना करते रहें ।। ये कहानी बताती है... कि ईश्वर पर विश्वास, ईश्वर की आराधना प्रणाली से अधिक महत्वपूर्ण है ।। सुमरण हो तो हो कुछ इस तरह कि भक्त-भगवान में भेद ना रहे । जब हृदय द्वार पर दस्तक हो आराध्य की तो ही मेल मिले। शिव सदैव कल्याण करे । शिवशक्ति भक्ति, शक्ति, मुक्ति, सद्बुद्धि दे । भैरव सदा सहाय ।।

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J.JHA Dec 6, 2019

ॐ शिव आदेश ॐ एक बार तुलसीदास जी से किसी ने पूछा - कभी कभी भक्ति करने का मन नही करता फिर भी नाम जपने के लिये बैठ जाते है, क्या उसका कोई फल मिलता है ? तुलसीदास जी ने मुस्करा कर कहा - तुलसी मेरे राम को रीझ भजो या खीज । भौम पड़ा जाने सभी उल्टा सीधा बीज ॥ अर्थातः भूमि मे जब बीज बोये जाते है तो यह नही देखा जाता कि बीज उल्टे है या सीधे पर फिर भी कालांतर मे फसल बन जाती है, इसी प्रकार नाम सुमिरन कैसे भी किया जाये उसके सुमिरन का फल अवश्य मिलता है ।। नाम की मौज़ रहे जीवन मे पल पल सुमरण रहे ओंठो पर । फल की चिंता ना कर जब कर्म काटेंगे तब सामने वो ही होगा ।। शिव कल्याण करे । शिवशक्ति भक्ति, शक्ति, मुक्ति, सद्बुद्धि दे । भैरव सदा सहाय ।

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J.JHA Dec 5, 2019

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